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Updated: 25 जुलाई, 2022 06:02 PM
मुकेश कुमार गजेंद्र
मुकेश कुमार गजेंद्र
  @mukesh.k.gajendra
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''कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता''...निदा फ़ाज़ली के गजल की ये पंक्तियां बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता राजीव कपूर की जिंदगी पर सटीक बैठती हैं. राजीव फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े कपूर खानदान में पैदा हुए. पिता हिंदी सिनेमा के शोमैन राजकपूर थे. ऋषि कपूर जैसा बड़ा भाई था, जिसकी अदा की दुनिया दीवानी थी. इन सबके बावजूद राजीव को कभी वो नहीं मिला, जिसके वो हकदार थे. जवान हुए तो पिता के व्यवहार और बड़े भाई के बर्ताव की वजह से दुखी रहने लगे. शादी के बाद पत्नी के साथ भी ज्यादा दिन तक नहीं निभ सकी, जिसके बाद उनको तलाक लेना पड़ा. अधेड़ हुए तो अपनी गुमनाम जिंदगी में अकेले रहने लगे. अचानक उनके बारे में लोगों ने तब जाना, जब उनकी मौत हुई. 9 फरवरी 2021 को उनके निधन के बाद उनके नाम की चर्चा हुई तो पता चला कि उनकी एक फिल्म भी रिलीज होने वाली है.

राजीव कपूर के निधन के अगले महीने यानी 4 मार्च 2021 को उनकी आखिरी फिल्म 'तुलसीदास जूनियर' को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया गया. इस फिल्म में उनके साथ अभिनेता संजय दत्त, बाल कलाकार वरुण बुद्धदेव और दिलीप ताहिल जैसे कलाकार अहम किरदारों में हैं. ये फिल्म बिना शोर बिना किसी प्रमोशन के रिलीज हुई थी. लेकिन कहा गया है ना ''सफलता संसाधनों की मोहताज नहीं होती''. इस फिल्म के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. एक प्रेरणदाई कहानी और कलाकारों के दमदार अभिनय की वजह से फिल्म लोगों को बहुत पसंद आई. आईएमडीबी पर फिल्म को मिली 7.5 रेटिंग इस बात की तस्दीक करती है. यहां तक तो ठीक था, लेकिन किसी को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि ये फिल्म इस साल की सबसे बेहतरीन फिल्म साबित होने वाली है. फिल्म 'तुलसीदास जूनियर' को साल 2021 की बेस्ट हिंदी फीचर के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला है.

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कमबैक फिल्म, जो आखिरी साबित हुई

'तुलसीदास जूनियर' को राजीव कपूर की कमबैक फिल्म माना गया था. लेकिन किसी को नहीं पता था कि ये उनकी आखिरी फिल्म साबित होगी, जो कि 32 साल के लंबे अंतराल के बाद रिलीज हुई. इससे पहले उनकी आखिरी फिल्म साल 1990 में 'जिम्मेदार' रिलीज हुई थी. इसमें उन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाया था. इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी नहीं मिली. इसकी वजह से राजीव के करियर पर ब्रेक लग गया. 32 साल बाद जब उन्होंने वापसी की तो कमाल की फिल्म में काम किया. लेकिन अफसोस अपनी इस कामयाबी का जश्न मनाने के लिए वो आज इस दुनिया में नहीं है. सही मायने में ये नेशनल फिल्म अवॉर्ड उनको सच्ची श्रद्धांजलि है. इससे पहले साल 1985 में राज कपूर के निर्देशन में बनी 'राम तेरी गंगा मैली' उनके करियर की सबसे सफल फिल्म थी. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कई सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे, लेकिन इसकी सफलता का सारा क्रेडिट फिल्म की एक्ट्रेस मंदाकिनी को मिल गया. फिल्म में खुद लीड एक्टर और पिता डायरेक्टर, इसके बावजूद क्रेडिट एक्ट्रेस को, ये बात राजीव कपूर को अंतिम समय तक कचोटती रही.

