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Updated: 15 जुलाई, 2021 03:39 PM
मुकेश कुमार गजेंद्र
मुकेश कुमार गजेंद्र
  @mukesh.k.gajendra
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जोया अख्तर के निर्देशन में बनी फिल्म 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' को रिलीज हुए 10 साल हो गए. यह फिल्म 15 जुलाई 2011 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में ऋतिक रोशन, फरहान अख्तर, अभय देओल, कैटरीना कैफ, कल्कि कोचलिन और नसीरुद्दीन शाह ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई है. फिल्म की कहानी तीन दोस्तों की जिंदगी पर आधारित थी, जो एक बैचलर ट्रिप पर दुनिया के अलग-अलग देशों में साथ जाते हैं. ये फिल्म हमें जिंदगी में किसी भी बात का अफसोस न करने की सीख देती है. इतना ही नहीं हमें वह बताती है कि कैसे हम अपने आज को खुशहाल बना कर भविष्य को भी सुरक्षित और खुशियों से भरपूर बना सकते हैं.

जिंदगी न मिलेगी दोबारा उन आजाद परिंदों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी जिंदगी में अपनी अपनी कुछ परेशानियां हैं. जिंदगी के हर स्वाद का मजा कैसे लिया जाता है, यह फिल्म के तीन किरदारों को देख कर आप अनुमान लगा सकते हैं. फिल्म जिंदगी न मिलेगी दोबारा जिंदगी में दोस्ती, प्यार व परिवार की अहमियत की कहानी है. दोस्ती की अहमियत जिंदगी में क्या होती है, फिल्म बखूबी दर्शाती है. लेकिन एक दिलचस्प बात ये भी है कि फरहान की अहम फिल्मों में से एक 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा' में उनके सभी स्टार्स ऋतिक रोशन (अर्जुन), अभय देओल (कबीर), कैटरीना कैफ (लैला) और कल्कि कोचलिन (नताशा) का भी पार्टनर से अलगाव हो चुका है.

znmd-700_071521031456.jpg15 जुलाई 2011 को रिलीज हुई फिल्म 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' जिंदगी के सच्चे सबक सिखाती है.

1. जिंदगी एक बार मिलती है, जमकर जियो

'हवा के झोकों के जैसे आजाद रहना सीखो, तुम एक दरिया के जैसे लहरों में बहना सीखो, हर एक लम्हे से तुम मिलो खोले अपनी बाहें, हर एक पल एक नया समां देखे ये निगाहें, जो अपनी आखों में हैरानियां लेके चल रहे हो तो जिंदा हो तुम, दिलों में तुम अपनी बेताबियां लेके चल रहे हो तो जिंदा हो तुम'...जावेद अख्तर का लिखा और फरहान अख्तर पर फिल्माया गया फिल्म 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' का ये शेर हमें जिंदगी के असली मायने सिखाता है. फिल्म का टाइटल ही इसके संदेश का वाहक है, 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा'. हम इंसानों को ऐसी जिंदगी एक बार मिलती है. इसलिए ज्यादा पाने की लालसा में परेशान हुए बिना हमें अपनी जिंदगी को जमकर जीना चाहिए.

2. डर के आगे जीत है

'इंसानों को डिब्बे में सिर्फ तब होना चाहिए, जब वो मर चुका हो'...फिल्म का ये डायलॉग हमें ये सीखाता है कि घर में बंद रहने की बजाए खुली हवा में सांस लेने की आदत डालनी चाहिए. जब भी मौका मिले परिवार और दोस्तों के साथ घूमने निकल जाना चाहिए. हर इंसान के मन में किसी न किसी बात का डर होता है. किसी को नौकरी खोने का तो किसी को गर्लफ्रेंड से दूर होने का, तो किसी को ऊंचाई से या पानी की गहराई से. हमारे मन में जिस बात का डर हो हमें वही करना चाहिए. फिल्म में भी तीनों दोस्त वही करते हैं, जिनसे उन्हें अक्सर डर लगता है. तीनों के मन से डर निकालने के लिए निर्देशक ने तीन अलग अलग एडवेंचर्स टास्क चुने हैं. सी वॉटर में जाना, ऊंचाई में सैर करना और सांड़ की रेस में भाग लेना. सभी रोमांचित लेकिन कठिनाइयों से भरे टास्क होते हैं और वे उन्हें जीते हैं.

