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Updated: 16 सितम्बर, 2021 08:20 PM
मुकेश कुमार गजेंद्र
मुकेश कुमार गजेंद्र
  @mukesh.k.gajendra
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कोरोना काल में गरीब, मजदूर और मजलूम की मदद कर मसीहा बने फिल्म अभिनेता सोनू सूद के ऊपर आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद उनके लिए सहानुभूति की लहर दौड़ पड़ी है. सोशल मीडिया पर आईटी कार्रवाई के खिलाफ और सोनू सूद के समर्थन में लोग लगातार लिख रहे हैं. सोनू समर्थकों का कहना है कि ये कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है. लोग सोनू को हिम्मत बनाए रखने की बात कहते हुए इसे गंदी राजनीति बता रहे हैं. उनका कहना है कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं. लोगों की भावुकता के बीच सवाल ये खड़ा होता है कि क्या सचमुच इसमें राजनीति है या फिर आयकर विभाग अपनी रूटीन कार्रवाही कर रहा है.

यहां सबसे पहली बात ये कि आयकर विभाग देश की एक सम्मानित संस्था है. इसलिए उसकी हर कार्रवाई के पीछे राजनीतिक मंशा देखना उचित नहीं है. दूसरी बात ये है कि सोनू सूद के संस्थाओं पर आयकर विभाग की छापेमारी नहीं हो रही है, बल्कि आयकर विभाग का सर्वे हो रहा है. तीसरी बात ये है कि, सोनू के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई करने से पहले आयकर विभाग की ने बहुत अच्छी तरह जान लिया होगा कि उनकी लोकप्रियता क्या है और उसकी वजह से इस कार्रवाई पर कैसे सवाल उठने वाले हैं. इसलिए बिना किसी ठोस आधार के आयकर विभाग की टीम सोनू सूद के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई के बारे में सोच भी नहीं सकती है.

sonu-650_091621063213.jpgफिल्म अभिनेता सोनू सूद पर आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद कुछ लोग गुस्से में हैं.

सूचना के मुताबिक, सोनू सूद पर टैक्स चोरी का आरोप लगा है. आरोप है कि उन्होंने एक डील में टैक्स चोरी की है, जिसमें लखनऊ की एक रियल एस्टेट कंपनी भी शामिल है. इस कंपनी में भी आयकर विभाग सर्वे कर रहा है. पीटीआई के मुताबिक लखनऊ की इस रीयल एस्टेट कंपनी और सोनू सूद की फर्म के बीच एक लैंड डील हुई है, जिसका सर्वे आयकर विभाग कर रहा है. इसमें लखनऊ के एक बड़े कारोबारी अनिल सिंह का नाम भी सामने आ रहा है. हाल ही में अनिल सिंह के दफ्तर पर आयकर विभाग का छापा पड़ा है. सोनू सूद और अनिल सिंह कारोबार में पार्टनर बताए जा रहे हैं. ऐसे में उन सभी संस्थाओं की जांच हो रही है, जो इन दोनों से जुड़े हैं.

आयकर विभाग ने क्या किया?

जानकारी के मुताबिक, सर्वे के दौरान आयकर विभाग के अधिकारियों ने अभिनेता सोनू सूद के घर पर मौजूद उनके परिवार और स्टाफ के लोगों से भी पूछताछ की है. उनके घर से अधिकारी कुछ फाइलें और कागजात भी अपने साथ ले गए हैं. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 133ए के प्रावधानों के तहत किए जाने वाले ‘सर्वे अभियान’ में आयकर अधिकारी केवल व्यावसायिक परिसरों और उससे जुड़े परिसरों में अवलोकन करते हैं. हालांकि, अधिकारी दस्तावेज भी जब्त कर सकते हैं. कोरोना काल में सोनू सूद ने हजारों लोगों की मदद की है. इनका एक एनजीओ भी चल रहा है, जिसका नाम 'सूद चैरिटी फाउंडेशन' है. यह NGO हेल्थकेयर, एजुकेशन, नौकरी और तकनीकी एडवान्समेंट पर काम करता है. आयकर विभाग की रडार पर सोनू का एनजीओ भी, जिसके जरिए करोड़ों रुपए के लेन-देन होते हैं.

छापे और सर्वे में अंतर क्या है?

