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Updated: 08 जनवरी, 2016 06:38 PM
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एक हफ्ते के भीतर तीन इंजीनियरों की हत्या वाकई गंभीर बात थी. जिन बातों के लिए बिहार के लोगों ने नीतीश कुमार को फिर से कुर्सी सौंपी, सुशासन उनमें प्रमुख था. हालत ये हो गई कि सरकार में नीतीश के सहयोगी आरजेडी नेताओं ने भी सवाल खड़े कर दिए. देखते ही देखते आरजेडी और जेडीयू आपस में भिड़ते नजर आने लगे.

नीतीश के साथ साथ विपक्ष ने लालू को भी निशाना बनाया. अब पठानकोट हमले को लेकर लालू विपक्षी बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टारगेट कर रहे हैं.

अब जवाब दो!

केंद्र में सत्तारुढ़ बीजेपी को सीधे सीधे निशाने पर लेते हुए लालू ने कहा है कि जो लोग बिहार में जंगलराज पार्ट 2 पर चर्चा करने में आगे रहते हैं वे लोग पठानकोट हमलों पर खामोश क्यों हैं?

लालू आरोप लगाते हैं कि 'हमारा देश तुम्हारे हाथों में सुरक्षित नहीं है' और पूछते हैं, "मोदी और बीजेपी वाले बोलते थे कि पाकिस्तान हमसे आंख नहीं मिलाएगा, फिर आतंकी देश में कैसे घुस गए?"

लालू ने सवाल उठाया कि बदमाशों द्वारा दो प्राइवेट कंपनी के इंजीनियरों की हत्या पर शोर मचाने वालों की बोलती बंद क्यों हो गई?

जंगलराज की दस्तक?

इंजीनियरों की सनसनीखेज हत्या के बाद एक इंटरव्यू में नितिन गडकरी ने भी कहा था कि चार-पांच इंजीनियरों ने उनसे मिल कर बिहार से ट्रांसफर की बात कही. गडकरी का कहना था कि डर के मारे इंजीनियर वहां काम नहीं करना चाहते.

विरोधी तो विरोधी, आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी नीतीश को कठघरे में खड़ा कर दिया, "सरकार की ड्राइविंग सीट पर बैठे नीतीश कुमार को कानून व्यवस्था की स्थिति और बेहतर बनाने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए. हमारी पार्टी आरजेडी तो पिछली सीट पर बैठी है और सुरक्षित गाड़ी चलाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री पर है."

जेडीयू ने इस पर कड़ा एतराज जताया और पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह साफ तौर पर बोले, "नीतीश कुमार को किसी से किसी तरह के लेक्चर की जरूरत नहीं है. उनका ट्रैक रिकॉर्ड सबके सामने है."

लेकिन रघुवंश से अलग, लालू ने नरम रूख अपनाया और कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान जो लोग कानून व्यवस्था को लेकर चुनौती बने हुए थे वे फिर से सिर उठा रहे हैं. इसके साथ ही लालू ने कहा कि इस प्रदेश से दंगाई, बलवाई और फासिस्ट लोगों को हमलोगों ने भगा दिया है और अब अपराधियों की बारी है.

इसके साथ ही एसपी और डीएम को गांवों में कैंप करने और वहां कुछ रातें गुजारने का सुझाव देते हुए लालू ने कहा कि गांव के लोगों के बीच जाने से उनसे बातचीत के दौरान अपराध में शामिल और आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल होगी, जिससे बेहतर पुलिसिंग में मदद मिलेगी. नीतीश कुमार ने भी रघुवंश की बात को नजरअंदाज करते हुए कहा कि लालू जी ने अच्छा सुझाव दिया है.

लालू सुपर सीएम

बीजेपी के साथ एनडीए के सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी नेता राम विलास पासवान बोले, "इससे बड़ा मजाक क्या हो सकता है कि लालू प्रसाद, नीतीश को कानून व्यवस्था के बारे में बताएं, लॉ एंड ऑर्डर के बारे में सलाह देने का राजद अध्यक्ष का क्या हक है, जबकि ये सब उनके कारण हो रहा है." बीजेपी नेता सुशील मोदी को तो बस मौके की तलाश थी. सुशील मोदी ने इसके लिए मंत्रियों की संख्या सामने रखी - 'लालू ने नीतीश को याद दिलाया है कि वे 14 मंत्रियों के सीएम हैं जबकि राजद अध्यक्ष 16 मंत्रियों के सुपर सीएम हैं.'

बहती गंगा में जीतन राम मांझी ने भी हाथ के मैल साफ कर लिये. मांझी ने नीतीश को सलाह दी कि बहुत दबाव में काम करने से बेहतर है नीतीश इस्तीफा दे दें.

वैसे तो पठानकोट हमले और बिहार में इंजीनियरों की हत्या का मामले की तुलना का कोई मतलब नहीं है. लेकिन बयानबाजी की राजनीति में मतलब की बात होती ही कितनी है? ये बात अलग है कि लालू के इस स्टैंड से आरजेडी और जेडीयू का आपसी टकराव फिलहाल थम जाएगा.

इस टकराव में एक खास बात देखने को मिली वो ये कि दोनों पार्टियों के नेता आपस में भिड़े. रघुवंश प्रसाद ने नीतीश को निशाना बनाया तो संजय सिंह ने जोरदार बचाव किया. वैसे बिहार की राजनीति के हिसाब से देखा जाए तो रघुवंश के बोलने का सीधा मतलब लालू ही होते हैं.

जब रघुवंश ने लालू के मन की बात कह दी तो लालू ने रुख बीजेपी की ओर मोड़ दिया. ठीक वैसे ही जैसे लालू के लिए भुजंग वाले ट्वीट के बाद नीतीश ने ठीकरा बीजेपी के सिर फोड़ दिया था. हिसाब बराबर.

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