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Updated: 22 जनवरी, 2019 10:54 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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सोमवार को लंदन में एक ऐसी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हुई, जिसने भारत की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. इसे ईवीएम हैकेथॉन के नाम से जाना जा रहा है. दरअसल, इस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी साइबर एक्सपर्ट सैयद शुजा ने ईवीएम के हैक होने का मामला उठाया है. शुजा ने इसे लेकर कई सनसनीखेज दावे किए, जिनमें 2014 में गोपीथान मुंडे की हत्या से लेकर लोकसभा चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ी के जरिए भाजपा के चुनाव जीतने तक का दावा किया गया है. सैयद शुजा के आरोपों ने जहां एक ओर कांग्रेस द्वारा ईवीएम के विरोध को पंख लगाने के काम किए हैं, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा कर दिया है. हालांकि, चुनाव आयोग ने खुद पर सवाल उठता देखकर सैयद शुजा और ईवीएम हैकथॉन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है.

हर बार चुनावों के दौरान ईवीएम पर सवाल उठते हैं, कभी उनमें गड़बड़ी के तो कभी उनसे छेड़छाड़ के, लेकिन इस बार उसकी हैकिंग को लेकर सवाल उठे हैं. इस हैकथॉन में सैयद शुजा ने न सिर्फ भाजपा पर हमला बोला है, बल्कि सपा-बसपा और आम आदमी पार्टी को भी लपेटे में ले लिया है. वहीं दूसरी ओर, इस हैकथॉन के दौरान वहां कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल भी मौजूद थे, जिसे लेकर भाजपा ने सिब्बल को भी आड़े हाथों लिया है और पूछा है कि आखिर वो वहां क्या कर रहे थे? भाजपा ने आरोप लगाए हैं ये सब कांग्रेस और कपिल सिब्बल की साजिश के तहत किया गया है. हालांकि, शुजा अपनी बातों को सच साबित करने के लिए कोई फैक्ट या सबूत नहीं दे सके, लेकिन कपिल सिब्बल ने खुद को इस मामले से पाक-साफ निकाल लेने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस तक की और बताया कि वह उस हैकथॉन में क्यों मौजूद थे, लेकिन पहले जान लीजिए कपिल सिब्बल पर भाजपा ने क्या आरोप लगाए थे.

क्या थे दावे?

सैयद शुजा ने ईवीएम हैकथॉन नाम दिए गए वीडियो कॉन्फ्रेंस में कई दावे किए, जिन्होंने कई पार्टियों पर और चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े किए. ये दावे थे-

1- 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की गई थी, जिसकी वजह से मोदी सरकार सत्ता में आ पाई.

2- ईवीएम हैकिंग की जानकारी गोपीनाथ मुंडे को थी, इसलिए उनकी हत्या कर दी गई.

3- शुजा ने दावा किया है कि ईवीएम को ब्लूटूथ के जरिए हैक नहीं किया जा सकता है, इसके लिए मोदी सरकार मिलिट्री ग्रेड की फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करती है.

4- सपा-बसपा और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा है कि उन्होंने भी ईवीएम से छेड़छाड़ की.

5- दिल्ली में आम आदमी पार्टी की प्रचंड जीत के लिए भी ईवीएम को जिम्मेदार कहा है. हालांकि, अपने किसी भी दावे का सैयद शुजा कोई सबूत नहीं पेश कर सके हैं.

6- शुजा के अनुसार एनआईए अधिकारी तंजिल अहमद मुंडे की मौत को हत्या बताते हुए एफआईआर दाखिल करने वाले थे, लेकिन उन्होंने खुदकुशी कर ली.

ईवीएम, मोदी सरकार, लोकसभा चुनाव 2019, सैयद शुजाईवीएम पर सवाल उठाने वाले सैयद शुजा की आइडेंटिटी और विश्वसनीयता खतरे में पड़ गई है. 

भाजपा ने लगाए हैं ये 5 आरोप

सैयद शुजा द्वारा भाजपा पर निशाना साधने और कपिल सिब्बल के उस हैकथॉन में देखे जाने के बाद भाजपा के रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कपिल सिब्बल और कांग्रेस पर 5 गंभीर आरोप लगाए हैं. ये हैं वो आरोप-

1- ईवीएम स्टंट कांग्रेस का एक शो है.

2- सिब्बल ने कांग्रेस के लिए उस कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की है.

3- कांग्रेस ईवीएम को 2019 चुनावों में हार का एलिबाई बनाना चाहती है.

4- कांग्रेस लोकतंत्र का अपमान कर रही है.

5- कांग्रेस 2014 के मैंडेट का अपमान कर रही है.

सिब्बल क्यों गए थे उस कॉन्फ्रेंस में?

