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Updated: 05 जनवरी, 2022 10:48 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
  @msTalkiesHindi
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पंजाब में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की रैली रद्द करनी पड़ी है. ये रैली पंजाब के फिरोजपुर में होनी थी. पहले पता चला कि बारिश की वजह से मोदी की रैली रद्द हुई है - फिर खबर आयी की सुरक्षा में चूक (PM Security Breach in Punjab) की वजह से प्रधानमंत्री की रैली को रद्द करना पड़ा. कांग्रेस का तो अलग ही आरोप है - कुर्सियां जो खाली पड़ी थीं.

पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक हुई है. विरोध प्रदर्शनकारियों के सड़क जाम कर देने से प्रधानमंत्री मोदी को बीच रास्ते से ही लौटना पड़ा. प्रधानमंत्री के काफिले के रूट में कोई बाधा नहीं होनी चाहिये, ये प्रोटोकॉल है. प्रोटोकॉल के तहत ये सुनिश्चित करना भी राज्य सरकार की ही जिम्मेदारी होती है - और लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिये.

पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर राजनीति भी तेज हो चली है. बीजेपी और कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) का इस्तीफा मांग रहे हैं. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का बड़ा इल्जाम है कि जब प्रधानमंत्री का काफिला फ्लाईओवर पर फंसा था तब मुख्यमंत्री चन्नी ने कॉल तक रिसीव नहीं किया.

प्रधानमंत्री मोदी के पंजाब दौरे से पहले ही खबर आ चुकी थी कि किसानों की तरफ से विरोध किया जाएगा. ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि वो प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने में आगे रहेंगे.

सवाल है कि अगर प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक हुई है तो सिर्फ मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगने से क्या होगा? अगर इसके पीछे कोई साजिश है तो एनआईए को जांच सौंपी जानी चाहिये. अगर जरूरी हो तो संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर सीधे गिरफ्तार किया जाना चाहिये - और पंजाब में चुनाव क्यों राष्ट्रपति शासन लागू करने के साथ ही सेना के हवाले कर देना चाहिये.

बठिंडा एयरपोर्ट के अधिकारियों के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने जो खबर दी है वो कोई मामूली बात नहीं है. पंजाब सरकार के अधिकारियों से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'अपने सीएम (चरणजीत सिंह चन्नी) को धन्यवाद कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट पाया.' उनका ये कहना बहुत ही बड़ी चिंता वाली बात है, बशर्ते ये कोई राजनीतिक बयान न हो - आखिर इसी देश में एक प्रधानमंत्री और एक पूर्व प्रधानमंत्री की सरेआम हत्या हो चुकी है.

देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा सर्वोपरि है. फिर चाहे वे पंजाब में हों या कोई और जगह. और उसमें राजनीति की बिलकुल भी जगह नहीं है. सुरक्षा में चूक हुई है. प्रधानमंत्री के रूट में कोई भी बाधा सुरक्षा से समझौता है. कुदरती आपदा की बात अलग होती है. अफसोस की बात ये है कि फिक्र की जगह राजनीति पर बहस हो रही है.

narendra modiप्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध खतरनाक है - और उससे भी ज्यादा खतरनाक है चल रही घटिया राजनीति!

प्रधानमंत्री को कोई खुफिया रिपोर्ट मिली क्या?

ज्यादा दिन नहीं हुए जब लुधियाना कोर्ट परिसर में बम विस्फोट हुआ था. विस्फोट भी बम लगाते वक्त ही हुआ था जिसमें में उस शख्स की भी मौत हो गयी जो ये काम कर रहा था. उसी पंजाब में प्रधानमंत्री के दौरे के वक्त अगर कोई आतंकवादी साजिश हुई है तो बहुत बड़ी बात है. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को शुरू से ही लगातार आगाह करते रहे हैं. पाकिस्तानी सरहद से जुड़ा राज्य होने के चलते पंजाब में ऐसी आशंका बनी भी रहती है.

पंजाब तो वैसे भी लंबे वक्त तक आतंकवाद से प्रभावित रहा है. लुधियाना ब्लास्ट में भी खालिस्तानी आतंकवादियों का ही हाथ रहा है. मास्टरमाइंड को जर्मनी में गिरफ्तार भी किया जा चुका है. उसका साथी पाकिस्तान में है.

वैसे भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिंदा लौट पाने जैसी बड़ी बात यूं ही तो कहेंगे नहीं. वैसे चुनावी माहौल में राजनीति की भी पूरी गुंजाइश होती है, लेकिन ये भी तो हो सकता है उनको ऐसी कोई खुफिया रिपोर्ट मिली हो और उसी के आधार पर वो एयरपोर्ट पर अधिकारियों के जरिये मैसेज देने का प्रयास किये हों.