अक्सर लोग आयकर विभाग के सर्वे को छापेमारी समझ लेते हैं, जबकि दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर है. जैसा कि पहले बताया कि आयकर विभाग का सर्वे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 133ए के अंतर्गत आता है. यह केवल व्यवसाय या पेशे के स्थान पर ही हो सकता है. यह आवासीय स्थान पर तब तक नहीं हो सकता जब तक दस्तावेज आवासीय स्थान पर नहीं रखे जाते. यह केवल कार्य दिवसों पर कार्य घंटों के दौरान ही हो सकता है. यह काम के घंटों के बाद भी जारी रह सकता है. अधिकारी को जब्त करने की कोई शक्ति नहीं होती है. किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत खोज नहीं की जा सकती. जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता ली जा सकती है.

समर्थन में लोग क्या कह रहे हैं?

आयकर विभाग की कार्रवाई की सूचना आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर सोनू के समर्थन में लोग लिख रहे हैं. ट्विटर पर #IstandWithSonuSood लगातार ट्रेंड कर रहा है. एक यूजर ने लिखा है, 'जिस व्यक्ति ने कोरोना महामारी के दौरान दिन-रात एक कर लोगों की मदद की, गरीबों के इलाज, शिक्षा के लिए काम किया. उसके घर में छापे मारे जा रहे हैं. सत्य को परेशान कर सकते हो पराजित नहीं.' एक दूसरे यूजर ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए और स्पाइसजेट के हवाई जहाज पर छपी सोनू सूद की तस्वीर को ट्वीट करते हुए लिखा है, 'दिक्कत यही थी, कि उनसे ज्यादा तुम कैसे छप गए.' एक यूजर अमित राजभर का कहना है, 'कोरोना काल में लोग तड़प-तड़प कर जान दे रहे थे, दाने-दाने को मोहताज थे. उस समय एक आदमी दिन रात एक करके लोगों की मदद, अपनी जान की बाज़ी लगाकर कर रहा था. उसको पद्मश्री देने की जगह उसके घर आयकर के छापे चल रहे हैं. सच में बदल रहा है हिंदुस्तान.' इस तरह लोग सोनू सूद का समर्थन कर रहे हैं.

क्या राजनीति से प्रेरित कार्रवाई?

आयकर विभाग इस कार्रवाई को कुछ लोग राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं. ऐसे लोगों का मानना है कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह से बढ़ती नजदीकियों की वजह से सोनू सूद के खिलाफ कार्रवाई की गई है. दरअसल, सोनू पंजाब और दिल्ली सरकार के लिए ब्रांड एम्बेसडर बने हैं. बीते 27 अगस्त को दिल्ली सरकार ने सोनू सूद को स्कूली छात्रों से जुड़े प्रोग्राम का ब्रांड एम्बेसडर बनाया है. इस दौरान उनके आम आदमी पार्टी में शामिल होने की अटकलें भी चली थीं, पर सोनू ने खुद कहा था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ उनकी सियासत पर कोई बात नहीं हुई. हालांकि, दिल्ली के मुख्यमंत्री इस सर्वे से नाराज दिखाई दिए. उन्होंने ट्वीट कर कहा- सच्चाई के रास्ते पर लाखों मुश्किलें आती हैं, लेकिन जीत हमेशा सच्चाई की ही होती है. सोनू सूद जी के साथ भारत के उन लाखों परिवारों की दुआएं हैं जिन्हें मुश्किल घड़ी में सोनू जी का साथ मिला था.

महामारी में 'मसीहा' बने सोनू

सोनू सूद ने कोरोना काल में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान सबसे पहले प्रवासियों को उनके घर पहुंचाने का बीड़ा उठाया था. इसके बाद वे लगातार देश भर के लोगों की मदद करते रहे हैं. सोनू ने गुडवर्कर जॉब ऐप, स्कॉलरशिप प्रोग्राम भी चलाए हैं. वे देश में 16 शहरों में ऑक्सीजन प्लांट भी लगवा रहे हैं. कोरोना के दौरान किए गए सोनू के मानवीय कामों के लिए फैंस उन्हें मसीहा कहने लगे. 48 साल के सोनू हिन्दी, तेलुगु, कन्नड़ और तमिल फिल्मों में काम कर रहे हैं. वो बहुत जल्द एक पीरियड ड्रामा पृथ्वीराज में दिखाई देंगे. इसके अलावा वे तेलुगु एक्शन-ड्रामा आचार्य में भी काम कर रहे हैं. सितंबर 2020 में उनको संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 2020 SDG स्पेशल ह्यूमैनिटेरियन एक्शन अवॉर्ड दिया था. फिलहाल वे देश के हर खास-ओ-आम की मदद के लिए सूद चैरिटी फाउंडेशन चला रहे हैं.

लेखक

मुकेश कुमार गजेंद्र मुकेश कुमार गजेंद्र @mukesh.k.gajendra

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप में डिजिटल जर्नलिस्ट हैं.

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