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Super blood wolf moon: ये चांद है 4 इन 1

    • श्रुति दीक्षित
    • Updated: 20 जनवरी, 2019 03:44 PM
  • 20 जनवरी, 2019 03:44 PM
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सुपर ब्लड वुल्फ मून नाम सुनकर ही थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन जितना रोचक ये नाम है उतनी ही रोचक है जनवरी की पौष पूर्णिमा की ये घटना.

20 और 21 जनवरी 2019 कुछ खास है. कारण? विज्ञान और आध्यात्म दोनों के लिए ही बहुत खास है क्योंकि न सिर्फ एस्ट्रोनॉमर बल्कि एस्ट्रोलॉजर भी इस दिन अपने-अपने काम में व्यस्त हैं. एक तरफ पौष पूर्णिमा और कुंभ 2019 ने भारतीयों को व्यस्त कर रखा है तो दूसरी ओर Super Blood Wolf Moon के कारण ISRO से लेकर NASA तक सभी व्यस्त हैं. 20 और 21 जनवरी की दर्मियानी रात एक महत्वपूर्ण आकाशीय घटना होने वाली है.

सुपर ब्लड वुल्फ मून नाम सुनकर ही थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन दरअसल, ये दो-तीन घटनाएं एक साथ होने के कारण ऐसा हो रहा है. पर इसका मतलब क्या है? और आखिर चांद से जुड़ी ऐसी कितनी आकाशीय घटनाएं होती हैं जिनको लेकर न्यूज भी बनती हैं और लोगों की रुचि भी रहती है.

सबसे पहले बात करते हैं Super Blood Wolf Moon के बारे में-

सुपर ब्लड वुल्फ मून अलग में कोई एक नाम नहीं है. बल्कि चंद्रेमा में चार तरह के असर एक साथ पड़ने वाले हैं इसलिए इसे सुपर ब्लड वुल्फ मून कहा गया है. ये वुल्फ मून भी है, सुपर मून भी और क्योंकि ग्रहण भी साथ में पड़ रहा है इसलिए ये ब्लड मून भी है. पर इतने फैंसी नाम अगर चांद को दिए जा रहे हैं तो उसका मतलब क्या है? 

1. Wolf moon-

ये एक अनोखी घटना इसलिए खास है क्योंकि सुपर मून, चंद्र ग्रहण और ब्लड मून जनवरी में पड़ रहे हैं. दरअसल, वुल्फ मून और कुछ नहीं बल्कि जनवरी में होने वाली पूर्णिमा को कहते हैं. सिर्फ जनवरी में होने वाले फुल मून को वुल्फ मून इसलिए कहा जाता है क्योंकि पौराणिक समय से ही सर्दियों में बर्फ से घिरी हुई वादियों में भेड़ियों की आवाज़ कुछ ज्यादा आती थी. यही कारण है कि ठंड में पड़ने वाली पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा गया. इसी से जुड़ा एक Snow Moon भी होता है जो फरवरी 19 को पड़ेगा. ऐसा माना जाता है कि इस समय बर्फबारी ज्यादा होती है.

20 और 21 जनवरी 2019 कुछ खास है. कारण? विज्ञान और आध्यात्म दोनों के लिए ही बहुत खास है क्योंकि न सिर्फ एस्ट्रोनॉमर बल्कि एस्ट्रोलॉजर भी इस दिन अपने-अपने काम में व्यस्त हैं. एक तरफ पौष पूर्णिमा और कुंभ 2019 ने भारतीयों को व्यस्त कर रखा है तो दूसरी ओर Super Blood Wolf Moon के कारण ISRO से लेकर NASA तक सभी व्यस्त हैं. 20 और 21 जनवरी की दर्मियानी रात एक महत्वपूर्ण आकाशीय घटना होने वाली है.

सुपर ब्लड वुल्फ मून नाम सुनकर ही थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन दरअसल, ये दो-तीन घटनाएं एक साथ होने के कारण ऐसा हो रहा है. पर इसका मतलब क्या है? और आखिर चांद से जुड़ी ऐसी कितनी आकाशीय घटनाएं होती हैं जिनको लेकर न्यूज भी बनती हैं और लोगों की रुचि भी रहती है.

सबसे पहले बात करते हैं Super Blood Wolf Moon के बारे में-

सुपर ब्लड वुल्फ मून अलग में कोई एक नाम नहीं है. बल्कि चंद्रेमा में चार तरह के असर एक साथ पड़ने वाले हैं इसलिए इसे सुपर ब्लड वुल्फ मून कहा गया है. ये वुल्फ मून भी है, सुपर मून भी और क्योंकि ग्रहण भी साथ में पड़ रहा है इसलिए ये ब्लड मून भी है. पर इतने फैंसी नाम अगर चांद को दिए जा रहे हैं तो उसका मतलब क्या है? 

1. Wolf moon-

ये एक अनोखी घटना इसलिए खास है क्योंकि सुपर मून, चंद्र ग्रहण और ब्लड मून जनवरी में पड़ रहे हैं. दरअसल, वुल्फ मून और कुछ नहीं बल्कि जनवरी में होने वाली पूर्णिमा को कहते हैं. सिर्फ जनवरी में होने वाले फुल मून को वुल्फ मून इसलिए कहा जाता है क्योंकि पौराणिक समय से ही सर्दियों में बर्फ से घिरी हुई वादियों में भेड़ियों की आवाज़ कुछ ज्यादा आती थी. यही कारण है कि ठंड में पड़ने वाली पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा गया. इसी से जुड़ा एक Snow Moon भी होता है जो फरवरी 19 को पड़ेगा. ऐसा माना जाता है कि इस समय बर्फबारी ज्यादा होती है.

