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Updated: 26 फरवरी, 2022 12:05 PM
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एटली के बाद तमिल सिनेमा का एक और बड़ा निर्देशक बॉलीवुड डेब्यू करने के लिए तैयार है. यह निर्देशक कोई और नहीं बल्कि तमिल सिनेमा में कई अब तक कई ब्लॉकबस्टर दे चुके पा रंजित हैं. पा रंजित ने हिंदी डेब्यू के लिए बायोग्राफिकल कंटेंट चुना है. फिल्म बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित होगी. बिरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आदि क्रांतिकारी और महानायक हैं. अंग्रेजों से संघर्ष में उन्होंने शहादत दी थी. पा रंजित के हिंदी डेब्यू पर सिनेमा उद्योग की नजरें होंगी.

पा की हिंदी फिल्म बिरसा को शरीन मंत्री और किशोर अरोड़ा प्रोड्यूस करेंगे. तमिल निर्देशक भव्य फ़िल्में बनाने के लिए मशहूर हैं. दर्शक उम्मीद कर सकते हैं कि बिरसा जैसी पीरियड ड्रामा के जरिए हिंदी दर्शकों को एक अच्छी फिल्म देखने को मिले. पा रंजित की आख़िरी फिल्म पिछले साल डिजिटल पर स्ट्रीम हुई सरपट्टा परम्बरै थी. फिल्म की कहानी तमिलनाडु में एक लोकल बॉक्सिंग चैम्पियनशिप को लेकर थी. हालांकि बॉक्सिंग के बहाने पा की फिल्म में भारतीय समाज के अंदर की जाति व्यवस्था और उसके संघर्ष/उत्पीडन को दिखाया गया था. सरपट्टा परम्बरै को खूब पसंद किया गया था.

pa ranjithइंडिया टुडे कॉन्क्लेव में पा रंजित.

सरपट्टा परम्बरै से पहले पा ने तमिल सिनेमा के महानायक रजनीकांत को लेकर दो ब्लॉकबस्टर फ़िल्में- काला और कबाली बनाई थीं. इन दोनों फिल्मों में भी भारतीय समाज व्यवस्था में जाति के सवाल को जगह दी गई थी. लेखक और निर्देशक के रूप में पा रंजित ने अब तक अपनी फिल्मों के जरिए समीक्षकों और एक व्यापक दर्शक वर्ग को प्रभावित किया है. पा रंजित की उम्र अभी महज 39 साल है. उन्हें कमर्शियल सिनेमा को लीक से हटकर बनाने वाले निर्देशक के रूप में लिया जा सकता है.

दलित किरदारों को लार्जर दैन लाइफ छवि देने के लिए विख्यात हैं पा रंजित

पा रंजित पेरियार और भीमराव अम्बेडकर के विचारों से गहरे प्रभावित हैं. उनकी फिल्मों में दोनों राजनीतिक महानायकों की छाप साफ़ दिखती है. कमर्शियल सिनेमा में संभवत: ऐसा पहली बार दिखा जब साल 2016 में आई कबाली में उन्होंने एक दलित नायक को 'लार्जर दैन लाइफ' की छवि में पेश किया. आमतौर पर सिनेमा के परदे पर दलित किरदार लाचार, कमजोर और दया के पात्र ही दिखते रहे हैं. पा रंजित के काम ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया और कबाली के बॉक्स ऑफिस में इसका सबूत भी दिखता है. साल 2018 में उन्होंने एक बार फिर रजनीकांत को लेकर दलित नायक को काला में पेश किया. इस बार भी उन्होंने पैसे के साथ जमकर शोहरत बटोरी. सिर्फ इन दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 800 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया.

दोनों फ़िल्में हिंदी में भी डब करके रिलीज की गई थीं. अब तमिल निर्देशक ने हाशिए के समाज से आने वाले एक और महानायक को बड़े परदे पर लाने का फैसला किया. महान स्वतंत्रता सेनानी थे. उनपर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं और कुछ डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है.

पहली बार बड़े परदे पर दिखेगी जननायक बिरसा मुंडा की जीवनी

मगर यह पहली बार होगा जब हिंदी में उनके जीवन पर कोई फीचर फिल्म बनेगी वह भी बहुत बड़े स्केल पर. बिरसा मुंडा जन्म झारखंड के खुटी जिले के उलीहातु गांव में 15 नवंबर 1875 के दशक में एक आदिवासी किसान परिवार में हुआ था. 1900 से पहले अकाल के बाद अपने लोगों की खराब हालत को लेकर जब उन्होंने चिंतन किया तो पाया कि इसके पीछे अंग्रेजी राज की बड़ी भूमिका है. अकाल में उन्होंने स्थानीय लोगों की जमकर सेवा की और उन्हें संगठित करते रहे.

birasa-pa-ranjith-65_022522080440.jpgबिरसा मुंडा की कहानी फिल्म में दिखेगी.

अंग्रेजों के उत्पीडन के खिलाफ आवाज बुलंद करने की वजह से बहुत कम समय में बिरसा एक जननायक के रूप में ख्यात होने लगे. उन्हें धरती आबा के रूप में पुकारा जाने लगा. अंग्रेजों और सामंतों को बिरसा मुंडा की ख्याति से जलन होना स्वाभाविक था. आसन्न खतरे को भांपते हुए अंग्रेजों ने बिरसा मुंडा को लोगों को भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया. उन्हें 2 साल की सजा दी गई. उत्पीडन के खिलाफ संघर्ष को अपना जीवन बना चुके बिरसा भला कहां रुकने वाले थे. बिरसा मुंडा के नेतृत्व में सालों तक आदिवासी, अंग्रेजी सरकार से युद्ध करते रहे. गुरिल्ला युद्ध में सैकड़ों आदिवासी शहीद हुए.

बिरसा मुंडा जंगल में अपने समुदाय के साथ मिलकर अंग्रेजों से लोहा लेते रहे. कुछ युद्धों में अंग्रेजों को करारी हार का सामना भी करना पड़ा. बिरसा जब तक जीवित रहे अंग्रेजी राज के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहा. आखिरकार अंग्रेजों ने 3 फरवरी 1900 को चक्रधरपुर के जमकोपाई जंगल से बिरसा को गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई. अंग्रेजों ने बिरसा को जहर दे दिया था. इसकी वजह से 9 जून 1900 को रांची कारागार में उनकी मृत्यु हुई. देश के कई राज्यों में आज भी बिरसा मुंडा के संघर्ष और शहादत को याद ककिया जाता है. उन्हें भगवान की तरह पूजा जाता है.

पा रंजित की हिंदी फिल्म में बिरसा के जीवन को देखना दर्शकों के लिए एक दिलचस्प अनुभव होगा.

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