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Updated: 19 अप्रिल, 2019 06:24 PM
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शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी नेतृत्व को घेरने का कोई मौका नहीं चूकना चाहते. जब बीजेपी में रहे तब तो आक्रामक रहे ही, अब तो शॉटगन ने बीजेपी के खिलाफ डबल बैरल बंदूक ही तान दी है - बिहार में भी और यूपी में भी. बिहार में पटना साहिब सीट पर और यूपी में लखनऊ संसदीय सीट से.

लखनऊ में बीजेपी के खिलाफ शत्रुघ्न सिन्हा के हल्ला बोल अभियान में आचार्य प्रमोद कृष्णम आड़े आ रहे हैं. हो ये रहा है कि शत्रुघ्न सिन्हा का पूनम सिन्हा के लिए प्रचार उनकी अपनी ही नयी पार्टी कांग्रेस के खिलाफ जा रहा है. कांग्रेस ने लखनऊ से राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय आचार्य प्रमोद कृष्णम को उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी की ओर से लखनऊ से केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह चुनाव लड़ रहे हैं.

फेमिली पॉलिटिक्स को लेकर बीजेपी के निशाने पर रहने वाली कांग्रेस में शत्रुघ्न सिन्हा ने नयी परंपरा शुरू कर दी है - 'फेमिली फर्स्ट'.

परिवार पहले, पार्टी बाद में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमाम बीजेपी नेता कांग्रेस के बारे में हर वक्त यही समझाते रहते हैं कि वहां परिवार पहले है - और पार्टी बाद में. अब इससे दिलचस्प बात क्या होगी कि शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस में पहुंच कर खुद भी यही समझाने लगे हैं.

बिहार की पटना साहिब सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी उम्मीदवार और पुराने साथी रविशंकर प्रसाद के खिलाफ मोर्चा संभाल चुके हैं. यूपी में उनकी पत्नी पूनम सिन्हा बीजेपी पर हमले का मौका मुहैया करा रही हैं. पूनम सिन्हा के नामांकन और रोड शो में हिस्सा लेने लखनऊ पहुंचे शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने पसंदीदा शगल बीजेपी को कोसना चालू रखा.

जब मीडिया के जरिये शत्रुघ्न सिन्हा तक कांग्रेस प्रत्याशी आचार्य प्रमोद कृष्णम की शिकायत पहुंची तो उनके लिए जवाब देना जरूरी हो गया. कांग्रेस उम्मीदवार आचार्य प्रमोद कृष्ण ने शत्रुघ्न सिन्हा को राजनीतिक धर्म की याद दिलायी थी. शत्रुघ्न सिन्हा ने भी साफ साफ कह दिया कि उनके लिए पारिवारिक धर्म पहले आता है - बाकी सब बाद में.

हालांकि, पहले एक इंटरव्यू में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा था कि चुनाव प्रचार के लिए उन्हें शत्रुघ्न सिन्हा की कोई जरूरत नहीं है. आचार्य प्रमोद कृष्णम का कहना रहा कि वो लखनऊ के लोगों पर किसी से भी ज्यादा भरोसा करते हैं. लगे हाथ आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ये भी कह दिया था कि अगर शत्रुघ्न सिन्हा को उनकी जरूरत हो तो वो उनके लिए चुनाव प्रचार करने को तैयार हैं.

आचार्य प्रमोद कृष्णम का जवाब देते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, 'ये मेरा कर्तव्य है कि मैं परिवार के मुखिया और एक पति के रूप में अपने परिवार का समर्थन करूं.'

shatrughn, dimple, poonam, mulayamसभी जगह सब कोई साथ साथ है - क्योंकि परिवार पहले आता है!

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि वो चुनाव के बाद भी पूरे परिवार के साथ लखनऊ की जनता के बीच रहेंगे. सवाल ये है कि फिर पटना साहिब के लिए कहां से वक्त निकालेंगे? वैसे सिन्हा परिवार के लिए अच्छी बात ये है कि लखनऊ में 6 मई को और पटना साहिब में 19 मई को वोटिंग होनी.

राहुल गांधी के साथ अपनी तस्वीर मीडिया में आने के कई दिन बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस का हाथ थामा. कांग्रेस ज्वाइन करते वक्त भी शत्रुघ्न सिन्हा ने क्रेडिट चारा घोटाले में जेल में सजा काट रहे आरजेडी नेता लालू प्रसाद को दिया. शत्रुघ्न सिन्हा ने बताया की अपने पारिवारिक मित्र लालू प्रसाद की ही सलाह पर और परमिशन लेकर वो कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं. अब सुनने में आ रहा है कि शत्रुघ्न सिन्हा ने लखनऊ में पत्नी पूनम सिन्हा के चुनाव प्रचार के लिए कांग्रेस आलाकमान से परमिशन ले रखी है.

मानना पड़ेगा फेमिली पॉलिटिक्स के लिए मशहूर कांग्रेस पार्टी में रह कर शत्रुघ्न सिन्हा का परंपरा को नये तरीके से आगे बढ़ाना - फेमिली फर्स्ट!

राजनीतिक धर्म या गठबंधन धर्म

ये तो साफ है कि शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी नेताओं और नीतियों की बुराई करते हुए पूनम सिन्हा के लिए वोट मांगेंगे, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार आचार्य प्रमोद कृष्णम के खिलाफ वो क्या रूख अख्तियार करेंगे?

क्या वही स्टैंड जो राहुल गांधी यूपी में अखिलेश यादव और मायावती के खिलाफ बनाये हुए हैं? क्या वही स्टैंड जो राहुल गांधी वायनाड में लेफ्ट नेताओं के प्रति अपनाये हुए हैं. अखिलेश और मायावती के लिए तो राहुल गांधी लगातार सम्मान भाव प्रकट करते आये हैं - और वायनाड में शपथ ले चुके हैं कि वो लेफ्ट नेताओं के खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे.

जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के बीच चुनावी गठबंधन हुआ है, लेकिन कुछ सीटों पर दोनों पार्टियां आपसी सहमति से फ्रेंडली मैच भी खेल रही हैं. ये बातें दोनों दलों के नेता मीडिया के सामने एक साथ कह भी चुके हैं.

क्या लखनऊ में भी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के साथ ये फ्रेंडली मैच होने जा रहा है?

पहले तो अखिलेश यादव कहा करते थे कि राहुल गांधी भी गठबंधन के साथ ही हैं. सभी लोग मिल कर चुनाव लड़ रहे हैं. भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद रावण से मिलने के बाद मायावती आपे से बाहर हो गयीं - और ऐलान कर दिया कि कांग्रेस से यूपी ही नहीं किसी भी सूबे में कोई गठबंधन नहीं होने वाला. अखिलेश यादव उसके बाद तो चुप ही हो गये.

अब जबकि शत्रुघ्न सिन्हा के कांग्रेस में जाने के बाद पूनम सिन्हा ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर नया नाता जोड़ दिया है - देखते हैं आगे चल कर ये रिश्ता क्या कहलाता है?

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