New

होम -> सिनेमा

 |  5-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 04 फरवरी, 2022 10:46 PM
मुकेश कुमार गजेंद्र
मुकेश कुमार गजेंद्र
  @mukesh.k.gajendra
  • Total Shares

एक वक्त था, जब आलिया भट्ट को दिग्गज फिल्म मेकर महेश भट्ट की बेटी के रूप में जाना जाता था. उनको स्टार किड्स की श्रेणी में रखकर लोग उनपर नेपोटिज्म का आरोप लगाते थे. यहां तक कि सोशल मीडिया पर आए दिन उनको मजाक बनाया जाता था. उनके निक नेम 'आलू' के बहाने उनके सामान्य ज्ञान की खिल्ली तक उड़ाई जाती थी. लेकिन आलिया ने कभी किसी पर पलटवार नहीं किया. उन्होंने हर बार अपनी मेहनत और दमदार अदाकारी के जरिए अपने आलोचकों को जवाब दिया है. इसी कड़ी में संजय लीला भंसाली की बहुप्रतिक्षित फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' का ट्रेलर लॉन्च किया गया है, जिसमें आलिया ने अपने करियर की सबसे दमदार परफॉर्मेंस दी है. इसमें जिस तरह से उनका नाजो-अंदाज दिखा है, उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि आलिया आला दर्जे की अभिनेत्री बन चुकी हैं. फिल्म में उनका जेस्चर काफी अपीलिंग है. गंगूबाई के रोल के लिए जो हिम्मत, ताकत, गुस्सा और निडरता चाहिए वो सब उनके तेवर में साफ नजर आ रही है.

650_020422034531.jpgसंजय लीला भंसाली की फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' में आलिया भट्ट ने शानदार एक्टिंग की है.

फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' के 3 मिनट 15 सेकंड के ट्रेलर (Gangubai Kathiawadi Trailer) के हर फ्रेम में आलिया की अदाकारी का बेहतरीन नमूना दिखता है. इसमें वो गंगूबाई नामक एक वेश्या का किरदार निभा रही है, जिसे धोखे से जिस्मफरोशी के धंधे में डाल दिया जाता है. इस किरदार का जिक्र लेखक एस हुसैन जैदी की किताब 'माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई' में किया गया है. गंगूबाई का असली नाम गंगा हरजीवनदास काठियावाड़ी था. गुजरात के काठियावाड़ की रहने वाली गंगूबाई को छोटी उम्र में ही वेश्यावृति धंधे में धकेल दिया गया था. इसके बाद वह गंगूबाई कोठेवाली बन गई. गंगूबाई ने मुश्किलों का सामना कर खुद को इतना मजबूत और निडर बनाया कि उनकी दबदबा देख कोई भी उनसे मुसीबत मोल नहीं लेता था. ऐसी कठोर और दबंग महिला का किरदार निभाना क्यूट सी आलिया भट्ट के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रहा है. लेकिन उन्होंने न सिर्फ इस चुनौती को स्वीकार किया है, बल्कि फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली की उम्मीदों पर खरी भी उतरी हैं.

देखिए फिल्म Gangubai Kathiawadi का ट्रेलर...

सही मायने में देखा जाए तो गंगूबाई काठियावाड़ी की जिंदगी का सफर और आलिया भट्ट का फिल्मी करियर एक जैसा रहा है. मासूम सी गंगूबाई को जब जिस्मफरोसी के दलदल में फेंक दिया गया, तो उसमें धंसकर मरने की बजाए, उन्होंने खुद को मजबूत किया. उन्होंने खुद को इतना सशक्त बनाया कि वो कमजोर और निरीह महिलाओं की आवाज बन गई. उनके नाम की तूती बोलने लगी. वैसे ही करण जौहर की 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली आलिया भट्ट को हमेशा कृपा पात्र समझा गया, लेकिन उन्होंने फिल्म-दर-फिल्म खुद को साबित किया है. मेहनत की भट्टी में तपकर उन्होंने अपने अभिनय को सोने जैसा निखारा है. इसकी बानगी 'गंगूबाई काठियावाड़ी' के किरदार में साफ-साफ दिखाई देती है. केवल एक्टिंग ही नहीं इसमें उनकी डायलॉग डिलीवरी भी शानदार है. वो बहुत दमदारी और मजबूत बॉडी लैंग्वेज के साथ अपने डायलॉग बोलती नजर आ रही हैं. उन्हें देखकर तो ऐसा लगता है कि पूरी फिल्म उनके ही कंधों पर टिकी हुई है.

