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Updated: 29 जून, 2020 01:27 PM
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भारत और चीन सीमा विवाद के कारण अनजानी आशंकाओं से लोगों के मन में तरह-तरह की बातें चल रही हैं. चीन लद्दाख सीमा से सटे अपने इलाकों में लगातार सैन्य टुकड़ियां बना रहा है और दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. विवाद तो लंबे समय से चल रहा था, लेकिन दो हफ्ते पहले ईस्टर्न लद्दाख स्थित गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों की हिंसक झड़प के बाद स्थिति ज्यादा तनावपूर्ण है. हालांकि झड़प के बाद बीते 22 जून को दोनों देशों के मध्य कमांडर स्तर की बातचीत जरूर हुई और चीन ने स्वीकार किया कि विवादित स्थल पर गैरजरूरी पेट्रोलिंग या अन्य गतिविधियां नहीं होंगी, लेकिन जब इस मामले की तह में जाते हैं तो पता चलता है कि चीन लद्दाख सीमा के पास अपनी सेना ला रहा है. आखिर चीन का मकसद क्या है? आखिर चीन ऐसा क्यों कर रहा है और इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो रही है.

बीते 15 जून को लद्दाख स्थित गलवान घाटी इलाके में भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास भारतीय सैनिकों की चीनी सैनिकों से हिंसक झड़प हो गई थी जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. चीन की इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनातनी की स्थिति बन गई थी. इस घटना के दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर और राजनयिक स्तर पर कई बैठकें हुईं और चीनी सेना के गलवान घाटी से पीछे हटने की खबर आई. लेकिन ताजा सैटलाइट इमेज में साफ पता चल रहा है कि चीन ने गलवान घाटी स्थित अपनी सीमा के पास कई सैन्य ठिकाने बना रखे हैं और वहां लगातार गतिविधि देखने को मिल रही है. ऐसे में ये सवाल उठना लाजिम है कि आखिर चीन शांति समझौते के बाद भी लद्दाख सीमा पर अपनी सेना क्यों बढ़ा रहा है. भले दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के बाद चीन गलवान घाटी में पीछे हटा है, लेकिन घाटी में चीनी सैनिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. चीन अपनी सीमा के अंदर सड़क और हैलीपेड बनाने के साथ ही अन्य गतिविधियां भी बढ़ा रहा है.

हर मोर्चे पर घिरा चीन कोरोना से ध्यान भटकाने की साजिश कर रहा है

ऐसे समय में, जब भारत और चीन समेत पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है, चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों को क्रियान्वित कर कोरोना संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है. दरअसल, कोरोना को चीनी वायरस कहा जा रहा है, क्योंकि यह वायरस चीन के वुहान शहर स्थित लैब से निकला है. ऐसे में चीन पर पूरी दुनिया की उंगली उठी है. चीन अब इससे ध्यान भटकाने के लिए अपने सीमाई इलाकों में सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है. साथ ही विस्तारवादी नीतियों को क्रियान्वित करने की कोशिश कर रहा है. दरअसल, चीन बौखलाया हुआ है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को डर है कि कोरोना संकट की वजह से बाकी दुनिया उन्हें अलग-थलग न कर दे. साथ ही हाल के महीनों में विभिन्न देशों से व्यापार घाटे ने भी चीन की साम्यवादी सरकार की नींद उड़ा दी है. अमेरिका कोरोना संकट के बाद तो चीन पर लगातार हमलावर है. अब चीन की शी जिनपिंग सरकार भारत से सीमा विवाद को तुल देकर अपनी कमजोरी दुनिया के सामने जाहिर कर रही है और इसी कोशिश का नतीजा है लद्दाख सीमा पर चीनी सैनिकों की संख्या में बढ़ोतरी.

क्या आर्थिक रूप से पिछड़ता चीन भारत पर बना रहा दबाव

दरअसल, चीन की अर्थव्यवस्था बीते कुछ समय से डगमगाई है. अन्य देशों से व्यापार के मामले में भी चीन का एकाधिकार कम हुआ है. भारत को ही लें तो भारत में समय-समय पर चीनी उत्पादों के बहिष्कार से जुड़ी मुहिम चलने से सरकार पर दबाव भी बढ़ा है इस वजह से कई करार कैंसल हुए और इसका परिणाम ये हुआ कि चीन से भारत का व्यापार प्रभावित हुआ. चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात आधारित है. कम कीमत की वजह से दुनियाभर में चीनी उत्पाद पहुंचते हैं. अगर अन्य देश चीनी प्रोडक्ट लेना बंद कर देंगे तो चीन की अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है. गलवान घाटी को लेकर चीन की जो अकड़ दिख रही है, वह एक तरह से चीन की रणनीति है और चीन भारत पर दबाव बनाना चाहता है, ताकि बीते कुछ महीनों से जो व्यापार प्रभावित हुआ है, वह पहले जैसा हो जाए.

चीनी उत्पादों के बहिष्कार से चीन के होश ठिकाने आएंगे!

भारत अगर चीन को सबक सिखाना चाहता है तो एक बार चीनी उत्पादों को पूरी तरह नकार कर देखे, इससे चीन के होश ठिकाने आ जाएंगे. जिस तरह चीन का व्यापार नीति आक्रामक रही है, इससे यूरोप के देश भी घबराने लगे हैं और इस वजह से हाल के महीनों में यूरोपीय देशों से चीन का व्यापार प्रभावित हुआ है. कोरोना संकट के बाद तो स्थिति ऐसी हो गई है कि विदेशी कंपनियां ही चीन से बाहर निकल रही हैं और भारत को एक बड़े मैन्यूफैक्चरिंग हब के रूप में देख रही है. चीन के लिए ये चिंता का सबब है, इसलिए वह भारत पर गलवान घाटी के बहाने दबाव बना रहा है और इसकी आड़ में अपना आर्थिक हित साधने की कोशिश कर रहा है.

भारत को कमजोर समझने की भूल कर रहा चीन चीन भारत से डरा हुआ है. इसका सबसे बड़ा कारण है भारत की बढ़ती आबादी. भारत अगले कुछ वर्षों में सबसे बड़ी आबादी वाला देश हो जाएगा. चीन के लिए उसकी आबादी ही उसका सबसे बड़ा हथियार है. चीन के अनुसार पॉप्युलेशन पावर का सबसे बड़ा सोर्स है. एशिया में दबदबा बनाने के पीछे चीन की ये कोशिश बर्षों से रंग ला रही है. अब जबकि भारत इस मामले में चीन को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रहा है तो चीन का डर अलग-अलग रूप से बाहर आ रहा है. अगर आबादी ज्यादा होगी तो स्वाभाविक रूप से सैन्य क्षमता भी बढ़ेगी. लोगों की जरूरतें पूरी करने के स्वदेशी साधन भी विकसित होंगे और देश छोटी-छोटी चीजों के लिए अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहेगा. चीन को यही डर है कि अगर भारत सैन्य और आर्थिक रूप से सबल होगा तो उसकी बादशाहत को चुनौती देते हुए एशिया पर अपना दबदबा बढ़ाएगा. ऐसे में चीन भारत को अपनी विस्तारवादी नीतियों की चपेट में लेकर युद्ध का डर दिखा रहा है. लेकिन चीन भूल गया है कि यह 21वीं सदी का भारत है जो दोस्ती भी अच्छे से निभाता है और दुश्मन की आंखों में आंखें डालकर बात करना भी जानता है.

चीन में उठने लगे हैं विरोध के सुर

एक और बात जो चीन की नींदें उड़ा रहा है, वो ये है कि बीते कुछ वर्षों के दौरान चीन के लोगों की साम्यवादी शासन के प्रति नाराजगी बढ़ी है. शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी सरकार निरंकुश होती जा रही है और शक्ति का केंद्रीकरण होता जा रहा है. ऐसे में विरोधियों के स्वर दबाए जा रहे हैं. चीन की सरकार के लिए यह बर्दाश्त से बाहर की चीज है और ऐसे में उसकी शोषणकारी प्रवृति दुनिया के सामने आती है. ऐसी स्थिति में चीन मुद्दे से ध्यान भटकाने के एक विकल्प के रूप पड़ोसी देशों से सीमा विवाद का मुद्दा उछालता है और पड़ोसियों पर दबाव बनाने की कोशिश करता है.

 

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