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Updated: 22 सितम्बर, 2022 05:27 PM
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'उम्मीद कीजिए अगर उम्मीद कुछ नहीं, गम खाइए बहुत जो खयाल-ए-सुरूर है'...उर्दू को जदीद नज़्म से परिचय कराने वालों में से एक मशहूर शायर इस्माइल मेरठी का ये शेर उनके लिए है, जो उम्मीद छोड़ चुके हैं. जीवन में उम्मीद ना हो तो समझिए कुछ नहीं है. राही उम्मीद का दामन पकड़े अपनी मंजिल की ओर निकलता है. उम्मीद है तो सब है. इसका कोई रूप-रंग नहीं है, लेकिन हर आदमी इसी के सहारे जिंदा है. इसी उम्मीद के सहारे अब कुछ लोगों का कहना है कि एसएस राजामौली की फिल्म 'आरआरआर' अभी ऑस्कर अवॉर्ड जीत सकती है. जबकि भारत की तरफ से गुजराती फिल्म 'छेल्लो शो' (लास्ट फिल्म शो) को ऑफिशियली नॉमिनेट कर दिया गया है. इसके बावजूद 'आरआरआर' के ऑस्कर में जाने की संभवनाएं अभी खत्म नहीं हुई हैं. फिल्म के मेकर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स अपने दम पर इसे एकेडमी अवॉर्ड में भेजने की तैयारी कर रहे हैं.

भारत की तरफ ऑस्कर की रेस में राजामौली की फिल्म 'आरआरआर', विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स', फहद फाजिल की मलयालम फिल्म 'मलयंकुंजू' और नानी की तेलुगू फिल्म 'श्याम सिंघा रॉय' थी. लोग चाहते थे कि 'आरआरआर' और 'द कश्मीर फाइल्स' में किसी एक ऑस्कर के लिए भेजा जाए. दोनों फिल्मों को लेकर सोशल मीडिया पर मुहिम चलाई जा रही थी. ज्यादातर फिल्म क्रिटिक्स 'आरआरआर' के पक्ष में थे. उनका मानना था कि इस फिल्म में ऑस्कर जीतने का दम है. क्योंकि इसने विश्व स्तर पर दर्शकों का मनोरंजन किया है. भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपना विशिष्ट स्थान दर्ज कराया है. लेकिन 20 सितंबर को फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इन सभी फिल्मों से अलग एक नई फिल्म का नाम ऐलान करके सबको हैरान कर दिया. इसके बाद ज्यादातर लोग निराश नजर आए. लेकिन अब उम्मीद की किरण दिखी है.

दरअसल, अमेरिका में 'आरआरआर' के डिस्ट्रब्यूटर वैरियंस फिल्म्स के अध्यक्ष डायलन मार्चेटी का कहना है कि वो लोग फिल्म के लिए पूरी दुनिया में प्रचार करने जा रहे हैं. इसके लिए एकेडमी के 10 हजार सदस्यों से बातचीत करके वोट देने की अपील भी की जाएगी. मेकर्स की तरफ से एकेडमी अवॉर्ड की कई कैटेगरी में नॉमिनेशन किया जाएगा. मार्चेटी कहते हैं, ''मैं ये नहीं मानता कि आरआरआर भारती की सबसे अच्छी फिल्म है, बल्कि मैं ये कहता हूं कि ये फिल्म पूरी दुनिया में सबसे अच्छी है. हमने दुनियाभर में फैंस से सुना है कि ये इस साल की बेहतरीन फिल्म है. हम एकेडमी से अनुरोध करते हैं कि वो फिल्म को सभी कैटेगरी में कंशिडर करे. फिल्म 'बेस्ट पिक्चर' की कैटेगरी में स्पॉट पाने के लिए संघर्ष करने के लिए तैयार है. इसके अलावा डायरेक्टर, स्क्रीनप्ले, सिनेमैटोग्राफी, प्रोडक्शन डिजाइन और एडिटिंग समेत कई अन्य कैटेगरी में शामिल हो सकती है.''