इस बार ब्लड मून और वुल्फ मून साथ में पड़ रहा है.

2. Blood Moon-

अब बात रही ब्लड मून की. तो मैं आपको बता दूं कि ये साल का अकेला बल्ड मून है. ये अलग से कोई आकाशीय घटना नहीं है बल्कि इसका सीधा संबंध चंद्र ग्रहण से है. जब चंद्रमा को पूर्ण ग्रहण लगता है तो क्योंकि सूर्य की रौशनी चंद्रमा पर पड़ रही होती है तो वो लाल रंग का दिखने लगता है. ये जगह, दिन, महीने पर निर्भर करेगा कि चांद कितना लाल दिखेगा. ये कुछ-कुछ ऐसा ही है जैसे पृथ्वी के वातावरण के कारण सूर्य का रंग पीला दिखता है, जब्कि असल में सूर्य का रंग सफेद है.

3. Super Moon-

अगर सुपर मून की बात की जाए तो ये कहना गलत नहीं होगा कि चांद इस दिन बड़ा हो जाता है. ये तब होता है जब फुल मून यानी किसी पूर्णिमा पर चांद पृथ्वी के काफी करीब आ जाए. सुपरमून का नाम ऐसा क्यों रखा गया इसकी कोई खास कहानी नहीं है. क्योंकि चंद्रमा को ज्वार और भाटा से जोड़कर देखा जाता है और जिस समय सुपरमून होता है उस समय पृथ्वी और चांद काफी करीब होते हैं इसलिए ऐसा माना जाता है कि इस घटना के आस-पास ज्वालामुखी फटेगा या फिर कहीं भूकंप या सूनामी आएगा. लेकिन इसका असर इतना छोटा होता है कि उसपर ज्यादा किसी का ध्यान नहीं जाता. 19 फरवरी और 18 मार्च को अगले सुपर मून होंगे.

4. Eclipse (ग्रहण)-

जैसा कि सबको पता है कि चांद और सूरज को ग्रहण लगता है जब चांद, सूरज और पृथ्वी तीनों एक ही लाइन में आ जाते हैं. 20-21 जनवरी को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण साल का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण भी होगा. अगला ग्रहण 2 जुलाई को पड़ेगा.

इस बार का सुपर ब्लड वुल्फ मून पश्चिमी गोलार्ध्द (Western Hemisphere), यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में साफ दिखेगा. इसके लिए किसी खास चश्मे की भी जरूरत नहीं होगी.

किस समय दिखेगा?

ये पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा. जी हां, इस साल का पूर्ण चंद्र ग्रहण भारतीय देख नहीं पाएंगे. पर अगर भारतीय समय के हिसाब से देखें तो ये 21 जनवरी सुबह 8 बजे शुरू होगा. ग्रहण सुबह 10.11 मिनट से लगेगा. इसके अलावा, ये 1 घंटे 2 मिनट का इवेंट कई जगहों पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा और इसलिए इसे ऑनलाइन देखा जा सकता है.

पूरा इवेंट जहां अर्ध ग्रहण, पूर्ण ग्रहण, ब्लड मून आदि सब मिला दिया जाए तो ये 3 घंटे से भी ऊपर चलेगा. पहले फेज में चांद पर कोई असर नहीं दिखेगा, दूसरे फेज में अर्ध चंद्र ग्रहण दिखेगा, 90 मिनट बाद चांद लाल हो जाएगा क्योंकि इस इवेंट का असर पूरी तरह से चांद पर होगा और फिर धीरे-धीरे ये प्रोसेस रिवर्स हो जाएगा.

भारत में ये अनोखी घटना नहीं दिखेगी

5. Blue moon-

अब बात करते हैं ब्लू मून की. ब्लू मून भी एक तरह का फुल मून भी होता है. ये कभी पहली पूर्णिमा को नहीं पड़ता. यानी ये महीने का दूसरा फुल मून होगा. इसका नाम चांद के रंग से नहीं जुड़ा है. इसे एक्स्ट्रा फुल मून कहा जा सकता है. यानी जैसे साल में 12 फुल मून पड़ते हैं ये 13वां होगा. ये किसी एक सीजन का तीसरा फुल मून होगा. जैसे गर्मी में चार पूर्णिमा पड़ती हैं चार महीने में तो ये तीसरी पूर्णिमा को होगा. ये ब्लू मून दो-तीन साल में 1 बार आता है. क्योंकि ये हर साल नहीं होता और ज्यादा लोग इसे देख नहीं पाते इसलिए इसे ब्लू मून नाम दिया गया जैसे अंग्रेजी का फ्रेज 'once in a blue moon' किसी अनोखी घटना के बारे में बताता है.

अगला ब्लू मून 18 मई को होगा.

तो अब तक आप समझ गए होंगे कि आकाशीय घटनाओं के लिए 2019 साल कुछ अलग है. तो तैयार हो जाइए एक अनोखे साल के लिए.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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