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ये हैं दुनिया के रोमियो और मजनुओं की नई देवी

    • अनुज मौर्या
    • Updated: 12 जनवरी, 2018 04:47 PM
  • 12 जनवरी, 2018 04:47 PM
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#MeToo वो अभियान है जो अपना प्‍यार पाने की कोशिश करने वाले लड़कों की यौन स्‍वतंत्रता पर हमला करता है. फ्रांस की मशहूर अभिनेत्री कैथरीन डेवेन्‍यू अपने सौ सहयोगियों के साथ जब ये बात रखती हैं तो दुनिया में बड़ी बहस छिड़ जाती है.

कोई लड़का अगर किसी लड़की का पीछा करे, उसे बार-बार प्रपोज करे या फिर सिर्फ दोस्ती करने की गुजारिश भी करे, तो यूपी जैसी जगह में तो उसे 'रोमियो' करार देते हुए बहुत पीटा जाएगा. पुलिस भी उसे जेल की हवा खिला ही देगी. उसे शोहदा, मजनू, मनचला या और किसी नाम से बुलाया जाएगा. लड़कियों के साथ ऐसी घटनाओं का विरोध करने के लिए दुनिया के अधिकतर लोग #MeToo जैसा अभियान चलाते हैं. लेकिन फ्रांस की मशहूर एक्ट्रेस कैथरीन डेवेन्‍यू इस धारा को रोकने के लिए एक अलग आंदोलन खड़ा कर रही हैं. वो जो कह रही हैं, कर रही हैं उसे जानकर तो सारे मॉडर्न रोमियो, शोहदे, मजनू और मचनले उन्‍हें अपना भगवान ही बना लेंगे.

ये हैं फांस की वो एक्ट्रेस

फ्रांस की मशहूर एक्ट्रेस कैथरीन डेवेन्यू ने मजनू, रोमियो और मनचला कहे जाने वाले लड़कों का एक तरह से पक्ष लिया है. दरअसल, उन्होंने यह बात अमेरिकी निर्देशक हार्वे वीस्टीन के खिलाफ यौन हिंसा के आरोपों का संदर्भ देते हुए कही है. आपको बता दें कि डेवेन्यू उन 100 लोगों में से एक हैं, जिन्होंने मंगलवार को ली मॉन्डे अखबार में छापे गए पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद से नारीवादी लोगों ने न सिर्फ इस पत्र की आलोचना की, बल्कि उन लोगों को भी भला बुरा कहा है, जिन्होंने इस पर हस्ताक्षर किए हैं. 74 साल की डेवेन्यू कैथरीन अपनी 1967 की फिल्म 'Belle du Jour' के लिए बेहद लोकप्रिय हुई थीं, जिसमें उन्होंने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया था जो हाउसवाइफ है और घर में बैठे-बैठे बोर हो जाती है. वह अपनी बोरियत खत्म करने के लिए अपना दिन एक वैश्या की तरह बिताती थी.

क्या लिखा है उस पत्र में?

हार्वे वीस्टीन के संदर्भ में इस पत्र में लिखा है- 'जब भी कोई मर्द किसी को छूना चाहता है तो उसे इसके लिए सजा दी जाती है. नौकरी से भी हाथ धोना पड़ जाता...

कोई लड़का अगर किसी लड़की का पीछा करे, उसे बार-बार प्रपोज करे या फिर सिर्फ दोस्ती करने की गुजारिश भी करे, तो यूपी जैसी जगह में तो उसे 'रोमियो' करार देते हुए बहुत पीटा जाएगा. पुलिस भी उसे जेल की हवा खिला ही देगी. उसे शोहदा, मजनू, मनचला या और किसी नाम से बुलाया जाएगा. लड़कियों के साथ ऐसी घटनाओं का विरोध करने के लिए दुनिया के अधिकतर लोग #MeToo जैसा अभियान चलाते हैं. लेकिन फ्रांस की मशहूर एक्ट्रेस कैथरीन डेवेन्‍यू इस धारा को रोकने के लिए एक अलग आंदोलन खड़ा कर रही हैं. वो जो कह रही हैं, कर रही हैं उसे जानकर तो सारे मॉडर्न रोमियो, शोहदे, मजनू और मचनले उन्‍हें अपना भगवान ही बना लेंगे.

ये हैं फांस की वो एक्ट्रेस

फ्रांस की मशहूर एक्ट्रेस कैथरीन डेवेन्यू ने मजनू, रोमियो और मनचला कहे जाने वाले लड़कों का एक तरह से पक्ष लिया है. दरअसल, उन्होंने यह बात अमेरिकी निर्देशक हार्वे वीस्टीन के खिलाफ यौन हिंसा के आरोपों का संदर्भ देते हुए कही है. आपको बता दें कि डेवेन्यू उन 100 लोगों में से एक हैं, जिन्होंने मंगलवार को ली मॉन्डे अखबार में छापे गए पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद से नारीवादी लोगों ने न सिर्फ इस पत्र की आलोचना की, बल्कि उन लोगों को भी भला बुरा कहा है, जिन्होंने इस पर हस्ताक्षर किए हैं. 74 साल की डेवेन्यू कैथरीन अपनी 1967 की फिल्म 'Belle du Jour' के लिए बेहद लोकप्रिय हुई थीं, जिसमें उन्होंने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया था जो हाउसवाइफ है और घर में बैठे-बैठे बोर हो जाती है. वह अपनी बोरियत खत्म करने के लिए अपना दिन एक वैश्या की तरह बिताती थी.

क्या लिखा है उस पत्र में?

हार्वे वीस्टीन के संदर्भ में इस पत्र में लिखा है- 'जब भी कोई मर्द किसी को छूना चाहता है तो उसे इसके लिए सजा दी जाती है. नौकरी से भी हाथ धोना पड़ जाता है. बलात्कार अपराध है, लेकिन किसी को सेड्यूस (आकर्षित) करना अपराध नहीं है. ना ही मर्द कोई हमलावर हैं.' जैसे ही यह पत्र ली मॉन्डे में छपा, इसने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है. कई नारीवादी संगठन इस पत्र का विरोध कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर भी लोग अपना गुस्सा दिखा रहे हैं.

#MeToo, #HimToo पर हमला

यह पत्र उन सोशल मीडिया अभियानों पर तगड़ा हमला है, जिसमें महिलाएं अपने साथ हुई किसी ऐसी घटना के बारे में बताती हैं या फिर उस शख्स के बारे में बताती हैं, जिसने उनको छूने या फिर सेड्यूस करने की कोशिश की. #MeToo और #HimToo जैसे कैंपेन में महिलाएं अपनी आपबीती बताती हैं, जिन पर इस पत्र के माध्यम से सीधा हमला बोला गया है.

खैर, डेवेन्यू ने जो कहा है वह उनका अपना विचार हो सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं है और लोग भी उनसे सहमत हों. भारत जैसे देश में तो उनकी इस विचारधारा से कोई भी सहमत नहीं होगा. यहां तक कि खुद फ्रांस के लोग भी उनका विरोध कर रहे हैं. लेकिन बावजूद इसके कैथरीन डेवेन्यू की चिट्ठी कुछ सवाल जरूर खड़े करती है. क्या किसी लड़की को प्रपोज करना गलत है? क्या किसी को अपने दिल की बात कहना गलत है? अगर ये गलत है तो फिर प्यार की शुरुआत कहां से होगी?

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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