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Updated: 14 जून, 2022 11:07 PM
मुकेश कुमार गजेंद्र
मुकेश कुमार गजेंद्र
  @mukesh.k.gajendra
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14 जून, 2020 को आज के ही दिन अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) रहस्यमयी हालत में अपने घर में मृत पाए गए थे. उनकी मौत के बाद दो साल गुजर चुके हैं. आत्महत्या और हत्या के बीच उलझी उनकी मौत की गुत्थी आज तक नहीं सुलझ पाई है. जबकि इस केस में देश के तमाम बड़ी जांच एजेंसियां शामिल रही हैं. इसमें मुंबई और बिहार पुलिस के साथ सीबीआई, एनसीबी और ईडी की सक्रिया भूमिका रही है, लेकिन अभी तक कुछ ठोस हासिल नहीं हो सका है. 6 अगस्त 2020 को सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज किया था.

देखा जाए तो तब से अभी तक जांच के 677 दिन बीत चुके हैं, लेकिन देश की सबसे बड़ी एजेंसी आज तक किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है. इस दौरान सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक अभिनेता के लिए इंसाफ की मांग होती रही है. बॉलीवुड के बायकॉट की बात होती रही है. इसका परिणाम बॉक्स ऑफिस पर भी साफ नजर आ रहा है. पिछले दो वर्षों के दौरान बॉलीवुड की तमाम बड़े सितारों की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ चुकी हैं. अक्षय कुमार और कंगना रनौत की फिल्में तो डिजास्टर साबित हो चुकी हैं.

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आइए जानते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड ने क्या-क्या खोया है...

- बॉलीवुड का नेपोटिज्म उजागर हुआ

बॉलीवुड में नेपोटिज्म का मुद्दा हमेशा से ही रहा है. फिल्मों में भाई-भतीजावाद की वजह से बाहर के कलाकारों को मौका मिलने में हमेशा से ही समस्या आती रही है. इसके शिकार कई कलाकार मरते दम तक अपने मौके के इंतजार करते रहे गए. लेकिन बॉलीवुड में मौजूद कॉकस उनकी पीड़ा को कभी बाहर नहीं आने दिया. लेकिन सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मौत के बाद पाप घड़ा फूट गया. पहली बार एक्ट्रेस कंगना रनौत ने नेपोटिज्म के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया. उन्होंने बताया कि नेपोटिज्म की वजह से ही सुशांत सिंह राजपूत की जान गई है. उन्होंने खुलकर करण जौहर और आदित्य चोपड़ा का नाम लिया, जिनके मुताबिक सुनियोजित तरीके से सुशांत का करियर खत्म किया था.

कंगना रनौत को बोलता देख अनुपम खेर सहित कई बाहरी कलाकारों ने भी नेपोटिज्म के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर दी. इसके बाद लोगों का भारी समर्थन मिलने लगा. हर किसी को समझ में आ गया कि नेपोटिज्म की वजह से नए कलाकारों को मौका नहीं मिल पाता है. यदि कोई कलाकार अपने टैलेंट की वजह से आगे भी बढ़ना चाहता है तो उसे खत्म कर दिया जाता है ताकि वो किसी स्टार के बच्चे या भाई के लिए खतरा न बन सके. कई बार कुछ कलाकारों को अपने मनमाफिक करने के लिए मजबूर किया जाता है. यदि कोई मना कर दे तो उसके खिलाफ ऐसा हालात पैदा कर दिए जाते हैं कि वो फिल्म इंडस्ट्री ही छोड़ दे. डिप्रेशन में चला जाए. खुदकुशी करने की सोचने लगे.

- मठाधीशों की मठाधीशी कम हुई

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद ही बॉलीवुड के मठाधीशों के बारे में खुलासा हुआ. पता चला कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री कुछ गिने-चुने लोगों के ईर्द-गिर्द काम करती है. वो जो चाह रहे हैं, जैसा चाह रहे हैं, मनमाने तरीके से वो काम कर रहे हैं. उनके लिए टैलेंट नहीं चापलूसी मायने रखती है. उनके लिए भाई-भतीजावाद मायने रखता है. अपनी सत्ता बचाने और बनाये रखने के लिए ये लोग किसी के साथ कुछ भी कर गुजरते हैं. ऐसे मठाधीशों में सबसे पहला नाम करण जौहर का सामने आया, जो कि धर्मा प्रोडक्शन के मालिक हैं. दूसरा नाम आदित्य चोपड़ा का आया, जो कि यशराज फिल्म्स के मालिक हैं. इन दोनों ही प्रोडक्शन हाऊस के बैनर तले बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्में रिलीज होती हैं.

