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Updated: 31 मई, 2020 12:18 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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लॉकडाउन 5.0 (Lockdown 5.0) बस नाम मात्र का ही समझिये - ये 1 से 30 जून तक लागू जरूर रहेगा और इसे अनलॉक 1.0 (Unlock 1.0) मान कर चल सकते हैं. महीने भर की इस अवधि के लिए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी कर दी है.

आसान भाषा में कहें तो रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी सभी चीजों के लिए छूट ही छूट है - लेकिन कुछ शर्तें लागू हैं. पहला हफ्ता यूं ही रहेगा लेकिन दूसरे हफ्ते से ज्यादातर मामलों में छूट मिलेगी.

एक महत्वपूर्ण बात - अगर अब भी कोई कहीं फंसा हुआ है तो मुश्किलें खत्म समझे. अब आने जाने की पूरी छूट है यानी अब किसी तरह के पास या परमिशन की जरूरत नहीं होगी - लेकिन 1 जून, 2020 से. पहले नहीं.

सबसे अहम बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने गाइडलाइन तैयार करने के अलावा एक तरीके से सारी जिम्मेदारी राज्य सरकारों (State Governments) पर डाल दी है - और लोगों को अपनी सुरक्षा का खुद ख्याल रखना होगा ये बात हर वक्त याद रहे.

अब पूरी छूट है, लेकिन शर्तें लागू हैं

संपूर्ण लॉकडाउन 1 जून से समाप्त हो जाएगा - लॉकडाउन 5.0 को लेकर सीधे सीधे आपके लिए समझने वाली बात इतनी भर ही है. मगर, ध्यान रहे हर राज्य को अब ये अधिकार मिल चुका है कि वो जहां जैसी जरूरत महसूस करें पाबंदी लगायें और हटायें - एक बात और, नाइट कर्फ्यू 30 जून तक जारी रहेगा. वक्त भी बदला होगा अब रात के 7 बजे से सुबह 7 बजे की जगह रात के 9 बजे से सुबह 5 बजे तक.

1. सबसे बड़ी राहत तो अब ये है कि कहीं आने जाने से पहले कोई इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी. एक राज्य से दूसरे राज्य में आने जाने पर लगी पाबंधी पूरी तरह हटा ली गयी है. राज्य के अंदर भी एक जिले से दूसरे जिले में लोग आ और जा सकेंगे - लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना ही होगा.

2. हर हाल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा और अनिवार्य तौर पर मास्क भी पहननना जरूरी होगा.

narendra modi, amit shahपाबंदियां न सही, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग हर हाल में जरूरी होगा

3. धार्मिक स्थल और सैलून खोले तो जाएंगे, लेकिन वहां भी कुछ शर्तें लागू रहेंगी. मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च खोलने की घोषणा तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पहले ही कर चुकी हैं. अब ये पूरे देश में लागू होगा.

4. दूसरे हफ्ते यानी 8 जून से रेस्टोरेंट और होटल खुलेंगे - जाइए मगर संभल कर.

5. स्कूल-कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान खोले जाने का फैसला राज्य सरकारें ही लेंगी, लेकिन इसकी संभावना जुलाई से ही लग रही है. जुलाई से अनलॉक 2.0 का टाइम शुरू हो जाएगा.

6. बताया गया है कि कई राज्य मॉल भी खोलने के पक्ष में हैं, लेकिन ऐसा धीरे धीरे हो पाएगा.

7. कोचिंग, जिम और बार खोले जाने को लेकर भी फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है.

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी

ई-एजेंडा आजतक कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि भारत में अब तक जितनी भी आपदा या महामारी आयी है उनसे सरकारें ही लड़ती रही हैं. बोले, हर बार परिवर्तन सरकारें लाती थीं, लेकिन इस बार पूरा देश लड़ रहा है.

फिर समझाये भी, लोगों ने जनता कर्फ्यू, थाली बजाकर और कोरोना वॉरियर्स का सम्मान कर देश को कोरोना महामारी के खिलाफ मजबूत किया. लोगों के सहयोग की बदौलत ही हम कोरोना के खिलाफ दूसरे देशों से बेहतर स्थिति में हैं.

अमित शाह ने अनलॉक 1 को लेकर भी आसान शब्दों में समझाया है, बोले - संयम के साथ तमाम गतिविधियों को शुरू किया जाएगा. हां, जहां कंटेनमेंट जोन होंगे वहां सख्ती लागू रहेगी लेकिन जहां परिस्थितियां बेहतर है वहां जन-जीवन सामान्य होगा.

मतलब साफ है. अब सभी को गांठ बांध कर समझ लेना होगा - सावधानी हटी, दुर्घटना घटी. ये स्लोगन भले सड़कों पर लिखा देखने को मिला हो. भले ही सफर में दिखा हो, लेकिन अब इसे हर वक्त अच्छी तरह याद रखना है. सोशल डिस्टेंसिंग खत्म, दुर्घटना संभव है. मास्क लगाना भूले, दुर्घटना संभव है. दो गज की दूरी भूले, दुर्घटना संभव है. लक्ष्मण रेखा भूले, दुर्घटना संभव है. ऐसे में बहुत ही जरूरी है कि आप अपना अच्छी तरह ख्याल रखें. अगर आप अपना ख्याल रखते हैं तो समझिये एक साथ कई लोगों का भला होता है. एक तो आपका और दूसरे आप के इर्द-गिर्द के सब लोगों का.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा करते वक्त जो लक्ष्मण रेखा खींची थी और बाद में भी याद दिलाते रहे अब अस्तित्व खो चुकी है, ऐसा बिलकुल नहीं है - जरा गौर करें तो लक्ष्मण रेखा का दायरा काफी विस्तृत हो गया है. वैसे भी लक्ष्मण रेखा शाश्वत है और ऐसी चीजें कभी खत्म नहीं होतीं. अब लक्ष्मण रेखा को सोशल डिस्टैंसिंग के रूप में महसूस कर सकते हैं लेकिन मुंह पर मास्क भी लगा होना चाहिये. बात पते की बस ये है - अब अपना ख्याल जरूर रखियेगा.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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