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Vinod Khanna Birthday: एक्टर जिसे याद कर आज भी मचल उठते हैं कई जवां दिल!

    • बिलाल एम जाफ़री
    • Updated: 06 अक्टूबर, 2020 11:40 PM
  • 06 अक्टूबर, 2020 11:40 PM
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विनोद खन्ना (Vindo Khanna ) का शुमार बॉलीवुड (Bollywood) के उन चुनिंदा लोगों में है जो एक बेहतरीन एक्टर तो थे ही साथ ही खूबसूरती के मामले में भी कोई उनकी टक्कर का नहीं था. इंडस्ट्री ने एक दौर वो भी देखा है जब विनोद खन्ना फिल्म को हिट कराने की गारंटी थे.

70 और 80 के दौर में भारत में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए जिन्हें तमाम सेक्टर्स की तरह हमने बॉलीवुड (Bollywood) में भी देखा. चूंकि 70 के दशक में बॉलीवुड अपनी सूरत पूरी तरह से बदल चुका था, इसलिए उस दौर में जो फिल्में बनी उसमें अगर किसी चीज पर सबसे ज्यादा काम हुआ तो वो फ़िल्म का हीरो था. बता दें कि 70 के दशक से पहले हीरो फ़िल्म का एक अदना सा हिस्सा था. लेकिन 70 या उसके बाद फ़िल्म में हीरो एक ज़रूरी हिस्से की तरह देखा गया. बिना उसके शायद ही कोई निर्देशक फ़िल्म की कल्पना कर पाता. इसी दौर में पर्दे पर एंट्री हुई थी एक्टर विनोद खन्ना (Vinod Khanna) की जो अपने आप में एंटरटेनमेंट का पूरा पैकेज थे. विनोद इंडस्ट्री के उन चुनिंदा कलाकारों में थे जिनके पास लुक्स और बॉडी तो थी ही साथ ही जिनकी एक्टिंग में भी धार थी. 6 अक्टूबर ये वो दिन है जब विनोद खन्ना का बर्थडे है. विनोद खन्ना का जन्म बंटवारे से फौरन पहले यानी 6 अक्टूबर 1946 में पाकिस्तान (Pakistan) के पेशावर में हुआ था लेकिन जब इन्होंने बॉलीवुड में एंट्री ली और अपनी एक्टिंग का परिचय दिया तो एक बार तो उस दौर के सिने क्रिटिक्स को भी लगा कि ये शख्स सिर्फ और सिर्फ एक्टिंग के लिए ही बना है.

विनोद खन्ना का शुमार आज भी इंडस्ट्री के सबसे खूबसूरत लोगों में है

तो क्या वाक़ई विनोद खन्ना एक्टर बनना चाहते थे?

इस सवाल का जवाब अपने में दिलचस्प है. जैसी मंझी हुई एक्टिंग विनोद खन्ना ने की है उसे देखकर शायद दर्शक अपना जवाब हां में दें लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था. विनोद खन्ना क्रिकेटर बनना चाहते थे. विनोद खन्ना के बारे में कहा जाता है कि जब विनोद खन्ना ने फिल्मों में जाने का मन बनाया तो उन्हें उनकी मां द्वारा इस शर्त पर इजाजत दी गयी कि यदि वो दो साल के अंदर अंदर फिल्मों में कामयाब नहीं होते हैं...

70 और 80 के दौर में भारत में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए जिन्हें तमाम सेक्टर्स की तरह हमने बॉलीवुड (Bollywood) में भी देखा. चूंकि 70 के दशक में बॉलीवुड अपनी सूरत पूरी तरह से बदल चुका था, इसलिए उस दौर में जो फिल्में बनी उसमें अगर किसी चीज पर सबसे ज्यादा काम हुआ तो वो फ़िल्म का हीरो था. बता दें कि 70 के दशक से पहले हीरो फ़िल्म का एक अदना सा हिस्सा था. लेकिन 70 या उसके बाद फ़िल्म में हीरो एक ज़रूरी हिस्से की तरह देखा गया. बिना उसके शायद ही कोई निर्देशक फ़िल्म की कल्पना कर पाता. इसी दौर में पर्दे पर एंट्री हुई थी एक्टर विनोद खन्ना (Vinod Khanna) की जो अपने आप में एंटरटेनमेंट का पूरा पैकेज थे. विनोद इंडस्ट्री के उन चुनिंदा कलाकारों में थे जिनके पास लुक्स और बॉडी तो थी ही साथ ही जिनकी एक्टिंग में भी धार थी. 6 अक्टूबर ये वो दिन है जब विनोद खन्ना का बर्थडे है. विनोद खन्ना का जन्म बंटवारे से फौरन पहले यानी 6 अक्टूबर 1946 में पाकिस्तान (Pakistan) के पेशावर में हुआ था लेकिन जब इन्होंने बॉलीवुड में एंट्री ली और अपनी एक्टिंग का परिचय दिया तो एक बार तो उस दौर के सिने क्रिटिक्स को भी लगा कि ये शख्स सिर्फ और सिर्फ एक्टिंग के लिए ही बना है.

