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सीडी के हमाम में सभी 'मर्द' नेता नंगे हैं!

    • अनुराग तिवारी
    • Updated: 14 नवम्बर, 2017 05:46 PM
  • 14 नवम्बर, 2017 05:46 PM
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राजनीति में सेक्स सीडी के जरिये आरोप प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है. लेकिन ताजा मामले का हार्दिक पटेल ने जिस तरह सामना किया है और अपने बचाव में जो तर्क दिया है वो होश उड़ाने वाला है.

गुजरात में हुआ सीडी कांड कोई नया नहीं है, अब तो देश में आये दिन किसी न किसी नेता की सीडी जारी होती रहती है. कुछ में कानून दखल देता है और कुछ मीडिया की सुर्खियां बनकर रह जाती हैं. देखें तो, आजतक किसी सीडी कांड में कोई बड़ा फैसला नहीं आया है. उलटा होता यह है कि सीडी दिखा रहा या उससे जुड़ा शख्स लाइमलाइट पा जाता है और नतीजा होता है, सिफर. इस बात का लब्बो-लुबाब यह कि सीडी के हमाम में सब ही 'नंगे' नजर आते हैं.

गुजरात में मतदान के पहले ही पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की एक तथाकथित सीडी आने से भूचाल आया हुआ है तो वहीं हार्दिक पटेल इस मामले को अपनी ही तरह भुनाने में लगे हैं. हार्दिक ने बयान दे दिया है,'मर्द हूं कोई नपुंसक नहीं' इससे तो साफ जाहिर होता है कि जाने-अनजाने वे स्वीकार कर रहे हैं कि सीडी में दिखनेवाले शख्स वही हैं. यही नहीं उन्होंने उस कल्पना को भी जन्म दे दिया है जो कुछ सीडी शूट करते वक़्त अंधेरा हो जाने के चलते नजर नहीं आया.

सीडी कांड से इस बार हार्दिक पटेल चर्चा में है जहां लोग उनकी जबरदस्त आलोचना कर रहे हैं

हाल ही में छत्तीगढ़ के मंत्री राजेश मूणत की सेक्स सीडी के मामले में वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा गिरफ्तार कर लिए गए. आरोप लगा कि वे मंत्री को ब्लैकमेल कर रहे थे और सीडी की 500 कॉपियां बनवा चुके थे. इस मामले में भी मंत्री की जांच होने के बजाय 'शूट द मेसेंजर' वाली कहावत चरितार्थ करते हुए सरकार ने पत्रकार को ही गिरफ्तार करवा दिया. जबकि इस मामले में जांच यह होनी चाहिये थी कि मंत्री के साथ नजर आ रही महिला अपनी सहमति के साथ उनसे संबंध बना रही थी या किसी दबाव में. खैर, मामला कोर्ट में है और अब नजर फैसले पर रहेगी. लेकिन इस मामले में भी मंत्री राजेश मूणत के ऊपर कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है.

इस देश में नेताओं की सीडी सामने आना...

गुजरात में हुआ सीडी कांड कोई नया नहीं है, अब तो देश में आये दिन किसी न किसी नेता की सीडी जारी होती रहती है. कुछ में कानून दखल देता है और कुछ मीडिया की सुर्खियां बनकर रह जाती हैं. देखें तो, आजतक किसी सीडी कांड में कोई बड़ा फैसला नहीं आया है. उलटा होता यह है कि सीडी दिखा रहा या उससे जुड़ा शख्स लाइमलाइट पा जाता है और नतीजा होता है, सिफर. इस बात का लब्बो-लुबाब यह कि सीडी के हमाम में सब ही 'नंगे' नजर आते हैं.

गुजरात में मतदान के पहले ही पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की एक तथाकथित सीडी आने से भूचाल आया हुआ है तो वहीं हार्दिक पटेल इस मामले को अपनी ही तरह भुनाने में लगे हैं. हार्दिक ने बयान दे दिया है,'मर्द हूं कोई नपुंसक नहीं' इससे तो साफ जाहिर होता है कि जाने-अनजाने वे स्वीकार कर रहे हैं कि सीडी में दिखनेवाले शख्स वही हैं. यही नहीं उन्होंने उस कल्पना को भी जन्म दे दिया है जो कुछ सीडी शूट करते वक़्त अंधेरा हो जाने के चलते नजर नहीं आया.

सीडी कांड से इस बार हार्दिक पटेल चर्चा में है जहां लोग उनकी जबरदस्त आलोचना कर रहे हैं

हाल ही में छत्तीगढ़ के मंत्री राजेश मूणत की सेक्स सीडी के मामले में वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा गिरफ्तार कर लिए गए. आरोप लगा कि वे मंत्री को ब्लैकमेल कर रहे थे और सीडी की 500 कॉपियां बनवा चुके थे. इस मामले में भी मंत्री की जांच होने के बजाय 'शूट द मेसेंजर' वाली कहावत चरितार्थ करते हुए सरकार ने पत्रकार को ही गिरफ्तार करवा दिया. जबकि इस मामले में जांच यह होनी चाहिये थी कि मंत्री के साथ नजर आ रही महिला अपनी सहमति के साथ उनसे संबंध बना रही थी या किसी दबाव में. खैर, मामला कोर्ट में है और अब नजर फैसले पर रहेगी. लेकिन इस मामले में भी मंत्री राजेश मूणत के ऊपर कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है.