प्रधानमंत्री के रूट की जानकारी कैसे लीक हुई? 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट करके बताया है कि पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध को लेकर गृह मंत्रालय ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. कहते हैं, 'प्रधानमंत्री के दौरे की सुरक्षा प्रक्रिया में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त के काबिल नहीं है - और जवाबदेही तय की जाएगी.

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि अगर प्रधानमंत्री मोदी के दौरे में सुरक्षा से जुड़ी कोई चूक हुई तो हम उसकी जांच कराएंगे. मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा का पूरा इंतजाम होने का दावा किया है. मुख्यमंत्री चन्नी ने ये भी बताया है कि कोरोना संक्रमितों के संपर्क में होने की वजह से वो प्रधानमंत्री के स्वागत में नहीं जा सके. पंजाब सरकार की तरफ से मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया.

प्रधानमंत्री मोदी को एयरपोर्ट से फिरोजपुर तक हेलिकॉप्टर से जाना था. खराब मौसम को देखते हुए प्रधानमंत्री ने करीब 20 मिनट तक इंतजार भी किया. फिर सड़क मार्ग से जाना तय हुआ. एसपीजी ने इसके लिए पंजाब डीजीपी से क्लीयरेंस मांगा. इसके बाद पंजाब डीजीपी ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री के यात्रा मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया गया है, वे अपनी यात्रा कर सकते हैं.

लेकिन, इसी बीच हुसैनीवाला में शहीद स्मारक से करीब 30 किलोमीटर पहले फ्लाईओवर पर प्रधानमंत्री का काफिला करीब 20 मिनट तक जाम में फंसा रह जाता है. क्‍योंकि, इस सड़क को प्रदर्शनकारियों ने घेरा होता है.

अब सवाल ये है कि अगर रूट क्लिअर नहीं था तो पंजाब पुलिस ने प्रधानमंत्री को रवाना क्यों करवाया?

क्या एसपीजी को रूट के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई थी?

अगर प्रदर्शन करने वालों ने सड़क जाम कर रखी थी तो काफिले के पहु्ंचने से पहले उन्हें हटाया क्यों नहीं गया?

इमरजेंसी की स्थिति होने पर कोई वैकल्पिक रूट क्यों नहीं तैयार नहीं किया गया था - ये किसकी जिम्मेदारी है?

और सबसे बड़ा सवाल - प्रधानमंत्री के सड़क के रास्ते जाने की बात तो एयरपोर्ट पर तय हुई थी, तो ये जानकारी लीक कैसे हुई? और प्रदर्शनकारियों तक कैसे पहुंच गयी? प्रधानमंत्री के काफिले में तो जैमर लगा होता है, तो फिर ये बात कहां से बाहर आई?

फिर तो एसपीजी पर सवाल उठेगा?

देश की सबसे काबिल और भरोसेमंद कमांडो से लैस एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के होते कोई देश के प्रधानमंत्री का बाल भी बांका कर सकता है, विश्वास करना मुश्किल हो रहा है.

क्या अपने ही देश में एसपीजी के रहते प्रधानमंत्री को कोई खतरा हो सकता है?

अक्टूबर, 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के साल भर बाद 1985 में एसपीजी का गठन किया गया था. एसपीजी में BSF, CISF, ITBP, CRPF के बेहतरीन अफसरों को लेकर स्पेशन कमांडो ट्रेनिंग दी जाती है जिसे अमेरिकी सीक्रेट सर्विस जैसा माना जाता है.

ये कमांडो अत्याधुनिक असॉल्ट राइफल से लैस होते हैं. साथ में बेहतरीन पिस्टल भी होती है. कमांडो बुलेटप्रूफ जैकेट भी पहनते हैं - और आपस में बातचीत के लिए भी पक्के इंतजाम होते हैं. काफिले के साथ जैमर भी चलता है - जो हर तरह के संचार सिस्टम को ब्लॉक कर सकता है.

ये देश की जनता तो ये मान कर चलती है कि एसपीजी के रहते देश के प्रधानमंत्री का बाल भी बांका नहीं हो सकता, लेकिन अगर ऐसे अभेद्य सुरक्षा किले के होते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी ने महसूस किया कि 'जिंदा लौट पाये' - तो ये एसपीजी पर भी बहुत बड़ा सवालिया निशान है!