सुशांत केस में कहा गया कि आदित्य चोपड़ा के साथ उन्होंने अपनी शर्तों पर काम करना चाहा तो एक्टर को प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया गया. इसके बाद उनके खिलाफ पूरा बॉलीवुड गैंगअप हो गया. करण जौहर ने जानबूझकर उनकी फिल्मों को ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज किया, ताकि उनका स्टारडम खत्म किया जा सके. फिल्म 'छिछोरे' की सफलता के बाद सुशांत करण की फिल्म 'ड्राइव' में काम कर रहे थे. उसे सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना था, लेकिन अचानक उसे ओटीटी पर रिलीज कर दिया गया. इससे सुशांत बहुत दुखी हुए. उसके बाद 'दिल बेचारा' फिल्म को जब ओटीटी पर रिलीज करने का फैसला किया गया तो वो डिप्रेशन में चले गए. लेकिन उनकी मौत के बाद लोगों ने इन मठाधीशों की जमकर क्लास लगाई. सुशांत केस में इन्हें शामिल किया गया. इनसे पूछताछ भी हुई. करण तो डिप्रेशन में ही चले गए. अब बॉलीवुड में मठाधीशी पहले से कम हुई है.

- खान, खानदान सब खत्म हुआ

एक वक्त था जब बॉलीवुड में खान और खानदान की तूती बोलती थी. फिल्में केवल इनके नाम पर चल जाया करती थीं. खान यानी शाहरुख, सलमान और आमिर खान. खानदान यानी कपूर फैमिली, चोपड़ा-जौहर फैमिली, मुखर्जी फैमिली आदि. बॉलीवुड के 99 फीसदी सुपरस्टार इन्हीं खानदानों से ताल्लुक रखते थे. लेकिन सुशांत सिंह राजपूत के बाद बॉलीवुड का तिलिस्म जब खत्म हुआ, तो उसका सीधा असर इन लोगों की स्टारडम पर पड़ा. स्थिति ये है कि सलमान, शाहरुख और आमिर की फिल्में अपनी लागत निकालने के लिए भी तरस जाती हैं. इसमें सलमान की आखिरी रिलीज फिल्म 'राधे' और 'अंतिम' की कमाई का आंकड़ा देख लीजिए समझ में आ जाएगा. शाहरुख तो बेचारे चार साल से बेरोजगार ही हैं.

आमिर खान अपनी आने वाली फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' को सफल बनाने के लिए सारे जतन कर रहे हैं, लेकिन उनके ट्रेलर लॉन्च पर जिस तरह की निगेटिव प्रतिक्रिया मिली है, उसे देखने के बाद तो मुश्किल लग रहा है. आलम ये है कि बॉलीवुड की किसी फिल्म के सिनेमाघरों में रिलीज होते ही लोग बायकॉट की बात शुरू कर देते हैं. इसका असर बॉक्स ऑफिस पर भी देखने को मिल रहा है. बॉलीवुड के सभी बड़े सितारों की फिल्में फ्लॉप हो रही हैं. अक्षय कुमार की फिल्म सम्राट पृथ्वीराज और कंगना रनौत की फिल्म धाकड़ इसका ज्वलंत उदाहरण है. इस फेहरिस्त में अजय देवगन की फिल्म 'रनवे 34', टाइगर श्रॉप की फिल्म 'हीरोपंती 2', जॉन अब्राहम की फिल्म 'अटैक' भी शामिल है.

- बॉलीवुड के प्रति आकर्षण कम हुआ

सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड के खिलाफ इस कदर नकारात्मक कैंपेन चला है कि लोगों को घृणा होने लगी है. बॉलीवुड का बदसूरत चेहरा सबके सामने है. इसकी वजह से दर्शक तो बॉलीवुड को बायकॉट कर ही रहे है, बाहरी कलाकारों में भी इसके प्रति आकर्षण कम हुआ है. पिछले कुछ वर्षों का ट्रेंड देखें तो ज्यादातर कलाकार ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की तरफ मूव कर चुके हैं. इसमें नए कलाकारों के साथ वो कलाकार भी शामिल हैं, जो मठाधीशों की उपेक्षा के शिकार थे, जबकि उनके अंदर टैलेंट कूट-कूट कर भरा हुआ था. अब जाकर जब उनका काम लोगों के सामने आया है, तो नाम और पहचान दोनों मिली है. नए कलाकारों को समझ में आ चुका है कि बॉलीवुड की किसी फिल्म में एक अदद रोल पाने के लिए भटकने से बेहतर है कि किसी वेब सीरीज में काम कर लिया जाए. यदि सीरीज चल गई तो छोटे रोल में भी ऐसा पहचान मिल जाएगी, जो बॉलीवुड फिल्मों से नहीं मिल सकती.

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लेखक

मुकेश कुमार गजेंद्र मुकेश कुमार गजेंद्र @mukesh.k.gajendra

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप में सीनियर असिस्टेंट एडिटर हैं.

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