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Updated: 02 मार्च, 2021 10:00 PM
मुकेश कुमार गजेंद्र
मुकेश कुमार गजेंद्र
  @mukesh.k.gajendra
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बॉलीवुड के फिल्‍मी सितारों की गैलेक्सी में टाइगर श्रॉफ ध्रुव तारे की तरह बिल्कुल अलग चमकते हुए दिखाई देते हैं. एक फिल्‍मी सितारे की संतान होकर उन्‍होंने जो मुकाम पाया है, उसका विवादों में न घिरना बताता है कि टाइगर में कुछ तो स्पेशल है. वे कुछ तो अलग कर ही रहे हैं, जिसने उन्हें सबसे अनूठा बनाया हुआ है. टाइगर श्रॉफ ने अपने छोटे से करिअर में जिन बुलंदियों को छुआ है, वह निश्चित ही एक पिता के रूप में जैकी श्रॉफ के लिए गौरव की बात है. टाइगर श्रॉफ पूरे बॉलीवुड के लिए एक नजीर हो सकते हैं कि आखिर चमक-दमक भरी ग्लैमर इंडस्ट्री में बेदाग रहे कैसे आगे बढ़ा जा सकता है.

बॉलीवुड एक्टर जैकी श्रॉफ और प्रोड्यूसर आएशा के घर जन्मे टाइगर श्रॉफ की आज अपनी खुद की पहचान है. लाजवाब एक्टिंग, शानदार डांस और हैरतअंगेज स्टंट्स से हर उम्र के दर्शकों को दीवाना बना देने वाले इस स्टार ने फिल्म 'हीरोपंती' से बी-टाउन में डेब्यू किया था. उसके बाद एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में देने वाले टाइगर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. बॉलीवुड के अन्य कलाकारों की तरह उनको कभी किसी 'कैंप' में आते-जाते नहीं देखा गया. न ही कभी वह किसी गैंग के हिस्सा बने. अपने टैंलेंट के दम पर वो आज फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम हासिल कर चुके हैं. बॉलीवुड की गॉसिप दुनिया से कोसों दूर रहने वाले टाइगर का आज जन्मदिन है.

tiger_030221022456.jpgफिल्म 'बागी' और उसके सीक्वल 'बागी 2' की सफलता ने टाइगर श्रॉफ को सुपरस्टार बना दिया.

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में उनके फॉलोवर्स हैं. फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लाखों लोग उनके जिमिंग, मार्शल आर्ट्स, डांस और गाने के वीडियो देखते, सुनते और पसंद करते हैं. कोरोना काल में जब पूरा देश ठहर सा गया था. फिल्म इंडस्ट्री में सारे काम बंद हो गए थे. उस वक्त टाइगर सोशल मीडिया पर अपने वीडियो के जरिए लोगों को लगातार मोटिवेट कर रहे थे. टाइगर मायानगरी में रहते हुए उस ध्रुवतारे की तरह हैं, जिसकी अपनी चमक है. वह खुद को बॉलीवुड की लीग से अलग करके अपना ऐसा अलहदा और असरदार किरदार गढ़ रहे हैं, जिसका हर कोई मुरीद हैं. बेहद सौम्य, शांत, सरल और मृदुभाषी टाइगर ने अपने करियर के महज 6 साल के अंदर कई सुपरहिट फिल्में दी हैं, लेकिन सफलता कभी सिर चढ़कर नहीं बोली.

मेहनत: चॉकलेटी इमेज तोड़ बने एक्शन स्टार

मुझे याद है, जब टाइगर की डेब्यू फिल्म 'हीरोपंती' रिलीज हुई तो हर कोई उस चॉकलेटी चेहरे को देख दंग रह गया था. लेकिन उस चॉकलेटी हीरो के पीछे छुपे एक्शन स्टार ने जब अपनी परफॉर्मेंस दिखाई तो बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई उसका दीवाना हो गया. दीवाना भी ऐसा कि पहली फिल्म ने ही बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड तोड़ दिए. टाइगर को अपने समकालीन अभिनेताओं से अलग खड़ा कर दिया. हमारे समाज और सिनेमा में चाकलेटी चेहरों को आसानी से स्वीकार किया जाता है. इसके साथ ही कभी-कभी रफ-टफ और खुरदरेपन को भी स्वीकार किया जाता है. शेख मुख्तार पहले खुरदरे शख्स थे, जिन्हें स्टार माना गया था. उन्होंने मेहबूब खान की फिल्म 'रोटी' में एक ट्राइबल की भूमिका निभाई थी. उसी तरह मिथुन चक्रवर्ती भी अपनी पहली फिल्म 'मृगया' में ट्राइबल की भूमिका में देखे गए थे. आगे चलकर मिथुन दा 'डिस्को डांसर' के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर हुए थे.

