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Updated: 08 जुलाई, 2022 03:47 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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लालू यादव (Lalu Yadav) की तबीयत को लेकर ताजा अपडेट है कि सेहत में सुधार हो रहा है - और घर परिवार के साथ आरजेडी नेता के समर्थकों के लिए ये अच्छी खबर है. लालू यादव को एयर एंबुलेंस के जरिये पटना से दिल्ली शिफ्ट करना पड़ा है, जहां एम्स में उनका इलाज चल रहा है.

बताते हैं कि लालू यादव को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सिंगापुर ले जाने की तैयारी चल रही थी, तभी सीढ़ियों से गिर पड़े और काफी चोट आयी है. कंधे में फ्रैक्चर हुआ है और पैर में भी चोट आयी है. अब कहा जा रहा है कि एम्स के डॉक्टरों की राय से ही लालू यादव को सिंगापुर ले जाने का कार्यक्रम बनेगा.

जमानत पर जेल से छूटने के बाद लालू यादव पटना में अपनी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास 10, सर्कुलर रोड पर रह रहे थे और वहीं ये हादसा हो गया. तेजस्वी यादव का परिवार और कुछ दिनों से लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव भी वहीं रह रहे हैं.

लालू यादव की तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अस्पताल जाकर मुलाकात की - और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने तेजस्वी यादव को फोन कर हालचाल जाना. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालू यादव के जल्द स्वस्थ होने की शुभकामना भी दी है. लालू यादव की सेहत को के बारे में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी जानकारी ली है.

बड़ी बात ये है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने ऐलान किया है कि लालू यादव का इलाज अब बिहार सरकार की तरफ से कराया जाएगा - और इस बीच लालू यादव के समर्थकों की तरफ से जगह जगह प्रार्थना भी की जा रही है. राबड़ी देवी ने कहा है कि वो जल्द ही ठीक हो जाएंगे और लोग उनकी सेहत के लिए दुआएं करें.

लालू यादव की सेहत को लेकर पार्टी लाइन से अलग हट कर जो तत्परता दिखायी गयी है, वो स्वाभाविक तौर पर होनी चाहिये, लेकिन बात सिर्फ इतनी ही नहीं है - ये लालू यादव का करिश्मा है कि चाहे वो जेल में रहें या अस्पताल के बेड पर बिहार की राजनीति के केंद्र में वो बने ही रहते हैं.

लालू को इग्नोर करने की हिम्मत किसी में नहीं

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान लालू यादव रांची के जेल में चारा घोटाले में सजा काट रहे थे, लेकिन एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा जब उनकी कोई चर्चा न रही हो. तेजस्वी यादव से ज्यादा तो बीजेपी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चर्चा कर रहे थे.

lalu yadav, nitish kumarलालू यादव की खराब तबीयत के बीच बिहार में चल रही है गला काट राजनीति

तेजस्वी यादव ने जहां जंगलराज के आरोपों से उबरने की कोशिश में कई बार माफी मांगी थी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको जंगलराज का युवराज कह कर लालू यादव और राबड़ी देवी के शासन की तरफ ध्यान दिलाने की कोशिश की थी.

लेकिन साल भर बाद ही 2021 में तारापुर और कुशेश्वर स्थान विधानसभाओं के लिए उपचुनाव हुए तो लालू यादव ने भी चुनाव प्रचार किया था और आरजेडी को कोई फायदा नहीं हुआ. तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर लालू यादव रहे - नीतीश कुमार, सोनिया गांधी और हेमंत सोरेन को छोड़ दें तो जो कोई भी लालू यादव के प्रति हमदर्दी जताने की कोशिश कर रहा तो उसके पीछे असल वजह राजनीति ही है. सच तो ये है कि राजनीति ऐसी ही होती है.

लालू यादव को सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही फोन नहीं किया था, नीतीश कुमार के साथ बीजेपी की तरफ से सैयद शाहनवाज हुसैन भी अस्पताल पहुंचे थे - और बाद में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी जाकर मिले हैं.

ये राजनीति ऐसी ही हो चली है, सोनिया गांधी सेहत की समस्याओं से जूझ रही हैं और प्रवर्तन निदेशालय पूछताछ के लिए उनके ठीक होने का इंतजार कर रहा है. कांग्रेस का आरोप है कि जांच एजेंसी बीजेपी सरकार के दबाव में काम कर रही है.

लालू यादव को लेकर तेजस्वी यादव का भी यही कहना है कि अगर बीजेपी के सामने वो समझौता कर लिये होते तो जेल जाने की नौबत ही नहीं आती, फिर भी बीजेपी की तरह से हमदर्दी दिखाने की हर कोशिश हो रही है. दरअसल, बीजेपी किसी भी सूरत में लालू यादव समर्थकों को नाराज नहीं करना चाहती.

लालू यादव की बीमारी अपनी जगह है, लेकिन बिहार में परदे के पीछे राजनीति की गला काट प्रतियोगिता जारी है - और जरूरी नहीं कि महाराष्ट्र के बाद तेलंगाना का नंबर है, 'खेला' तो बिहार में भी हो सकता है.

1. बीजेपी को नीतीश से पीछा छुड़ाना है बीजेपी हर हाल में नीतीश कुमार से जल्द से जल्द पीछा छुड़ाना चाहती है - मतलब, कोई रास्ता न बचे तो तेजस्वी यादव के साथ भी सरकार बनाने तक से परहेज किये जाने की संभावना तक जतायी जा रही है - वैसे भी महाराष्ट्र के प्रयोग के बाद तो ऐसे सारे प्रयोग मुमकिन लगने लगे हैं.

2. तेजस्वी यादव को अपनी सरकार बनानी है तेजस्वी जैसे भी संभव हो आरजेडी की सरकार और खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं.