"फिल्म 'तुलसीदास जूनियर' का नेशनल अवॉर्ड जीतना मेरे रियल और रील पिता दोनों को एक सच्ची श्रद्धांजलि है. मैं कल्पना नहीं कर सकता कि हमने यह पुरस्कार जीता है. तुलसीदास जूनियर मेरा पैशन प्रोजेक्ट था, जिसे मैंने अपने पिता को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाया था. इसमें राजीव कपूर ने स्क्रीन पर मेरे पिता की भूमिका निभाई थी. दुर्भाग्य से, फिल्म की रिलीज से पहले ही मेरे पिता और राजीव सर का निधन हो गया. हालांकि, मुझे यकीन है कि यह उनका आशीर्वाद था जिसके परिणामस्वरूप आज यह जीत मिली है''.- मृदुल, फिल्म निर्देशक, तुलसीदास जूनियर

स्नूकर पर बनी बॉलीवुड की पहली फिल्म

बॉलीवुड में स्पोर्ट्स फिल्मों की भरमार है. इसमें क्रिकेट, बॉक्सिंग, फुटबॉल, एथलीट, गोल्फ, कबड्डी और हॉकी जैसे खेलों पर फिल्में बन चुकी हैं. लेकिन 'तुलसीदास जूनियर' स्नूकर जैसे खेल पर बनी पहली हिंदी फिल्म है. फिल्म में राजीव कपूर तुलसीदास के किरदार में हैं, जो एक स्नूकर खिलाड़ी है. तुलसीदास कलकत्ता क्लब स्नूकर चैंपियनशिप जीतना चाहता है, लेकिन अपने प्रतिद्वंद्वी जिमी टंडन (दलीप ताहिल) से हर बार हार जाता है. इसी तरह एक अहम मैच में तुलसीदास जब जिमी से हारता है, तो बुरी तरह से टूट जाता है. ये बात उसके छोटे बेटे (वरुण बुद्धदेव) को परेशान कर देती है. वो अपने पिता के सपने को पूरा करने का फैसला करता है. इसके लिए वरुण अपने परिवार से छुपकर छोटी उम्र में स्नूकर सीखना शुरू कर देता है. इसमें स्नूकर चैंपियन मोहम्मद सलाम (संजय दत्त) उसकी मदद करता है. वरुण के स्नूकर चैंपियनशिप जीतने की कहानी दिलचस्प और प्रेरणादाई है.

राज कपूर के उपेक्षा के शिकार थे राजीव?

राजीव कपूर को कभी अपने पिता राज कपूर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला. साल 1988 में राज कपूर के निधन के बाद तो राजीव कपूर का हाल और भी बुरा गया था. राजीव कपूर को लगा कि जब उन्हें अपने पिता की सबसे अधिक जरूरत थी तभी वह उन्हें छोड़कर चले गए. राज कपूर के खास दोस्त डॉक्टर नरेंद्र पांड्या ने राजीव कपूर की हालत बताते हुए कहा था, ''राज कपूर के निधन के एक हफ्ते बाद चिंपू (राजीव कपूर) मेरे पास आया. उसके सिर पर चोट लगी थी. वह कांप रहा था. अपना होश खो बैठा था.'' एक इंटरव्यू में शम्मी कपूर ने बताया था कि राजीव कपूर के करियर की शुरुआत बेहद गलत तरीके से हुई थी. वह शुरुआत से ही उनको कॉपी करने की कोशिश किया करते थे. ऐसे में लोग उनको देखकर यह कहने लगते थे कि ये तो शम्मी कपूर है. राजीव कपूर भाग्यशाली नहीं थे. वह बतौर एक्टर बेहद अच्छे थे, लेकिन उनका करियर बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया.

लेखक

मुकेश कुमार गजेंद्र मुकेश कुमार गजेंद्र @mukesh.k.gajendra

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप में सीनियर असिस्टेंट एडिटर हैं.

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