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Updated: 12 जुलाई, 2020 12:10 AM
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‘विकास दुबे कानपुर वाला’. 10 दिन पहले कानपुर के बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करके गैंग्स्टर विकास दुबे फरार हो जाता है. यूपी पुलिस और एसटीफ समेत सैकड़ों पुलिसकर्मी विकास दुबे को खोजने की जी-जान से कोशिश करते हैं, लेकिन वह किसी के हाथ नहीं लगता. वह एक हफ्ते तक कानपुर, दिल्ली, हरियाणा में घूमते हुए खुद को बचाने की कोशिशें करता रहता है. आखिरकार एक हफ्ते बाद बड़े नाटकीय तरीके से वह मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित एक मंदिर में यह बोलते हुए सरेंडर करता है कि मैं विकास दुबे हूं, कानपुर वाला. पुलिस उसे गिरफ्तार करती है और उज्जैन से कानपुर लाने के दौरान कानपुर से कुछ किलोमीटर पहले विकास दुबे का एनकाउंटर हो जाता है. पुलिस इस एनकाउंटर के बारे में कहती है कि सड़क पर मवेशी आ जाने के कारण अचानक ब्रेक लगने से विकास दुबे की गाड़ी पलटती है और वह पुलिसकर्मी की बंदूक छीनकर भागने की कोशिश करता है, जिसके बाद पुलिस उसे मार गिराती है.

आपको यह घटना किसी फिल्म या वेब सीरीज में दिखाई जाने वाली घटना लगती होगी ना? दरअसल, फिल्मों और वेब सीरीज में ही तो इस तरह की कहानी दिखाई जाती है. अब वही विकास दुबे मुंबई और देश के अन्य हिस्सों में बैठे फिल्ममेकर्स और कहानीकारों की जुबां पर है और हर तरफ यह चर्चा चल रही है कि आने वाले दिनों में विकास दुबे पर एक अच्छी फिल्म या वेब सीरीज बन सकती है. अनुराग कश्यप, रोहित शेट्टी और तिग्मांशु धूलिया समेत अन्य डायरेक्टर्स को लोग सोशल मीडिया पर टैग करके बोल रहे हैं कि ये कहानी तो काफी मजेदार है, कब बना रहे हैं फिल्म या वेब सीरीज? यहां तक कि विकास दुबे के रूप में कौन सा किरदार सही रहेगा, इसकी भी चर्चा हो रही है. हमारे समाज में विलेन और गैंगस्टर के किरदार को फैंटेसाइज करके दर्शकों के सामने मसालों से भरी फिल्में और सीरियल्स पेश करने का सफल चलन लंबे समय से चलता आ रहा है. अब वेब सीरीज के दौर में ये और निखरकर सामने आ रहा है. चाहे वह यूपी का श्रीप्रकाश शुक्ला हो, मुख्तार अंसारी हो, ब्रजेश सिंह समेत अन्य हो या राजस्थान का आनंदपाल सिंह. इन किरदारों पर हाल में वेब सीरीज बनी है और हिट भी रही है. अगला नंबर विकास दुबे का है.

सिनेमा और समाज की घटनाएं एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं

सिनेमा समाज में घटी घटनाओं को लोगों के सामने विजुअल मीडियम के रूप में प्रस्तुत करती है या फिल्मों में दिखाई गई घटनाओं से समाज और लोगों पर प्रभाव पड़ता है? यह सवाल वर्षों से लोगों के मन में कौंधता रहा है और इसका संतोषजनक जवाब अब तक नहीं मिला है. लेकिन समय-समय पर ऐसी कई घटनाएं घटी हैं, जो बाद में थोड़ी काल्पनिकता के साथ पर्दे या टीवी पर दिखी है. अब तो समय ऐसा आ गया है, जब हर बड़ी घटना, जो मीडिया और सोशल मीडिया में कुछ दिनों तक छाई रहती है, उसपर वेब सीरीज और फिल्में बन जाती हैं और ये लोगों को पसंद भी आती है. चाहे कोरोना संकट हो, बिहार के दरभंगा की एक 13 साल की लड़की ज्योति कुमारी का अपने पिता को साइकल पर बिठा 1100 किलोमीटर दूर बिहार पहुंचना हो या अन्य सामाजिक और आपराधिक घटनाएं हों. हाल के दिनों में इन सभी वास्तविक घटनाओं पर आने वाले समय में फिल्में और वेब सीरीज देखने को मिलेंगी. अब भी मनोरंजन इमोशन, दर्द और हिंसा के साथ ही रहस्य और रोमांच जैसी विधाओं पर निर्भर है. अगर आपकी कहानी में ये सारी बाते हैं तो फिर इसे वेब सीरीज या फ़िल्म की शक्ल देकर लोगों के सामने प्रस्तुत कर दीजिए, लोग आपकी कहानी को आत्मसात कर लेंगे.

