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Updated: 08 सितम्बर, 2015 06:08 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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बाबा रामदेव और DRDO के बीच टाई-अप के बाद कई नए रास्ते खुल गए हैं. नया रिकग्निशन मिलने के बाद तो बड़ी बड़ी कंपनियों और संगठनों में बाबा को हायर करने की होड़ मची हुई है.

एक ऑफर नासा से भी मिलने की चर्चा है. असल में, नासा का मानना है कि जितना काम वो करता है उसकी मार्केटिंग ठीक से नहीं हो पाती. इसलिए वो बाबा को हायर करना चाहता था. रेस में कई लोगों को देख आचार्य जी की सलाह पर बाबा ने खुद की नीलामी का ही प्रस्ताव रख दिया. आनन फानन में ई-ऑक्शन के इंतजाम किए गए. नासा और उसके जैसे और भी संगठनों ने किस्मत आजमाई, लेकिन अमेरिका की सबसे बड़ी कंपनी AOL यानी अमेरिका ऑनलाइन के सीईओ ही नसीबवाले निकले.

कंपनी ने बाबा को सबसे पहले बिजनेस हेड का पद ऑफर किया. लेकिन बाबा ने असमर्थता जता दी. बाबा का कहना रहा कि भारत में कुछ सरकारी कमिटमेंट के चलते उनका कंपनी के साथ फुल टाइम जुड़ना मुमकिन नहीं है.

लेकिन इतनी मशक्कत के बाद पास हुआ टेंडर कंपनी किसी कीमत पर न तो गंवाना चाहती थी और न ही बाबा को खोना चाहती थी. इसलिए उसने चीफ बिजनेस कनसल्टैंट का पद ऑफर किया. बाबा ने ये ऑफर खुशी खुशी स्वीकार कर लिया.

इस दौरान बाबा ने अपनी ओर से बस एक शर्त रखी थी. किसी भी सूरत में वो अपने स्वदेशी सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे. अगर ऐसी स्थिति बनी तो कंपनी को उनका स्वदेशी प्रोडक्ट अपनी बिक्री सूची में शामिल करना होगा.

ऐसे कंडीशन में मैगी की जगह पतंजलि आटा नूडल्स का उदाहरण सामने आया गया.

चूंकि मोदी से दोस्ती के चलते बराक ने भारत के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के लिए अमेरिकी कंपनियों को अलग से विशेषाधिकार के प्रावधान कर रखे हैं. अगर कंपनी बाबा की ये बात नहीं मानती तो अमेरिकी नियमों का पालन न करने का आरोप बनता. फिर, कंपनी ने बाबा की ये शर्त भी मंजूर कर ली. ऑनलाइन एग्रीमेंट में टर्म्स और कंडीशंस पहले से टिक किए होते हैं. अगर किसी को मंजूर न हो तो उसे अनटिक कर सकता है. बाबा ने आचार्यजी की पढ़ने की सलाह को ओवररूल करते हुए झट से जमा वाला बटन प्रेस कर दिया.

पेंच तब फंसा जब बाबा के सामने नए बिजनेस प्लान से संबंधित कुछ दस्तावेज अप्रूवल के लिए पहुंचे. एक डॉक्युमेंट देखने के बाद तो बाबा के जैसे होश ही उड़ गए. वो पोर्न बिजनेस से संबंधित था.

अब बाबा की समस्या है कि स्वदेशी के नाम पर पोर्न बिजनेस को कैसे विस्तार दें. देशी स्टारों में अभी पोर्न का तमगा लगाने का साहस किसी में नहीं दिख रहा. ग्राफिक नॉवेल का आइडिया भी दिमाग में आया पर सविता भाभी के पाठक इतनी आसानी से उसमें फंसने वाले नहीं. अचानक बाबा को लगा जैसे अर्धमत्स्येंद्रासन में अटक गए हैं.

देसी पोर्न परोसें तो कैसे परोसें? थक हार कर बाबा ने आचार्य जी से समस्या का समाधान तलाशने को कहा है.

बाबा की मुश्किल ये है कि अमेरिकी पोर्न को भारत में प्रमोट कर नहीं सकते क्योंकि यहां पर बैन लगा हुआ है. और अगर कंपनी घाटे को पूरा करने के लिए देसी पोर्न की डिमांड रखती है तो प्रोडक्शन और फिर सप्लाई कहां से करें. पहले की बात और थी. खुद के सिद्धांत आड़े आते तो आउटसोर्स कर लेते. आखिर बिजनेस के भी तो कुछ उसूल होते हैं. अब बैन के बाद तो ये संभव नहीं है.

कॉन्ट्रैक्ट के तहत दोनों में से कोई भी पार्टी अगर पीछे हटती है तो अगले पांच साल तक उन इलाकों में बिजनेस नहीं कर सकती जो बिजनेस डील के दायरे में आते हैं. ऊपर से साल भर के एक्स्पेक्टेड बिजनेस प्रॉफिट का 20 फीसदी बतौर जुर्माना भी भरना पड़ेगा.

अगर अमेरिकी कंपनी बराक से शिकायत करती है और वो उसे भारत को फॉरवर्ड करती है तो क्या होगा? फिर अपनी सरकार को भी समझाना पड़ेगा कि मेक इन इंडिया के तहत ऐसा करार किया ही क्यों?

फिलहाल आचार्य जी समाधान की खोज में नेपाल की तराई में भ्रमण कर रहे हैं, सुना तो ऐसा ही जा रहा है.

लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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