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Updated: 21 जून, 2022 04:57 PM
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भारतीय सिनेमा में कई मर्तबा सुपरहीरोज को स्टेब्लिश करने की कोशिशें तो हुई हैं, लेकिन सिलसिला बहुत कामयाब होता नहीं दिखा है अभी तक. हिंदी समेत अन्य भारतीय भाषाओं में जब भी पौराणिकता में साइंस फिक्शन बनाए गए, कम से कम हिंदी दर्शकों ने उसे बुरी तरह खारिज किया है. हिंदी में मिस्टर एक्स इन बॉम्बे, मिस्टर इंडिया और कोई मिल गया फ्रेंचाइजी को अपवाद माना जा सकता है. हिंदी सिनेमा की ये फ़िल्में पौराणिक नहीं हैं. बॉलीवुड अयान मुखर्जी के निर्देशन में एक बार फिर पौराणिकता की चासनी में साइंस फिक्शन परोसने को तैयार है. फिल्म है- "ब्रह्मास्त्र."

बॉलीवुड की यह फिल्म पिछले चार साल से बन रही है. अब जाकर सितंबर में इसे रिलीज किया जाएगा. फिल्म में अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, नागार्जुन, मौनी रॉय, डिम्पल कपाड़िया और दिवेंदु शर्मा जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं. हाल ही में फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज किया गया है. कुल मिलाकर मिलाजुला रेस्पोंस है. कुछ को बहुत पसंद आई जबकि ऐसे लोगों की भी भरमार है जो नापसंद कर रहे हैं. बॉलीवुड में पौराणिता और साइंस फिक्शन का पुराना रिकॉर्ड देखें तो ब्रह्मास्त्र के ट्रेलर को कमजोर कह सकते हैं. हालांकि पौराणिकता में साई फाई फिल्मों को उनके ट्रेलर भर से जज करना बहुत हद तक ज्यादती भी है.

ब्रह्मास्त्र की कहानी अच्छी शक्तियों और बुरी शक्तियों के बीच जंग की है. एक शिवभक्त नेक लड़का है जिसके अंदर दिव्य शक्तियां हैं. दुनिया में नेकी बचाने के लिए कई और लोग भी उसके साथ आते हैं. इन सभी का जन्म ही ख़ास मकसद के लिए हुआ है. दूसरी तरफ बुरी शक्तियां हैं. वे ब्रह्मास्त्र की तलाश में हैं. ताकि ब्रह्मास्त्र के जरिए दुनिया को अपनी तरह से हांक सकें. नेकी पक्ष हर हाल में दुनिया की बेहतरी के लिए ब्रह्मास्त्र को बुरी शक्तियों के हाथ पड़ने से बचाने में लगा है. ट्रेलर से इतनी बात तो साफ है कि फिल्म में अच्छे और बुरे लोगों के बीच के संघर्ष को ही दिखाया जाएगा.

brahamastraब्रह्मास्त्र में रणबीर कपूर और अलिया भट्ट की जोड़ी है.

18 साल पहले भी आई थी लगभग इसी तरह की एक फिल्म

साल 2004 में मणि शंकर के लेखन निर्देशन में भी पौराणिकता में रची बसी फिल्म आई थी- "रुद्राक्ष." संजय दत्त, सुनील शेट्टी, बिपासा बसु, ईशा कोप्पिकर और कबीर बेदी की अहम भूमिका से सजी फिल्म भी अच्छी और बुरी शक्तियों के बीच जंग की कहानी पर आधारित थी. बुरी शक्तियां रावण के रुद्राक्ष को हासिल करना चाहती हैं और नेकदिल हीरो उसे बचाने की हर संभव कोशिश में लगा है. 18 साल पहले आई फिल्म सच में अपने समय में कमाल की थी. संभवत: पौराणिकता में रची बसी बॉलीवुड की पहली साइंस फिक्शन थी. अभिनय, कैमरा और तकनीक का काम भी बेहतर था. मार्वल की सुपरहीरोज को जिस तरह भारत में पसंद किया जा रहा है- रुद्राक्ष को देखने के बाद समझ में नहीं आता कि तब दर्शकों ने इसे खारिज क्यों कर दिया था?

हो सकता है कि 18 साल पहले हिंदी का दर्शक रुद्राक्ष जैसी कहानी के लिए तैयार ही ना रहा हो. क्योंकि बॉलीवुड का वह दौर एक अलग ही किस्म का था. इधर हॉलीवुड की तमाम सुपरहीरोज फिल्मों को जिस तरह पसंद किया जा रहा है वह ब्रह्मास्त्र के लिए सबसे अच्छी बात है. चूंकि ब्रह्मास्त्र पौराणिक-साइंस फिक्शन है- तो इससे अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं. बढ़िया स्क्रिप्ट, अभिनय, कैमरा, लोकेशन, सम्पादन और दूसरे तकनीकी पक्ष विषय के अनुकूल रहे तो शायद हिंदी सिनेमा को भी कोई मिल गया के बाद एक अलग तरह की सुपरहीरो फ्रेंचाइजी मिल जाए. इसीलिए ऊपर कहा गया कि अभी ट्रेलर से अच्छा या बुरा बताना जल्दबाजी होगी. अयान की योजना पहले से ही फिल्म को तीन बड़े हिस्सों में लाने की है. सुपरहीरो योजना में ब्रह्मास्त्र पहला हिस्सा है.