इस देश में नेताओं की सीडी सामने आना कोई नई बात नहीं और गुजरात से तो इसका पुराना नाता रहा है. कभी संघ द्वारा बतौर प्रभारी भेजे गए बीजेपी नेता संजय जोशी का पॉलिटिकल करियर इसी सीडी कांड के चलते खत्म हो गया था. लेकिन, वो वक्त कुछ और था, ये वक्त कुछ और है कि तर्ज पर अब ऐसे सेक्स सीडीज की धार भोथरी हो चुकी है. हां, एक बात और कि अब ये सीडी कांड के नाम से जाना जाता है तब इसे मीडिया एमएमएस के नाम से बुलाती थी.

इसी तरह आम आदमी पार्टी के नेता संदीप कुमार की राशन कार्ड वाली 'मर्दानगी' भी काफी चर्चा में रही. उनके सीडी सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार होना पड़ा और आजकल वे थोड़ा गुमनामी के अंधेरे में जी रहे हैं. एक तरफ बीजेपी और आप के इस सीडी कांड के चलते संजय जोशी और संदीप कुमार का करियर जरूर खत्म हुआ हो, लेकिन इस तरह की सीडी ने कांग्रेसी नेताओं की 'पॉलिटिकल मर्दानगी' बढ़ाने का काम ही किया है.

साल 2013 में जब हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शमशेर सिंह सुरजेवाला की सीडी या कहें एमएमएस सामने आया तो हरियाणा की पॉलिटिक्स में ऐसा ही भूचाल आया था. तब उनके बेटे रणदीप सिंह सुरजेवाला हरियाणा सरकार में मंत्री थे. विपक्ष बाप की करतूत पर बेटे से इस्तीफा मांगता रह गया, लेकिन पार्टी नेतृत्व को सुरजेवाला पर इतना भरोसा था कि पार्टी ने उनके बाद उनके बेटे का कद बढ़ा दिया. आज रणदीप सिंह सुरजेवाला हरियाणा की राजनीति से बाहर निकल पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं.

इस सीडी कांड पर हार्दिक ने जो तर्क दिया है वो किसी का भी होश उड़ाने के लिए काफी है

इसी तरह कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का भी हाल रहा. उनकी जो सीडी सामने आई उसमें, वे हाईकोर्ट का जज बनवाने के नाम पर एक महिला वकील के साथ अन्तरंग क्षणों में दिखे. हालांकि, इस तरह का लालच देकर किसी महिला को झांसे में लेना कहीं से उचित नहीं था, लेकिन जिस हाल में वे थे उसका नशा शराब और ड्रग्स से ज्यादा खतरनाक है. ऐसे हाल में तो इंसान एक नया ताजमहल या लाल किला बनवा दे, उन्होंने तो सिर्फ एक महिला को जज बनवाने की बात कही थी. इस सीडी के चटकारे तो सभी ने बहुत लिए, लेकिन हुआ कुछ नहीं. कुछ दिन लो-प्रोफाइल में रहने के बाद सिंघवी भी एक बार फिर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं.

सीडी की चर्चा हो और नारायण दत्त तिवारी का नाम न आए, ऐसा संभव ही नहीं. अपनी रंगीन मिजाजी के लिए 'फेमस' हो चुके नारायण दत्त तिवारी एक्टिव पॉलिटिक्स से रिटायर हुए तो आंध्र प्रदेश के गवर्नर बना दिए गए. वहां से जो एमएमएस या सीडी बाहर निकली वह टीआरपी का बड़ा मुद्दा बनी. इसमें बुजुर्ग हो चुके तिवारी कई युवतियों के साथ 'मर्दानगी' वाले अवतार में मगन नजर आए. इस कांड के बाद एक पुराने कोर्ट केस में उनके और उनके बायोलॉजिकल बेटे रोहित शेखर के डीएनए जांच की बात सामने आई, तो उन्होंने उज्ज्वला तिवारी से अपने संबंधों को स्वीकार कर लिया.

साथ ही उन्होंने रोहित शेखर को अपना बेटा माना. कुल मिलाकर, इन बड़े कांडों के बाद ही बुजुर्ग हो रहे तिवारी का पॉलिटिकल करियर भले न जवान हुआ हो लेकिन ऐसे 'जवां मर्द' को हर पॉलिटिकल पार्टी हाथों-हाथ लेने को तैयार थी. पहले समाजवादी पार्टी के तत्कालीन सुप्रीमो मुलायम सिंह ने एनडी और रोहित के बाप बेटे की जोड़ी को अपनी पार्टी में लेने की कोशिश की तो बाद में बीजेपी ने रोहित शेखर को अपने पाले में ले ही लिया.

वापस हार्दिक की सीडी के मुद्दे पर चलते हैं, मीडिया और जनता इस बहस में उलझी है कि सीडी में जो कुछ भी हो रहा है, वह हार्दिक का मौलिक अधिकार है या नहीं? शायद इस बहस का नतीजा भी कुछ नहीं निकलना है, लेकिन हार्दिक इसके चलते मीडिया की कुछ और फुटेज पाने में सफल हो गए हैं. हार्दिक अपने बयान से शायद ओरिजिनल का दावा लखनऊ वाले जैन बंधुओं की सेक्स क्लिनिक का धंधा के भट्ठा बैठा देंगे. हार्दिक के बयान का यह भी मायने निकलता है कि सेक्स सीडी जारी करवाओ मर्द बन जाओ. ऐसे में लखनऊ वाली 'असली' क्लिनिक का पता पूछेगा कौन?

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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