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Updated: 24 अक्टूबर, 2020 03:43 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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दर्शकों का इंतजार ख़त्म अपने निर्धारित समय से तीन घंटा पहले ही अमेजन प्राइम की चर्चित वेब सीरीज मिर्ज़ापुर 2 दर्शकों के पास पहुंच चुकी हैं. जिनके पास सब्सक्रिप्शन है उनका तो ठीक है, लेकिन जो बेचारे बजट का रोना रोते हैं. उन्होंने घोड़े खोल लिए हैं. टेलीग्राम से लेकर यू-टॉरेंट तक सब जुआड़ पानी फिट कर लिया है कि कुछ भी हो बढ़िया प्रिंट मिल जाए और वो अपने प्यारे गुड्डू भइया और गोलू गुप्ता को मुन्ना एंड पार्टी की बैंड बजाते देख लें. अब क्योंकि मिर्जापुर का सीजन 2 हमारे बीच आ गया है. तमाम कयासों पर विराम लग गया है. अब जो भी बातें होंगी सीधी सपाट होंगी दो टूक होंगी. तो पहली बात क्या मिर्ज़ापुर 1 के मुकाबले मिर्ज़ापुर 2 मजेदार है या फिर इसे लेकर इस चर्चित सीरीज के निर्माता निर्देशक की तरफ से व्यर्थ का प्रोपोगेंडा फैलाया गया? जवाब हां है. मिर्जापुर की ही भाषा में कहें तो - 'भइया मिर्ज़ापुर का सीजन 2 एकदम गर्दा उड़ा दिया है.' लेकिन आगे हम कुछ और बताएं इससे पहले ये जान लीजिए कि अगर दूसरा सीजन बेहतरीन बना है. तो न तो इसकी वजह मुन्ना त्रिपाठी हैं. और न ही गुड्डू पंडित और गोलू गुप्ता. मिर्ज़ापुर सीजन 2 में जो व्यक्ति छाया है वो सिर्फ और सिर्फ अखंडानंद त्रिपाठी या ये कहें कि कालीन भइया हैं. सीजन 2 में कालीन भइया ने मुन्ना को संदेश दिया है कि, बेटा कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए बाप-बाप ही रहता है.

जैसा कि हम बता चुके हैं मिर्ज़ापुर का सीजन 2 आ गया है. तो तमाम चीजें हैं जो नई हैं. सीरीज देखकर दर्शक जान जाएंगे कि मिर्ज़ापुर के प्रोड्यूसर डायरेक्टर ने जो नए प्रयोग किये वो कामयाब रहे हैं. बदले के अलावा क्या तमंचा, क्या पिस्टल और बम. सीरीज में हर वो चीज है, जिसके इंतेजार में शायद दर्शक कई रातें सोये नहीं और पूरी तन्मयता से मिर्ज़ापुर 2 का इंतजार किया.

mirzapur 2 reviewमिर्जापुर में बदले की लड़ाई से ज्यादा उस बदले का तनाव नजर आता है.

चूंकि मिर्ज़ापुर 2 में कोई लाघ लपेट नहीं है. पहले सीजन के आखिरी एपिसोड को देखकर हम दर्शक इस बात को समझ गए थे कि अबकि सीजन 2 में कुछ इधर उधर का नहीं होगा और जो होगा वो एकदम डायरेक्ट होगा. सीजन 2 के शुरुआती तीन एपिसोड्स हमारे इस कयास की पुष्टि करते हैं. कहानी का जो खाका सीजन 2 के शुरुआत में खींचा गया है वो ये बता दे रहा है कि मुन्ना से ज्यादा तो दुश्मन इसबार कालीन भइया के हैं. बहुत सीधे शब्दों में कहा जाए तो मुन्ना त्रिपाठी तो एक मोहरा हैं. गोलू और गुड्डू भइया के अलावा बाकी जो भी दुश्मन हैं, उन्हें कालीन भइया तक पहुंचना है. उनसे अपना हिसाब किताब करना है.

प्लॉट का जैसा टेम्परामेंट है और जो बातें हम ट्रेलर और टीजर में देख चुके हैं, उन्हें देखकर ये तो पहले ही स्पष्ट था कि सीजन 2 की कहानी घायल शेरों की कहानी है. जिनके जीवन का एकमात्र मकसद विजय हासिल करना और अपनी जमीन पर पकड़ मजबूत करना है. ऐसे में जब हम मिर्ज़ापुर के सीजन 2 को देखते हैं तो चाहे वो इंतकाम में जलती हमारी गजगामिनी गुप्ता हो या फिर एक हाथ में बंदूक और दूसरे हाथ से बैसाखी थामे, पिछले सीजन में मिस्टर पूर्वांचल बनने वाले गुड्डू भइया हों. सब बदले की आग में जल रहे हैं. मिर्ज़ापुर सीजन 2 के लिए यही कहा जा रहा था कि इस बार छोटे छोटे कैरेक्टर को भी स्वतंत्रता दी गयी है. ऐसे में जब हम सीजन 1 में गुड्डू पंडित बबलू पंडित की बहन का किरदार निभाने वाली डिम्पी को देखें तो बाक़ी कलाकारों की तरह उनका उद्देश्य एकदम क्लियर है. डिम्पी को सीजन 2 में सिर्फ कॉलेज नहीं जाना.

