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Updated: 03 मई, 2020 02:51 PM
मशाहिद अब्बास
मशाहिद अब्बास
  @masahid.abbas
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लॉकडाउन (Lockdown) 1.0 और 2.0 के बाद अब लॅाकडाउन 3.0 का भी ऐलान हो चुका है. लॉकडाउन (Lockdown 3) का यह तीसरा चरण 4 मई से 17 मई तक जारी रहेगा. पहली बार 21 दिनों के लिए लॉकडाउन 25 मार्च से लागू हुआ. फिर 19 दिन के लिए और अब 14 दिनों के लिए इसे बढ़ा दिया गया है. तीसरे चरण के खत्म होने पर देश में लॉकडाउन 57 दिनों का हो जाएगा. इसके पहले के दोनों लॅाकडाउन में किसी भी तरह की कोई छूट नहीं दी गई थी लेकिन लॅाकडाउन के तीसरे चरण में कई तरह की ढ़ील दी गई हैं. भारत (India ) में कोरोना वायरस (Coronavirus) का आगमन हुआ तब से ही चिंता बढ़ गई थी, जैसे ही संक्रमित मरीजों की संख्या में वृद्धि हुयी तो देश में लॅाकडाउन का ऐलान कर दिया गया. देश में पहली बार लॅाकडाउन का ऐलान हुआ तो जो जहां था वहीं थम गया. रेलवे, हवाई जहाज और बस सेवाएं सब कुछ बंद कर दिया गया. कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं में नौकरी कर रहे लोगों को छोड़कर किसी को भी घर से निकलने की अनुमति नहीं दी गई.

कोरोना वायरस के संदिग्धों को ढूंढ कर उन्हें तेज़ी के साथ क्वारंटाइन किया गया और जो लोग भी विदेश या किसी अन्य राज्य से लौटे उन्हें भी अलग कर दिया गया. टेस्टिंग रफ्तार बढ़ाई जाने लगी. देश के कई लैबों को जांच करने की अनुमति दी गई जिससे टेस्ट करने की रफ्तार बहुत बढ़ गई. जब टेस्ट की रफ्तार बढ़ी तो बड़ी संख्या में कोरोना के संक्रमित लोगों की पहचान होने लगी. मरीजों की बढ़ती तादाद ने ही स्पष्ट कर दिया था कि लॅाकडाउन 2.0 का ऐलान किया जा सकता है. हुआ भी वही, सरकार ने संक्रमितों की संख्या देखते हुए लॅाकडाउन 2.0 का ऐलान कर दिया.

लाकडाउन के पहले चरण को देखते हुए लॅाकडाउन 2.0 में भी कुछ खास ढ़ील नहीं दी गई थी. हालांकि सरकार के सामने अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौती भी थी लेकिन सरकार ने ढ़िलाई नहीं बरती. लॅाकडाउन 2.0 में कुछ अन्य सेवाओं को भी छूट दी गई जिसमें सरकारी दफ्तरों को 33 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम करने की भी अनुमती दी गई. इसके अलावा यात्राओं पर अभी भी प्रतिबंध लगा रहा.

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देश के सभी शहरों में टेस्टिंग की रफ्तार बढ़ाई गई जिससे कोरोना के संक्रमित मरीजों की पहचान होती रही. इन्हीं कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या पर देश के शहरों को कुछ ज़ोनों में तब्दील कर दिया गया. ये शहर रेड, आरेंज ओर ग्रीन जोन में रखे गए. लॅाकडाउन 3.0 में इसी जोन को आधार बनाकर कुछ ढ़िलाई दी गई है ताकि अर्थव्यवस्था पर भी एक बहुत बड़ा संकट न आने पाए. इसके साथ ही अन्य राज्यों में फंसे हुए लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए कुछ विशेष ट्रेनों को भी मंजूरी दी गई है.

अब सवाल उठता है कि भारत कोरोना वायरस से निपटने के लिए आने वाले दिनों में कितना तैयार है. लॅाकडाउन के ऐलान के बाद से ही अन्य राज्यों में फंसे लोग अपने घरों को जाना चाहते थे, अब जब सरकार उनको घरों तक पहुंचाना चाहती है तो एक बहुत बड़ा संकट पैदा होते नज़र आ रहा है. अपने राज्यों में लौटने वालों की संख्या अनुमान से भी बहुत अधिक है अकेले बिहार राज्य में घर वापसी के लिए पिछले 2 दिनों में 28 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा रखा है.

जानकारों का मानना है कि पूरे देश से 35-40 लाख बिहार के लोग अपने घरों को लौटना चाहते हैं. ये अकेले बिहार का आंकड़ा है पूरे देश में फंसे हुए अन्य लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने की संख्या क्या होगी इस बात का अंदाजा भी किसी को नहीं है. सरकारों की मानें तो उनकी प्राथमिकता पहले छात्रों और फिर उन लोगों को लाने की है जो कैंपों में शरण लिए हुए हैं.

लेकिन सच्चाई तो यह भी है कि पिछले दो महीनों से देश में सबकुछ ठप पड़ा है ऐसे में दिक्कतें उन लोगों को भी हो रही है जो अभी भी किराए के मकान में ठहरे हुए हैं, बिना किसी आमदनी के उनका वहां टिकना भी अब मुश्किल हो रहा है. इसीलिए तमाम लोग अब अपने घरों को लौटना चाहते हैं. सरकार के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है देश के अलग-अलग राज्यों में फंसे लोगों को वह किस तरह पहुंचाने का कार्य करेगी, सोशल डिस्टेंसिंग का कितना पालन हो पाएगा और उनकी जांच कैसे करेगी.

इसके अलावा सरकार के पास चुनौती यह भी है कि वह कैसे ग्रीन जोन के शहरों को बचाकर रखेगी. अन्य प्रदेश व शहरों से आने जाने वाले लोगों को कैसे अलग रखा जाएगा. सरकार पर अब दोहरी मार पड़ रही है. कोरोना के साथ-साथ अर्थव्यवस्था भी खूब परेशान कर रही है. लॅाकडाउन ने कोरोना की रफ्तार को जरूर कम किया है लेकिन बहुत हद तक राहत नहीं मिली है. सरकार का कहना है कि कोरोना वायरस की पहले जो संख्या हर 3 दिन पर दोगुनी हो रही थी वह अब 11 दिन पर दोगुनी हो रही है इससे जाहिर है कि लॅाकडाउन अपना असर दिखा रहा है.

सरकार के इस दावे से भले राहत मिल जाए लेकिन कोरोना वायरस वक्त के साथ-साथ चिंता भी बढ़ा रहा है. चुनौतियां हर दिन लगातार बढ़ रही हैं जिससे पार पाना बिल्कुल भी आसान नज़र नहीं आ रहा है. ये बेहद सख्त इम्तेहान की घड़ी है राज्य सरकारों के साथ-साथ केन्द्र सरकार को भी कड़ी मेहनत करनी होगी और एक दूसरे के साथ मिलकर हर चुनौती का कड़ा मुकाबला करना होगा.

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लेखक

मशाहिद अब्बास मशाहिद अब्बास @masahid.abbas

लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं

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