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Updated: 23 अप्रिल, 2019 08:18 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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लोकसभा चुनावों के इस दौर में राहुल गांधी कहीं भी 'चौकीदार चोर है' कहना नहीं भूलते. लेकिन 10 अप्रैल को उन्हें जो मौका मिला था, उसे भुनाने के चक्कर में 'उत्तेजनावश' राहुल गांधी अपना ही हाथ जला बैठे. दरअसल, 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर राफेल डील की दोबारा सुनवाई को मंजूरी दी थी. इसी बीच राहुल गांधी की मुलाकात मीडिया से हुई और वह बोल बैठे कि सुप्रीम कोर्ट भी मान चुका है कि 'चौकीदार चोर है'. उनका ये बयान मधुमक्खी के छत्ते में हाथ देने जैसा था, जिसका परिणाम अब वो भुगत रहे हैं.

पीएम मोदी किसी भी मौके पर सेना की बात करना नहीं भूलते. राहुल गांधी ने इसे भी भुनाना चाहा और भाजपा पर सेना के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगा दिया. वैसे सेना के नाम पर राजनीति करना गलत है और पीएम मोदी को भी हम गलत ही मानते, बशर्ते राहुल गांधी भी वही काम नहीं करते. यानी घूम-घूम पर राहुल गांधी दूसरों को जो ज्ञान बांट रहे हैं, उस पर खुद अमल नहीं कर रहे. 5 साल विपक्ष में रहकर राहुल गांधी ने सेना और राफेल डील जैसे दो अहम मुद्दे भाजपा के खिलाफ हथियार बनाकर इस्तेमाल किए, लेकिन ये दोनों ही मुद्दे दोधारी तलवार निकले, जिनसे वह खुद ही घायल हो रहे हैं.

कांग्रेस, राहुल गांधी, राफेल डील, लोकसभा चुनाव 2019लोग कहते हैं कि 'तुझे कोर्ट में घसीटूंगा', राहुल गांधी ने तो सुप्रीम कोर्ट को ही अपने भाषण में घसीट लिया.

सिर्फ राहुल गांधी की माफी से संतुष्ट नहीं है सुप्रीम कोर्ट

'चौकीदार चोर है' का नारा सुप्रीम कोर्ट के संदर्भ में देना राहुल गांधी को कितना भारी पड़ा है, अभी शायद इसका अंदाजा राहुल गांधी को भी ना हो. उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है. सोमवार को ही कोर्ट द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर राहुल गांधी की ओर से कहा गया कि उन्होंने चुनावी उत्तेजना में बहकर ऐसा कह दिया था, जिसके लिए उन्होंने माफी भी मांगी. लेकिन ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट सिर्फ माफी से संतुष्ट नहीं है. तभी तो, मंगलवार को हुई सुनवाई में राहुल गांधी को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी कर दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी.

सेना पर राहुल गांधी से बड़ी राजनीति कौन करेगा?

जब-जब पीएम मोदी सेना का जिक्र करते हैं तो राहुल गांधी ये जरूर कहते हैं कि मोदी सेना के नाम पर राजनीति कर रहे हैं. बालाकोट में हमले का श्रेय जब भी पीएम मोदी लेना चाहते हैं तो राहुल गांधी राजनीति का आरोप लगाते हैं. राजनीति करनी भी नहीं चाहिए सेना के नाम पर, लेकिन राहुल गांधी भी दूध के धुले नहीं हैं. जब कांग्रेस का मेनिफेस्टो देखेंगे तो आपको यकीन हो जाएगा कि सेना के नाम पर राजनीति मोदी से अधिक राहुल कर रहे हैं.

कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में लिखा है कि 'वह 'जय जवान, जय किसान के नारे से प्रेरित होकर, कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में देश ने पाकिस्तान पर 1965 के युद्ध में विजय प्राप्त की, 1971 के युद्ध में हमने पाकिस्तान को निर्णयात्मक रूप से पराजित करके बांग्लादेश को मुक्त करवाया.' अब इसे सेना के नाम पर राजनीति नहीं तो फिर क्या कहेंगे. मेनिफेस्टो में लिख कर सेना के काम को अपना कहना राजनीति नहीं तो फिर क्या है. मेनिफेस्टो में तो ये भी नहीं लिखा कि कांग्रेस के नेतृत्व में सेना ने ये सब किया, उल्टा सारा श्रेय खुद को ही दे दिया है माने कांग्रेस के नेता ही सीमा पर जाकर लड़े हों.

देखा जाए तो राहुल गांधी का मोदी के खिलाफ खेला गया हर दाव उल्टा पड़ जाता है. 'चौकीदार चोर है' का कैंपेन उन्होंने शुरू किया, जिससे बेशक भाजपा की बदनामी होना शुरू हुई. लोगों को राफेल डील में कुछ गड़बड़ी की आशंका दिखने लगी. लेकिन भाजपा ने 'मैं भी चौकीदार' अभियान चलाकर राहुल गांधी की मेहनत पर पानी फेर दिया. जो थोड़ी संभावनाएं बची थीं, 'चौकीदार चोर है' कहने के चक्कर में राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ लेकर उनका भी गला घोंट दिया. राहुल गांधी को ये समझना चाहिए था कि चुनावी भाषण देते समय किसी लीगल मैटर में हाथ नहीं डालना चाहिए. खासकर तब, जब बात सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी हो. अक्सर लोग कहते हैं कि 'तुझे कोर्ट में घसीटूंगा', राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट को ही अपने भाषण में घसीट लिया.

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