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4 जून को भारत शौर्य और पाकिस्तान अपनी शर्मिंदगी लेकर उतरेगा

    • श्रीधर राव
    • Updated: 26 मई, 2017 01:19 PM
  • 26 मई, 2017 01:19 PM
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एजबेस्टरन में एक बार फिर क्रिकेट के बहाने साख का संग्राम और भी कांटे का होगा.

उस दिन पाकिस्तान की हंसी मर गई थी, पाकिस्तान क्रिकेट टीम की लाचारी और बेबसी के आलम को बयां करना अमानवीय बर्ताव लग रहा था. ऐसे लगा था कि मरे हुए को और कितना मारें. खिलाड़ियों के कंधे झुके हुए थे, आंखें धंसी हुई थी, चेहरे में नूर का नामो- निशान दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा था.

उस दिन मैच के खत्म होने के बाद एक देश के लिए मैदान में हरे लिबास में हताशा ही हताशा बिखरी हुई थी. दर्शक दीर्घा में जो लोग चेहरे पर हरा रंग पुतवाकर आए थे वो मैच के खत्म होने के बाद हार का प्रतीक बन गये. हरे झंडे को लहराने वाले क्रिकेट फैन्स उस दिन मैच के बाद हरियाली को उठाने की ताकत खो चुके थे.

पाकिस्तान की टीम जब आईसीसी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2013 का तीसरा मैच हारी तो ऐसे लगा जैसे गब्बर सिंह चट्टान पर खड़े होकर चीख-चीखकर अट्टहास कर रहा हो कि तीनों के तीनों हार गये हा.. हा... हा... आये थे पांच मैच खेलने और तीन में ही बाहर हो गये. ये तो बहुत नाइंसाफी है. उस दिन मानो क्रूर गब्बर ये कह रहा हो कि जब पाकिस्तान के किसी गांव में बच्चा रोता है न, तो मां कहती है कि बेटा सो जा भारत की क्रिकेट टीम पाकिस्तान की टीम को पीट रही है और फिर पाकिस्तान के कई इलाकों में लोग टीवी पर एक साथ लाठी, डंडे और गोलियों की बौछार के साथ बरस पड़ते हैं. ये सब कुछ होता है इंग्‍लैंड के एजबेस्टन में और करीब 6000 से ज्यादा किलोमीटर दूर पाकिस्तान के गांवों की गलियों में मातम पसर जाता है और इसके लिए जिम्मेदार था उसका परंपरागत प्रतिद्वंदी भारत.

2013 आईसीसी चैम्पियन्स ट्रॉफी में पाकिस्तान की टीम के बल्लेबाज किसी एक मैच में 200 रन बनाने को तरस गये थे. 170, 167 और...

उस दिन पाकिस्तान की हंसी मर गई थी, पाकिस्तान क्रिकेट टीम की लाचारी और बेबसी के आलम को बयां करना अमानवीय बर्ताव लग रहा था. ऐसे लगा था कि मरे हुए को और कितना मारें. खिलाड़ियों के कंधे झुके हुए थे, आंखें धंसी हुई थी, चेहरे में नूर का नामो- निशान दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा था.

उस दिन मैच के खत्म होने के बाद एक देश के लिए मैदान में हरे लिबास में हताशा ही हताशा बिखरी हुई थी. दर्शक दीर्घा में जो लोग चेहरे पर हरा रंग पुतवाकर आए थे वो मैच के खत्म होने के बाद हार का प्रतीक बन गये. हरे झंडे को लहराने वाले क्रिकेट फैन्स उस दिन मैच के बाद हरियाली को उठाने की ताकत खो चुके थे.

पाकिस्तान की टीम जब आईसीसी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2013 का तीसरा मैच हारी तो ऐसे लगा जैसे गब्बर सिंह चट्टान पर खड़े होकर चीख-चीखकर अट्टहास कर रहा हो कि तीनों के तीनों हार गये हा.. हा... हा... आये थे पांच मैच खेलने और तीन में ही बाहर हो गये. ये तो बहुत नाइंसाफी है. उस दिन मानो क्रूर गब्बर ये कह रहा हो कि जब पाकिस्तान के किसी गांव में बच्चा रोता है न, तो मां कहती है कि बेटा सो जा भारत की क्रिकेट टीम पाकिस्तान की टीम को पीट रही है और फिर पाकिस्तान के कई इलाकों में लोग टीवी पर एक साथ लाठी, डंडे और गोलियों की बौछार के साथ बरस पड़ते हैं. ये सब कुछ होता है इंग्‍लैंड के एजबेस्टन में और करीब 6000 से ज्यादा किलोमीटर दूर पाकिस्तान के गांवों की गलियों में मातम पसर जाता है और इसके लिए जिम्मेदार था उसका परंपरागत प्रतिद्वंदी भारत.

2013 आईसीसी चैम्पियन्स ट्रॉफी में पाकिस्तान की टीम के बल्लेबाज किसी एक मैच में 200 रन बनाने को तरस गये थे. 170, 167 और भारत के खिलाफ 165. पाकिस्तान के शूरवीरों की कहानी और गजब की थी. मोहम्मद हफीज कुल 61 गेंदों का सामना ही कर सके और उनका अधिकतम स्कोर था 27 रन और औसत करीब साढ़े बारह रन का. शोएब मलिक ने कुल 53 गेंदों का सामना किया और उनका औसत था साढ़े आठ रन का. उनके तीन बल्लेबाज ऐसे थे जो तीनों मैचों में मिलकर 30 का आंकड़ा पार नहीं कर सके थे.

वहीं 15 जून 2013 को एजबेस्टन में पाकिस्तान को रौंदने के बाद भारत के सूरमा एक नया इतिहास लिखने की दिशा में बढ़ चुके थे. 2013 के उस टूर्नामेंट का जिक्र आते ही दुनिया के सामने शिखर धवन की शौर्य की कहानी याद आ जाती है. पांच मैचों में उन्होंने करीब 90 के औसत से दो शतक और एक अर्धशतक की मदद से 363 रन बनाये थे. शिखर मैन ऑफ द सीरीज रहे. टूर्नामेंट के टॉप फाइव बल्लेबाजों में रोहित शर्मा और विराट कोहली छाये रहे. इंगलैंड के विरूद्ध फाइनल मैच में रवींद्र जडेजा ने हरफनमौला खेल दिखाकर मैन ऑफ द मैच का खिताब अपने नाम किया था. वो टूर्नामेंट के सबसे शीर्ष विकेट टेकिंग गेंदबाज भी रहे.

बतौर टीम भारत के लिए 2013 की चैम्पियन्स ट्रॉफी कभी न भूलने वाली ट्रॉफी थी. इसमें भारत ने अपने सारे के सारे मैच जीते और महेंद्र सिंह धोनी भारत के पहले ऐसे कप्तान बने, जिन्होंने भारत को आईसीसी के टी-20 विश्व कप, विश्व कप और फिर चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब जितवाया.

साफ जाहिर है इस बार 4 जून को एजबेस्टन में एक बार फिर जब क्रिकेट की दुनिया के सबसे बड़े रायवल आमने-सामने होंगे, तो भारत के सिर पर उसके शौर्य का ताज होगा और पाकिस्तान अपनी शर्मिंदगी के बोझ तले, बनावटी उत्साह के साथ अपने देश को अपने क्रिकेट पर यकीन दिलाने के लिए जूझ रहा होगा और हरे रंग में सिमटी हर चीज उस दिन सहमी-सहमी होगी.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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