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Updated: 28 अक्टूबर, 2018 11:50 AM
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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सबरीमला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़ा किया है. अमित शाह का साफ तौर पर कहना है कि कोर्ट का आदेश ऐसा नहीं होना चाहिये जिससे लोगों की आस्था को चोट पहुंचे.

सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले के बाद सबरीमला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश और पूजा करने की अनुमति दे दी गई है. इससे पहले 10 साल की लड़कियों से लेकर 50 साल तक महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी. हालांकि, लोगों के भारी विरोध के कारण इस पर अमल नहीं हो सका है.

अमित शाह ने आस्था के नाम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध किया है. तो क्या बीजेपी का यही स्टैंड अयोध्या के मामले में भी लागू होगा?

आस्था को लेकर अमित शाह की चेतावनी

केरल के कन्नूर में अमित शाह बीजेपी के ऑफिस का उद्घाटन करने पहुंचे थे. अमित शाह के निशाने पर ज्यादातर राज्य की लेफ्ट सरकार रही. अमित शाह ने लेफ्ट की पी. विजयन सरकार पर बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ताओं को यूं ही जेल में डाल देने का आरोप लगाया और ऐसा न करने के लिए आगाह भी किया. साथ ही, अमित शाह ने वादा किया कि बीजेपी भगवान अयप्पा के भक्तों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है.

amit shahआस्था के नाम पर...

सबरीमला मंदिर को लेकर चल रहे विवाद के बीच अमित शाह ने कहा, "सरकार और कोर्ट को आदेश ऐसा करना चाहिये जिसका पालन हो सके. ऐसा आदेश नहीं करना चाहिये जो लोगों की आस्था को तोड़ने का काम करे."

अब ये समझने की जरूरत है कि क्या अमित शाह सबरीमला के बहाने कुछ और इशारा कर रहे हैं? क्या सबरीमला मंदिर का नाम लेकर अमित शाह ने अयोध्या में राम मंदिर को लेकर बीजेपी का स्टैंड साफ किया है?

अयोध्या पर बीजेपी का बदलता रूख

हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से कानून बनाने की मांग की थी. फिलहाल अयोध्या केस की सुप्रीम कोर्ट में सुनवार्ई चल रही है.

अयोध्या मसले पर बीजेपी का रूख मौके के हिसाब से बदलता नजर आता है. यूपी चुनाव तक बीजेपी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ जाने की बात किया करती थी. बीजेपी नेता अयोध्या मामले पर अलग अलग बयान देते हैं. कोई कहता है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के एजेंडे में नहीं है तो कोई हर हाल में मंदिर बनाने की बात करता है.

मोहन भागवत का कहना था कि लोग पूछने लगे हैं कि अगर अभी मंदिर नहीं बनेगा तो आखिर कब बनेगा? अभी से मतलब केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार से है.

सबरीमला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमित शाह मौलिक अधिकारों से जोड़ कर समझाने की कोशिश कर रहे हैं. सबरीमला में सभी महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे लोगों का समर्थन करते हुए कोर्ट के आदेश को उनके मौलिक अधिकार के खिलाफ बताया है.

अमित शाह का कहना है, "आर्टिकल 14 की दुहाई दी जाती है... मैं पूछना चाहते हो कि आर्टिकल 14 की दुहाई क्यों देते हो... आर्टिकल 25 और 26 में मेरे धर्म के अनुसार मुझे भी जीने का अधिकार है... एक फंडामेंटल राइट दूसरे फंडामेंटल राइट पर कैसे ओवरराइट कर सकता है?"

सबरीमला विवाद पर अमित शाह के बयान को अयोध्या के प्रसंग में समझें तो कई बातें साफ हो रही हैं. जिस आस्था की बात अमित शाह सबरीमला मंदिर के सिलसिले में कर रहे हैं, अयोध्या में राम मंदिर के मामले में भी वही दलील दी जाती है. बीजेपी नेताओं की पुरानी बातें याद करें तो यही सुनने को मिलता था कि राम लला के जन्म स्थान का मामला आस्था से जुड़ा है. माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में जमीन का मालिकाना हक निर्णायक साबित होगा, बनिस्बत आस्था के.

अमित शाह आस्था को मौलिक अधिकार से जोड़ कर ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं. जाहिर है अयोध्या मामले में भी अमित शाह का यही तर्क होगा.

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