3. पैसों से सबकुछ नहीं खरीद सकते

'कभी पे चेक मिलते वक्त तुम्हारे आंखों से आंसू आए हैं'...खुशी एक भावना है जो हम खुद के भीतर खोजते हैं. एक सामान थोड़ी देर के लिए किसी व्यक्ति को खुश कर सकता है, लेकिन खुशी पूरे जीवन के लिए होती है. यदि कोई ऐसा सोचता है कि पैसे से सुख को खरीद सकता है तो वह ख़रीदी हुई खुशी सच्ची नहीं है. पैसे को बहुत महत्व दिया जाता है और सरल चीजें जो हमें सच्ची खुशी देती हैं हम अक्सर उनकी अनदेखी कर देते हैं. जैसे कभी सैलरी मिलने या चेक मिलने पर हम इतने खुश नहीं हुए होंगे कि खुशी के मारे आंखों से आंसू आ गए हों, लेकिन हमारे जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं, जब खुशी के मारे हमारी आंखों से आंसू बहने लगते हैं.

4. दोस्तों से कुछ नहीं छिपता है

'तू है तन्हा कह यहां, सब ही तो है यहां'...आप झूठ बोलकर कितनी भी छिपाने की कोशिश कर लें, आपके सच्चे दोस्त आपका सच पकड़ ही लेते हैं. यदि आप इसे स्वीकार नहीं करते हैं तो भी वे आपको एक सच्ची सलाह देने में संकोच नहीं करेंगे. जाहिर है, वे आपको खुद से बेहतर जानते हैं. आप भले ही उनसे कितने भी दूर रहें, लेकिन आपकी परेशानी समझकर उसे सुलझाने की कोशिश भी करते हैं. एक बिंदास, बेफिक्र दोस्ती की कहानी है जिंदगी. कोई दिखावापन नहीं, इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है. फिल्म में दो दोस्तों के बीच हुई गलतफहमियों की वजह से आए दो दोस्तों के खटास को केवल संवादों के हवाले से ही समझाने की कोशिश की गई है.

फिल्म 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' में जावेद अख्तर की ये शायरी बहुत कुछ कहती है, 'एक बात होठों तक है जो आई नहीं, बस आंखों से है झांकती, तुमसे कभी मुझसे कभी, कुछ लब्ज है वो मांगती, जिनको पहन के होठों तक आ जाए वो, आवाज़ की बाहों में बाहें डाल के इठलाये वो, लेकिन जो ये एक बात है एहसास ही एहसास है, खुशबू सी जैसे हवा में है तैरती, खुशबू जो बेआवाज़ है, जिसका पता तुमको भी है, जिसकी खबर मुझको भी है, दुनिया से भी छुपता नहीं, ये जाने कैसा राज है.'

5. वर्तमान में जियो और मस्त रहो

'जब जब दर्द का बादल छाया, जब गम का साया लहराया, जब आंसू पलकों तक आया, जब ये तनहा दिल घबराया, हमने दिल को ये समझाया, दिल आखिर तू क्यों रोता है, दुनिया में यही होता है'...हम अक्सर अपने भूत और भविष्य की वजह से परेशान रहते हैं. इस वजह से हमारा वर्तमान भी खराब हो जाता है. ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि जिंदगी चार दिन की होती है, इसे खुलकर मस्ती के साथ जीना चाहिए. हम न तो अपने साथ कुछ लेकर आए थे, न ही लेकर जाने वाले हैं, इसलिए किस बात की परेशानी. सब मोहमाया है. हमें इसे परे जाकर अपनी जिंदगी को खुशहाली के साथ जीने की कोशिश करनी चाहिए. मस्त रहें, स्वस्थ रहें.

लेखक

मुकेश कुमार गजेंद्र मुकेश कुमार गजेंद्र @mukesh.k.gajendra

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप में डिजिटल जर्नलिस्ट हैं.

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