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Updated: 03 मई, 2023 09:04 PM
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सत्यजीत रे. भारतीय सिनेप्रेमियों के बीच ये नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. भारतीय सिनेमा की दशा और दिशा बदलने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है. उनकी फिल्में लोकर होते हुए भी ग्लोबल लेवल की होती थी. भारतीय सिनेमा में उनके योगदान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऑस्कर कमेटी ने लाइफटाइम अचीवमेंट का ऑस्कर कोलकाता में उनके घर आकर दिया था. ये अवॉर्ड पाने वाले वाले वो पहले और इकलौते हिंदुस्तानी हैं. उनको भारत रत्न (1992), दादा साहब फाल्के अवॉर्ड (1985), पद्म विभूषण (1976) और पद्म भूषण (1965) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा जा चुका है.

सत्यजीत रे ने कुल 36 फिल्में बनाई हैं. इनके लिए 32 नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला है. कई फिल्मों को विदेशों में भी सम्मानित किया गया था. साल 1978 में बर्लिन फिल्म फेस्टिवल की संचालक समिति ने उन्हें दुनिया के तीन सर्वकालिक महानतम निर्देशकों में से एक चुना था. साल 1979 में 11वें मास्को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उन्हें सिनेमा में योगदान के लिए मानद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वेनिस फिल्म फेस्टिवल में उन्हें 1982 में गोल्डन लायन मानद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. चार्ली चैपलिन के बाद वो दूसरी फिल्म हस्ती हैं जिन्हें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिली थी.

सत्यजीत रे का जन्म 2 मई 1921 को कोलकाता में हुआ था. बचपन में ही उनके पिता की मौत हो गई, जिसकी वजह से शुरूआती जीवन बहुत संघर्षों भरा रहा. कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक विज्ञापन एजेंसी में काम करना शुरू कर दिया था. इसी बीच किसी काम से लंदन जाना हुआ, जहां उन्होंने एक फिल्म 'बाइसिकल थीव्स' देखी. इसके बाद से ही उन्होंने फिल्में बनाने का सपना देखना शुरू कर दिया. घर में पैसे नहीं थे, तो पत्नी से उनके जेवर लेकर गिरवी रख दिया. इसके बाद 1955 में अपनी पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' रिलीज की थी. साल 1992 में लंबी बीमारी के बाद उनका कोलकाता में निधन हो गया.

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सत्यजीत रे की पांच बेहतरीन फिल्में, जो उनको महान फिल्मकार बनाती हैं...

1. पाथेर पांचाली

IMDb रेटिंग- 8.2/10

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सत्यजीत रे की पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' थी. पाथेर पांचाली का अर्थ होता है, 'पथगीत' या 'एक छोटे रास्ते का गीत'. 16 अगस्त 1958 को पाथेर पांचाली को वैंकूवर फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म सहित 5 अवार्ड मिले थे. इतना ही नहीं इसे कान सहित गोल्डन ग्लोब जैसे कई बड़े अवार्ड भी मिले हैं. पाथेर पांचाली बिभूतिभूषण बंदोपाध्याय के इसी नाम के एक उपन्यास पर आधारित है. साल 1943 में जब रे ने इस उपन्यास को पढ़ा, तब फ़िल्म बनाने का ख़्याल उनके दिमाग़ में नहीं था. लेकिन 1950 में लंदन में अंग्रेजी फिल्म फिल्म 'बाइसिकल थीव्स' देखने के बाद उन्होंने इस फिल्म को बनाने का फैसला किया था. तमाम तरह की आर्थिक परेशानियों से दो-चार होती ये फिल्म 26 अगस्त 1956 को रिलीज की गई थी. इसका शुरूआती रिस्पांस बहुत अच्छा नहीं था, लेकिन तीन हफ्ते बाद फिल्म ने ऐसा रफ्तार पकड़ा की कमाई के कई सारे रिकॉर्ड टूट गए.