विनोद खन्ना का शुमार आज भी इंडस्ट्री के सबसे खूबसूरत लोगों में है

तो क्या वाक़ई विनोद खन्ना एक्टर बनना चाहते थे?

इस सवाल का जवाब अपने में दिलचस्प है. जैसी मंझी हुई एक्टिंग विनोद खन्ना ने की है उसे देखकर शायद दर्शक अपना जवाब हां में दें लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था. विनोद खन्ना क्रिकेटर बनना चाहते थे. विनोद खन्ना के बारे में कहा जाता है कि जब विनोद खन्ना ने फिल्मों में जाने का मन बनाया तो उन्हें उनकी मां द्वारा इस शर्त पर इजाजत दी गयी कि यदि वो दो साल के अंदर अंदर फिल्मों में कामयाब नहीं होते हैं तो वापस आकर अपने पिता का पुश्तैनी कारोबार संभाल लें. विनोद ये शर्त मान गए और फिर जो आफलता के पायदान उन्होंने छुए, कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

विनोद खन्ना का क्रिकेट प्रेम!

बात विनोद खन्ना के क्रिकेट प्रेम की हुई है तो बता दें कि इंटरनेट पर विनोद खन्ना के हवाले से एक ट्वीट वायरल हुआ है जिसमें बताया गया है कि वो एकनाथ सोनकर के साथ क्रिकेट खेलते थे और नंबर 4 पर बैटिंग करते थे. लेकिन जब उन्हें लगा कि वो एकनाथ सोनकर नहीं बन सकते तो उन्होंने फिल्मों का रुख किया.विनोद ने कई मौकों पर इस बात को कुबूला था कि क्रिकेट ही उनका पहला प्यार है.

विनोद खन्ना के विनोद खन्ना बनने में अमिताभ का हाथ

जिस फ़िल्म का हम जिक्र कर रहे हैं उसका नाम था कुर्बानी.फ़िल्म 1980 में रिलीज हुई. फ़िल्म को लेकर कहा यही जाता है कि जब ये फ़िल्म बन रही थी फ़िल्म के निर्माता और निर्देशक बतौर एक्टर अमिताभ को कास्ट करना चाहते थे लेकिन समय की कमी के चलते उन्होंने फिल्म को साइन करने से मना कर दिया. अमिताभ की मनाई के बाद विनोद खन्ना को कास्ट किया गया और उसके बाद जो हुआ उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो फ़िल्म जबरदस्त हिट साबित हुई. फ़िल्म में विनोद जीनत अमान के अपोजिट थे और दर्शकों ने भी इस जोड़ी को खूब सराहा.

जब कामयाबी को ठेंगा दिखाकर संन्यास की राह पर आए विनोद खन्ना.

बात 90 के आस पास की है. इस समय तक विनोद इंडस्ट्री के स्थापित कलाकारों में से एक थे. उन्होंने सफलता को भी करीब से देख लिया था.लेकिन इसी बीच विनोद खन्ना का मन उचाट हुआ और वो ओशो रजनीश के संपर्क में आए. विनोद, ओशो से कुछ इस हद तक प्रभावित हुए कि उन्होंने संन्यास ले लिया और ओशो के आश्रम चले गए जहां विनोद करीब 5 साल रहे. बात विनोद खन्ना की सफलता की हुई है तो बता दें कि जिस वक्त विनोद खन्ना ने संन्यास लिया वो अपने करियर के पीक पर थे.

संडे को छुट्टी लेते थे विनोद

विनोद खन्ना के बारे में एक दिलचस्प तथ्य ये भी है कि शशि कपूर के बाद विनोद वो दूसरे अभिनेता थे जो संडे को काम नहीं करते थे और इस दिन को अपने बच्चों और परिवार के साथ एन्जॉय करते थे.

आज विनोद खन्ना हमारे बीच नहीं हैं. मगर जो काम वो कर के चले गए वो आज भी इंडस्ट्री में मील का पत्थर है जिसपर देश को गर्व है. विनोद खन्ना हैंडसम तो थे ही साथ ही एक शानदार शख्सियत के स्वामी थे. इंडस्ट्री के जवां दिलों की धड़कन रह चुके विनोद को हमारी तरफ से भी हैप्पी बर्थडे.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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