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Updated: 05 अप्रिल, 2021 03:56 PM
मुकेश कुमार गजेंद्र
मुकेश कुमार गजेंद्र
  @mukesh.k.gajendra
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केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Election 2021) के लिए रविवार को प्रचार समाप्त हो चुका है. राज्य की 140 विधानसभा सीटों पर 6 अप्रैल को वोटिंग होनी है. ऐसे में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के साथ बीजेपी ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. लेकिन केरल में सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आए हैं, कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi). कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने पांच राज्यों के चुनाव में सबसे ज्यादा फोकस केरल पर रखा है.

राहुल गांधी की केरल में सक्रियता की दो बड़ी वजहें हैं. पहली ये कि केरल के इतिहास को देखा जाए, तो हर बार सत्ता परिवर्तन होता है, ऐसे में कांग्रेस की अगुवाई वाली युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को इस बार सूबे में सरकार बनाने का अवसर मिल सकता है. दूसरी बात ये कि यूपी की अपनी परंपरागत सीट अमेठी को हारने के बाद राहुल गांधी केरल के वायनाड से सांसद हैं. वायनाड राहुल की नई अमेठी है. वे यहां से रिकॉर्ड 4 लाख वोटों से जीते थे. लेकिन इस बार हालात अलग नजर आ रहे हैं.

untitled-1-650_040521082024.jpgओपिनियन पोल और प्री-पोल के आंकड़े राहुल गांधी के लिए शुभ संकेत नहीं दे रहे हैं.

Manorama News-VMR प्री-पोल सर्वे में केरल में सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार बनती हुई नजर आ रही है. केवल कसारगोड, कन्नूर, वायनाड और कोझीकोड जिलों की 32 में से 27 सीटों पर LDF की जीत की संभावना है. सबसे ज्यादा खराब हालत तो वायनाड की है. यहां तीन विधानसभा सीटों पर कांग्रेस बुरी तरह हारते हुए नजर आ रही है. तीनों सीटें कलपेट्‌टा, मानंदवाणी और सुल्तान बथेरी LDF के खाते में जाती हुई दिख रही हैं. LDF को 54.42% शेयर मिल रहा है.

केरल भी हार गए राहुल तो कहां जाएंगे?

वायनाड, केरल का सबसे कम 3 विधानसभा सीटों वाला जिला है, जो कर्नाटक सीमा से सटा हुआ एक पहाड़ी इलाका है. यहां करीब 20% आबादी आदिवासी वोटर्स की है. इसलिए यहां तीन में से दो सीटें मानंदवाणी और सुल्तान बथेरी एसटी के लिए आरक्षित हैं, जबकि एक मात्र कलपेट्‌टा सामान्य है. यहां पिछले तीन चुनाव की बात करें तो LDF ने साल 2006 में जिले की तीनों सीटें जीत ली थीं. साल 2011 में UDF ने सभी तीनों सीटें जीती थीं. साल 2016 में 2 सीट LDF के और एक UDF के खाते में गई थी. इस जिले में 29% वोटर्स मुस्लिम, 21% क्रिश्चियन और 49% वोटर्स हिंदू हैं. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल को यहां से व्यापक जनसमर्थन मिला था.

ऐसे में केरल में सरकार बनाना न केवल कांग्रेस के अस्तित्व के लिए जरूरी है, बल्कि राहुल के सियासी वजूद के लिए भी अहम है. कांग्रेस की सूबे में जीत से एक ओर उनकी राजनीतिक क्षमता पर सवाल उठाने वाले आलोचकों को जवाब मिल सकता है, दूसरी तरफ पांच राज्यों के चुनाव के बाद कांग्रेस के नए अध्यक्ष के चुनाव में उनकी दावेदारी को मजबूती मिल सकती है. लेकिन ओपिनियन पोल और प्री-पोल के आंकड़े शुभ संकेत नहीं दे रहे हैं. ऐसे में यदि राहुल केरल भी हार गए, तो जाएंगे कहां?

ओपिनियन पोल में LDF की सरकार तय

केरल विधानसभा चुनाव को लेकर तीन प्रमुख ओपिनियन पोल/प्री-पोल सर्वे हुए हैं. इन तीनों में केरल में सत्तारूढ़ LDF के सत्ता में बने रहने का अनुमान है. पिनाराई विजयन की अगुवाई वाला गठबंधन LDF 140 विधानसभा सीटों में 77 पर जीत हासिल करेगा. साल 2016 में LDF को 91 सीटें मिली थीं. इस बार सीटें घटने के बावजूद विजयन सरकार बहुमत हासिल करते दिख रही है. वैसे यदि ऐसा हुआ तो केरल राजनीतिक इतिहास में पहली बार कोई सरकार लगातार दो टर्म रहेगी.

