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Updated: 18 अप्रिल, 2020 07:45 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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बबीता फोगाट (Babita Phogat) सोशल मीडिया पर कई दिनों से ट्रेंड भी कर रही हैं - और उसी तरह ट्रोल भी हो रही हैं. हों भी क्यों ना, तब्लीगी जमात (Tablighi Jamaat) जैसे हॉट टॉपिक पर टिप्पणी के एवज में ये तो पक्का ही था. दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में आयोजन को लेकर चर्चित तब्लीगी जमात कोरोना वायरस फैलाने को लेकर भी सुर्खियों में रहा है. एक वक्त ऐसा भी रहा जब देश भर के कोरोना पॉजिटिव लोगों में तब्लीगी जमात की एक तिहाई हिस्सेदारी दर्ज होने लगी थी. लिहाजा तब्लीगी जमात को लेकर कहा जाने लगा कि भारत में कोरोना के मामले बढ़ाने में तब्लीगी जमात की बड़ी भूमिका है. फिर क्या था, कुश्ती से राजनीति में आयीं बबीता फोगाट ने मुद्दा लपक लिया.

बबीता फोगाट को चर्चा में आने के लिए तब्लीगी जमात बेहतरीन टॉपिक लगा - और उनके दो-तीन ट्वीट में ही समर्थकों और विरोधियों की लंबी फौज ट्विटर पर आमने-सामने आ गयी. बबीता फोगाट रुकी नहीं अपनी टिप्पणी में कुछ ऐसे ऐड-ऑन फीचर का इस्तेमाल किया और जायरा वसीम और लॉकडाउन 2.0 (Lockdown 2.0) पर राहुल गांधी को भी अपने ट्वीट में शामिल कर लिया.

दादरी सीट से 2019 में हरियाणा विधानसभा का चुनाव हार चुकीं बबीता फोगाट खेलों की दुनिया में तो बड़ा नाम पहले ही बन चुकी थीं, लेकिन आम लोगों के बीच आमिर खान की फिल्म दंगल के जरिये पहुंचीं.

राजनीति में पहला अनुभव बहुत बुरा रहा. मैदान कोई भी हो, कोई भी पहलवान कहीं चित्त नहीं होना चाहता, पहलवान के लिए हार तो हार ही होती है - नये दांव से बबीता फोगाट के दादरी का दर्द कुछ कम जरूर होना चाहिये.

बबीता फोगाट ने खूब मसाले भी डाले

बबीता फोगाट को कतई उम्मीद नहीं रही होगी कि सियासी पारी की शुरुआत इतनी खराब होगी. गोल्ड से पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में दो बार सिल्वर जीत चुकीं बबीता फोगाट दादरी विधानसभा सीट पर दूसरी भी नहीं तीसरे नंबर पर आयीं. 2019 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार सोमबीर ने जननायक जनता पार्टी (JJP) के सतपाल सांगवान को 14,272 वोटों से हराया - और बबीता फोगाट तीसरे नंबर पर पहुंच गयीं.

1. तब्लीगी जमात पर टिप्पणी: चुनाव में बबीता भले ही चूक गयीं लेकिन नये अखाड़े में वक्त की नजाकत को समझते हुए दांव आजमाने शुरू किये - तब्लीगी जमात पर बबीता फोगाट के एक ही ट्वीट का ऐसा असर हुआ कि एक साथ दो ट्रेंड चलने लगे - #SuspendBabitaPhogat और #ISupportBabitaPhogat.

एक अन्य ट्वीट में बबीता फोगाट ने तब्लीगी जमात के मौलाना साद को भी टारगेट किया. मौलाना साद के बारे में अपडेट है कि वो अपना ठिकाना बदल चुके हैं. मौलाना साद का कहना था कि वो खुद को सेल्फ-क्वारंटीन में रखे हुए हैं - हालांकि, उनके बेटे का बयान आया है कि मौलाना साद को कोरोना संक्रमण नहीं हुआ है.