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डायलन के अनुसार, आरआरआर को निम्नलिखित कैटेगरी में नॉमिनेट किया जाएगा...

1. बेस्ट पिक्चर

2. ओरिजनल स्क्रीनप्ले (एसएस राजामौली और वी विजयेंद्र प्रसाद)

3. लीड एक्टर (जूनियर एनटीआर और राम चरण)

4. सपोर्टिंग एक्टर (अजय देवगन)

5. सपोर्टिंग एक्ट्रेस (आलिया भट्ट)

6. ओरिजनल सॉन्ग (नातू नातू)

7. ओरिजनल स्कोर (एमएम कीरवानी)

8. सिनेमैटेग्राफी (केके सेंथिलकुमार)

बताते चलें कि एकेडमी अवॉर्ड दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड माना जाता है. हर फिल्म मेकर या फिल्म इंडस्ट्री का सपना होता है कि उनकी फिल्म को ये अवॉर्ड मिले. लेकिन दुर्भाग्य है कि आजतक भारत की किसी भी सिनेमा इंडस्ट्री की फिल्म को ये अवॉर्ड अभी तक नहीं मिला है. पिछले कुछ वर्षों में देखा जाए तो हर साल किसी न किसी भारतीय फिल्म को ऑस्कर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया, लेकिन ट्रॉफी कभी हाथ नहीं आई है. इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? क्या भारत में इस तरह की फिल्में बनती ही नहीं हैं जो कि ऑस्कर के स्तर की हों या फिर भारतीय फिल्मों के साथ भेदभाव किया जाता है? ऐसे सवाल कई हैं, लेकिन जवाब इस साल की चुनाव प्रक्रिया में ही छुपा हुआ है.

ऑस्कर अवॉर्ड 1956 में शुरू किया गया था. 1957 से लेकर 2021 तक केवल तीन फिल्मों 'मदर इंडिया', 'सलाम बॉम्बे' और 'लगान' को ऑफिशियल नॉमिनेशन मिला है. इन 65 वर्षों में अभी तक कोई भी भारतीय फिल्म ऑस्कर अवॉर्ड नहीं जीत पाई है. साल 1958 में 'मदर इंडिया' सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म कैटेगरी में अवॉर्ड जीतने के बहुत करीब थी. लेकिन महबूब खान द्वारा निर्देशित ये फिल्म नाइट्स ऑफ कैबिरिया के तीसरे मतदान के दौरान केवल एक वोट से हार गई. इसके बाद साल 1988 में मीरा नायर की फिल्म सलाम बॉम्बे से उम्मीदें जगी, लेकिन वो भी अवॉर्ड जीतने में नाकाम रही. साल 2001 में रिलीज हुई आमिर खान की फिल्म लगान की दावेदारी भी मजबूत थी, लेकिन उसे भी अवॉर्ड नहीं मिला.

अब एक बार फिर 'आरआरआर' के साथ ऑस्कर अवॉर्ड की बड़ी उम्मीद जगी है. देश ही नहीं पूरी दुनिया से एक स्वर में कहा जा रहा है कि इस फिल्म में ऑस्कर के कई कैटेगरी में अवॉर्ड जीतने का माद्दा है. यदि इस फिल्म मेकर्स अपने दम पर ही सही इसे ऑस्कर तक पहुंचाने में कामयाब रहे और एक दो कैटेगरी में भी ये अवॉर्ड जीतने में कामयाब रही, तो समझिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की भद्द पीटनी तय है. वैसे भी इस साल एक अनजान गुजराती फिल्म को ऑस्कर के लिए नॉमिनेट करके एफएफआई सवालों के घेरे में है. लोगों को समझ ही नहीं आ रहा है कि आखिर किस आधार पर इस फिल्म को नॉमिनेट किया गया है. जबकि इसके मुकाबले आरआरआर और द कश्मीर फाइल्स जैसी बेहतरीन फिल्में थीं.

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