रविशंकर प्रसाद द्वारा कई गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद कपिल सिब्बल ने इसे लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि उन्हें उस कॉन्फ्रेंस में निजी तौर पर न्योता देकर बुलाया गया था. ये न्योता उन्हें इंटरनेशनल जनरल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आशीष रे ने दिया था. सिब्बल के अनुसार उस कॉन्फ्रेंस में सभी राजनीतिक पार्टियों को भी न्योता दिया गया था, जिनमें मोदी-शाह भी शामिल थे, लेकिन कोई नहीं गया. सिब्बल ने कहा है कि ये कॉन्फ्रेंस उनकी या कांग्रेस की साजिश नहीं थी. इसमें किसी एक पार्टी पर आरोप नहीं लगाए गए, बल्कि सभी पार्टियों को लपेटे में लिया गया. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए ना कि इस पर राजनीति होनी चाहिए.

कल जिस ईवीएम हैकथॉन ने भाजपा पर ईवीएम से छेड़छाड़ का संदेह पैदा कर दिया था, आज देखते ही देखते वो सारे शक हवा हो गए. वजह सिर्फ इतनी है कि अमेरिकन साइबर एक्सपर्ट सैयद शुजा ने बड़े-बड़े दावे तो कर दिए, लेकिन अपने किसी दावे को पुख्ता साबित करने के लिए सबूत पेश नहीं कर सके. वहीं दूसरी ओर कपिल सिब्बल की मौजूदगी की वजह से कांग्रेस और सिब्बल सवालों के कटघरे में थे, लेकिन आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के सिब्बल ने भी खुद को इस मामले से लगभग-लगभग पाक साफ निकाल ही लिया है. लेकिन इन सबके पीछे छूट गए हैं कुछ सवाल, जिनके जवाब मिलना अभी भी बाकी हैं. एक नजर कुछ सवालों पर-

1- शुजा ने आरोप लगाया है कि विन सॉल्यूशन नाम की कंपनी ने ईवीएम मशीनें बनाने का ऑर्डर ईसीआईएल को दिया था, ये बात कितनी सच है?

2- सिब्बल के अनुसार चुनावों के बाद ईवीएम मशीनें बना रही 'MS7B' नाम की 13 लोगों की टीम में से 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी, जिसमें सैयद शुजा भी घायल हुए थे, ये कितना सच है? अगर ये सच है तो विन सॉल्यूशन के मालिक कमल राव पर शिकंजा कसा जाएगा या नहीं, जो इस समय अमेरिका में हैं?

3- सैयद शुजा के अनुसार उन्हें अमेरिका में राजनीतिक शरण मिली है. उनके अनुसार पहले उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया था और पूरे मामले की पड़ताल के बाद शरण दी गई. आखिर किन बातों की पड़ताल के बाद अमेरिका ने सैयद शुजा को शरण दी?

4- सैयद शुजा ने मोदी सरकार पर 2014 के लोकसभा चुनावों में ईवीएम को हैक कर के जीतने का गंभीर आरोप लगाया है, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं दिया. ऐसे तो कांग्रेस आए दिन भाजपा पर ऐसे आरोप लगाती रहती है तो फिर शुजा के आरोपों को सच कैसे मानें?

5- आरोप ये भी हैं कि आम आदमी पार्टी ने उनसे मुलाकात करनी चाही थी और जानना चाहा था कि ईवीएम कैसे हैक होती है. क्या वाकई ऐसा हुआ था? अगर हां तो इसका कोई प्रमाण क्यों नहीं है?

6- सबसे बड़ा और सबसे अहम सवाल ये है कि क्या जिस शख्स ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ये सारे आरोप लगाए हैं वह सैयद शुजा ही था या कोई और था? दरअसल, सैयद शुजा की 10-15 आइडेंटिटी हैं, ऐसे में इस बात की भी पुष्टि नहीं हो पा रही है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करने वाला शख्स सैयद शुजा ही था.

7- सैयद शुजा ने दावा किया कि ब्रेग्जिट वोट में भी गड़बड़ी की गई, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि ब्रेग्जिट ईवीएम का इस्तेमाल ही नहीं करता. वहां वोटिंग बैलेट से होती है, तो फिर शुजा ने ब्रेग्जिट का नाम क्यों लिया?

इस कॉन्फ्रेंस में सभी राजनीतिक पार्टियों को न्योता दिया गया था, लेकिन कोई भी वहां नहीं पहुंचा. एक कपिल सिब्बल वहां मौजूद थे, जिन्होंने भी कांग्रेस को इस मामले से दूर रखते हुए ये कह दिया कि उन्हें निजी तौर पर न्योता दिया गया था. सिब्बल ने इस मामले में खुद को पाक साफ बचाते हुए कहा है कि इस मामले की जांच होनी चाहिए. वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग ने भी इस मामले की पुलिस में शिकायत कर दी है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि सैयद शुजा के दावों में से किसी के भी कोई प्रमाण मिलते हैं या फिर खुद सैयद शुजा को ढूंढ़ना भी टेढ़ी खीर साबित होगा. पहले तो ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठा, लेकिन अब ये सवाल उठाने वाले की विश्वसनीयता ही खतरे में पड़ गई है.

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