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Updated: 22 अगस्त, 2019 10:00 PM
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पी. चिदंबरम केस में कांग्रेस एक साथ कई मोर्चों पर जूझ रही है. कानूनी लड़ाई वो सुप्रीम कोर्ट में लड़ रही है. राजनीतिक लड़ाई सड़क पर लड़ रही है और साथ ही साथ, मीडिया के जरिये केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए भी संघर्ष कर रही है.

तमाम कोशिशों के बाद भी कांग्रेस के वकीलों की फौज पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम को गिरफ्तार होने से नहीं बचा पायी - और इसी बात को लेकर कांग्रेस चौतरफा खफा लग रही है. कपिल सिब्बल से लेकर रणदीप सुरजेवाला तक सभी कांग्रेस नेता लोगों को यही समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि आज जो उनके साथ हो रहा है - कल को किसी के भी साथ भी हो सकता है. मुश्किल तो ये है कि कोई ये समझने को तैयार ही नहीं है कि पी. चिदंबरम बेकसूर हैं.

हैरानी की बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को घेरने की कोशिश में कांग्रेस नेता न्यायपालिका को भी बख्शने को तैयार नहीं हैं.

वैसे कांग्रेस को सबसे ज्यादा शिकायत किससे है?

हैरान होने की जरूरत नहीं, अगर पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी के मामले की अंदरूनी जांच का काम कांग्रेस नेतृत्व एके एंटनी को सौंप दे. एंटनी कमेटियों का सबसे चर्चित काम कांग्रेस की चुनावी हारों की समीक्षा ही रही है. जांच का कोई नतीजा न निकलना होता है, न निकलता है. पहले तो हार की जिम्मेदारी मढ़ने के लिए बलि के किसी बकरे की तलाश होती है, ऐसा न हो पाने की स्थिति में सामूहिक जिम्मेदारी मान ली जाती है.

ताजा मामले में कांग्रेस नेता चिदंबरम को पीड़ित, प्रताड़ित और ऐसे व्यक्ति के तौर पर पेश कर रहे हैं जिसकी फरियाद किसी भी मंच पर नहीं सुनी जा रही है.

1. दिल्ली हाई कोर्ट से नाराजगी : ये ठीक है कि पी. चिदंबरम कोई मामूली आदमी नहीं हैं. लंबे अरसे से राजनीति में हैं और केंद्र सरकार में वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय संभाल चुके हैं. साथ ही सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील भी हैं - लेकिन हकीकत तो ये भी है ही कि फिलहाल वो एक आरोपी हैं. आरोपी तो आरोपी ही होता है. कानून सबके लिए बराबर है. फिर क्या सीनियर और सम्मानित और क्या जूनियर और आम इंसान. दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी तो ये रही है कि चिदंबरम INX मीडिया केस के 'किंगपिन' यानी मास्टरमाइंड हैं - और इसी वजह से उन्हें आगे के लिए अग्रिम जमानत नहीं मिल पायी, जबकि उसी अदालत से वो 22 बार अपनी अग्रिम जमानत बढ़वाते रहे.

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल को चिदंबरम के केस में कई वाकये नागवार गुजरे हैं और यही वजह है कि वो एक ही झटके में मोदी सरकार के साथ साथ न्यायपालिका को भी कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. सिब्बल ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज करने वाले हाईकोर्ट के जज पर भी उंगली उठायी है.

हाई कोर्ट के जज के बारे में कपिल सिब्बल शिकायती भरे लहजे में कहते हैं, 'उन्होंने 25 जनवरी से ही फैसला सुरक्षित रखा था और सात महीने बाद जब रिटायरमेंट के दो दिन बचे तो जजमेंट दे दिया.'

chidambaram lawyers at special courtCBI स्पेशल कोर्ट ने कपिल सिब्बल सहित चिदंबरम के सभी वकीलों की दलील को दरकिनार कर 5 दिन की रिमांड पर भेज दिया.

सिब्बल को तो यहां तक लगता है कि हाईकोर्ट ने ऐसा रवैया अख्तियार किया ताकि चिदंबरम के लिए आगे अपील तक न की जा सके. हाई कोर्ट के फैसले की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कपिल सिब्बल ने कहा, '3.25 बजे फैसला सुनाया गया. जजमेंट के बाद हमने अग्रिम जमानत की याचिका पेश की तो इसे शाम चार बजे रिजेक्ट कर दिया गया ताकि हम सुप्रीम कोर्ट भी न जा सकें.'

ये तो रही दिल्ली हाईकोर्ट के जज को लेकर कपिल सिब्बल का नजरिया - सुप्रीम कोर्ट से भी कपिल सिब्बल उतने ही खफा लग रहे हैं. केस को लेकर कपिल सिब्बल की बातें तो यही समझा रही हैं.

2. सुप्रीम कोर्ट से भी नाराजगी कम नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट की ही तरह कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में चिदंबरम केस में हुए व्यवहार से नाराज हैं. सिब्बल ने चिदंबरम के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई गतिविधियों पर भी सवाल खड़े किये हैं. कपिल सिब्बल ये समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके मुवक्किल के साथ हर कदम पर पक्षपात हो रहा है - और किसी भी मंच पर उनकी सुनवाई नहीं हुई है.