महिलाएं, मिर्ज़ापुर 1 की यूएसपी रही हैं. निर्माता निर्देशक जानते थे कि अगर सीजन 2 हिट कराना है तो सीरीज की महिलाओं को कमज़ोर नहीं दिखाना है. सीजन 2 के मद्देनजर अच्छी बात ते रही कि प्रोड्यूसर डायरेक्टर ने इस बात को हवा हवाई नहीं रखा बल्कि इसे अमली जामा भी पहनाया. पिछले सीजन में तमाम पात्र थे जिनके हाथों में चूड़ियां थीं जिन्हें इस बार बंदूक ने रिप्लेस कर दिया है.

होने को तो मिर्ज़ापुर 2 परफेक्ट एंटरटेनर है मगर जिस चीज को देख कर सबसे ज्यादा मन उदास हुआ वो थे गुड्डू भइया और मुन्ना त्रिपाठी. एक दर्शक के तौर पर मिर्ज़ापुर 1 की जान रह चुके इन दोनों ही कलाकारों से हमारी बहुत उम्मीदें थीं मगर अब जबकि इंतजार के लम्हें ख़त्म हो गए हैं और ये दोनों कलाकार हमारे सामने आ चुके हैं तो हमें निराशा हुई.

बात पहले गुड्डू भइया का किरदार निभाने वाले अली फ़ज़ल की. मिर्ज़ापुर 2 को लेकर जो शख्स सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा था वो अली फ़ज़ल थे. क्यों कि बीते दिनों हुए एन्टी सीएए प्रोटेस्ट में अली फ़ज़ल ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी और ज़ोरदार भाषण भी दिया था तो एक बड़ा वर्ग इनके विरोध में आ गया था और केवल इनके कारण मिर्ज़ापुर सीजन 2 को बायकाट करने की बात कर दी थी ऐसे में अब जब हम सीजन 2 में गुड्डू भइया की एक्टिंग देखते हैं तो निराशा होती है. काश बॉडी और डंबल उठाने से ज्यादा वजन उन्होंने अपनी एक्टिंग को दिया होता. आए-हाए मजा दोगुना हो जाता. 1 साल तक जो इंतजार किया था उसका नतीजा मिलता लेकिन बात फिर वही है शायर पहले ही कह कर जा चुका है. हर किसी को मुकम्मल जहां नहींं मिलता.

अली के बाद बात मुन्ना भइया की... क्राइम सीरीज में जो मेन विलेन का लड़का हो और जिसे मिर्ज़ापुर जैसी जगह पर दबंगई करनी हो उसे इतना भी 'क्यूट' नहीं होना चाहिए कि जब जब वो पर्दे पर आए दर्शक ये कहें कि मुन्ना भइया के लिए निर्देशक को 'नवाज़' जैसे लड़के को चुनना था. न हम तुलना नहीं कर रहे. बिल्कुल भी नहीं कर रहे. बस यूं ही मन मे आ गया तो शेयर कर लिया. यूं भी बड़े बुजुर्गों ने कहा है जरूरी बातों को शेयर करना चाहिए. शेयर करते रहना चाहिए.

कुल मिलाकर मॉरल ऑफ द स्टोरी ये है कि मिर्जापुर देखिए. मुन्ना, गोलू, गुड्डू के लिए न सही कालीन भइया के लिए देखिए. बीना के लिए देखिए. बाबूजी के लिए देखिए. पुलिस ऑफिसर मौर्या के लिए देखिए। हमारा दावा है आपके हाथ निराशा न लगेगी.

कहानी अच्छी है और हां मिर्जापुर सीजन 2 जब देखिएगा तो सब्सक्रिप्शन लेके देखिएगा. वो क्या है न कि पाइरेसी अपराध तो है ही, जो कलाकार बिरादरी होती है न. उस बेचारी का बड़ा नुकसान होता है और दूसरे ये भी कि बढ़िया प्रिंट मिले इसकी भी कोई गारंटी वारंटी नहीं है.

लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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