ओपिनियन पोल के मुताबिक, कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF साल 2016 में मिली 47 सीटों को बढ़ाकर इस बार 62 सीटें कर लेगी. यह संख्या विजयन सरकार को हटाने के लिए काफी नहीं है. BJP को इस चुनाव में कोई फायदा होने की उम्मीद नहीं है. उसके सिर्फ एक सीट जीतने की संभावना है. साल 2016 में भी BJP को एक ही सीट मिली थी. सर्वे में शामिल 39.3% लोग विजयन ने मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं. दूसरे नंबर पर कांग्रेस नेता और पूर्व CM ओमन चांडी हैं. उन्हें 26.5% वोट मिले हैं.

टाइम्स-नाउ और सी-वोटर ओपिनियन पोल

टाइम्स-नाउ और सी-वोटर के ओपिनियन पोल (Kerala Opinion Poll) में LDF सरकार की वापसी के आसार हैं. ओपिनियन पोल के मुताबिक, LDF की सीटों में कमी आएगी, लेकिन वह प्रदेश में सबसे बड़े दल के रूप में सामने आएगी. लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को 9 सीटों के नुकसान के साथ 82 सीटों पर जीत मिल सकती है. वहीं, UDF को 56 सीटों पर जीत मिलने की संभावना है. हालांकि, पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार यूडीएफ के खाते में 9 सीटें ज्यादा आ सकती हैं.

बीजेपी को इस बार भी सिर्फ एक सीट पर जीत मिलती दिखाई दे रही है. वहीं, एक अन्य उम्मीदवार के भी जीतने की संभावना है. 38 फीसदी लोग पिनराई विजयन को फिर मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं. ओमन चांडी 28.3 फीसदी लोगों की मुख्यमंत्री के रूप में पहली पसंद हैं. 2.5 फीसदी लोग मुल्लापल्ली रामचंद्रन को, 5.9 फीसदी केके शैलजा को और 4.2 फीसदी रमेश चेन्निथला को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं. शशि थरूर को भी 5.8 फीसदी लोगों ने सीएम के रूप में अपनी पहली पसंद बताया है.

ABP न्यूज-CVoter का ओपिनियन पोल

ABP न्यूज-CVoter के ओपिनियन पोल में सबसे ज्यादा 85 सीट सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रैटिक फ्रंट (LDF) को मिलती दिख रही है. यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) जहां 53 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर है. वहीं बीजेपी और अन्य को केवल 1-1 सीटें मिलती दिख रही हैं. वोट प्रतिशत के लिहाज से भी सर्वे में LDF 41.6% वोट हासिल करके सबसे आगे दिख रही है. वहीं UDF को 34.6% और बीजेपी को 15.3% वोट सर्वे में मिलते दिख रहे हैं. चुनाव में बहुमत हासिल करने के लिए 71 सीट जरूरी हैं.

इस सर्वे में LDF को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है. हालांकि, सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत और सीट हासिल करने के बावजूद 2016 के नतीजों की तुलना में LDF के खाते में 6 सीटें कम आई हैं. सर्वे में शामिल करीब 46 फीसदी लोगों ने मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को पसंद बताया है. कांग्रेस के ओमान चांडी करीब 22 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर हैं. सीपीएम की केके शैलजा को तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा पसंद किया गया है. इस तरह केरल में LDF की वापसी तय मानी जा रही है.

किस गठबंधन में कौन सी पार्टी है शामिल

कांग्रेस के अगुवाई वाले UDF में यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (जोसेफ) आरएसपी, केरला कांग्रेस (जैकब) सीएमपी (जे) भारतीय नेशनल जनता दल और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक शामिल हैं. लेफ्ट की अगुवाई वाले LDF में सीपीएम, सीपीआई, जेडीएस, एनसीपी, केरला कांग्रेस (एम), केरला कांग्रेस (सकारिया थामस), कांग्रेस (सेक्युलर), जेकेसी, इंडियन नेशनल लीग, केरला कांग्रेस (बी) जेएसएस और लोकतांत्रिक जनता दल हैं. वहीं, NDA में बीजेपी और भारतीय धर्म जनसेना पार्टी शामिल है.

लेखक

मुकेश कुमार गजेंद्र मुकेश कुमार गजेंद्र @mukesh.k.gajendra

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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