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Updated: 13 अक्टूबर, 2021 03:13 PM
मुकेश कुमार गजेंद्र
मुकेश कुमार गजेंद्र
  @mukesh.k.gajendra
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दिल्ली के बुराड़ी इलाके में तीन साल पहले साल 2018 में हुई 11 लोगों की रहस्यमयी मौत ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था. एक ही घर में रह रहे एक परिवार ही परिवार के 11 सदस्यों का एक साथ फांसी के फंदे पर झूलता पाया जाना हर किसी के लिए रहस्य था. पब्लिक, पुलिस और पत्रकार के सामने इस रहस्य की गुत्थी आज तक बरकरार है, जिसे ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज में सुलझाने की कोशिश की गई है.

जी हां, दिल्ली के बुराड़ी कांड पर आधारित ट्रू क्राइम डॉक्यूमेंट्री 'द हाउस ऑफ सीक्रेट्स द बुराड़ी डेथ्स' (House of Secrets The Burari Deaths) में इस घटना को एक नए तरीके से समझने की कोशिश की गई है. अपने देश में इस तरह की डॉक्यूमेंट्री सीरीज पहली बार बनी है. फिल्म और वेब सीरीज के बाद इसे सिनेमा की नई विधा जरूर कह सकते हैं, क्योंकि अभी तक इस तरह की डॉक्यूमेंट्री सीरीज बनाने और देखने का चलन हॉलीवुड में ही रहा है.

इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज की कहानी क्लाइमेक्स से ही शुरू होती है, जिस दिन 11 लोगों का शव बुराड़ी इलाके के उस घर में पाया गया, जिसमें एक दिन पहले तक सबकुछ ठीक चल रहा था. उस परिवार का एक किराना स्टोर भी था, जिससे मोहल्ले के लोग अपने घर के लिए जरूरी सामान खरीदा करते थे. उस रोज की सुबह दुकान बंद थी. बाहर दूध से भरी हुई ट्रे रखी हुई थी. जब काफी देर हो गई, तो पड़ोसियों को कुछ शक हुआ. घर का दरवाजा खटखटाया, जो अंदर से खुला हुआ था. अंदर जाकर देखा, तो जैसे कलेजा मुंह को आ गया. ये क्या, एक दो नहीं पूरे परिवार के 11 लोगों के शव छत से लटक रहे थे.

hos-650_101321100003.jpgदिल्ली के बुराड़ी कांड में मृत पाए गए परिवार के सभी 11 सदस्यों की तस्वीर (क्रेडिट- नेटफ्लिक्स)

दिल दहला देने वाले इस दृश्य को देखने के बाद पड़ोसियों ने सीधे पुलिस को सूचित किया. पुलिस की टीम मौके पर पहुंची. उन्हें भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये सब कैसे हुआ, किसने किया. ये हत्या है या आत्महत्या. हालांकि, स्थिति देखकर पहली नजर में खुदकुशी का केस लग रहा था, लेकिन लोगों के दबाव मे आकर पुलिस ने हत्या का ही केस दर्ज किया. इधर मीडिया के जरिए देश-दुनिया में इस घटना के बारे में जानने के बाद लोगों का कौतूहल बढ़ता जा रहा था.

पुलिस ने सभी शवों की शिनाख्त कराई. मरने वालों में परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला 80 साल की नारायणी देवी, उनकी बड़ी बेटी प्रतिभा भाटिया (57 साल), उनकी बेटी प्रियंका (33 साल), बड़ा बेटा भवनेश (50 साल), उसकी पत्नी सविता (48 साल), उनकी बेटियां नीतू (25 साल), मोनू (23 साल), बेटा ध्रुव (15 साल). नारायणी देवी का छोटा बेटा ललित (45 साल), उसकी पत्नी टीना (42 साल) और उनका एकलौता बेटा शिवम (15 साल) सब एक साथ रहते थे.

सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया गया, तो उसमें मौत का कारण दम घुटना बताया गया, जिससे पता चला कि सभी की जान फांसी के फंदे से लटकने से गई है. इसके बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घर की गहनता से छानबीन की, जिसमें उनको मंदिर में रखे हुई डायरी और नोट्स बरामद हुए. इस पढ़ने के बाद पुलिस के होश उड़ गए. पुलिस जिस कॉज ऑफ डेथ की तलाश में खून पसीना एक किए हुए थी, उसका रहस्य तो उन नोट्स और डायरियों में छिपा हुआ था.

दरअसल, उस डायरी को परिवार के सदस्य हर रोज लिखा करते थे. उसके मुताबिक, साल 2007 में परिवार के सबसे बड़े सदस्य भोपाल सिंह की मौत हो गई थी. इसका सदमा पूरे परिवार को लगा, क्योंकि भोपाल सिंह ही पूरे परिवार की देखरेख किया करते थे. उनकी मौत के बाद उनके छोटे बेटे ललित ने कहा कि उनकी आत्मा उनके ऊपर आती है. वो निर्देश देती है कि परिवार को कैसे रहना है और क्या-क्या करना है. परिवार के लोगों ने उनकी बातों का पालन शुरू कर दिया.

