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Updated: 20 जून, 2020 06:49 PM
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गलवान घाटी... बीते 4 दिनों से भारत और चीन में सबसे ज्यादा चर्चा इस घाटी की हो रही है. गलवान घाटी में बीते सोमवार को चीनी और भारतीय सैनिकों की हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तल्खी बढ़ गई है. पूर्वी लद्दाख स्थित गलवान घाटी इलाके पर चीनी सैनिकों की नापाक नजर का भारतीय सैनिकों ने जब करारा जवाब दिया तो दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई. इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए और माना जा रहा है भारतीय कार्रवाई में 40 से ज्यादा चीनी सैनिक भी मारे गए हैं. इन सबके बीच यह मामला गहराता जा रहा है कि आखिर अब चीन कौन सी चाल चल रहा है. आपको बता दें कि चीन लंबे समय से भारत की सीमा से सटे भारतीय इलाकों पर अपनी नजरें गड़ाए हुए है. साल 1962 में भारत को हराकर चीन ने अक्साई चीन का इलाका हथिया लिया. इसके बाद वर्ष 1967 और 1975 में भी चीन ने सिक्किम से लेकर लद्दाख तक अपनी विस्तारवादी नीतियों को क्रियान्वित करने की कोशिश की, लेकिन भारत ने चीन को माकूल जवाब देते हुए उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया.

अब चीन की नजरें ईस्टर्न लद्दाख स्थित गलवान घाटी पर टिक गई हैं. चीन सिल्क रूट वाले गलवान नाला को अपने प्रभाव वाला इलाका बताने की कोशिश रहा है, जिसका विरोध करने पर भारत-चीन के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई है. भारत चीन की इस अनैतिक और गैरजरूरी विस्तारवादी नीतियों की आलोचना कर रहा है और कह रहा है कि गलवान घाटी हमेशा से भारत का क्षेत्र रहा है और अब अचानक चीन इसे अपना क्षेत्र बताने की कोशिश कर रहा है.

China claims that Galwan Valley comes under its territory. India Today has spoken to the man whose great grandfather actually discovered the Galwan Valley. Here is the entire truth.#IndiaFirst (@gauravcsawant)#RE pic.twitter.com/JmjDNASqR0

जानें गलवान घाटी का इतिहास

इस बीच गलवान घाटी को सबसे पहले खोजने वाले भारतीय रसूल गलवान के वंशज के बारे में पता चला है, जिसे हमारे सहयोगी इंडिया टूडे की टीम ने लद्दाख में खोजा है. इंडिया टूडे केे वरिष्ठ पत्रकार गौरव सावंत से बात करते हुए मोहम्मद आमीन गलवान ने कहा कि उनके परदादा रसूल गलवान ने वर्ष 1890 में इस घाटी की खोज की थी. उस समय रसूल लगवान 12-13 साल के रहे होंगे. सन् 1892-93 में सर यंग हसबैंड ने व्यापार वास्ते सिल्क रूप के नए-नए रास्ते खोजने की कोशिश के तहत एक अभियान चलाया था. रसूल गलवान भी उसी अभियान का हिस्सा थे. जब सर यंग हसबैंड की टीम गलवान घाटी में भटक गई तो रसूल गलवान ने उन्हें रास्ता दिखाया था और टीम को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में मदद की थी. दरअसल, रसूल गलवान कई बार उस सुनसान घाटी का दौरा कर चुके थे और उन्हें गलवान नाला के बारे में भी पता था. ब्रिटिश सरकार ने रसूल गलवान से खुश होकर उनके नाम पर इस घाटी का नामकरण किया था. तब से यह इलाका गलवान घाटी के नाम से जाना जाता है.

‘गलवान घाटी पर सिर्फ भारत का अधिकार’

इंडिया टूडे से बातचीत में मोहम्मद आमिन गलवान ने चीन द्वारा इस इलाके को अपना बताए जाने के दावे को पूरी तरह झुठलाते हुए कहा कि गलवान घाटी हमेशा से भारत की रही है और चीन किसी भी कीमत पर इसे अपना नहीं बता सकता. इसके साथ ही आमिन गलवान ने ये भी कहा कि गलवान घाटी से चीनी सैनिकों को भारतीय जवान खदेड़ दें. उन्होंने कहा कि चीन के पास कोई साक्ष्य नहीं है कि गलवान घाटी उसके प्रभाव क्षेत्र में आता है. दरअसल, चीन के दावे के बाद राजनीतिक हलकों में गहमागहमी तेज हो गई और युद्ध की संभावनाओं को टालने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं.

झड़प के बाद हालात और रिश्ते बिगड़े

गलवान घाटी झड़प के बाद चीन के नापाक मंसूबों की पोल खुल गई है कि किस तरह वह बीते 60 वर्षों के दौरान समय-समय पर भारतीय जमीन पर कब्जा करने की कोशिशें करता रहा है. बीते 50 वर्षों में दोनों देशों के बीच कोई बड़ी हिंसक झड़प देखने को नहीं मिली थी, लेकिन बीते सोमवार को जिस तरह चीनी सैनिकों ने कील लगे डंडों और धारदार हथियार से भारतीय जवानों पर हमला किया है, इससे साथ पता चल रहा है कि चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों को मूर्त रूप देने के लिए धीरे-धीरे आक्रामक होता जा रहा है. लेकिन उसे इल्म नहीं है कि भारत अब पहले जैसा नहीं रहा. चीन की हर चाल का माकूल जवाब दिया जाएगा और अगर ड्रैगन ने हमारी जमीन हड़पने की कोशिश की तो उसे बिल्कुल ऐसा नहीं करने दिया जाएगा.

चीन से बाकी देश भी परेशान

चीन की विस्तारवादी नीतियों से भारत ही नहीं, बल्कि 20 से ज्यादा देश परेशान हैं, जिनमें रूस से लेकर भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान भी हैं. ताइवान और साउथ कोरिया से चीन के रिश्ते के बारे में तो दुनिया जानती है. चीन ने पूर्वी तुर्किस्तान, तिब्बत, दक्षिणी मंगोलिया, ताइवान, हॉन्ग कॉन्ग और मकाउ पर पहले से ही कब्जा कर रखा है. चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और लद्दाख से सटे भारतीय इलाकों पर भी नजरें गड़ाए बैठा है. चीन हमेशा ये दलील देता है कि मैकमोहन लाइन के जरिये भारत ने चीन के इलाकों को अपने प्रभाव में कर लिया है, लेकिन ये हकीकत नहीं है और दुनिया इस बात को जानती है कि भारत ने कभी भी अपने पड़ोसियों की जमीन को कब्जा करने की कोशिशें नहीं कीं.

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