ऐसा भी नहीं कि बबीता पूरी तरह मुस्लिम विरोधी हैं - वो देश काल और परिस्थिति का पूरा ख्याल रखती हैं. चुनावी राजनीति के नतीजों की बात और है लेकिन पहलवान को मालूम है कि अपने वोट बैंक की अहमियत क्या होती है. अपने इलाके के मुस्लिम समुदाय के लोगों को वो मिसाल के तौर पर पेश करती हैं.

बबीता फोगाट के ट्वीट पर रिएक्ट करते हुए एक्टर स्वरा भास्कर ने लिखा कि जरा आंकड़ों पर भी गौर किया करें. अपने ट्वीट के अंत में स्वरा भास्कर ने तंज भरे टोन में लिखा - बाकी आपके फैन तो हम हैं ही. बबीता फोगाट ने स्वरा की बातों पर टिप्पणी के साथ रीट्वीट किया और टाइमलाइन पर पिन कर दिया.

बबीता फोगाट और कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल के खिलाफ औरंगाबाद के सिटी चौक थाने में शिकायत दर्ज करायी गयी है - रंगोली के अकाउंट को तो ट्विटर ने सस्पेंड भी कर दिया है. अब लोग बबीता फोगाट के खिलाफ भी वही एक्शन लिये जाने की मांग कर रहे हैं.

babita phogat with narendra modiतब्लीगी जमात पर टिप्पणी तो बहाना है, नजर तो कहीं और टिकी लगती है

हालांकि, बबीता फोगाट ने ट्रोल को जवाब देने के लिए एक वीडियो मैसेज तैयार किया और उसमें बॉलीवुड छोड़ चुकीं दंगल गर्ल जायरा वसीम का नाम भी जोड़ दिया. ये नुस्खा भी कामयाब रहा.

2. जायरा वसीम जैसी नहीं: जब तब्लीगी जमात को लेकर बबीता फोगाट के ट्वीट पर बवाल शुरू हुआ तो बीजेपी नेता ने एक वीडियो मैसेज तैयार किया और बोला कि वो धमकियों से डरने वाली नहीं हैं - मैं जायरा वसीम नहीं हूं.

वीडियो के साथ बबीता फोगाट ने एक मैसेज भी लिखा - अगर आप बबीता फोगाट को सपोर्ट करते हैं तो ये बात उन तक जरूर पहुंचा दीजिये और बोलिये कान खोल कर सुन लें.

कश्मीरी मूल की जायरा वसीम ने आमिर खान की फिल्म दंगल में बबीता की बहन गीता फोगाट के बचपन का रोल निभाया है. जायरा ने कुछ फिल्में और की, लेकिन फिर एक्टिंग छोड़ दी. माना गया कि जायरा ने ये फैसला दबाव में आकर लिया था.

तब्लीगी जमात के प्रसंग में बबीता फोगाट के नाम लेने पर जायरा वसीम ने इस्टाग्राम पर एक पोस्ट लिखी है. अपनी पोस्ट में जायरा ने बबीता का नाम तो नहीं लिया है, लेकिन बातें प्रसंग के काफी करीब लगती हैं. जायरा लिखती हैं - 'मैं विनम्रतापूर्वक स्वीकार करती हूं कि सब लोग मुझ से प्यार करते हैं. मैं इस बात पर ज्यादा जोर नहीं दे सकती कि मेरी तारीफ मुझे कितना संतोष देती है या मेरे लिए ये इम्तिहान है - और ये चीज मेरे इमान के लिए कितनी खतरनाक है. मैं इतनी भी धार्मिक नहीं हूं जो और लोगों को प्रभावित कर सके.'

 
 
 
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3. राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस पर टिप्पणी: सोशल मीडिया पर चर्चाओं में रफ्तार भरती बबीता फोगाट ने राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया. राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस के बाद बबीता फोगाट ने ट्विटर पर लिखा, आज राहुल गांधी जी ने क्या बोला - किसी को कुछ समझ आया?

