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Updated: 27 दिसम्बर, 2018 02:14 PM
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चुनावों में ही नहीं, घटिया बयानबाजी के मामले में भी नेताओं में 2018 के पूरे साल एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ मची रही. नितिन गडकरी भले ही बड़बोले बीजेपी नेताओं के मुंह में कपड़ा ठूंसने का इरादा रखते हों. भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे बीजेपी नेताओं को 'मुंह के लाल' बतायें, लेकिन भाषण के दौरान खुद भी मर्यादा की सीमाएं लांखते देर नहीं लगती.

तकरीबन वही हाल राहुल गांधी का भी है. 2017 में नीच कहने पर मणिशंकर अय्यर से माफी मंगवाने वाले राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विधानसभा चुनावों के दौरान लगातार चोर बताते रहे. बात ये भी है कि बीजेपी नेताओं ने भी राहुल गांधी को कभी नाली का कीड़ा तो कभी वायरस बता डाला.

"...चौकीदार चोर है"

राफेल डील को लेकर वैसे तो राहुल गांधी 2018 में ज्यादातर मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी पर हमलावर रहे, लेकिन चुनावों में कुछ ज्यादा ही आक्रामक और व्यक्तिगत हो गये थे.

राजस्थान की एक रैली में राहुल गांधी ने नारा लगाया, 'गली गली में शोर है, चौकीदार चोर है.' उसके बाद तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तमाम चुनावी सभाओं में राहुल गांधी ये नारा लगवाते रहे.

दरअसल, स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने ही खुद को एक बार चौकीदार बताया था - और राहुल गांधी ने उसी बात को पकड़ लिया. ये बताने के लिए कि मोदी सरकार में भी भ्रष्टाचार रुका नहीं है, राहुल गांधी चौकीदार चोर है कह कर मोदी को टारगेट करते रहे. एनडीए में बीजेपी के सहयोगी शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे भी राहुल गांधी की बात दोहराने लगे हैं.

मोदी-उमा की जाति-धर्म भी बता डाले

राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता सीपी जोशी ने तो प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री उमा भारती की जाति पर ही टिप्पणी कर डाली. एक चुनावी रैली में सीपी जोशी ने कहा, "उमा भारतीजी की जाति मालूम है किसी को? ऋतंभरा की क्या जाति है, मालूम है किसी को? इस देश में धर्म के बारे में कोई जानता है तो पंडित जानते हैं. अजीब देश हो गया. इस देश में उमा भारती लोधी समाज की हैं, वो हिंदू धर्म की बात कर रही हैं. साध्वीजी किस धर्म की हैं? वह हिंदू धर्म की बात कर रही हैं. नरेंद्र मोदीजी किसी धर्म के हैं, हिन्दू धर्म की बात कर रहे हैं. तो क्या ब्राह्मण किसी काम के नहीं हैं, 50 साल में इनकी अक्ल बाहर निकल गई."

राजस्थान की ही एक रैली में खुद राहुल गांधी ने गीता ज्ञान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री के हिंदुत्व के बारे में जानकारी पर सवाल उठाया था.

"मोदी तो बिच्छू जैसे..."

ऐसा भी होता है जब प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस नेता शशि थरूर एक दूसरे की तारीफ करते नजर आते हैं, लेकिन निजी हमलों के मामले में भी दोनों का कोई सानी नहीं. पांच साल पहले शशि थरूर को लेकर '50 करोड़ की गर्लफ्रेंड' वाला बयान अक्सर चर्चाओं का हिस्सा हुआ करता है.

मोदी के बारे में शशि थरूर की ताजा टिप्पणी उनकी नयी किताब 'द पैराडॉक्सिकल प्राइम मिनिस्टर' आने के बाद हुआ. शशि थरूर ने एक आरएसएस के एक गुमनाम कार्यकर्ता का हवाला देते हुए कहा, 'मोदी शिवलिंग पर बैठे बिच्छू की तरह है, जिसे आप ना तो अपने हाथों से और ना ही चप्पल मारकर हटा सकते है.'