मंदिर में जूते पहनकर जाने का विवाद ब्रह्मास्त्र के लिए खतरनाक

जहां तक बात ब्रह्मास्त्र की है- उसके सामने कई तरह की चुनौतियां भी हैं. पहला तो यही कि उसे हिंदी के परंपरागत दर्शकों को प्रभावित करना होगा. हिंदी का बहुतायत दर्शक हमेशा से ख़ास तरह की फिल्मों को देखने का आदि रहा है. दूसरी बात यह भी है कि ब्रह्मास्त्र एक अच्छी फिल्म है या बुरी फिल्म, उसके सामने रिलीज के पहले कई तरह की मुश्किलें खड़ी हैं. पिछले कुछ सालों से एंटी बॉलीवुड कैम्पेन देखने को मिल रहा है. ट्रेलर रिलीज होते ही एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया. असल में ट्रेलर के एक सीन को लेकर दावा किया गया कि रणबीर मंदिर में जूते पहनकर दिख रहे हैं. सोशल मीडिया पर इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया. हालांकि निर्देशक अयान मुखर्जी ने विवादों को फिजूल का बताया और साफ करने की कोशिश भी की कि रणबीर जूते पहने हुए हैं, मगर वह किसी मंदिर का परिसर में नहीं हैं. बल्कि दुर्गा पूजा के पंडाल के परिसर में है. ट्रेलर के बाद शुरू हुए जूता विवाद ने साफ कर दिया कि रिलीज आते-आते ब्रह्मास्त्र को इस तरह के कई एंटी बॉलीवुड कैम्पेन से जूझना पड़ेगा. ब्रह्मास्त्र की सोशल टीम को आने वाले दिनों में बहुत ज्यादा काम करना पड़ सकता है.

ब्रह्मास्त्र को बॉलीवुड के खिलाफ चलने वाले हेट कैम्पेन से भी नुकसान

देखा जाए तो सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही बॉलीवुड को लेकर एक बड़े तबके के मन की घृणा सोशल मीडिया पर अक्सर नजर आ रही है. नेपोटिज्म का मुद्दा पहले से था. लेकिन सुशांत की मौत ने इसे और भड़का दिया. अब तक कुछ हिंदी फ़िल्में हेट कैम्पेन का शिकार भी बन चुकी हैं. इस फिल्म में तो असल जीवन के पति-पत्नी रणबीर कपूर और अलिया भट्ट की जोड़ी है. दोनों बॉलीवुड के दिग्गज परिवारों से आते हैं. कलाकारों को छोड़ भी दिया जाए तो निर्देशक-निर्माता भी बॉलीवुड के दिग्गज परिवारों से ही आते हैं. स्वाभाविक है कि एक ही फिल्म में दोनों सितारों और दूसरे तमाम फ़िल्मी परिवारों से आने वाले लोगों का होना, नेपोटिज्म का विरोध करने वालों को ब्रह्मास्त्र के खिलाफ बोलने का बड़ा मौका देने वाली साबित होंगी.

फिल्म पर करण जौहर का साया भी कम खतरनाक नहीं है

ब्रह्मास्त्र का निर्माण करण जौहर के बैनर धर्मा प्रोडक्शन ने किया है. करण जौहर कई वजहों से लोगों के निशाने पर रहते हैं. उनपर आरोप लगता है कि वह फिल्म उद्योग के सबसे बड़े मठाधीश हैं, जो भाई भतीजावाद को बढ़ावा देते हैं. साथ ही साथ उन लोगों के काम को भी प्रभावित करते हैं- जो उनके खेमे का नहीं होता. उनपर एंटी इंडिया कल्चर सेट करने वाली फिल्मों को बनाने के भी आरोप लगते ही रहते हैं. उनके कई पुराने बयान भी अकसर लोगों की जेहन में ताजा हो जाते हैं. सुशांत केस में तो करण जौहर पर ना जाने किस-किस तरह के आरोप लगाए गए. यहां तक कहा गया कि करण जैसे लोगों के इशारे पर सुशांत का करियर बर्बाद करने के उपक्रम हुए.

हिंदी फिल्मों को लेकर फिलहाल जिस तरह का निगेटिव माहौल है, उसमें तमाम चीजें ब्रह्मास्त्र के पक्ष में तो नहीं कही जा सकती हैं. भले ही फिल्म के विषय में मौजूदा सेंटिमेंट को भुनाने की एक कहानी भी है. यह तो तय है कि फिल्म के खिलाफ कई तरह के हेट कैम्पेन चलेंगे ही चलेंगे. मंदिर में जूता विवाद जैसे कंटेंट हुए तो आशंका है कि हेट कैम्पेन से फिल्म को नुकसान पहुंच सकता है और सुपरहीरोज फ्रेंचाइजी बनाने की कोशिश में लगे बॉलीवुड को तगड़ा कारोबारी झटका मिल सकता है. वैसे भी ब्रह्मास्त्र का बजट भारी भरकम है.

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