पिता भोपाल सिंह की आत्मा के जरिए ललित का परिवार पर होल्ड हो गया. वो जैसा चाहता, वैसा करता और कराता था. चूंकि उस वक्त परिवार की आर्थिक स्थिति भी उसकी बातों के मानने के बाद ठीक होने लगी, तो परिजनों को भी उसकी बातों पर भरोसा होने लगा. भरोसा ऐसा कि घर का सबसे छोटा सदस्य भी ये सब बातें कहीं किसी और से नहीं कहता था. यह सब करते-करते 11 साल हो गए. घर के लोग इस राज को अपने सीने में दबाए, ललित की बातें मानते रहे.

20 जून 2018 घटना वाली रात. डायरी में लिखे निर्देशों के अनुसार पूरे परिवार ने एक साथ पूजा की. पालतू कुत्ते को छत पर ले जाकर बांध दिया. इसके बाद सभी सदस्यों के हाथ-पैर बांध दिए गए. मुंह पर टेप लगा दिया गया. इसके बाद एक पैटर्न की तरह सबने छत से फंदा लगाकर अपने गले में डाल लिया. उनको विश्वास था कि भोपाल सिंह की आत्मा उनको बचाने आएगी. उसके बाद परिवार की सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सबकी जान चली गई.

आध्यात्मिक विश्वास के अंधविश्वास में बदलने की इस घटना ने एक साथ चूंडावत (भाटिया) परिवार के 11 लोगों की जान ले ली. इसमें 77 साल की बुजुर्ग से लेकर 14 साल के किशोर तक. चार पुरुष और सात महिलाएं शामिल थीं. पुलिस ने एक लंबे पड़ताल के बाद इस केस को हत्या और आत्महत्या से इतर ‘आकस्मिक हादसा’ करार दिया. उनका कहना था कि तमाम सबूत इस बात की ओर इशार करते हैं कि सभी लोगों की जान जाना एक ‘संयुक्त मनोदशा’ का नतीजा था.

आपराधिक घटनाओं को लेकर क्राइम पेट्रोल और सावधान इंडिया जैसे कई टेलीविजन शोज भारत में पहले से ही बहुत लोकप्रिय है. इनमें किसी भी घटना को इस तरह दिखाया जाता है कि लोग इसे देखने के बाद सबक ले सकें और भविष्य में ऐसी किसी घटना को रोकने में मदद मिल सके. ट्रू क्राइम डॉक्यूमेंट्री 'द हाउस ऑफ सीक्रेट्स द बुराड़ी डेथ्स' का भी प्रयास कुछ वैसा ही है, लेकिन ये किसी मनोरंजक शो की तरह नहीं है, बल्कि इसे अधिक वैज्ञानिक तरीके से दिखाने की कोशिश की गई है.

'द हाउस ऑफ सीक्रेट्स द बुराड़ी डेथ्स' ट्रू क्राइम डॉक्यूमेंट्री में इस केस को मनोवैज्ञानिक और सामाजिक एक्सपर्ट के नजरिए से देखने की कोशिश की गई है. इसलिए कई बड़े साइकोलॉजिकल और क्लिनिकल एक्सपर्ट से बातचीत इसमें दिखाई गई है. इसके साथ ही पुलिस और पत्रकारों को भी पूरी तरहीज दी गई है. क्योंकि किसी भी घटना को प्राइमरी रूप से पुलिस और पत्रकार ही पहले रिपोर्ट करते हैं और उसकी जांच में साथ-साथ चलते हैं. कई पुलिसकर्मियों और पत्रकारों का नजरिया भी शामिल है.

इसमें किसी फिल्म की तरह कलाकार तो है नहीं, सो उनकी परफॉर्मेंस की बात तो हो नहीं सकती, लेकिन तकनीकी रूप से इसकी मेकिंग पर चर्चा जरूर की जा सकती है. नेटफ्लिक्स का शो है, तो जाहिर सी बात है कि इसके तकनीकी पक्ष पर बारीकी से काम किया गया है, जो कि मजबूत दिखता है. इसकी निर्देशक लीना यादव ने अपने सहयोगी अनुभव चोपड़ा के साथ बेहतरीन काम किया है. घटना को एक्सपर्ट की बातचीत के साथ बहुत ही दिलचस्प तरीके से पिरोया गया है. कुल मिलाकर, इस ट्रू क्राइम डॉक्यूमेंट्री सीरीज को जरूर देखना चाहिए. यदि आप क्राइम शोज को पसंद ना भी करते हो तो भी एक नए तरह के सिनेमा से जरूर परिचित हो सकते हैं.

लेखक

मुकेश कुमार गजेंद्र मुकेश कुमार गजेंद्र @mukesh.k.gajendra

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप में डिजिटल जर्नलिस्ट हैं.

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