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Updated: 11 जुलाई, 2021 09:38 PM
मुकेश कुमार गजेंद्र
मुकेश कुमार गजेंद्र
  @mukesh.k.gajendra
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विवादित लेकिन मशहूर रियलिटी शो 'बिग बॉस' का अपकमिंग सीजन डिजिटली लॉन्च होने जा रहा है. इस शो के मेकर्स इसे टेलीविज़न प्रीमियर से पहले ओटीटी प्लेटफार्म पर लॉन्च करने की तैयारी में है. इसका टाइटल 'बिग बॉस ओटीटी' रखा गया है. देखा जाए तो टेलीविजन की दुनिया में अपने तरह का ये पहला प्रयोग होने जा रहा है, जिसमें किसी पॉपुलर रियलिटी शो को उसके ट्रेडिशनल प्लेटफॉर्म टीवी से पहले ओटीटी पर लॉन्च किया जा रहा है. इससे पहले किसी भी टीवी प्रोग्राम को सैटेलाइट टेलीकास्ट के कुछ घंटों बाद ही ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जाता रहा है. लेकिन 'बिग बॉस' की निर्माता कंपनी एंडमॉल शाइन‌ इंडिया ये प्रयोग करने जा रही है.

दुनिया भर में अभी इंटरैक्टिव एंटरटेनमेंट अपने शुरूआती दौर में है. हिंदुस्तान में हमने ओटीटी पर इस शैली की एक झलक भर देखी है, लेकिन इसका अधिकांश भाग फिक्शन कंटेंट के रुप में उपलब्ध है. यदि 'बिग बॉस' के निर्माता ओटीटी का फायदा उठाते हुए इंटरैक्टिव कंटेंट के प्रसार संबंधित कोड को क्रैक करने में सफल रहे, तो ओवर द टॉप प्लेटफॉर्म इस तरह के शो के लिए सोने की खान साबित हो सकता है. क्योंकि 'बिग बॉस' जैसे रियलिटी शोज के लिए ओटीटी एक मुफीद प्लेटफॉर्म है, जहां न तो समय सीमा की परवाह है, न ही फैमिली ऑडियंस के नैतिक मूल्यों को कोई खतरा. यहां 24X7 किसी भी शो को लाइव दिखाया जा सकता है.

weekend_ka_vaar_650_071121090212.jpgसलमान खान का मशहूर रियलिटी शो 'बिग बॉस' टीवी से पहले ओटीटी पर लॉन्च होने जा रहा है. यही वजह है कि 6 महीने तक लाइव शूट होने वाले 'बिग बॉस' के मेकर्स ने इस बार इसे टेलीविज़न की बजाए डिजिटल प्लेटफार्म पर पहले टेलीकास्ट करने का फैसला लिया है. पहले के 6 हफ्ते ऑडियंस को ये शो ओटीटी प्लेटफार्म वूट पर देखने को मिलेगा. टेलीविज़न पर इस शो को सिर्फ एक घंटा टेलीकास्ट किया जाता है, जिसकी वजह से मेकर्स को काफी एडिटिंग करनी पड़ती है, लेकिन ओटीटी प्लेटफार्म पर ऐसा नहीं होगा. ऑडियंस इस शो को 24X7 लाइव बिना एडिटिंग के एन्जॉय कर सकते हैं. इतना ही नहीं शो को इंटरैक्टिव बनाने के लिए आम आदमी को असामान्य शक्तियां भी दी जाएंगी, जिससे वे प्रतियोगियों, उनके टास्क और शो से बाहर निकालने में सक्षम होंगे.

'बिग बॉस' के लिए एकदम सही मंच है ओटीटी

वैसे भी 'बिग बॉस' जैसे शोज के लिए ओटीटी एकदम सही मंच है. इस शो पर हमेशा ये आरोप लगता रहा है कि टीआरपी के लिए इसे अक्सर विवादों के तंदूर में झोंक दिया जाता है. इतना ही इसमें अश्लीलता, फूहड़पन और हिंसा का तड़का भी लगाया जाता है. कंट्रोवर्सी के सहारे इस रियलिटी शो को पिछले कई वर्षों से टीवी पर दिखाया जा रहा है. कई बार शो के मेकर्स इसमें कंट्रोवर्सी का तड़का खुद लगाते हैं, तो कई बार इसमें भाग ले रहे कंटेस्टेंट्स. उनको भी पता होता है कि यदि शो में नोटिस होना है, तो जानबूझकर विवाद करो. लड़ाई-झगड़े करो. चिल्लाओ और रोओ. गाली दो. अश्लीलता और अभद्रता करो. यही वजह है कि बिग बॉस विवादों में रहता है.