आलिया भट्ट के अलावा फिल्म में अभिनेता अजय देवगन, विजय राज और सीमा पाहवा भी अहम किरदारों में नजर आ रहे हैं. इसमें अजय देवगन करीम लाला के रोल में हैं. पहले फिल्म में उनका केवल कैमियो था, लेकिन बाद संजय लीला भंसाली ने उनके किरदार को विस्तार दे दिया. इस तरह अजय देवगन को भी फिल्म में अहम रोल में देखा जा सकता है. वैसे भी गंगूबाई की असल जिंदगी में करीम लाला का अहम योगदान रहा है. बताया जाता है कि एक बार डॉन करीम लाला गैंग के एक गुंडे शौकत खान ने गंगूबाई के साथ दरिंदगी को अंजाम दिया. इस पर गंगूबाई ने करीम लाला से मिलकर उस गुंडे की शिकायत करते हुए न्याय की गुहार लगाई. इसके बाद करीम लाल ने न सिर्फ उस गुंडे की पिटाई कराई, बल्कि गंगूबाई को सुरक्षा देने का वादा भी किया. इसे खुश होकर गंगूबाई ने करीम लाला को राखी बांध दिया. करीम उसको अपनी मुंहबोली बहन मानकर सुरक्षा देता रहा और गंगूबाई लेडी डॉन बन गई. कमाठीपुरा क्या पूरे मुंबई में उसका दबदबा बन गया. वह माफिया क्वीन बन गई.

''अरे जब ये शक्ति, संपत्ति और सद्बुद्धि तीनों ही औरते हैं, तो इन मर्दों को किस बात का गुरूर''...फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' के ट्रेलर में महिला सशक्तिकरण की झलक भी दिखी है, जैसा कि फिल्म के इस डायलॉग से समझा जा सकता है. गंगूबाई का किरदार भी इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है. वरना मुंबई जैसी जगह, जहां पर एक से बढ़कर एक माफिया और डॉन हुए, जहां संगठित अपराध एक विस्तृत इतिहास रहा है, वहां एक महिला का डॉन बनना हैरान करता है, लेकिन अपनी हिम्मत और साहस के दम पर गंगूबाई ने अपना साम्राज्य स्थापित किया था. फिल्म के इस डायलॉग को ध्यान से पढिएगा, ''शायद आपको मेरी बात थोड़ी सी कड़वी लगे, लेकिन ध्यान से सुनना, आपसे ज्यादा इज्जत है हमारे पास, पूछो कैसे? आपकी इज्जत एक बार गई तो गई, हम तो रोज रात को इज्जत बेचती है, साली खत्म इ च नहीं होती.'' इसे बोलते हुए गंगूबाई के चेहरे पर कई तरह के भाव नजर आते हैं, उसके हालात को बयां करते हैं, जिसे आसानी से देखा और समझा जा सकता है.

संजय लीला भंसाली की फिल्मों में आपको भव्य सेट और बेहतरीन म्युजिक जरूर देखने को मिलता है. वो कलरफुल सिनेमा बनाने में यकीन रखते हैं. 'रामलीला', 'बाजीराव मस्तानी' से लेकर 'पद्मावत' तक, उनकी फिल्मों को याद कीजिएगा, उनकी भव्यता ने दर्शकों का मनमोह लिया था. इसका परिणाम बॉक्स ऑफिस पर भी देखने को मिला है. इन फिल्मों ने भंसाली की उम्मीद से ज्यादा कमाई की है. कुछ इसी तरह फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' से भी उम्मीदें हैं. 25 फरवरी को फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है, लेकिन 21 दिन पहले ट्रेलर रिलीज करके मेकर्स ने दर्शकों के बीच उत्सुकता का माहौल बना दिया है.

#गंगूबाई काठियावाड़ी, #फिल्म ट्रेलर, #संजय लीला भंसाली, Gangubai Kathiawadi Trailer Out, Gangubai Kathiawadi Trailer Review In Hindi, Sanjay Leela Bhansali

लेखक

मुकेश कुमार गजेंद्र मुकेश कुमार गजेंद्र @mukesh.k.gajendra

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप में सीनियर असिस्टेंट एडिटर हैं.

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय