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कश्मीर में सुरक्षा अधिकारी और पत्नी की हत्या करने वाले आतंकी क्या समझेंगे देशसेवा?

    • ज्योति गुप्ता
    • Updated: 29 जून, 2021 05:02 PM
  • 29 जून, 2021 05:02 PM
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पुलवामा के अवंतीपोरा इलाके के हरिपरिगाम में आतंकी हमले के शिकार विशेष पुलिस अधिकारी फयाज अहमद और उनकी पत्नी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई. उनके अंतिम दर्शन के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा. आवाम का जन सैलाब और उनके आंसू आतंकियों को उनके हमले का जवाब दे रहे थे.

देश पर मिटने वाला एक बेटा अपनी पत्नी के साथ जब अंतिम यात्रा पर निकला तो उसके पीछे-पीछे चलती आवाम की भीड़ रो पड़ी. पुलवामा के अवंतीपोरा इलाके के हरिपरिगाम में आतंकी हमले के शिकार विशेष पुलिस अधिकारी फयाज अहमद और उनकी पत्नी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई. उनके अंतिम दर्शन के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा.

आवाम का जन सैलाब और उनके आंसू आतंकियों को उनके हमले का जवाब दे रहे थे. लोगों के शांत चेहरे पर भले उदासी थी लेकिन उऩका गुस्सा और दर्द आंसू बनकर बाहर निकल रहे था. आतंकवादियों ने घर में घुसकर एसपीओ फैयाज अहमद के पूरे परिवार को निशाना बनाया और ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं. हमले में पूर्व SPO और उनकी पत्नी के बाद बेटी राफिया ने भी दम तोड़ दिया. इस तरह एक हमले ने एक हंसते-खेलते परिवार की दुनिया उजाड़ कर रख दी.

आवाम के आंसुओं ने आंतकियों को जवाब दिया है

पति-पत्नी जिंदगी भर साथ निभाने का वादा करते हैं लेकिन कोई भी इस तरह अपने परिवार के अंत की कभी कल्पना नहीं करता है, चाहे वह कोई नॉर्मल परिवार हो या फिर देश की सेवा करने वाला जवान. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि देश की सुरक्षा में लगे किसी जवान का ये हाल हुआ है.

आए दिन ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं जब देश की सुरक्षा में लगा कोई लाल शहीद होता है. जितनी मेहनत ये अधिकारी करते हैं उतनी ही भूमिका इनकी पत्नियों की भी होती है. एक जवान की पत्नी अपने पति के हिसाब से ही अपनी लाइफ जीती है, क्योंकि वह अपने पति की देश के प्रति जिम्मेदारियों को समझती है. आसान नहीं है किसी आर्मी मैन की पत्नी होना. पुलिस अधिकारी फयाज अहमद की पत्नी का इस तरह से दुनिया से रूख्सत होना काफी कुछ कहता है.

देश की सेवा में लगे सैनिक की पत्नी की जिंदगी कैसी होती है

अगर आप किसी आर्मी सैनिक की पत्नी को जानते हैं...

देश पर मिटने वाला एक बेटा अपनी पत्नी के साथ जब अंतिम यात्रा पर निकला तो उसके पीछे-पीछे चलती आवाम की भीड़ रो पड़ी. पुलवामा के अवंतीपोरा इलाके के हरिपरिगाम में आतंकी हमले के शिकार विशेष पुलिस अधिकारी फयाज अहमद और उनकी पत्नी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई. उनके अंतिम दर्शन के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा.

आवाम का जन सैलाब और उनके आंसू आतंकियों को उनके हमले का जवाब दे रहे थे. लोगों के शांत चेहरे पर भले उदासी थी लेकिन उऩका गुस्सा और दर्द आंसू बनकर बाहर निकल रहे था. आतंकवादियों ने घर में घुसकर एसपीओ फैयाज अहमद के पूरे परिवार को निशाना बनाया और ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं. हमले में पूर्व SPO और उनकी पत्नी के बाद बेटी राफिया ने भी दम तोड़ दिया. इस तरह एक हमले ने एक हंसते-खेलते परिवार की दुनिया उजाड़ कर रख दी.

आवाम के आंसुओं ने आंतकियों को जवाब दिया है

पति-पत्नी जिंदगी भर साथ निभाने का वादा करते हैं लेकिन कोई भी इस तरह अपने परिवार के अंत की कभी कल्पना नहीं करता है, चाहे वह कोई नॉर्मल परिवार हो या फिर देश की सेवा करने वाला जवान. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि देश की सुरक्षा में लगे किसी जवान का ये हाल हुआ है.

आए दिन ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं जब देश की सुरक्षा में लगा कोई लाल शहीद होता है. जितनी मेहनत ये अधिकारी करते हैं उतनी ही भूमिका इनकी पत्नियों की भी होती है. एक जवान की पत्नी अपने पति के हिसाब से ही अपनी लाइफ जीती है, क्योंकि वह अपने पति की देश के प्रति जिम्मेदारियों को समझती है. आसान नहीं है किसी आर्मी मैन की पत्नी होना. पुलिस अधिकारी फयाज अहमद की पत्नी का इस तरह से दुनिया से रूख्सत होना काफी कुछ कहता है.

देश की सेवा में लगे सैनिक की पत्नी की जिंदगी कैसी होती है

अगर आप किसी आर्मी सैनिक की पत्नी को जानते हैं तो आपको अच्छी तरह पता होगा कि उनकी लाइफ कैसी होती है. मैंने देखा है आर्मी अफसर की पत्नी को और इसलिए उनकी हिम्मत की दाद देती हूं. फौजी की पत्नी की जिंदगी भी कम अनुशासित नहीं होती. उनके घर में सारी चीजों का एक टाइम है, थोड़ी भी इधर-उधर हुआ कि सबकुछ गड़बड़ हो सकता है. सुबह 4 बजे जगना हो या फिर देर रात तक पति का इंतजार करना हो. यो तो नॉर्मल बात है, एक सिपाही की पत्नी को इससे कहीं ज्यादा कुर्बानी देनी पड़ती है. 

ये कहती हैं कि शादी के बाद तो कई सालों तक मैं पति से दूर ही रही, क्योंकि पोस्टिंग ऐसी जगह थी जहां फैमिली को नहीं ले जा सकते थे. हमारी शादी हुई और थोड़े दिन में ही इनको ड्यूटी पर जाना पड़ा. हमारी अरेंज मैरिज हुई थी मैं इनके माता-पिता के साथ ही रहती थी. इसलिए हमें एक-दूसरे को जानने में वक्त लगा. उस टाइम में फोन का भी इतना चलन नहीं था.

कई बार ऐसा हुआ कि ये छुट्टी आने वाले थे लेकिन आ नहीं पाए क्योंकि किसी वजह से छुट्टी कैंसिल हो दी जाती. शुरू में तो ये सब अजीब लेगा लेकिन मैं धीरे-धीरे इस माहौल में ढल गई और समझ गई कि इनकी अहमियत सिर्फ मेरे तक नहीं है बल्कि देश की सेवा है. इनका जज्बा देख मुझे हौसला मिलता गया और मैं उसी हिसाब से ढलती गई. कभी पूरी रात ड्यूटी निभाने के लिए बारिश में खड़े रहना हो भले आंधी हो, ठंड हो, गर्मी हो या फिर तूफान देश के सेनिकों को मैंने अपनी जगह पर लगातार खड़े देखा है, क्योंकि आतंकी कभी भी  हमला कर सकते हैं.

पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को जब आतंकियों ने हमला किया था उस दिन पहले ही आंधी तूफान आ रहा था. काले बादल को देख ऐसा लग रहा था जैसे कुछ होने वाला है. हमले के बाद इनकी ड्यूटी लगी. जब तक ये नहीं आए, डर का साया पीछा नहीं छोड़ रहा था, हालांकि हिम्मत नहीं टूटी. मतलब यह है कि हमेशा खौफनाक माहौल रहता है. कब क्या हो जाए कुछ पता नहीं चलता. जब ये पेट्रोलिंग ड्यूटी पर जाते हैं आएंगे या नहीं यह पता नहीं रहता. बच्चे जब जगते हैं पापा नहीं रहते जब सोते हैं तो भी पापा नहीं रहते. कई बार साथ में रहने के बावजूद भी महीनों अकेले रहने रहना पड़ता है. तब जिम्मेदारी और बढ़ जाती है.

हर तीन साल में ट्रांसफर हो जाता है, नया माहौल, नए लोग में ढलना पड़ता है. हमारे साथ बच्चे भी समझ जाते हैं कि पापा देश की सेवा कर रहे हैं. हर तीन साल में उनका भी स्कूल बदल जाता है. दोस्त बदल जाते हैं. मां-पापा जब मिलना चाहें तो उन्हें छुट्टी मिलने तक इंतजार करना पड़ता है. 

कभी सुबह 5 बजे नाश्ता चाहिए तो कभी रात को लेट खाना. कई बार सुबह तीन बार जगना पड़ता है. कई बार कहीं जाने की प्लानिंग होती है लेकिन छुट्टी ना मिलने से कैसिंल भी हो जाती है. टाइम से खाना नहीं दिया तो ये बिना खाए ही ड्यूटी पर निकल जाएंगे. एक सैनिक की पत्नी को हमेशा हालात से निबटने के लिए तैयार रहना पड़ता है. एक तरह से हमारी भी ट्रेनिंग होती है कि हमें अपनी सूझ-बूझ से किस तरह हालात का सामना करना है.

कई बार बिना कुछ कहे कि काफी कुछ समझना होता है. आतंकी अगर घर में घुस आए तो उसके लिए भी आपको तैयार रहना पड़ता है. जब देश के लिए शहीद होना है तो क्यों ना घर में आए आतंकी को मारकर दुनिया से विदा लिया जाए, क्योंकि अगर वे घर में आ गए तो फिर क्या होगा, आप समझ जाएं. हां, बस इतना समय मिलना चाहिए.

इनसे बात करके ये तो समझ आ गया कि एक आर्मी मैन के साथ पूरे परिवार को सफर करना पड़ाता है, खासकर पत्नी को कई सारी छोटी-छोटी कुर्बानियां देनी पड़ती हैं. कई बार ये कुर्बानी जान देकर पूरी होती है. जिस तरह एसपीओ फैयाज अहमद की पत्नी ने जान देकर दी. पुलिस का जवान हों या फिर सेना का, हमें उनके साथ उनकी पत्नियों की कुर्बानी भी नहीं भूलनी चाहिए. ऐसी और भी बातें हैं जिन्हें लिखने की इजाजत नहीं है, बस इतना याद रखिए कि सैनिक रात भर पहरा देते हैं तब हम चैन से सोते हैं.

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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