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Updated: 08 जून, 2020 07:02 PM
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इस महीने की 12 तारीख को एक बड़ी फिल्म रिलीज हो रही है, जिसका नाम है- गुलाबो सिताबो. विकी डोनर, अक्टूबर और पीकू जैसी संवेदनशील फिल्म बना चुके शूजित सरकार इस बार गुलाबो सिताबो के जरिये अपनी फेवरेट जोड़ी अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना को लखनऊ की तंग गलियों में बसे एक जर्जर मकान के लिए उलझते दिखाएंगे. इस फिल्म को खास जो एक बात बनाती है वह है मेगास्टार अमिताभ बच्चन का लुक. लेकिन रिलीज से ठीक पहले यह फिल्म विवादों में आ गई है और गुलाबो सिताबो की राइटर जूही चतुर्वेदी पर कहानी चुराने का आरोप लगा है, जिसका जूही ने खंडन किया है और उसे अपनी ओरिजिनल स्टोरी बताया है.

Plagiarism यानी साहित्य चोरी...एक ऐसा आरोप, जिसकी गिरफ़्त में आकर कितने क्रिएटिव लोगों की जिंदगी खराब हो गई और उन्हें चोर समझा जाने लगा. उनकी काबिलियत पर ऐसे दाग लगे, जिन्हें धोना लोगों के लिए बिल्कुल आसान नहीं रहा. क्रिएटिव फील्ड में प्लेजियरिजम बेहद आम बात हो गई है. चाहे साहित्य के क्षेत्र में हो, फिल्म इंडस्ट्री हो या म्यूजिक इंडस्ट्री, समय-समय पर प्लेजियरिजम की बात सामने आती है और इन फील्ड्स के लोग एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं. अब प्लेजियरिजम यानी साहित्य चोरी के आरोप से घिर गई हैं फेमस स्क्रिप्ट, स्क्रीनप्ले और डायलॉग राइटर जूही चतुर्वेदी. जूही चतुर्वेदी को आप विकी डोनर, पीकू और अक्टूबर जैसी फ़िल्मों की कहानीकार के रूप में जानते हैं और उनकी निर्देशक शूजीत सरकार के साथ जोड़ी काफी हिट मानी जाती है.

जूही चतुर्वेदी पर साहित्य चोरी का आरोप लगा है उनकी आने वाली फिल्म गुलाबो-सिताबो को लेकर. गुलाबो सिताबो इस साल की बहुप्रतीक्षित फिल्म मानी जा रही है जिसमें मेगास्टार अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना अहम भूमिका में हैं. यह पहली मेनस्ट्रीम फिल्म है जो कोरोना संकट की वजह से थिएटर्स नहीं, बल्कि ओटीटी प्लैटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो रही है. लेकिन रिलीज के पहले ही प्लेजियरिजम आरोप से घिरने की वजह से गुलाबो सिताबो विवादों में आ गई है. जूही चतुर्वेदी पर कहानी चुराने के आरोप लगाए हैं दिवंगत लेखक राजीव अग्रवाल के बेटे अकीरा अग्रवाल ने. हालांकि जूही ने आरोपों का खंडन करते हुए साफ-साफ कहा है कि यह उनकी कहानी है जो उन्होंने दिल से लिखी है. साथ ही उन्होंने अकीरा पर पब्लिसिटी के लिए इस तरह के आधारहीन आरोप लगाने की बात कही है.

क्या है ये पूरा मामला

अब जरा इस मामले की तह तक जाते हैं. जूही चतुर्वेदी के मुताबिक, उन्होंने शूजीत सरकार और अमिताभ बच्चन से इस कहानी का आइडिया साल 2017 में शेयर किया था, जिसपर बिग बी ने उन्हें काम शुरू करने को कहा था. धीरे-धीरे यह कहानी डेवलप हो गई और अब गुलाबो सिताबो फिल्म के रूप में सामने है. अब जबकि यह फिल्म रिलीज होने को है तो दिवंगत लेखक राजीव अग्रवाल के बेटे अकीरा जूही पर इस फिल्म की कहानी चुराने का आरोप लगाते हैं. अकीरा के वकील रिजवान सिद्दिकी का कहना है कि राजीव अग्रवाल ने सिनेस्तान नाम के स्टोरीटेलर स्क्रिप्ट कॉन्टेस्ट के लिए मार्च 2018 में ‘16, Mohandas Lane’ नामक एक स्क्रिप्ट ज्यूपी मेंबर्स के पास सबमिट कराया था. ज्यूरी के प्रमुख थे फेमस राइटर अंजुम राजाबली और जूही चतुर्वेदी उस ज्यूरी की सदस्य थीं. अब अकीरा अपने तर्क में इस बात का हवाला देते हैं कि जूही ने उनके पिता की स्क्रिप्ट पढ़ ली और फिर इसकी कहानी चुराकर गुलाबो सिताबो लिख डाली. इस विवाद पर अंजुम राजाबली ने भी बयान दिया और साफ-साफ कहा कि जूही अंतिम रूप से चयनित 8 स्क्रिप्ट ही पढ़ सकती थीं और चूंकि राजीव अग्रवाल की कहानी टॉप 8 में जगह बनाने में कामयाब नहीं रही, ऐसे में राजीव की स्क्रिप्ट तक जूही की पहुंच का सवाल ही नहीं उठता.