कपिल सिब्बल की सुनिये, 'हमें कहा गया कि CJI इस पर फैसला लेंगे, जबकि सुप्रीम कोर्ट हैंडबुक के मुताबिक, चीफ जस्टिस संवैधानिक बेंच में व्यस्त हैं. ऐसे में नियम ये है कि दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश सुनवाई करें... हमें अपना अधिकार नहीं मिला...'

कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से भी बेहद खफा नजर आये - 'रजिस्ट्रार ने बताया कि चीफ जस्टिस शाम 4 बजे इस पर सुनवाई करेंगे. 4 बजे सुनवाई का समय ही नहीं बचता है.'

3. सिस्टम की फिक्र जताने की कोशिश : कपिल सिब्बल ये भी समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये मामला सिर्फ चिदंबरम का नहीं है. ये मामला सिस्टम के काम करने से जुड़ा है. कपिल सिब्बल का कहना है, 'ये सिर्फ चिदंबरम का मामला नहीं है. ये सिस्टम से जुड़ा मसला है. कानून को अपना काम करते रहना चाहिए... इसकी कोई चिंता नहीं है. चिंता की बात ये है कि सिस्टम को ऐसे तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है.'

न गिरफ्तारी से बचा सके, न सीबीआई रिमांड से

टीवी बहसों में बीजेपी नेताओं को ये समझाने में जरा भी मुश्किल नहीं हो रही कि पी. चिदंबरम को पास कानूनी बचाव के सर्वोत्तम संसाधन हासिल हैं. देश के दर्जन भर बेहतरीन वकीलों की टीम ने पी. चिदंबरम को बचाने में दिन रात एक कर रखा है. वकीलों में ज्यादातर कांग्रेस नेता ही हैं जो वकालत से ही राजनीति में आये हैं और मौका मिलते ही अपने मुवक्किलों की पैरवी में सुप्रीम कोर्ट में देखे जाते रहे हैं.

जब स्पेशल कोर्ट में सीबीआई ने चिदंबरम को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की अर्जी दी तो बचाव पक्ष के वकीलों ने जोरदार विरोध किया. कपिल सिब्बल लगातार समझाने की कोशिश करते रहे कि चिदंबरम को रिमांड पर भेजने की कतई जरूरत नहीं है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बचाव पक्ष की दलीलों को काटते रहे. तुषार मेहता का कहना रहा कि जांच तभी संभव हो पाएगा जब चिदंबरम के पास से जानकारी ली जा सकेगी.

1. कपिल सिब्बल ने विशेष अदालत को बताया कि सौदे को जिस FIPB के बोर्ड ने मंजूरी दी थी उसमें 6 सेक्रेटरी केंद्र सरकार के थे, जिनमें से कुछ आरबीआई गवर्नर बन गए हैं, नीति आयोग के चेयरमैन भी बने हैं - लेकिन किसी को भी कभी गिरफ्तार नहीं किया गया.

2. सिब्बल ने कहा कि सीबीआई ने जो कुछ कहा है उसे 'अकाट्य सत्य' के तौर पर नहीं लिया जा सकता - चिदंबरम से 12 सवाल पूछे गये और वो उनमें से 6 का जवाब पहले ही दे चुके हैं.

3. 'जांचकर्ता नहीं जानते कि क्या पूछना है और उनके पास सवाल भी तैयार नहीं हैं. बुधवार रात में गिरफ्तारी के बाद चिदंबरम से पूछताछ गुरुवार की सुबह 11 बजे की गई... रात को सोने भी नहीं दिया गया.'

4. सिब्बल की दलील रही, 'गुनाह कबूल न करने का मतलब ये नहीं होता कि चिदंबरम सहयोग नहीं कर रहे हैं. जरूरी नहीं कि चिदंबरम हर बात में हां बोलें. अगर चिदंबरम असहयोग कर रहे थे तो हाई कोर्ट के सामने ये बातें क्यों नहीं कहीं गईं. जब भी सीबीआई और ED ने चिदंबरम को बुलाया वो हाजिर भी हुए.

कपिल सिब्बल की सारी दलीलें बेकार गयीं और कोर्ट ने सीबीआई की 5 दिन की रिमांड को मंजूर कर लिया. हालांकि, कोर्ट ने साफ तौर पर सीबीआई को कुछ खास हिदायतें भी दी हैं.

1. सीबीआई इस बात का पूरा ख्याल रखे कि आरोपी व्यक्ति की 'पर्सनल डिग्निटी' को किसी भी सूरत में कोई नुकसान न पहुंचे.

2. रिमांड के दौरान हर 48 घंटे बाद मेडिकल जांच होनी चाहिये.

3. रिमांड की अवधि के दौरार रोजाना आरोपी के परिवारवालों और वकीलों को 30 मिनट मुलाकात का वक्त दिया जाये.

कपिल सिब्बल न तो अदालत को समझा पाये न बाकी रणदीप सुरजेवाला मीडिया के जरिये लोगों को समझाने में सफल हो पा रहे हैं कि पी. चिदंबरम को इंसाफ पाने की राह में रोड़े अटकाये जा रहे हैं. तमाम बातों के बावजूद ये समझना भी मुश्किल हो रहा है कि कांग्रेस नेता ज्यादा खफा मोदी सरकार से हैं, या सुप्रीम कोर्ट के जजों से - या फिर देश की जनता से जिसने आम चुनाव में वोट देकर नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बना दिया है?

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