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Updated: 27 मार्च, 2019 08:35 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
  @msTalkiesHindi
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प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संदेश सबसे बड़ी तत्कालीन घटना होती है. पिछली बार तो सरकारी मुलाजिमों ने बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं - और तभी प्रधानमंत्री ने टीवी पर प्रकट होकर नोटबंदी की घोषणा कर दी थी.

जब प्रधानमंत्री मोदी खुद ट्वीट कर जानकारी दें कि वो कुछ ही देर में सारे संचार मंचों से राष्ट्र के नाम बड़ा संदेश देने वाले हैं - फिर किसी के मन ख्याल आएगा भी तो क्या? प्रधानमंत्री का 'मन की बात' कार्यक्रम तो स्थगित ही है, फिर सभी के मन में ये सवाल तो उठेगा ही कि अब कौन सी बात प्रधानमंत्री मन में है जो सामने आने वाली है?

कोई काले धन को लेकर फिर से नोटबंदी की दहशत में था तो कुछ के मन में सर्जिकल स्ट्राइक जैसी बातें चलने लगी थीं. कई लोग तो पाकिस्तान से हाफिज सईद और अजहर मसूद को उठा लाये जाने तक की संभावना जताने लगे थे.

जब देश में इतना सब चल रहा था तो सरहद पार क्या हाल रहा होगा? वो भी तब जब खुद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ऐसी आशंका जता चुके हों की भारत फिर से कोई एक्शन ले सकता है. आखिर वो एक घंटा पाकिस्तानी हुक्मरानों के सामने कैसा बीता होगा?

थर्रा तो इमरान खान भी उठे होंगे!

अभी कल ही की तो जैसे बात है. एक इंटरव्यू में इमरान खान ने भारत की ओर से और एक्शन की आशंका जतायी थी. लॉ ऑफ अट्रैक्शन में तो अमेरिकी ज्यादा यकीन करते हैं. कहते सिर्फ सोचने भर से आस पास वैसी ही चीजें मंडराने लगती हैं. मालूम नहीं इमरान खान ने गंभीर सोच विचार के बाद इंटरव्यू में भारतीय एक्शन की आश्का जतायी थी या फिर यूं ही कुछ बोलना था तो बोल दिया था.

नोबल पुरस्कार के प्रस्ताव को इमरान खान ने हंसते हंसते खारिज कर दिया था, लेकिन फाइनेंशियल टाइम्स को दिये इंटरव्यू में खुद ही सर्टिफिकेट ले लिये थे. इंटरव्यू में इमरान खान ने कहा, 'नये पाकिस्तान में दहशतगर्दों के लिए कोई जगह नहीं है. हमारी सरकार के दौरान आतंकवादियों पर ऐसी कार्रवाई की गई जो इतिहास में कभी नहीं हुई थी. अब हम किसी भी आतंकी घटना का आरोप अपने ऊपर नहीं लेना चाहते.'

इमरान खान का ये कहना तो एक तरीके से इकबालनामा ही लगता है कि अब वो किसी भी आतंकी घटना का आरोप अपने ऊपर नहीं लेना चाहते. मतलब तो यही हुआ कि अब तक वो ऐसा ही करते रहे. हो सकता है वो ये समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि अब तक उनसे पहले वाले पाकिस्तानी हुक्मरान ऐसा करते रहे हों.

देखा जाये तो इमरान खान का बयान भी वैसा ही है जैसा कभी जनरल परवेज मुशर्रफ तो कभी नवाज शरीफ दे चुके हैं. कारगिल के बारे में जनरल परेवज मुशर्रफ क्रेडिट तो ले ही चुके हैं और हाल के पाकिस्तानी चुनावों के दौरान नवाज शरीफ ने भी मुंबई हमले में पाकिस्तान की भूमिका कबूल की ही थी.

imran khanमोदी के ट्वीट के बाद क्या चल रहा था इमरान खान के मन में?

जब इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट देखा होगा तो हो सकता है एकबारगी नोटबंदी जैसी कोई चीज सोच कर नजरअंदाज करने की कोशिश की हो - लेकिन कितनी देर? फाइनेंशियल टाइम्स को दिये इंटरव्यू वाली बातें तो दिमाग में चलने ही लगी होंगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वास्तव में कोई मुकाबला नहीं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोचा भी नहीं होगा कि इतना तेज रिस्पॉन्स मिलेगा. मुसीबत इतनी जल्दी टपक पड़ेगी. सुबह के अखबार छान मारने के बाद भी शक गहराता जा रहा होगा कि कहीं आधी रात को ही तो कुछ नहीं हुआ? अखबारों में तो आधी रात की एक घटना की रिपोर्ट गोवा से जरूर थी. MGP के दो तिहाई विधायकों ने अपने नेता को छोड़ कर आधी रात को बीजेपी को अपना लिया था. हाथ के हाथ खतरे में नेता और डिप्टी सीएम सुदिन धवलीकर की कुर्सी को भी डाल दिये.

