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Updated: 19 नवम्बर, 2021 01:14 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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नुसरत फतेह अली खान, राहत फतेह अली खान, आतिफ़ असलम, अदनान सामी, अली जफर, शफकत अमानत अली, आबिदा परवीन, नूर जहां, बिलाल सईद, हादिका किआनी, मोमिना मुस्तेहसन, रेशमा, जुनैद जमशेद, असीम अजहर... ये उन पाकिस्तानी सिंगर्स की लिस्ट है जिन्होंने म्यूजिक की दुनिया में तहलका मचा के रखा हुआ है. जब हम इन सिंगर्स को सुनते हैं तो लगता ही नहीं है कि ये लोग उस देश से आते हैं जिनके प्रधानमंत्री भारत जैसे शांतिप्रिय देश को नीचा दिखाने के लिए मौके की तलाश में रहते हैं और प्रायः हर मौके पर मुंह की खाते हैं. विषय राजनीति न होकर पाकिस्तान के सिंगर्स हैं. तो जिस तरह के गाने पाकिस्तान से आते हैं चाहे वो गाने के बोल हों या फिर म्यूजिक और उसे पेश करने का तरीका हर चीज मन मोह लेने वाली होती है. दिल इस बात की गवाही देता है कि अगर कहीं वाक़ई संगीत को साधना की तरह देखा जाता है और उसकी पूजा पूरी ईमानदारी के साथ होती है तो वो हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान है. अब तक हमने यही माना है. ऐसे में जैसा पाकिस्तान का चाल, चरित्र और चेहरा है सवाल है कि क्या संगीत, गाने, मौसिकी को लेकर पाकिस्तान इतना ही लिबरल है? जवाब फराज अनवर के जरिये मिला है और ये जवाब कई मायनों में दिल दुखाने वाला है.

Faraz Anwar, Songs, Music, Pakistan, Islam, Musalman, Qazi, Fundamentalismपाकिस्तान में संगीतकारों और सिंगर्स के साथ क्या सुलूक किया जाता है उसपर फराज अनवर की बातें गहरा अवसाद पैदा करती हैं

अब फिर सवाल होगा कि कौन फराज अनवर ? तो इस सवाल का जवाब बस इतना है कि फ़राज़ पाकिस्तान के मशहूर म्यूजिशियन, सिंगर-सॉन्गराइटर, गिटारिस्ट और बैंडलीडर हैं. दरअसल हुआ कुछ यूं हैं कि फराज अनवर ने पाकिस्तान जैसे देश में किसी म्यूजिशियन के स्ट्रगल की दास्तां को बयान किया है और ऐसा बहुत कुछ बताया है जो खुद-ब-खुद इस बात की तस्दीख कर देता है कि पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क है जहां म्यूजिक को अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता.

बताते चलें कि फराज अनवर का शुमार पाकिस्तान के उन चुनिंदा लोगों में है जिन्होंने हेवी मेटल और हार्ड रॉक जॉनर में अपना नाम कमाने वाले के लिए न केवल जी तोड़ मेहनत की बल्कि कई दशकों की तपस्या भी की है. फ़राज़ कोई आज के नहीं हैं वो पाकिस्तान जैसे कट्टरपंथी और असहिष्णु देश मे सालों से संगीत का निर्माण कर लोगों की रूह को सुकून दे रहे हैं.

अभी हाल ही में फ़राज़ ने ट्रिब्यून को एक इंटरव्यू दिया है और इस्लाम में गीत संगीत को हराम बताए जाने को लेकर अफसोस जाहिर किया है. बात आगे होगी लेकिन उससे पहले हमारे लिए ये जान लेना बहुत जरूरी है कि फराज अनवर उन खास लोगों में शामिल हैं जिन्होंने पाकिस्तान के सिंगिंग लेजेंड्स अली हैदर, जुनून, जुनैद जमशेद, स्ट्रिंग्स और सज्जाद अली के साथ काम कर इतिहास रचा है.

ट्रिब्यून से हुई बातचीत में फ़राज़ ने कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी है और कहा है कि मैंने ये एहसास किया है कि लोग समझ नहीं पाते हैं कि आर्टिस्ट कैसे काम करते हैं. आज के दौर में भी लोगों को लगता है कि म्यूजिक एक साइड बिजनेस है और म्यूजिक से वही लोग जुड़ते हैं जिनके परिवार वालों की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है. लेकिन मैं आश्वस्त हूं कि म्यूजिक आर्टिस्ट्स के साथ भेदभाव भी किया जाता है.