इंदिरा और राजीव गांधी हत्याकांड

इंदिरा गांधी हत्याकांड: इंदिरा गांधी हत्याकांड के वक्त एसपीजी तो अस्तित्व में भी नहीं था, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जायें तो क्या कहा जा सकता है.

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर तो उनकी सुरक्षा में लगे दो गार्ड ही हमला बोल दिये थे - देखते ही जब तक वो कुछ समझ पातीं या संभलने की कोशिश करतीं, सुरक्षा गार्डों ने ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर दी थी.

इंदिरा गांधी की ही तरह राजीव गांधी केस भी बिलकुल अलग था. हालांकि, दोनों ही घटनाओं की परिस्थितियां आपस में काफी अलग रहीं.

राजीव गांधी की हत्या: इंदिरा गांधी की हत्या से अलग राजीव गांधी की हत्या सुरक्षा खामियों की वजह से हुई थी. हत्या के वक्त राजीव गांधी के पास एसपीजी सुरक्षा नहीं थी क्योंकि उस एक्ट में संशोधन कर ऐसा कर दिया गया था.

अभी की तरह तब भी एसपीजी सुरक्षा सिर्फ प्रधानमंत्री और उनके परिवार तक सीमित रही. राजीव गांधी की एसपीजी सुरक्षा तीन महीने तक बहाल रखी गयी थी, लेकिन फिर हटा ली गयी.

देखा जाये तो एक प्रधानमंत्री और फिर एक पूर्व प्रधानमंत्री की हत्याएं अलग अलग परिस्थितियों में हुईं - और शुक्र है प्रधानमंत्री मोदी के सामने ऐसी कोई परिस्थिति नहीं थी.

प्रधानमंत्री की सुरक्षा क्या राजनीतिक मुद्दा है?

ये कोई चुनावी राजनीति का मसला नहीं है. देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा से बढ़ कर कुछ भी नहीं हो सकता. प्रधानमंत्री की सुरक्षा भी उतनी ही अहम है जितनी की देश के सरहदों की सुरक्षा सुनिश्चित किया जाता - और सबसे अच्छी बात ये है कि ये दोनों ही देश के बेहतरीन हाथों में है.

अमित शाह ने बिलकुल ठीक कहा है, जवाबदेही तय होगी. केंद्र सरकार को अगर लगता है वास्तव में ऐसा ही हुआ है तो पंजाब सरकार के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एक्शन लेना चाहिये.

केंद्रीय गृह मंत्रालय को फौरन आदेश जारी को जांच के लिए एनआईए को मौके पर तत्काल रवाना करना चाहिये. सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की तत्काल बैठक बुलायी जानी चाहिये - और जरूरत के मुताबिक फैसला लेकर राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेज देनी चाहिये.

अगर लगता है कि पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद का खतरा मंडरा रहा है और मौजूदा सरकार गंभीरता से नहीं ले रही तो बर्खास्त कर सिर्फ राष्ट्रपति शासन ही नहीं लागू किया जाना चाहिये - तत्काल प्रभाव से सेना के हवाले कर देना चाहिये. ऑपरेशन ब्लू स्टार भी पंजाब में ही हुआ था.

और साथ ही, एक सरकार की तरफ से श्वेत पत्र भी जारी करना चाहिये - ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो और देश के लोग भी सच्चाई से जल्द से जल्द वाकिफ हों.

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का आरोप है कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने तब फोन तक नहीं उठाया जब प्रधानमंत्री का काफिला जाम के चलते फ्लाईओवर पर फंसा हुआ था. और फिर प्रधानमंत्री मोदी के अधिकारियों के जरिये मुख्यमंत्री को मैसेज देने की एक वजह ये भी लगती है.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बीजेपी अध्यक्ष नड्डा को जवाब देते हुए ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें कुछ लोग छाता लिये हुए हैं - और कुर्सियां खाली पड़ी हैं. कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री की रैली रद्द होने की वजह खाली कुर्सियां बताया है.

कांग्रेस नेता गौरव पंधी ने सुरजेवाला वाले वीडियो के फोटो के साथ मोरिंदा में मुख्यमंत्री चन्नी की रैली की तस्वीर शेयर करते हुए फर्क दिखाने की कोशिश की है. तस्वीर में लोगों की भीड़ दिखायी गयी है जिसमें कुछ लोगों के हाथ में छाता भी है - लेकिन कांग्रेस की तरफ से सबसे घटिया ट्वीट यूथ कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी की तरफ किया गया है - ये ट्वीट अगर राहुल गांधी को खुश करने के लिए किया गया है तो बात अलग है.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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