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Updated: 30 जुलाई, 2019 10:27 PM
प्रवीण शेखर
प्रवीण शेखर
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कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के दामाद और कैफे कॉफी डे के संस्थापक-मालिक वीजी सिद्धार्थ कर्नाटक के मैंगलुरु से अचानक लापता हो गए हैं. पुलिस के मुताबिक 'सिद्धार्थ की गुमशुदगी का मामला उनके ड्राइवर ने मैंगलुरु में एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया था. शिकायतकर्ता ड्राइवर बसवराज पाटिल द्वारा पुलिस स्टेशन में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, सिद्धार्थ नेत्रवती नदी के पुल पर कार से उतर गए और यह कहकर कि वह थोड़ी देर सैर करना चाहते हैं, उसे पुल के दूसरे छोर पर इंतजार करने के लिए बोलकर चले गए, लेकिन एक घंटे बाद भी नहीं लौटे. रिपोर्ट के मुताबिक, कॉफी किंग सिद्धार्थ ने लापता होने से पहले कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स और कॉफी डे परिवार' को संबोधित एक पत्र लिखा था.

इस पत्र में, उन्होंने एक प्राइवेट इक्विटी पार्टनर से 'जबरदस्त दबाव' जिक्र किया है. सिद्धार्थ ने यह भी जिक्र किया कि वह 'सही लाभदायक व्यवसाय मॉडल बनाने में विफल रहे', और उन्होंने लोगों को निराश करने के लिए बहुत खेद भी जताया. वीजी सिद्धार्थ के अचानक गायब हो जाने से मंगलवार कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजारों को बेहद झटका लगा है.

वीजी सिद्धार्थ, कर्नाटक, उद्यमी  आत्महत्या, लापता, VG Siddharthaवीजी सिद्धार्थ का शुमार उन लोगों में रहा है जिसने बहुत कम समय में अपना बिजनेस इम्पायर खड़ा किया

कॉफी किंग वीजी सिद्धार्थ का कारोबारी सफर

वीजी सिद्धार्थ कॉफी कैफ़े डे ग्रुप के प्रमोटर हैं. उनका परिवार 130 से अधिक वर्षों से कॉफी के व्यवसाय में है. कॉफी डे ग्रुप का व्यवसाय कॉफी रिटेलिंग, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी पार्कों (एसईजेड और एसटीपी योजना), वित्तीय सेवाओं और टेक्नोलॉजी कंपनियों से जुड़ा है. कैफे कॉफी डे कॉफी खुदरा व्यापार में मार्किट लीडर का पहचान बनाये हुए है. उन्होंने माइंडट्री लिमिटेड में अपनी पूरी 20 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी लार्सन एंड टुब्रो (L &T) को 18 मार्च 2019 को 3,300 करोड़ में बेचा था.

कॉफी किंग वीजी सिद्धार्थ का कारोबारी सफर काफी दिलचस्प रहा है.

कर्नाटक के चिकमंगलुरु में जन्में सिद्धार्थ का नाता ऐसे परिवार से है, जो लंबे समय से कॉफी बिजनेस से जुड़ा था. उनके परिवार के पास कॉफी के बागान थे, जिसमें महंगी कॉफी उगाई जाती थी. हालांकि उन्होंने परिवार से मिली इस विरासत को अपना सहारा नहीं बनाया और मैंगलुरु यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री ली. वह बाद में मुंबई आ गए और जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज (अब जेएम मॉर्गन स्टैनली) में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में काम की शुरुआत की. यहां से उन्होंने शेयर बाजार की अच्छी समझ डेवलप की. उन्होंने कभी 5 लाख रूपये के साथ अपने सफर की शुरुआत की और आज वह भारत के 'कॉफ़ी किंग' कहे जाते हैं.

इसके बाद सिद्धार्थ ने कर्नाटक में कॉफी बिजनेस शुरू किया. उन्होंने घरेलू और ग्लोबल स्तर पर कॉफी बेचना शुरू किया. उनकी कॉफी ट्रेडिंग कंपनी अमलगामेटेड बीन कंपनी (ABC) का सालाना टर्नओवर 2500 करोड़ हो गया. करीब एक दशक तक फाइनैंशियल सर्विसेज में हाथ ज़माने के बाद सिद्धार्थ ने 1996 में कैफ़े कॉफ़ी डे की शुरुआत की. उनका यह कारोबार बेहद सफल रहा और इसने भारत में कॉफ़ी के बिजिनेस को नई दिशा दी.

कंपनी के पास आज 1,750 कैफ़े हैं. भारत के अलावा ऑस्ट्रिया, कराची, दुबई और चेक रिपब्लिक में भी कंपनी के आउटलेट हैं. इसका सीधा मुकाबला टाटा ग्रुप की स्टारबक्स के अलावा अपेक्षाकृत छोटी कैफे चेन बरिस्ता और कोस्टा कॉफी से है. स्टारबक्स के भारत में 146 स्टोर हैं. हालांकि, पिछले दो साल में सीसीडी के विस्तार की रफ्तार घटी है. कर्ज तो बढ़ा ही है, चायोस और चाय पॉइंट सरीखे टी कैफे से भी चुनौती मिल रही है. सीसीडी ने वित्त वर्ष 2018 में 90 स्मॉल फॉरमेट स्टोर बंद किए थे. वीजी सिद्धार्थ ने सीसीडी के अलावा माइंडड्री, ग्लोबल टेक्नोलॉजी वेंचर्स लिमिटेड, डार्क फॉरेस्ट फर्नीचर कंपनी, SICAL लॉजिलिस्टिक्स में भी निवेश किया. उन्होंने 3000 एकड़ जमीन पर केले के पेड़ लगाए और केले का निर्यात भी करने लगे.

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लेखक

प्रवीण शेखर प्रवीण शेखर @praveen.shekhar.37

लेखक इंडिया ग्रुप में सीनियर प्रोड्यूसर हैं

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