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Updated: 26 मार्च, 2015 10:21 AM
मधुरेन्द्र सिन्हा
मधुरेन्द्र सिन्हा
  @madhurendra.sinha
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मोबाइल फोन बनाने वाली भारतीय कंपनी माइक्रोमैक्स ने भारत में पहला स्थान पा लिया है. उसने दक्षिण कोरिया की सैमसंग को पीछे छोड़ दिया. फीचर और स्मार्टफोन दोनों ही सेगमेंट में वह आगे बढ़ गई है. गुड़गांव स्थित इस कंपनी ने सही रणनीति से कोरिया की इस विशालकाय कंपनी को धूल चटा दी. आइए देखते हैं कि वे कौन सी 8 बातें थीं जिन्होंने इस कंपनी को पहले पायदान पर पहुंचा दिया.

1. माइक्रोमैक्स ने कीमत और प्रॉडक्ट में बढ़िया संतुलन बनाया. उसने मोबाइल फोन की कीमत के अनुरूप उसमें फीचर भरे. उनकी कीमतें हर वर्ग के लोगों के लिए थीं, खासकर उस वर्ग के लिए जो कम दाम में ज्यादा फीचर चाहता है. उसने कम कीमत पर भी काफी फीचर वाले फोन पेश किए.

2. कंपनी ने बिल्कुल सस्ते मॉडल की बजाय मिड लेवल के फोन पर ज़ोर दिया क्योंकि इस वर्ग में खरादारी ज्यादा होती है. उसने 6,000 रुपए से लेकर 12,000 हजार रुपए तक के फोन पेश किए. कंपनी ने कम पैसे में अधिक से अधिक देने का वादा किया.

3. कीमतों की ही तरह माइक्रोमैक्स ने हर साइज़ के फोन बनाए. उसने अपने प्रतिद्वंद्वियों के अनुसार अपने फोन का आकार रखा. उसने स्क्रीन के मामले में ज्यादा प्रयोग नहीं किया और पांच इंच के स्क्रीन पर ही ध्यान लगाए रखा. इसका उसे फायदा हुआ क्योंकि आम भारतीय खरीदार न तो बहुत बड़े स्क्रीन पसंद करता है और न ही बहुत छोटे.

4. कंपनी ने मार्केटिंग का पूरा जाल बिछा दिया और अपने फोन हर तरह के स्टोरे से बेचकर यह सुनिश्चित किया कि यह सुलभ हो और लोगों को इसके लिए भटकना न पड़े. उसकी टीम किसी भी हैंडसेट के सफल होते ही उसके लिए तुरंत और सप्लाई की व्यवस्था करती थी. चीन के संयंत्रों से उनकी सप्लाई फौरन हो जाती थी.

5. माइक्रोमैक्स ने अपने फोन के प्रचार के लिए दमदार विज्ञापनों का सहारा लिया. उसके चमकदार विज्ञापनों ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया. उसके कैनवस सीरीज के हैंडसेट के टीवी विज्ञापन बहुत बढ़िया थे और लोगों को पसंद आए. कंपनी ने बड़े स्पोर्ट्स इवेंट में भी अपने टीवी विज्ञापन दिए जिससे उसके उत्पादों की प्रतिष्ठा बढ़ी. ऑस्ट्रेलियन ऐक्टर ह्यू जैकमैन के टीवी विज्ञापन पर उसने 30 करोड़ रुपए खर्च किए.

6. कंपनी ने भारतीय ग्राहकों की नब्ज पहचानी और उनकी जरूरत के हिसाब से ही मॉडल पेश किया. वह महंगे से महंगे फोन के हल्के भारतीय संस्करण पेश करके बड़ी कंपनियों को चुनौती देती रही है. मार्केट की मांग के अनुसार वह मॉडल पेश करती है.

7. नोकिया के बिक जाने का फायदा कंपनी को मिला क्योंकि उसने भारतीय बाज़ार में जबर्दस्त पैठ बना रखी थी. नोकिया ऐसा ब्रांड है जिसे भारतीय जनता ने काफी पसंद किया लेकिन माइक्रोसॉफ्ट के इसे अधिग्रहण कर लेने से उसका विस्तार रुक सा गया.  

8. माइक्रोमैक्स ने अपने हैंडसेट में स्थानीय भाषा को वरीयता दी और देश की कई भाषाओं को अपने फोन में समाहित किया जिसका उसे क्षेत्रीय स्तर पर लाभ मिला.

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