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क्या रेप के लिए पॉर्न साइट्स जिम्मेदार हैं?

    • पारुल चंद्रा
    • Updated: 24 जून, 2016 10:02 PM
  • 24 जून, 2016 10:02 PM
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रेप की समस्या से जूझ रहे इन सारे नेताओं को एक मीटिंग बुलाकर पहले ये तय कर लेना चाहिए कि रेप का मूल कारण आखिर है क्या?

जयपुर में एक के बाद एक अलग-अलग जगह पर तीन और चार साल की बच्चियों के साथ रेप की घटनाएं घटीं. एक आरोपी पकड़ा गया, दूसरा अभी भी फरार है. जाहिर है ऐसे में राज्य के मंत्रियों को रेप कल्चर के बारे में कुछ तो बोलना ही था, सो बोल दिया. राजस्थान के उद्योग मंत्री गजेंद्र सिंह का कहना है पोर्न वेबसाइटों के कारण ही रेप की वारदातें हो रही हैं. इन साइटों पर रोक लगाई जाए. उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया, अश्लील साहित्य और पोर्न साइटों के कारण अपराध और दुष्कर्म की घटनाएं बढ रही हैं.

पोर्न साइटों को रेप के लिए जिम्मेदार ठहराना रेप जैसी जघन्य घटना को किसी सामान्य घटना की तरह लेना है. वैसे भी ये कोई नई बात नहीं है, 2013 में पोर्न बैन के लिए एक याचिका दायर की गई. तब भी यही कहा गया था कि महिलाओं के साथ हो रहे अपराध का यह बड़ा कारण है. लेकिन तब सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने ही तीखे सवाल किए, जिसके जवाब ये दे नहीं पाए. ये सिर्फ नूडल्स खाने और जींस पहनने को ही रेप का ज़िम्मेदार बता सकते हैं. इस मामले पर ये भी लगता है रेप की समस्या से जूझ रहे इन सारे नेताओं को एक मीटिंग बुलाकर पहले ये तय कर लेना चाहिए कि रेप का मूल कारण आखिर है क्या? हो सकता है कि नूडल्स, जींस या फिर स्कर्ट पर बैन लगाने या इनमें से किसी एक पर रोक लगाने से ही समस्या का हल सामने आ जाए.

ये भी पढ़ें- पोर्न देखने की ये कैसी लत!

ये मान भी लें कि पोर्न बलात्कार के लिए उकसाता होगा, लेकिन क्या पूरी की पूरी जिम्मारी सिर्फ पोर्न पर डाली जा सकती है. क्या सिर्फ पॉर्न देखने वाले ही रेप करते हैं? कह रहे हैं कि पॉर्न बैन करने से अपराध कम हो जाएंगे. ये किसी की निजी सोच हो सकती है, क्योंकि आंकड़े तो यही कहते हैं कि ऐसे देश जहां सेक्स को लेकर खुलापन नहीं है, जैसे अफगानिस्तान, कांगो सोमालिया, पाकिस्तान...

जयपुर में एक के बाद एक अलग-अलग जगह पर तीन और चार साल की बच्चियों के साथ रेप की घटनाएं घटीं. एक आरोपी पकड़ा गया, दूसरा अभी भी फरार है. जाहिर है ऐसे में राज्य के मंत्रियों को रेप कल्चर के बारे में कुछ तो बोलना ही था, सो बोल दिया. राजस्थान के उद्योग मंत्री गजेंद्र सिंह का कहना है पोर्न वेबसाइटों के कारण ही रेप की वारदातें हो रही हैं. इन साइटों पर रोक लगाई जाए. उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया, अश्लील साहित्य और पोर्न साइटों के कारण अपराध और दुष्कर्म की घटनाएं बढ रही हैं.

पोर्न साइटों को रेप के लिए जिम्मेदार ठहराना रेप जैसी जघन्य घटना को किसी सामान्य घटना की तरह लेना है. वैसे भी ये कोई नई बात नहीं है, 2013 में पोर्न बैन के लिए एक याचिका दायर की गई. तब भी यही कहा गया था कि महिलाओं के साथ हो रहे अपराध का यह बड़ा कारण है. लेकिन तब सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने ही तीखे सवाल किए, जिसके जवाब ये दे नहीं पाए. ये सिर्फ नूडल्स खाने और जींस पहनने को ही रेप का ज़िम्मेदार बता सकते हैं. इस मामले पर ये भी लगता है रेप की समस्या से जूझ रहे इन सारे नेताओं को एक मीटिंग बुलाकर पहले ये तय कर लेना चाहिए कि रेप का मूल कारण आखिर है क्या? हो सकता है कि नूडल्स, जींस या फिर स्कर्ट पर बैन लगाने या इनमें से किसी एक पर रोक लगाने से ही समस्या का हल सामने आ जाए.

ये भी पढ़ें- पोर्न देखने की ये कैसी लत!

ये मान भी लें कि पोर्न बलात्कार के लिए उकसाता होगा, लेकिन क्या पूरी की पूरी जिम्मारी सिर्फ पोर्न पर डाली जा सकती है. क्या सिर्फ पॉर्न देखने वाले ही रेप करते हैं? कह रहे हैं कि पॉर्न बैन करने से अपराध कम हो जाएंगे. ये किसी की निजी सोच हो सकती है, क्योंकि आंकड़े तो यही कहते हैं कि ऐसे देश जहां सेक्स को लेकर खुलापन नहीं है, जैसे अफगानिस्तान, कांगो सोमालिया, पाकिस्तान और भारत, उन्हीं देशों में यौन हिंसा के मामले सबसे ज्यादा हैं.

 पहले भी पोर्न बैन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल किए थे

यहां रेप के मामलों को कंट्रोल करना सरकार के बस के बाहर की चीज हो गया है, रेपिस्ट पकड़ में नहीं आ रहे, जो पकड़े जा रहे हैं उन्हें सजा का कोई डर नहीं है. इन सारी चीजों पर ध्यान देने के बजाए पोर्न को दोष देना बेकार की बात है.

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इन मंत्रियों को ये बताना भी जरूरी है कि इंटरनेट पर आते ही पोर्न आपकी स्क्रीन पर नहीं आता. वो उस व्यक्ति की मानसिकता के कारण आता है जो उसे इंटरनेट पर ढूंढता है. रेप की ज़िम्मेदार होती है मानसिकता, ऐसी सोच जो अपने सामने अपना-पराया, छोटा-बड़ा कुछ नहीं देखती. इस बात की तस्दीक वो आंकड़े करते हैं जो हमारी सरकारी वेबसाइटों पर उपलब्ध हैं.

फर्ज कीजिए अगर पोर्न पर बैन लगा दिया जाए, तो इंटरनेट पर पोर्न देखकर खुद को संतुष्ट करने वाले लोग, बैन के बाद संतुष्टि के लिए आस-पड़ोस में रहने वाली लड़कियों और बच्चियों को ढ़ूंढेंगे. क्या ये कम गनीमत है कि समाज का ये वर्ग सिर्फ पोर्न देखकर ही खुद को संतुष्‍ट कर लेते हैं और इस तरह की किसी हिंसा को अंजाम नहीं देते.

एक बात और, बाजार का नियम तो सबको पता ही है कि जिस भी चीज पर रोक लगाई जाती है, उसकी डिमांड और बढ़ जाती है. आप रोक लगा भी दें, तो पोर्न का बिजनेस और भी फले-फूलेगा. भारत में हैकिंग और जुगाड़ आज के दौर में जरा भी मुशकिल नहीं है.

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इसलिए रेप की घटनाओं को रोकने के लिए कोई रणनीति तैयार कीजिए, कोई समझदारी भरा फैसला लीजिए, लड़कियों के कपड़ों की लंबई मत नापिए बल्कि लोगों की विकृत मानसिकता बदलने के सार्थक प्रयास कीजिए.

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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