फराज अनवर के मुताबिक वो साल 2005 में एक स्टूडियो बनाना चाहता था लेकिन हम कोई लोकेशन ही पक्की नहीं कर पा रहे थे. हम जहां भी जाते, लोग कहते कि वे बहुत रूढ़िवादी मुस्लिम हैं और वे म्यूजिक आर्टिस्ट्स को स्टूडियो खोलने नहीं दे सकते हैं. पाकिस्तान में संगीत से जुड़े लोगों के साथ कैसा बर्ताव होता है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस वक्त फ़राज़ कराची में घर ले रहे थे तब भी उन्हें तमाम तरह के सवालों से दो चार होना पड़ा.

अपने संघर्ष और चुनौतियों पर बात करते हुए फराज अनवर ने ये भी कहा कि उनके जीवन में ऐसे भी मौके आए हैं जब सिंगर होने के चलते बैंक तक ने उनका एकाउंट खोलने से मना कर दिया था. फ़राज़ के अनुसार वो ऑनलाइन क्लासेस देते थे इसलिए उन्हें एक डॉलर अकाउंट खोलना था लेकिन बैंक की तरफ से उनसे कहा गया कि उनकी रिक्वेस्ट को खारिज कर दिया गया है क्योंकि वो एक म्यूजिक आर्टिस्ट हूं.

इस बात ने फराज को खूब आहत किया था कि जब अपने परेशानी भरे लहजे में उन्होंने बैंक कर्मचारी से पूछा कि क्या मैं काफिर हूं? उसपर बैंक कर्मचारी का जवाब हां में था. ट्रिब्यून से हुई बातचीत में फ़राज़ ने भारत का भी जिक्र किया और भारतीय फैंस की शान में जी भरकर कसीदे पढ़े हैं.

फराज ने कहा कि मैं जब अपने भारतीय फैंस से मिलता हूं तो वे मेरे पांव छूते हैं जबकि पाकिस्तानी भारतीय गाने सुनते हुए मुझे 'कंजर, मिरासी' कहकर बुलाते हैं. फ़राज़ के अनुसार,'मैंने कुरान को अलग-अलग ट्रांसलेशन के साथ पांच बार पढ़ा है. उसमें कहीं से भी ये नहीं लिखा है कि म्यूजिक हराम है. हालांकि कुरान में जुआ, लोन और जिना को गलत बताया गया है. लेकिन आप हमारे किसी भी बैंक में जाकर लोन ले सकते हैं.

पाकिस्तान  में कट्टरपंथी क्यों फ़राज़ या उनके जैसे अन्य लोगों को पसंद नहीं करते? इसका जवाब खुद फराज ने दे दिया है. फराज के अनुसार, लोग जानते हैं कि हमारा संदेश दूर-दूर तक जाता है और धर्म के ठेकेदारों को लगता है कि हम उनका पर्दाफाश कर सकते हैं. वे पूर्ण नियंत्रण चाहते हैं.  इसके अलावा अपने इंटरव्यू में फराज ने उन घटनाओं का भी जिक्र किया जिनका सामना हालिया दौर में पाकिस्तानी संगीतकारों को पाकिस्तान में करना पड़ा है.

बात बहुत सीधी है चाहे वो पाकिस्तानी सिंगर जुनैद जमशेद को एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारे जाने की घटना हो या फिर अमजद साबरी की दिनदहाड़े सार्वजनिक बाजार में गोली मारकरहुई हत्या इतना तो साफ़ हो जाता है कि तमाम खतरे हैं जिनका सामना पाकिस्तान में गीत संगीत से जुड़े लोगों को तकरीबन हर रोज करना पड़ता है.

खुद सोचिये. कल्पना कीजिये जिस मुल्क में गीतकारों और संगीतकारों को धार्मिक कट्टरता का सामना हर रोज करना पड़ता है यदि वहां से इतना बेहतरीन संगीत निकल कर बाहर आ रहा है तो पूरी दुनिया को इसकी तारीफ करनी चाहिए और इससे प्रेरणा लेनी चाहिए. फराज अनवर ने जिन चुनौतियों का बखान किया है उसके बाद ये कहना अतिश्योक्ति नहीं है कि गीत संगीत के मामले में पाकिस्तानी सिंगर्स बधाई के पात्र हैं.

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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