आधी रात की घटनाएं बड़ी खतरनाक होती है. अचानक आधी रात को अमेरिकी हेलीकॉप्टर आये और ओसामा बिन लादेन के बंगले में घुस कर मारने के बाद लाश भी साथ लेते गये. उरी हमले के बाद भारतीय जांबाजों ने आधी रात के बाद ही सर्जिकल स्ट्राइक कर दी. बालाकोट एयरस्ट्राइक भी आधी रात को ही चुकी थी - मालूम सुबह होने पर सब हरकत में आये. पहली जानकारी तो पाकिस्तानी फौज के ही अफसर ने ट्विटर पर दी थी.

मिशन शक्ति पर पाकिस्तान ने आधिकारिक बयान में कहा है, 'अंतरिक्ष मानवता की साझी विरासत है और हर मुल्क की जिम्मेदारी है कि वो ऐसे कामों से बचने की कोशिश करे जिनसे वहां फौजी गतिविधियों के हालात पैदा होते हों.'

चीन ने भी काफी सोछ समझ कर बेहद नपी तुली प्रतिक्रिया दी है. चीन ने उम्मीद जाहिर की है कि सभी देश अंतरिक्ष में शांति बनाये रखने की कोशिश करेंगे.

डर के आगे... 'अच्छा है'

2 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडिया टुडे के कार्यक्रम में पहुंचे थे. तमाम बातों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने डर की बात की. डर के आगे जीत की धारणा को भी प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तरीके से समझाया. ये भी कि अगर किसी को डर लगता है तो 'अच्छा है' -

1. जब दुश्मन में भारत के पराक्रम का डर हो, तो ये 'डर अच्छा है'.

2. जब आतंक के आकाओं में सैनिकों के शौर्य का डर हो, तो ये 'डर अच्छा है'.

3. जब भगोड़ों में भी कानून और अपनी सम्पत्ति जब्त होने का डर हो, तो ये 'डर अच्छा है'.

4. जब मामा के बोलने से बड़े-बड़े परिवार बौखला जाए, तो ये 'डर अच्छा है'.

5. जब भ्रष्ट नेताओं को भी जेल जाने का डर सताए, तो ये 'डर अच्छा है'.

क्रोएशिया के दौरे पर गये राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी कहा है कि बालाकोट में हमले के बाद भारत ये साफ कर चुका है कि अपने लोगों की सलामती के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है.

पाकिस्तान तो अभी तक भारत के परमाणु हथियार सम्पन्न होने से ही दहशत में हुआ करता था. जब तब खुद के भी न्यूक्लियर पॉवर होने की दुहाई देता रहा है.

अब तो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार, भारत ने दुनिया में अंतरिक्ष महाशक्ति के तौर पर नाम दर्ज करा दिया है. भला और क्या चाहिये गर्व करने के लिए. प्रधानमंत्री ने बताया कि ये टेस्ट बेहद दुर्लभ और खतरनाक भी था, लेकिन सब कुछ महज तीन मिनट में निपट गया. देश के 130 करोड़ लोगों से मुखातिब होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले, 'कुछ ही समय पहले भारत ने एक अभूतपूर्व सिद्धि प्राप्त की है. भारत ने दुनिया में अंतरिक्ष महाशक्ति के तौर पर नाम दर्ज करा दिया है. भारत से पहले यह उपलब्धि सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन के पास थी.'

प्रधानमंत्री की ये घोषणा भी जोश से लबालब रही. वैसे भी प्रधानमंत्री हर शब्द का इस्तेमाल खूब सोच समझ कर करते हैं. मिशन शक्ति की कामयाबी के ऐलान में प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देते हुए दो शब्दों का खास तौर पर इस्तेमाल किया - 'लाइव' और 'मार गिराया'. दुनिया में किसी को कोई गलतफहमी न हो इसलिए उसी वक्त ये भी साफ कर दिया कि ये सब किसी के खिलाफ नहीं है.

मगर राजनीति भी क्या चीज होती है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तो चुनाव आयोग के पास शिकायत दर्ज कराने की बात कर रही हैं. राहुल गांधी ने DRDO के वैज्ञानिकों को दो मिशन की कामयाबी की मुबारकवाद दी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ल्ड थियेटर डे की बधाई दे डाली. दरअसल, 27 मार्च को दुनिया भर में विश्व थियेटर दिवस मनाया जाता है. बढ़िया है.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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