टिप्पणी चूंकि राहुल गांधी पर थी, किसी न किसी को तो मुकाबले में खड़ा होना ही था. जाहिर है कोई करीबी भी पहले आगे आएगा. राहुल गांधी के बचाव में कांग्रेस विधायक ललित नागर ने मोर्चा संभाला. ललित नागर ने बबीता को समझाने की कोशिश की कि वो राजनीति के खेल में न उलझें क्योंकि ये उनके समझ के बाहर की चीज है. ललित नागर के खिलाफ ईडी और आयकर विभाग की जांच चल रही है और बीकानेर घोटाले में कई बार उनके यहां छापे भी पड़ चुके हैं. वही बीकानेर घोटाला जिसमें प्रवर्तन निदेशालय रॉबर्ट वाड्रा से भी पूछताछ कर चुका है. बहरहाल, बबीता ने ललित नागर पर भी तरीके से पलटवार किया - जो बात समझाने की कोशिश कर रहे हैं वो राहुल गांधी को क्यों नहीं समझा देते.

रास्ता जो लाइमलाइट में ला दे!

फर्ज कीजिये अगर बबीता फोगाट ने तब्लीगी जमात पर टिप्पणी नहीं की होती. अगर टिप्पणी करके छोड़ दी होती और मुद्दे को आगे बढ़ाने की कोशिश न की होतीं - तो क्या लगातार इतनी देर तक चर्चा में रहतीं? बेशक बबीता फोगाट ट्विटर पर काफी एक्टिव रहती हैं, लेकिन जिस तरह तब्लीगी पर टिप्पणी को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं, वैसा तो यूं ही नहीं होता. तब्लीगी जमात पर पॉलिटिकल लाइन लेते तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी देखा गया, लेकिन वो एक खास दायरे में ही रहा. दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने केजरीवाल सरकार के उस फैसले पर घोर आपत्ति जतायी थी जिसमें हेल्थ बुलेटिन में तब्लीगी जमात के संक्रमित लोगों की संख्या अलग से बतायी जाती है.

वैसे तो बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से अपील भी की थी कि वे ऐसी बयानबाजी न करें जिससे गलत मैसेज जाये - यानी विरोधियों को मुद्दा बनाने का मौका मिले. कहने को तो अमित शाह ने भी एक टीवी इंटरव्यू में माना था कि दिल्ली में शाहीन बाग को लेकर उनकी टिप्पणी को विपक्ष ने मुद्दा बना दिया - और कुछ नेताओं के बयानों से बीजेपी को नुकसान भी हुआ.

बावजूद इन सब के बबीता फोगाट की ट्विटरबाजी काफी हद तक वैसी ही लगती है जैसी बयानबाजी दिल्ली विधानसभा चुनावों के वक्त अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा कर रहे थे - कपिल मिश्रा की बयानबाजी तो दिल्ली हाईकोर्ट तक गूंजी ही थी. हाईकोर्ट ने पुलिस को हिदायत भी दी थी कि बयानों की जांच कर अगर लगे कि केस दर्ज करने लायक मामला है तो वो भी किया जाये.

ये तो साफ है जिस मकसद से कपिल मिश्रा और दूसरे नेता शाहीन बाग पर बयान दे रहे थे, बबीता फोगाट भी उसी रास्ते पर चल पड़ी हैं. खास बात ये है कि बबीता फोगाट ये काम चुनावी माहौल में नहीं बल्कि तब कर रही हैं जब कोरोना वायरस से आयी वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन की मियाद बढ़ा दी गयी है. ऐसा भी नहीं कि बबीता फोगाट सिर्फ तब्लीगी जमात से जुड़ी टिप्पणियों में व्यस्त हैं, मौका पाकर वो गरीबों की मदद भी कर रही हैं और वे तस्वीरें भी ट्विटर पर मौजूद हैं ताकि सनद रहे और वक्त पर काम आये.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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