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता राज बब्बर ने डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में गिरावट की तुलना प्रधानमंत्री मोदी की माता की उम्र से कर दी थी जिस पर खुद मोदी ने भी रिएक्ट किया. कांग्रेस के एक नेता विलासराव मुत्तेमवार ने तो यहां तक कह डाला, 'पूरी दुनिया राहुल की पीढ़ियों के बारे में जानती है, लेकिन कोई भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता के बारे में नहीं जानता.'

"बिके हरि और..."

जब हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव जीत गये तो प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी खूब तारीफ की. बतौर एनडीए उम्मीदवार हरिवंश ने कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद को हराया था.

भरी संसद में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "ये चुनाव ऐसा था जिसमें दोनों तरफ हरि थे लेकिन एक के आगे बीके था, बिके हरि, कोई न बिके और इधर थे कि कोई बिका..."

narendra modiजब उठे प्रधानमंत्री पद की गरिमा पर सवाल

प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को बाद में कार्यवाही से डिलीट कर दिया गया. किसी प्रधानमंत्री की टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाये जाने के ये पहला मामला तो नहीं था, लेकिन अपनेआप में ये मिसाल है. वैसे 2009 में ये कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ही रहे जिन्होंने नरेंद्र मोदी को 'गंदी नाली का कीड़ा' कहा था.

संसद में रामायण सीरियल और 'शूर्पणखा'

संसद का ही एक और वाकया है, इसी साल का. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में बयान दे रहे थे और उसी दौरान कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी जोर से हंसे जा रही थीं. हंसी पर अपनी टिप्पणी में प्रधानमंत्री ने 'शूर्पणखा' शब्द का इस्तेमाल तो नहीं किया, लेकिन आशय सभी ने वही समझा.

मुस्कुराते हुए प्रधानमंत्री मोदी बोले, 'सभापति जी रेणुका जी को आप कुछ मत कहिए... रामायण सीरियल के बाद ऐसी हंसी सुनने का आज सौभाग्य मिला है.'

आटा चक्की और दिल्ली के सिख दंगे

मध्य प्रदेश चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस नेता कमलनाथ को दिल्ली के सिख दंगों से जोड़ते हुए निशाना बनाया था. दंगों के मामले में हाल ही में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा हुई है.

मंदसौर की चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, 'कमलनाथ कहते हैं कि उनकी चक्की देर से चलती है लेकिन पीसती बड़ा बारीक है. श्रीमान कमलनाथ जी 1984 के दिल्ली के सिख विरोधी दंगे इसका जीता जागता सबूत हैं.'

11 दिसंबर को चुनाव नतीजे आने के बाद जब कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने की खबर आयी तो सिख दंगों से जोड़ कर उनके नाम पर विवाद खड़ा करने की कोशिश हुई थी.

'नाली का कीड़ा', 'निपाह वायरस'

एक तरफ राहुल गांधी चोर-चोर चिल्लाते रहे तो दूसरी तरफ बीजेपी नेता कभी उन्हें नाली का कीड़ा तो कभी निपाह वायरस बताते रहे.

बीजेपी नेता अश्विनी कुमार चौबे ने सासाराम में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से राहुल गांधी की तुलना करते हुए बताया, 'प्रधानमंत्री गगन के जैसा... और जो आज का कांग्रेस का अध्यक्ष है, उनका आकार कैसा... नाली के कीड़े जैसा.'

rahul gandhi"...चौकीदार चोर है"

हरियाणा के मंत्री अनिल विज भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों से कम ही गायब रहते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष के बारे में अनिल विज की राय रही, 'राहुल गांधी निपाह वायरस की तरह हैं और वो जिस भी पार्टी के संपर्क में आएंगे वह खत्‍म हो जाएगी.'

दरअसल, विज विपक्षी दलों को आगाह कर रहे थे कि जिस किसी ने भी कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोशिश की वो बर्बाद हो जाएगा.

अपने नजरिये के साथ डटे रहे शरद यादव

नीतीश कुमार के एक्शन के बाद महागठबंधन में ठिकाना बनाये रखने वाले शरद यादव की महिलाओं पर बयान के मामले में ख्याति वैसी ही है, जैसी बलात्कार के मामले में मुलायम सिंह यादव की. शरद यादव की ताजा शिकार हुईं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे.

अलवर की एक चुनावी सभा में शरद यादव ने वसुंधरा राजे को 'मोटी' बताते हुए कहा कि 'उसे' आराम देने की जरूरत है.