उदारता: सुभाष घई के लिए मुफ्त में फिल्म करना चाहते थे, क्योंकि...

एक किस्सा सुनाया जाता है, टाइगर श्रॉफ के जन्म के वक्त सुभाष घई उनके घर पहुंचे थे. पहली बार टाइगर को देखकर सुभाष ने उनके हाथ में 101 रुपए रखते हुए कहा, 'यह साइनिंग अमाउंट है. तुम्हें बतौर हीरो मैं ही लॉन्च करूंगा.' टाइगर बड़े हुए और जब उन्होंने फिल्मों में अभिनय के प्रति रूचि दिखाई तो चर्चाएं गर्म हुई कि सुभाष घई अपनी सुपरहिट फिल्म 'हीरो' का रीमेक टाइगर को लेकर बनाएंगे. टाइगर ने भी सुभाष घई को यह प्रस्ताव दिया कि वे बिना पारिश्रमिक लिए उनके लिए एक फिल्म करना चाहते हैं, क्योंकि उन्होंने उनके पिता जैकी श्रॉफ को पहला मौका दिया था. लेकिन सुभाष घई ने प्रस्ताव ठुकरा दिया. इसके बाद टाइगर को साजिद नाडियाडवाला ने फिल्म 'हीरोपंती' के जरिए लॉन्च किया था.

सौम्यता: बॉलीवुड की attitude वाली लीग से अलग सितारा

फिल्म 'हीरोपंती' के बाद साल 2016 में आई फिल्म 'बागी' और उसके सीक्वल 'बागी 2' की सफलता ने टाइगर श्रॉफ को सुपरस्टार बना दिया. इसके बाद फिल्म वॉर में उन्होंने बॉलीवुड के एक्शन स्टार रितिक रोशन से तगड़ा मुकाबला किया. उन्हें देखकर लगा ही नहीं कि एक कम उम्र का एक्टर इतने बड़े अनुभवी अभिनेता के सामने अभिनय कर रहा है. इस दौरान रितिक रोशन ने भी टाइगर की बहुत तारीफ की थी. आज टाइगर तमाम नवोदित अभिनेताओं की भीड़ से बिल्कुल अलग, एक अनोखे मुकाम को हासिल कर चुके हैं. अपनी मेहनत की बदौलत डांस और एक्शन में उन्होंने जो महारत हासिल की है, उसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है. लेकिन कभी सफलता टाइगर के सिर चढ़कर नहीं बोली. वह हमेशा सौम्य, सहज और सरल रहे हैं.

टाइगर श्रॉफ का चेहरा पारंपरिक नहीं है. वे अपने पिता जैकी श्रॉफ की तरह नहीं हैं. वे अपनी मां आएशा दत्त पर गए हैं. उनके चेहरे पर हमेशा बनी रहने वाली मुस्कान, मृदुभाषी और चेहरे की सौम्यता ये जताती है कि ये सुपरस्टार अहंकार के अंधकार से कोसों दूर है. उनके अंदर फिल्मी सेलिब्रिटी एटीट्यूड भी नहीं दिखता, वरना एक भी फिल्म हिट हो जाए, तो जमीन के सितारे आसमान से नीचे उतरते ही नहीं है. खुद ऋषि कपूर ने एक बार बताया था कि जब उनकी पहली फिल्म बॉबी हिट हुई, तो वो बिना पंख आसमान में उड़ने लगे थे. निर्माता-निर्देशकों को भी कुछ नहीं समझते थे. हालांकि, पिता राजकपूर ने समय रहते उनको संभाल लिया था. टाइगर अपनी धुन में मस्त रहने वाले एक उम्दा कलाकार हैं. जो सेलिब्रिटियों की तमाम बुराइयों से परे हैं.