3. नीतीश यादव को बीजेपी से बदला लेना है और नीतीश कुमार अपनी कुर्सी जाने पर बीजेपी को भी मजा नहीं लेने देने पर आमादा हैं - भले ही उनको तेजस्वी को ही क्यों न सपोर्ट करना पड़े.

बिखरा विपक्ष और लालू यादव का प्रासंगिक बने रहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने घोषित तौर पर तो कांग्रेस मुक्त अभियान ही चलाया था, लेकिन अब तो हालत ये हो गयी है कि देश की राजनीति धीरे धीरे विपक्ष मुक्त होती लगने लगी है - विपक्ष के एकजुट होने की बात कौन करे वो तो बिखरने के साथ लुढ़कता हुआ नजर आने लगा है.

फिर भी तेजस्वी यादव बिहार में आरजेडी की सरकार बनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं और ये सब तो लालू यादव की ही देन है - क्योंकि अब तक तेजस्वी को जो कुछ मिला है उनका कोई अपना योगदान तो है नहीं. तेजस्वी यादव ने लालू यादव का बेटा बन कर ही अभी तक सब हासिल किया है.

1. विपक्ष ने तो घुटने ही टेक दिये हैं विपक्ष का अब इससे बुरा हाल क्या होगा कि राष्ट्रपति चुनाव में ममता बनर्जी एनडीए के उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की जीत के चांस देखने लगी हैं. यशवंत सिन्हा को तो ये भी समझ में नहीं आ रहा है कि वो क्यों नामांकन दाखिल करने के लिए तैयार क्यों हुए - हालत ये हो गयी है कि यशवंत सिन्हा न तो अपने गृह राज्य झारखंड में प्रचार कर पा रहे हैं और न ही पश्चिम बंगाल में जहां उसी तृणमूल कांग्रेस की सरकार है जिसके वो उपाध्यक्ष हैं.

2. बीजेपी उम्मीदवार के लिए निर्विरोध जीतना भी संभव 6 अगस्त को होने जा रहे उपराष्ट्रपति चुनाव में भी करीब करीब मिलती जुलती स्थिति की ही संभावना लग रही है. जिस तरीके से ममता बनर्जी राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार को लेकर रिएक्ट कर रही हैं, लगता नहीं कि वो उपराष्ट्रपति चुनाव में कोई खास भूमिका निभाने के बारे में सोच भी रही होंगी.

हालत तो ये हो चली है कि अगर बीजेपी मुख्तार अब्बास नकवी या आरिफ मोहम्मद खान में से किसी को उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए का उम्मीदवार घोषित कर दे तो वो निर्विरोध निर्वाचित हो जाएगा.

3. महुआ ने बढ़ाई ममता की मुसीबत हिंदुत्व की राजनीति के बढ़ते असर के बीच विरोध की आवाज बने रहने के लिए संघर्ष कर रहीं ममता बनर्जी के लिए उनके साथी नेता ही मुसीबतें खड़ी कर दे रहे हैं - महुआ मोइत्रा का काली वाले पोस्टर पर दिया गया बयान तो एक मुसीबत ही है.

4. उद्धव ठाकरे तो शरद पवार को भी ले डूबे हैं महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार के गिर जाने के बाद शरद पवार जैसे एनसीपी नेता को भी नहीं सूझ रहा होगा कि अब 2024 के आम चुनाव के लिए विपक्ष के मोर्चे को कैसे खड़ा किया जा सकेगा. महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी सरकार के रहने से कम से कम एक दबाव तो बना ही हुआ था.

5. गांधी परिवार कानूनी पचड़े से उबरे तो बात बने जिस कांग्रेस को लेकर शरद पवार और प्रशांत किशोर कहते रहे कि उसके बगैर विपक्ष का कोई मोर्चा बनाना संभव ही नहीं है, उसके नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी ईडी के चक्कर में फंसे हुए हैं. जब तक कानूनी ग्रह दशा नहीं सुधरती तब तक राजनीति भी ट्विटर से आगे नहीं बढ़ पाएगी.

ऊपर से देखने पर तो ऐसा लग रहा है जैसे महाराष्ट्र के बाद तेलंगाना की बारी है, लेकिन बिहार में भी बहुत कुछ ठीक नहीं चल रहा है. बीजेपी और जेडीयू में रार बहुत बढ़ चुकी है - असली नमूना तो तब देखने को मिलेगा जब बीजेपी आरसीपी सिंह को मोर्चे पर तैनात करेगी.

नीतीश कुमार की नाराजगी के चलते राज्य सभा का टिकट गंवाने के बाद आरसीपी सिंह को कार्यकाल खत्म होते ही केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा है - बीजेपी अब तक जैसे मुख्तार अब्बास नकवी को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रही है, आरसीपी सिंह को लेकर भी वैसा ही रहस्य बनाने की कोशिश हो रही है, लेकिन ध्यान रहे आरसीपी सिंह के फॉर्म में आते ही नीतीश कुमार की मुश्किलें बढ़नी तय हैं.

और नीतीश कुमार के सिर पर मंडराती मुश्किलें ही लालू यादव की प्रासंगिकता बढ़ा देती हैं - क्योंकि नीतीश कुमार को बीजेपी और मोदी-शाह से बदला लेने में लालू यादव ही सबसे बड़े मददगार हो सकते हैं.

वैसे भी AIMIM के विधायकों को साथ ले लेने के बाद तेजस्वी यादव ने आरजेडी को फिर से बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बना दिया है. जो लोग असदुद्दीन ओवैसी को बीजेपी की बी टीम मानते हैं, अब मालूम हो रहा होगा कि कैसे ओवैसी बीजेपी के लिए मुसीबत बन गये हैं.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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