शरद यादव अपने ताजा बयान पर भी वैसे ही घिरे जैसे पहले होते रहे हैं. संसद में 'परकटी' महिलाएं कह कर संबोधित करने वाले शरद यादव ने 2017 में कहा था, 'वोट की इज्जत आपकी बेटी की इज्जत से ज़्यादा बड़ी होती है. अगर बेटी की इज्जत गई तो सिर्फ गांव और मोहल्ले की इज्जत जाएगी लेकिन अगर वोट एक बार बिक गया तो देश और सूबे की इज्जत चली जाएगी.'

शरद यादव के बयान पर वसुंधरा राजे का कहना रहा, 'मैं अपमानित महसूस कर रही, ये सभी महिलाओं का अपमान है.

नेताओं की नजर में बालीवुड एक्टर

जब वसुंधरा राजे के बारे में नेताओं की ऐसी टिप्पणी हो, फिर उन महिलाओं के बारे में कहा कहा जाये जो किसी और फील्ड से राजनीति में आयी हैं. स्मृति ईरानी की ही तरह इस साल राज्य सभा सांसद जया बच्चन को निशाना बनाया गया.

समाजवादी पार्टी द्वारा राज्य सभा का उम्मीदवार न बनाये जाने से नाराज नरेश अग्रवाल ने इस साल बीजेपी का दामन थाम लिया. गुस्से से लाल नरेश अग्रवाल का कहना था कि समाजवादी पार्टी ने उनका टिकट काट कर 'फिल्मों में नाचने वाली' को दे दिया.

2012 में एक टीवी बहस के दौरान कांग्रेस सांसद संजय निरुपम ने स्मृति ईरानी को कहा था, 'कल तक आप पैसे के लिए ठुमके लगा रही थीं और आज आप राजनीति सिखा रही हैं.' बाद में दोनों एक दूसरे के खिलाफ कोर्ट गये थे, अभी अभी आये दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद मानहानि का मुकदमा स्मृति ईरानी पर खत्म हो गया, लेकिन संजय निरुपम पर चलता रहेगा.

बलात्कार की शिकार महिला के बारे में एक विधायक की राय

बलिया के बैरिया से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह उन्नाव गैंग रेप के आरोपी एमएलए कुलदीप सिंह सेंगर के बचाव में उतर आये थे. कैमरे के सामने उनका बयान था, 'तीन बच्चों की मां के साथ कोई रेप करता है क्या?'

सुरेंद्र सिंह के ही एक और बयान पर भी विवाद हुआ था जिसमें बीजेपी विधायक ने अधिकारियों की तुलना सेक्स वर्कर से की थी. सुरेंद्र सिंह की नजर में, 'अधिकारियों से अच्छा चरित्र वेश्याओं का होता है, वो पैसा लेकर कम से कम अपना काम तो करती हैं और स्टेज पर नाचती हैं... ये अधिकारी तो पैसा लेकर भी आपका काम करेंगे कि नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है.'

किसानों को भी नहीं बख्शा

2018 में किसानों ने कई बार आंदोलन किया. दिल्ली में तो दक्षिण भारत के किसानों ने अलग अलग तरीके अपना कर अपनी पीड़ा प्रस्तुत करने के प्रयास किये.

एक बार किसानों के कई राज्यों में फैले आंदोलन पर कृषि मंत्री राधामोहन सिंह से सवाल पूछा गया तो उनका कहना रहा कि ये सब मीडिया में आने के लिए होता है.

किसानों के आंदोलन को लेकर पत्रकारों के सवाल पर राधामोहन ने कहा, 'मीडिया में आने के लिए असामान्य कार्य करना होता है. देश में 12-14 करोड़ किसान हैं. हमेशा से ऐसे संगठन रहेंगे जिनमें कुछ हजार लोग होंगे.'

बीजेपी की बैठकों में अब नेताओं की नजर राधामोहन सिंह पर तो जाती ही होगी खासकर प्रधानमंत्री मोदी की, जब कभी किसानों का जिक्र आता ही होगा. ये किसानों के वोट ही रहे जिसने 2018 जाते जाते बीजेपी की हंसी छीन ली है - और 2019 को लेकर माथे की लकीरें साफ झलकने लगी हैं.

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