2. अपराजितो

IMDb रेटिंग- 8.3/10

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साल 1956 में रिलीज हुई फिल्म 'अपराजितो' सत्यजीत रे की फिल्म 'पाथेर पांचाली' की सीक्वल है. जिन लोगों को लगता है कि फिल्म को कई पार्ट्स में बनाकर रिलीज करने की परंपरा नई है, उनकी जानकारी के लिए बता दें रे ने इसकी शुरूआत 50 के दशक में ही कर दी थी. उन्होंने 'द अपु ट्रायलॉजी' के तहत तीन फिल्मों का निर्माण किया था. इसमें पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली', दूसरी फिल्म 'अपराजितो' और तीसरी फिल्म 'द वर्ल्ड ऑफ अपु' है. फिल्म 'अपराजितो' विभूतिभूषण बनर्जी के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है. 'पाथेर पांचाली' की मेकिंग के दौरान रे ने कभी नहीं सोचा था कि वो इसके सीक्वल बनाएंगे, लेकिन फिल्म की सफलता ने उन्हें प्रोत्साहित किया. 'अपराजितो' को 11 अक्टूबर 1956 को रिलीज किया गया. इस फिल्म ने 11 इंटरनेशनल अवॉर्ड जीते थे. इसमें गोल्डन लॉयन और क्रिटिक्स अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं.

3. अपूर संसार/द वर्ल्ड ऑफ अपु

IMDb रेटिंग- 8.5/10

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'द वर्ल्ड ऑफ अपु' सत्यजीत रे की 'द अपु ट्रायलॉजी' के तहत बनाई गई तीसरी फिल्म है. इसके अपूर संसार के नाम से भी जानते हैं. साल 1959 में रिलीज हुई इस फिल्म ने दुनियाभर में भारतीय सिनेमा को एक अलग मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया. दुनिया में भारतीय फिल्मों का रुतबा बढ़ने लगा. साल 1960 के लंदन फिल्म फेस्ट में बेस्ट ओरिजनल फिल्म का खिताब जीता था. इसी साल एडिनबर्ग इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट में भी अवॉर्ड पाकर सुर्खियां बटोरी थी. इतना ही नहीं 1962 में हुए बाफ्टा अवॉर्ड में बेस्ट फॉरेन फिल्म और बेस्ट फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया था. इसी फिल्म से शर्मिला टैगोर ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी. बंगाली भाषा में रिलीज हुई यह फिल्म भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर की तरह है. इसे बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला था. इसे अमेरिकी के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने देखा था.

4. महानगर/द बिग सिटी

IMDb रेटिंग- 8.3/10

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साल 1963 में रिलीज हुई फिल्म 'महानगर' में कोलकाता शहर की खूबसूरती को सत्यजीत रे ने बड़े करीने से संजोया है. एक ऐसी फिल्म जो एक पति और पत्नी को करियर के दो राहे पर ले जाती है. इसमें समाज है, रूढ़‍िवादी परंपराओं के रक्षक हैं, नई और उदार सोच रखने वाले लोग हैं. फिल्‍म के मुख्‍य पात्र इन्‍हीं आदर्शों के बीच फंसे हुए हैं. माधवी मुखर्जी और अनिल चटर्जी की शानदार एक्‍ट‍िंग ने इस फिल्‍म को और भी बेहतरीन बना दिया है. फिल्‍म उस दौर के राजनीति को भी मनोरंजक तरीके से दिखाती है. इस फिल्म के जरिए जया बच्चन ने सिनेमा में कदम रखा था. पूरे दुनिया में इस फिल्म की तारीफ हुई थी. साल 1964 में 14वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सत्यजीत रे को बेस्ट डायरेक्टर का गोल्डन बियर अवॉर्ड मिला था. 36वें ऑस्कर अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म की कैटेगरी के लिए नॉमिनेट किया गया था.

5. आगंतुक/द विजिटर

IMDb रेटिंग- 7.3/10

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साल 1991 में रिलीज हुई फिल्म 'आगंतुक' सत्यजीत रे की आखिरी फिल्म है. लेकिन यह उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्‍मों में से एक है. फिल्‍म में उत्पल दत्त एक बेहद अमीर महिला के लंबे समय से खोए हुए बड़े चाचा होने का दावा करते हैं. स्वाभाविक है कि यह दावा संदेह पैदा करता है. कई सवाल दर्शकों के मन में भी हैं और फिल्‍म के किरदारों के भी. फिल्‍म कुछ के जवाब देती है और कुछ दर्शकों के लिए छोड़ देती है. इस फिल्‍म में सस्पेंस के साथ-साथ हमें कोलकाता की खूबसूरती भी देखने को मिलती है. साल 1992 में आयोजित हबुए नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में इसे बेस्ट फीचर फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर के साथ स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड मिला था. फिल्म में उत्पल दत्त के साथ ममता शंकर, दीपंकर डे, धृतिमान चटर्जी, प्रमोद गांगुली और रवि घोष लीड रोल में हैं. इस फिल्म की शूटिंग के वक्त सत्यजीत रे बीमार रहते थे, लेकिन फिल्म पर कोई असर नहीं आने दिया था.

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