एकदम फिल्मी कहानी है

बीते दिनों विकास दुबे ने जिस तरह फ़िल्मी अंदाज में सरेंडर किया और फिर अगले ही दिन और ज्यादा नाटकीय तरीके से उसका एनकाउंटर हुआ, इससे लोगों के मन में ये सवाल ज्यादा उठ रहे हैं कि अगर विकास दुबे जिंदा होता तो क्या खाकी और खादी में छिपे बड़े नकाबपोशों के चेहरे से पर्दा उठता? क्या विकास दुबे सत्ता और प्रशासन की हाथों की कठपुतली बनकर रह गया, जिसे समय बीत जाने पर मार दिया गया. विकास दुबे के एनकाउंटर की जिस तरह से खबर आई, उसने लोगों के मन में कई सवाल पैदा किए. दिन भर चर्चा होती रही कि विकास दुबे का फर्जी एनकाउंटर किया गया और ऐसा तो फिल्मों में दिखाया जाता है. इसके बाद राजनीतिक और फिल्मी गलियारों से काफी प्रतिक्रियाएं आईं, जिनमें यूपी पुलिस की कार्यशैली और विकास दुबे के एनकाउंटर पर सवाल उठाए गए.

तापसी पन्नू ने क्या कह डाला

फेमस एक्ट्रेस तापसी पन्नू ने भी विकास दुबे के एनकाउंटर पर हैरानी जताई और वैसे लोगों को खरी-खोटी सुनाई, जो कहते हैं कि फिल्मों की वजह से सोसाइटी और लोगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है. तापसी ने ट्वीट में लिखा- क्या बात है, ये तो हमने कभी सोचा ही नहीं था और फिर हम लोग बॉलीवुड पर ये आरोप लगाते हैं कि वो वास्तविकता से दूर है. तापसी ने एक साथ कई लोगों को निशाने पर लिया, जिसमें यूपी सरकार, पुलिस प्रशासन और सामाजिक घटनाओं के लिए फिल्मों को दोष देने वाऐ लोग शामिल हैं. अब आलम ये है कि विकास दुबे ने जो-जो किया और उसके साथ जो-जो हुआ, वह ऐसी कहानी के रूप में सामने आ रही है कि विकास दुबे पर फिल्म और वेब सीरीज बनाने की मांग और कवायदें तेज हो गई हैं.

अभी और बहुत कुछ सामने आएगा

55 वर्षीय विकास दुबे की बीते 30 साल की जिंदगी, उसका पॉलिटिकल कनेक्शन, पुलिस से मिलता सहयोग और कानपुर में रहते हुए लखनऊ के राजनीतिक आकाओं के लिए काम करना... इन सारी बातों की तहें उधेड़ी जा रही हैं और इनमें काल्पनिकता का तड़का लगाकर फिल्म या वेब सीरीज के रूप में लोगों के सामने पेश करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं. यहां तक कि किसी ने ये खबर भी चला दी कि विकास दुबे के रोल में मनोज बाजपेयी सटीक रहेंगे, जिसके बाद मनोज ने इस खबर का खंडन किया और कहा कि फिल्मी विकास दुबे बनने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है.

रंगबाज, रक्तांचल जैसी कई वेब सीरीज बनी हैं

उल्लेखनीय है कि बीते 2 साल के दौरान भारत में गैंग्स्टर की वास्तविक जिंदगी या उनसे प्रभावित कहानियों पर कई वेब सीरीज बन चुकी हैं सबसे पहले ओटीटी प्लैटफॉर्म जी5 पर शाकिब सलीम रंगबाज नामक वेब सीरीज में यूपी के गैंग्स्टर श्रीप्रकाश शुक्ला बनकर आए. यह वेब सीरीज खूब देखी गई. इसके बाद इसका दूसरा सीजन भी आया, जिसमें जिमी शेरगिल राजस्थान के गैंग्स्टर आनंदपाल सिंह की भूमिका में दिखे. इसके बाद मिर्जापुर, भौकाल और रक्तांचल जैसी वेब सीरीज भी कई गैंग्स्टर की कहानी बताती दिखी. अब इसी कड़ी में विकास दुबे का नाम भी शामिल हो गया है, जिसपर आने वाले समय में फिल्म या वेब सीरीज बनती है तो इसमें आश्चर्य की बात नहीं होगी, आखिरकार समाज तो यही चाहता है और समाज में घटी घटनाओं से ही तो फिल्में बनती हैं.

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