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Updated: 07 फरवरी, 2019 02:53 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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यूं तो रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ भ्रष्‍टाचार के आरोपों की जांच यूपीए के दौर में ही शुरू हो गई थी, जिसे नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनाया था. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव पास आते-अाते पहले रॉबर्ट वाड्रा पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापे तेज हो गए हैं, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. हाल ही में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पार्टी का महासचिव नियुक्त किया है और दूसरी ओर रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ जांच तेज हो गई है. बुधवार को ही मनी लॉन्डरिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा से 5 घंटे तक पूछताछ की गई. बताया जा रहा है कि उनसे ईडी ने करीब 40 सवाल पूछे थे. यहां एक बात बेहद अहम ये है कि खुद प्रियंका गांधी ही उन्हें ईडी के दफ्तर तक छोड़ने गई थीं और मीडिया से कहा कि वह रॉबर्ट वाड्रा के साथ हैं.

एक ओर रॉबर्ट वाड्रा को पूरे गांधी परिवार का साथ है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इस मौके को भुनाने में लगी हुई है. रॉबर्ट वाड्रा पर लगे आरोपों के चलते उनके साथ-साथ पूरी कांग्रेस को लपेटे में लिया जा रहा है. भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने तो ये भी पूछ लिया है कि आखिर एक 'रोड-पति' करोड़पति कैसे बन गया? रॉबर्ट वाड्रा पर लगे आरोपों के चलते भाजपा और कांग्रेस में सियासी बयानबाजी खूब हो रही है. आइए जानते हैं किन आरोपों के चलते रॉबर्ट वाड्रा पर ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है.

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बीकानेर लैंड डील मामला

सितंबर 2015 में ईडी ने मनी लॉन्डरिंग केस दर्ज करते हुए आरोप लगाया था कि रॉबर्ट वाड्रा की बीकानेर के कोलायत में स्थित स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी कंपनी ने उस जमीन का अधिग्रहण किया है जो गरीब गांव वालों के लिए थी. रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप है कि उन्होंने 69.55 हेक्टेयर की इस जमीन को काफी सस्ते में खरीदा और करीब 7 गुना फायदे के साथ 5.15 करोड़ रुपए में Allegenery Finlease कंपनी को बेच दिया. ईडी की जांच के अनुसार Allegenery Finlease कंपनी भी फर्जी कंपनी पाई गई है, जिसका ना तो कोई बिजनेस है ना ही शेयरहोल्डर्स हैं.

जमीन को गलत तरीके से निजी क्षेत्र को देने के चलते राजस्थान सरकार इस सौदे को पहले ही रद्द कर चुकी है. इसके अलावा ईडी ने इनकम टैक्स सेटलमेंट कमीशन से भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड से जुड़ी कार्यवाही का ब्यौरा भी मांगा है. आपको बता दें कि भूषण पावर वही कपंनी है, जिसने Allegenery Finlease को जमीन खरीदने के लिए लोन दिया था. यूं तो इस मामले में आरोपियों में वाड्रा का नाम नहीं है, लेकिन उनकी कंपनी स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी का नाम है, जिसके जरिए जमीन खरीदी और बाद में बेची थी. इसी वजह से इस जांच में वाड्रा ही मुख्य हैं.

यूके में प्रॉपर्टी का केस

ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ कई प्रॉपर्टी खरीदने के मामले में मनी लॉन्डरिंग का केस दर्ज किया है. इनमें लंदन के 12, ब्रायंसटन स्क्वायर में स्थित करीब 17.77 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी के अलावा 37.42 करोड़ रुपए और 46.77 करोड़ रुपए की दो अन्य प्रॉपर्टी भी शामिल हैं. आरोप है कि ये सभी रॉबर्ट वाड्रा के नाम पर रजिस्टर हैं. इन प्रॉपर्टीज को खरीदने में यूपीए सरकार के दौरान हुई एक पेट्रोलियम डील से मिले पैसों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है. ईडी उस डील को लेकर भी अलग से जांच कर रही है.

संजय भंडारी की मिली मदद

इस मामले में संजय भंडारी का नाम भी सामने आ रहा है, जो एक हथियार कारोबारी है. लंदन की 12, ब्रायंसटन स्थिति जिस प्रॉपर्टी या यूं कहें कि बंगले की बात हो रही है, वह संजय भंडारी ने ही वाड्रा की कंपनी के नाम किया था. भंडारी ने इस बंगले को करीब 17.77 करोड़ रुपए में खरीदा था और फिर उसकी मरम्मत और सजावट में करीब 61 लाख रुपए खर्च हुए. उसके बाद खरीद दाम पर ही इस प्रॉपर्टी को रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइड हॉस्पिटैलिटी के नाम कर दिया गया. संजय भंडारी के खिलाफ भी ईडी और आयकर विभाग जांच कर रहा है.

मनोज अरोड़ा के जरिए की डील

भंडारी के अलावा इस मामले में मनोज अरोड़ा नाम के एक शख्स का जिक्र भी हो रहा है. ईडी के अनुसार संजय अरोड़ के जरिए ही रॉबर्ट वाड्रा ने इन प्रॉपर्टीज की डील को अंजाम दिया था, जो स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी कंपनी का ही एक कर्मचारी था. वहीं इस मामले में मनोज अरोड़ा का कहना है कि ईडी जानबूझकर उन पर दबाव बना रहा है कि वह रॉबर्ट वाड्रा को इस मामले में फंसाएं.

2009 पेट्रोलियम डील केस

ईडी के अनुसार 2009 में यूपीए की सरकार के दौरान जो पेट्रोलियम डील हुई थी, उसमें रॉबर्ट वाड्रा और उनके साथियों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया. भाजपा ने भी आरोप लगाए हैं कि यूपीए सरकार के दौरान हुई पेट्रोलियम और डिफेंस डील से रॉबर्ट वाड्रा ने ढेर सारे पैसे कमाए और इन्हीं पैसों से लंदन में करोड़ों की प्रॉपर्टी खरीदी गई. ईडी इसी प्रॉपर्टी की जांच कर रही है क्योंकि उन्हें शक है कि इनके जरिए कालेधन को सफेद किया गया.

ईडी के सूत्र भी इस बात का दावा करते हैं कि लंदन में स्थित प्रॉपर्टी वाड्रा को पेट्रोलियम डील से हुए फायदे के पैसों से ही खरीदी गई है. इन पैसों को Santech International कंपनी में ट्रांसफर किया गया, जो यूएई की कंपनी है और वहीं से कंट्रोल होती है. इसके बाद Santech International ने एक प्राइवेट होल्डर Vortex से लंदन के '12, ब्रायंसटन स्क्वायर' में प्रॉपर्टी खरीद ली. इसके बाद Vortex के शेयर 'स्काईलाइट इन्वेस्टमेंट' कंपनी में ट्रांसफर कर दिए गए, जो एक एनआरआई कारोबारी सी थंपी के नाम पर रजिस्टर थी.

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