इस मामले पर जूही ने साफ किया कि महज 2 मिनट का ट्रेलर देख कोई कैसे अनुमान लगा सकता है और फिल्म को अपनी कहानी बता सकता है. जूही ने अकीरा के आरोपों का साफ खंडन किया. यहां बताना जरूरी हो जाता है कि आखिरकार कहानी क्या है, जिसपर विवाद हो रहा है? तो बता दें कि गुलाबो सिताबो लखनऊ बेस्ड स्टोरी है, जिसमें एक खड़ूस मकान मालिक का किरदार निभा रहे अमिताभ बच्चन का किरायेदार आयुष्मान खुराना से अक्सर विवाद होता रहता है. फिल्म की कहानी प्रॉपर्टी और अपने घर से जुड़ाव को लेकर है, जिसका ताना-बाना दो जेनरेशन के लोगों की सोच के ईर्द-गिर्द बुना गया है. वहीं राजीव अग्रवाल की कहानी 16, Mohandas Lane के नाम से तो भी यही लग रहा है कि यह एड्रेस किसी प्रॉपर्टी का है, जिसके इर्द-गिर्द कोई कहानी बुनी गई हो.

प्लेजियरिजम का इतिहास लंबा और हकीकत सुन दुखेगा दिल 

आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी स्क्रिप्ट राइटर पर कहानी चुराने या कॉपीराइट्स उल्लंघन संबंधी आरोप लगे हैं. प्लेजियरिजम का लंबा इतिहास है और इसकी जद में बड़े-बड़े महारथी आ चुके हैं. यहां तक कि बॉलीवुड के बड़े-बड़े डायरेक्टर्स पर हॉलीवुड और साउथ की फिल्मों की कहानी चुराकर उसपर फिल्म बनाने के आरोप लग चुके हैं. बीते कुछ वर्षों की बात करें तो साल 2017 में आई फिल्म राब्ता (Raabta), जिसमें सुशांत सिंह और कृति सैनन प्रमुख भूमिका में थे, पर तेलुगू फिल्म मागाधीरा की कहानी कॉपी करने का आरोप लगा था. हालांकि बाद में तेलुगू प्रोडक्शन हाउस ने केस वापिस ले लिया था और राब्ता को मागाधीरा से प्रभावित फिल्म बताया गया था.

साल 2017 में ही आई इमरान खान की फिल्म हिंदी मीडियम (Hindi Medium) पर भी आरोप लगे थे कि उसकी कहानी साल 2014 में आई बंगाली फिल्म Ramdhanu से मिलती-जुलती है. हालांकि, इस फिल्म को लेकर कॉपीराइट उल्लंघन का विवाद ज्यादा नहीं उछला था. प्लेजियरिजम के आरोपों के घेरे में शाहरुख खान और आलिया भट्ट अभिनीत निर्देशक गौरी शिंदे की फिल्म भी आई, और उसे Canadian comedy-drama TV series Being Erica का हिंदी वर्जन करार दिया गया, लेकिन इसपर ज्यादा विवाद नहीं हुआ. इसी तरह Manjhi-The Mountain Man, Mardaani, Ek Villain, Dangerous Ishq, Murder 2, Wanted और ग़जनी जैसी फिल्मों पर भी प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से आरोप लगे.

यही नहीं, पूर्व में कांटे, चोरी-चोरी, कर्मा, जो जीता वही सिकंदर, बाजीगर, पापी गुड़िया, एक रुका हुआ फैसला, कैदी, अग्निसाक्षी, दरार और याराना समेत अन्य फिल्मों पर भी जाने-अनजाने प्लेजियरिजम के आरोप लग चुके हैं, चाहे वह हॉलीवुड फिल्मों से इंस्पार्ड जैसे शब्दों के पीछे छुपकर हो या हॉलीवुड फिल्म का हिंदी वर्जन बताने के रूप में. लेकिन इन सबसे बीच एक बात जो सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि प्लेजियरिजम यानी साहित्य चोरी की बात सच है. साहित्य चोरी होती भी है और इससे लोगों का करियर भी प्रभावित होता है, लेकिन ज्यादातर मामलो में यह पब्लिसिटी स्टंट बनकर रह जाती है.

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