अश्लीलता और हिंसा ने बढ़ाई लोगों की चिंता

'बिग बॉस' में बढ़ती अश्लीलता और हिंसा को देखते हुए इसका टाइम भी बदल दिया गया था. पहले ये 9 बजे प्रसारित होता है, लेकिन बाद में इसका समय 10.30 बजे कर दिया, ताकि बच्चों पर इसका बुरा प्रभाव न पड़े. ऐसे में ओटीटी पर बिग बॉस बिना किसी नैतिक दबाव के स्वतंत्र रूप से दिखाया और देखा जा सकता है. इस प्लेटफॉर्म पर फिलहाल पहले से ही ऐसे कंटेंट मौजूद हैं, बिग बॉस उसके आगे कहीं नहीं टिकता. दूसरा सबसे बड़ा फैक्टर है, समय सीमा. टीवी पर एक निश्तित समय के अंदर ही मेकर्स को शो टेलीकास्ट करना पड़ता है, उसमें भी विज्ञापन का दबाव अलग से होता है. ओटीटी पर समय सीमा से परे 24 घंटे तक लाइव किया जा सकता है.

'बिग बॉस' का प्रयोग सफल रहा तो क्या होगा?

अब सवाल ये उठता है कि यदि 'बिग बॉस' का प्रयोग सफल रहा और टीवी के दर्शक भी ओटीटी पर शिफ्ट होने लगे तो इस माध्यम का क्या होगा? देखिए सबसे पहली बात तो ये कि कोरोना के कहर के बीच लगे लॉकडाउन ने ओटीटी का बाजार तेजी से फैलाया है. चूंकि थियेटर और टीवी पर फ्रेश कंटेंट बंद हो गया, तो लोग तेजी से ओटीटी की तरफ भागे. मेट्रो सिटी और बड़े शहरों के बाद छोटे शहरों और कस्बों की ऑडियंस के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए ओटीटी आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है. भारत में मनोरंजन के मैदान में एक दिलचस्प मुकाबले का बिगुल बज चुका है. इसमें बिग बॉस के मेकर्स ने भी शंखनाद कर दिया है.

ओटीटी और टीवी के बीच होगी लंबी लड़ाई

ट्रेड एनालिस्ट गिरीश जौहर का मानना है कि लॉन्ग टर्म में ओरिजिनल फाइट ओटीटी और टीवी के बीच ही होगी. आज इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइस के हिसाब से टीवी का पलड़ा भारी है. टीवी घर-घर पहुंच चुका है. रेट्स भी अफोर्डेबल हैं. दूसरी तरफ ओटीटी का सारा आधार इंटरनेट कनेक्टिविटी है. अगर सही स्पीड नहीं है, तो वेब सीरीज देखने का कोई मजा नहीं. हालांकि, इंटरनेट स्पीड की समस्या कुछ ही समय की मेहमान है. 5G आ रहा है. ओटीटी अपनी कंटेंट लाइब्रेरी भी रिच कर रहे हैं. वह हर क्लास का कंटेंट लेकर आ रहे हैं. रीजनल ओटीटी भी तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में यदि टीवी को बच कर रहना है, तो उसे खुद को बदलना होगा.

तेजी से बढ़ रहे हैं ओटीटी पेड सबस्क्राइबर्स

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल मार्च से जुलाई के दौरान लॉकडाउन में भारत में ओटीटी पेड सबस्क्राइबर्स में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पेड सबस्क्राइबर्स की संख्या 2.22 करोड़ से बढ़कर 2.9 करोड़ तक पहुंच गई. लॉकडाउन में टीवी चैनल्स के लिए नए प्रोग्राम नहीं बने, थिएटर भी बंद रहे, नई फिल्मों की रिलीज टलती गई, ऐसे में सिर्फ ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ही मनोरंजन का जरिया बने. जो ओटीटी प्लेटफॉर्म्स रीजनल कंटेंट लेकर आए, उन्हें सबसे ज्यादा फायदा मिला. भारत में 90 फीसदी कंज्यूमर रीजनल भाषाओं में कंटेंट देखना पसंद कर रहे हैं. ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बिताए समय का सिर्फ 7 फीसदी ही इंग्लिश कंटेंट पर गया है.

लेखक

मुकेश कुमार गजेंद्र मुकेश कुमार गजेंद्र @mukesh.k.gajendra

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप में सीनियर असिस्टेंट एडिटर हैं.

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