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Updated: 01 जून, 2019 10:52 PM
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बीजेपी में उम्मीदवारों को टिकट अगर जीत के हिसाब से बांटे गये थे, तो मोदी कैबिनेट में जगह भी इसी उम्मीद के साथ मिली है कि वो अपने इलाके में आगे होने वाले चुनाव जरूर जिताएंगे. मोदी-शाह ने घंटों माथापच्ची के बाद जो लिस्ट बनायी उसमें खासियत तो बहुत सारी हैं - लेकिन एक महत्वपूर्ण बात चुनावी राज्यों को तरजीह दिया जाना भी लगती है. कुछ राज्यों में इसी साल कुछ महीने बाद तो कुछ जगह अगले साल चुनाव होने हैं.

अक्टूबर-नवंबर, 2019 में महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और वहां से 13 मंत्री बनाये गये हैं. अगले साल दिल्ली और बिहार चुनाव को देखते हुए दोनों राज्यों से 7 मंत्री बनाये गये हैं.

मतलब चुनाव जीत कर आने पर मंत्री पद मिलता है - और जिम्मेदारियों में आगे के चुनाव जिताना भी शामिल होती है.

महाराष्ट्र में दोबारा सरकार बनवाने के लिए फिर से 8 मंत्री तैनात

महाराष्ट्र में बीजेपी को आम चुनाव में 23 और शिवसेना 18 संसदीय सीटें हासिल हुई हैं. अब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की बारी है. जिस हिसाब से मोदी कैबिनेट में महाराष्ट्र को तवज्जो दी गयी है, उससे साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमित शाह के साथ सूबे में चुनावी तैयारियों का बिगुल भी बजा दिया है.

मोदी मंत्रिमंडल में महाराष्ट्र से आने वाले 8 नेता शामिल हुए हैं. बीजेपी ने महाराष्ट्र से अपने कोटे से छह मंत्री बनाने के साथ ही शिवसेना और आरपीआई को एक एक मंत्रालय में शामिल किया है.

बीजेपी के नितिन गडकरी, प्रकाश जावड़ेकर और पीयूष गोयल और शिवसेना के अरविंद सावंत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. आरपीआई नेता रामदास अठावले के अलावा बीजेपी के दानवे रावसाहेब दादाराव, धोत्रे संजय शामराव और वी मुरलीधरन को राज्य मंत्री बनाया गया है.

modi swearing in gadkariशपथ हो गया, अब अगले चुनाव की तैयारी...

अरविंद सावंत को भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय मिला है, जबकि नितिन गडकरी, प्रकाश जावड़ेकर और पीयूष गोयल को उनके पुराने विभागों की ही जिम्मेदारी दी गयी है.

रामदास अठावले सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण विभाग में राज्य मंत्री बने हैं. इसी तरह दानवे रावसाहेब दादाराव उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री, धोत्रे संजय शमराव मानव संसाधन विकास, संचार और इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री और वी मुरलीधरन विदेश के साथ संसदीय कार्य राज्य मंत्री बने हैं.

वैसे मोदी सरकार 1 में भी महाराष्ट्र से 8 ही मंत्री बनाये गये थे - ध्यान रहे तब भी चुनावों को देखते हुए ही फैसला लिया गया होगा.

हरियाणा में BJP को सभी 10 सीटें मिलीं, अब 3 मंत्री दोबारा सरकार बनवाएंगे

हरियाणा भी देश के उन राज्यों में शुमार है जहां बीजेपी को सब की सब सीटें मिली हैं - और उनमें से तीन मंत्री बनने में भी सफल हुए हैं. मंत्री पद उन्हीं नेताओं को दिया गया है जिनके जरिये बीजेपी हरियाणा में गुर्जर, यादव और दलित समीकरण साध सके. साथ ही, गैर-जाट मुख्यमंत्री का दांव एक बाहर फिर से चल जाये.

मोदी कैबिनेट 2.0 में हरियाणा से तीन मंत्री बनाये गये हैं - राव इंद्रजीत सिंह को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जबकि कृष्णपाल गुर्जर और रतनलाल कटेरिया राज्य मंत्री बनाया गया है.

झारखंड के लिए तो 2 मंत्री ही काफी हैं

झारखंड से सीधे सीधे देंखें तो एक ही मंत्री बना है, लेकिन चूंकि मुख्तार अब्बास नकवी भी झारखंड से ही राज्य सभा सदस्य हैं इसलिए ये संख्या दो हो जा रही है. मुख्तार अब्बास नकवी को उनका अपना अल्पसंख्यक मंत्रालय ही फिर से मिला है.

झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे अर्जुन मुंडा भी कैबिनेट मंत्री बने हैं - और उनके पास आदिवासी मामलों की जिम्मेदारी है, इसलिए राज्य में चुनाव जीतने के लिए ये विभाग वैसे ही महत्वपूर्ण हो जाता है.

झारखंड में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बीजेपी ने गैर आदिवासी नेता रघुबर दास को बिठाया है, फिर तो अर्जुन मुंडा पर ज्यादा ही दारोमदार आ जा रहा है.

बिहार के लिए 6 और दिल्ली से सिर्फ 1 मंत्री!

बिहार से आने वाले 6 बीजेपी नेता मोदी सरकार में मंत्री बने हैं - और दिल्ली से सिर्फ 1. दिल्ली से सिर्फ 1! फिर भी ये कोई नाइंसाफी नहीं है. अगले साल पहले दिल्ली और उसके बाद बिहार में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं.

दिल्ली से सिर्फ हर्षवर्धन को ही मौका मिला है, जबकि बीजेपी के खाते में राजधानी की सभी सातों सीटें आई हुई हैं. दरअसल, दिल्ली में आम आदमी पार्टी के तीसरे स्थान पर लुढ़क जाने से बीजेपी जीत के प्रति कुछ ज्यादा ही आश्वस्त लग रही है. वैसे भी विधानसभावार मिले वोटों से मालूम होता है कि बीजेपी को 70 में से 65 सीटें, कांग्रेस को 5 और आप को 0 ही सीटें मिलने का अनुमान है - ये वोट शेयर के हिसाब से समझ आ रहा है. 2015 के चुनाव में आप को 67 सीटों पर जीत मिली थी - बाद के उपचुनाव में एक सीट जीत कर बीजेपी ने अपनी संख्या 4 कर ली है.

दिल्ली के चांदनी चौक से चुनाव जीत कर लोक सभा पहुंचे डॉ. हर्षवर्धन को दोबारा कैबिनेट मंत्री बनाया गया है - और इस बार वो स्वास्थ्य मंत्री बने हैं. 2013 का दिल्ली विधानसभा चुनाव भी बीजेपी ने हर्षवर्धन के नेतृत्व में ही लड़ा था और सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बाद भी सरकार नहीं बनाया. फिर कांग्रेस के सपोर्ट से अरविंद केजरीवाल ने पहली सरकार बनायी जो 49 दिन तक ही चल पायी थी.

यूपी की ही तरह बीजेपी के बिहार अध्यक्ष नित्यानंद राय को भी मंत्री बना दिया गया है. नित्यानंद राय को अमित शाह के साथ गृह विभाग में राज्य मंत्री बनाया गया है. जाहिर है बीजेपी को बिहार में अब अध्यक्ष पद के लिए भी एक मजबूत नेता की जरूरत होगी.

बिहार चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चित सीट बेगूसराय ही रही. बेगूसराय की चर्चा सीपीआई कैंडिडेट कन्हैया कुमार के कारण ज्यादा रही, वैसे गिरिराज सिंह जीतने में सफल रहे. शुरू में वो अपनी नवादा सीट नहीं छोड़ना चाहते थे लेकिन अमित शाह ने सख्ती दिखायी तो चुपचाप बेगूसराय चले गये - जीते और दोबारा मंत्री भी बन चुके हैं - इस बार वो पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग में कैबिनेट मंत्री बने हैं.

गिरिराज सिंह के बाद दूसरा चर्चित चुनाव रहा पटना साहिब सीट पर जहां से शत्रुघ्न सिन्हा सांसद हुआ करते रहे. बागी हो चुके शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट काट कर बीजेपी ने रविशंकर प्रसाद को पटना साहिब भेजा और वो जीत कर लौटे. रविशंकर प्रसाद का ये पहला चुनाव रहा क्योंकि अब तक वो राज्य सभा के सदस्य के रूप में मंत्री बनते रहे. इस बार भी उनका उन्हें कानून और न्याय के साथ सूचना और प्रसारण मंत्रालय मिला हुआ है.

आरा से चुनाव जीत कर आने वाले आरके सिंह को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है - बिजली, नवीन और नवीनीकरण मंत्रालय मिला है. आरके सिंह को कौशल विकास मंत्रालय में महेंद्रनाथ पांडेय के साथ भी काम करना होगा.

बक्सर से सांसद अश्विनी चौबे फिर से राज्य मंत्री बने हैं और स्वास्थ्य मंत्रालय में उन्हें डॉ. हर्षवर्धन का सहयोगी बनाया गया है.

बिहार में NDA का हिस्सा होने के बावजूद कोटे में सिर्फ एक ही मंत्री पद मिलने से नीतीश कुमार ने इंकार कर दिया, लेकिन रामविलास पासवान खुद मंत्री बने हैं. पासवानी की पार्टी एलजेपी भी बिहार में एनडीए का हिस्सा है. पासवान खुद इस बार चुनाव नहीं लड़े, लेकिन बीजेपी ने वादा किया है कि जो भी राज्य सभा की सीट पहले खाली होगी बीजेपी उन्हें राज्य सभा भेज देगी. अमित शाह और स्मृति ईरानी के लोक सभा पहुंच जाने के कारण दो सीटें खाली भी हुई हैं. हो सकता है एक पासवान तो दूसरी विदेश मंत्री एस. जयशंकर के हिस्से में आये.

बिहार चुनाव के बाद 2021 में जिन राज्यों के विधानसभा चुनाव होंगे उनमें बीजेपी के लिए सबसे महत्वपूर्ण पश्चिम बंगाल होगा - ममता बनर्जी से भारी संघर्ष के बावजूद बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में पांव तो मजबूती से जमा लिया है - अभी से चुनावी तैयारी भी शुरू हो चुकी है. पश्चिम बंगाल से मोदी सरकार में दो मंत्री बनाये गये हैं. बाबुल सुप्रियो तो दोबारा मंत्रिमंडल का हिस्सा बने हैं, पश्चिम बंगाल बीजेपी की महासचिव देबश्री मुखर्जी पहली बार मंत्री बनी हैं और मोदी कैबिनेट की 6 महिलाओं में से एक हैं.

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