आजाद परिंदा: कभी किसी गैंग का हिस्सा नहीं बने

बॉलीवुड में नेपोटिज्म यानि भाई-भतीजावाद का हमेशा से आरोप लगता रहा है. सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मौत के बाद इस मामले ने इतना तूल पकड़ लिया कि पूरे देश में हंगामा हो गया था. लेकिन इन सभी विवादों से बेहद दूर हमेशा कूल रहने वाले टाइगर श्रॉफ ने लोगों को अपनी प्रतिभा के दम पर ये बता दिया कि हर सुपरस्टार का बेटा 'अभिषेक बच्चन' नहीं होता है. वो टाइगर श्रॉफ भी हो सकता है. जो अपने पिता की छाया से कोसों दूर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बना सकता है. जिसकी अपने आप में एक मुकम्मल पहचान हो सकती है. जो बॉलीवुड के किसी भी कैंप में गए बिना फिल्में साइन कर सकता है. उन फिल्मों में काम करके हिट करा सकता है. वरना आलिया भट्ट, रणवीर सिंह, विकी कौशल आदि पर तो 'करण कैंप' का ठप्पा लगा है.

करण ने खुद किया फिल्म ऑफर: 'करण कैंप' तो समझ ही गए होंगे. अरे वो अपने धर्मा प्रोडक्शन वाले प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और एक्टर करण जौहर. सुशांत केस में इनका नाम भी खूब लिया गया. आरोप लगा कि ये मठाधीशी करते हैं. नए कलाकारों को बनाते और बिगाड़ते हैं. बड़े-बड़े एक्टरों के बेटे-बेटियों को ही अपनी फिल्मों में मौका देते हैं. इनका नाम खूब घसीटा गया. इतना कि ये डिप्रेशन में चले गए थे. हालांकि, अभी सब ठीक है. हां, तो हम टाइगर के बारे में बता रहे थे. टाइगर कभी काम मांगने करण के पास नहीं गए, बल्कि करण खुद उनके पास एक प्रस्ताव लेकर गए. सफलता की गंध सूंघते रहना फिल्मकारों का शगल है. साल 2017 में बागी और बागी 2 की अपार सफलता को देखते हुए करण ने फिल्म 'स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2' में बतौर लीड एक्टर साइन किया था.

विवादों के बजाए क्रिएटिविटी से बनाई पहचान

बॉलीवुड फैमिली से संबंध रखने के बावजूद बचपन से ही टाइगर की रुचि स्पोर्ट और डांस में थी. वह इसमें अपना करियर बनाना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. फिल्म 'हीरोपंती' से पहले 3 साल तक फ्लेक्सिबिलिटी और मोशन (Flexibility & Motion) की ट्रेनिंग ली थी. उन्होंने नेशनल लेवल जिम्नास्ट ज़िले सिंह मवई से ट्रनिंग ली थी. यहां फ्रंट पाइक, 360 डिग्री बैकवर्ड ट्विस्ट, वाल फ्लिप्स आदि सीखा. मार्शल आर्ट्स की भी ट्रेनिंग ली है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि टाइगर ने आमिर खान को ट्रेनिंग दी थी. फिल्म 'धूम-3' की शूटिंग के दौरान आमिर की बॉडी बनाने में उनकी हेल्प भी की थी. अब सोशल मीडिया पर अपने जिमिंग, मार्शल आर्ट्स, डांस और सिंगिंग के वीडियो शेयर करके लोगों को मोटिवेट और एंटरटेन करते रहते हैं.

फ्रेश और यूनिक स्टंट करते हैं टाइगर

फिल्म के हीरो की बॉडी उसकी दुकान की तरह होती है. पृथ्वीराज कपूर दंड-बैठक लगाते थे. धरम पाजी भी उसी स्कूल के थे, लेकिन सलमान खान के सुपरस्टार बनते ही मॉडर्न जिम में कलाकार कसरत करने लगे. महंगे प्रोटीन पीने लगे, जिनकी कीमत हर महीने पचास हजार से कम नहीं होती. जिमिंग जिस्म बनाने का महंगा तरीका है. आधुनिक युवा इसके नशे में गाफिल हैं. जिस्म मजबूत बनाने की दंड-बैठक पद्धति में किसी उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती. यह सस्ता, सुंदर और टिकाऊ जरिया है. सलमान खान की तरह ही टाइगर एक्शन हीरो हैं, लेकिन वे अपने स्टंट में ताज़गी ला रहे हैं. उनके चेहरे पर जितनी मासूमियत है, बलिष्ट शरीर की नदी में मांसपेशियों की मछलियां उतनी ही तैरती रहती हैं. जो उनको अलग पंक्ति में खड़ा करती हैं.

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लेखक

मुकेश कुमार गजेंद्र मुकेश कुमार गजेंद्र @mukesh.k.gajendra

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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