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अनुकृति वास का मिस इंडिया चुना जाना भारतीय सौंदर्य के लिहाज से तो क्रांति ही है

    • श्रुति दीक्षित
    • Updated: 20 जून, 2018 02:59 PM
  • 20 जून, 2018 02:59 PM
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मिस इंडिया 2018 के नतीजे के बाद अनुकृति वास ने एक कीर्तिमान तो गढ़ ही दिया है. सांवले रंग की ये सलोनी लड़की कई भारतीय लड़कियों के लिए प्रेरणा बन सकती है.

मिस इंडिया 2018 प्रतियोगिता को अनुकृति वास ने जीत लिया है. अनुकृति वास ने अपनी सूझ-बूझ से 29 लड़कियों को पछाड़ कर मिस इंडिया का क्राउन अपने सिर पहना. अनुकृति तमिलनाडु की हैं और एक रूढ़िवादी समाज से आती हैं. ये वो समाज है जहां लड़कियों की सुंदरता का एक तय पैमाना होता है और ये पैमाना शुरू होता है गोरे रंग से. खुशी की बात ये है कि कम से कम अनुकृति ने तो इस पैमाने को गलत साबित कर दिया.

भारतीय सुंदरता की परिभाषा रंग से शुरू होती है. मैट्रिमोनियल साइट से लेकर ब्यूटी कॉन्टेस्ट तक सभी को गोरे रंग की सुंदर, छरहरी लड़कियां चाहिए होती हैं और यही सोच की संकीर्णता को दिखाता है. अनुकृति सांवले रंग की बेहद आकर्शक व्यक्तित्व वाली लड़की हैं जिन्हें बंधंन में बंध कर रहने की कोई मंशा नहीं है.

मिस इंडिया 2018 की प्रतियोगिता उन्होंने अपने विवेक और दमदार व्यक्तित्व की बदौलत जीती है और इसके बीच में उनका रंग कहीं आड़े नहीं आया. बल्कि वो रंग उनकी खूबसूरती को और निखारता हुआ ही नजर आया. प्रतियोगिता की किसी भी तस्वीर को उठाकर देख लीजिए यकीनन उनका मुस्कुराता चेहरा नई परिभाषा गढ़ता नजर आएगा.

अनुकृति वास

मिस इंडिया का जवाब जिसने बदला नतीजा...

मानुषी छिल्लर का विनिंग आंसर तो सभी को याद होगा, लेकिन अनुकृति ने अपने सवाल के जवाब में कुछ और बेहतर बताया. अनुकृति से सवाल किया गया था कि ,'जिंदगी का सबसे बेहतर टीचर कौन है- सफलता या असफलता?'.

अनुकृति का सीधा सा जवाब था - 'असफलता. ये मेरी असफलता ही है जिसने मुझे यहां तक पहुंचाया. एक गांव की जगह से उठकर मिस इंडिया तक पहुंचा दिया. लोगों के ताने और असफलता ने मुझे वो बनाया जो मैं हूं. मेरी मां के अलावा और कोई मेरे साथ नहीं था, लेकिन ये असफलता ही थी जिसने साथ दिया और मुझे...

मिस इंडिया 2018 प्रतियोगिता को अनुकृति वास ने जीत लिया है. अनुकृति वास ने अपनी सूझ-बूझ से 29 लड़कियों को पछाड़ कर मिस इंडिया का क्राउन अपने सिर पहना. अनुकृति तमिलनाडु की हैं और एक रूढ़िवादी समाज से आती हैं. ये वो समाज है जहां लड़कियों की सुंदरता का एक तय पैमाना होता है और ये पैमाना शुरू होता है गोरे रंग से. खुशी की बात ये है कि कम से कम अनुकृति ने तो इस पैमाने को गलत साबित कर दिया.

भारतीय सुंदरता की परिभाषा रंग से शुरू होती है. मैट्रिमोनियल साइट से लेकर ब्यूटी कॉन्टेस्ट तक सभी को गोरे रंग की सुंदर, छरहरी लड़कियां चाहिए होती हैं और यही सोच की संकीर्णता को दिखाता है. अनुकृति सांवले रंग की बेहद आकर्शक व्यक्तित्व वाली लड़की हैं जिन्हें बंधंन में बंध कर रहने की कोई मंशा नहीं है.

मिस इंडिया 2018 की प्रतियोगिता उन्होंने अपने विवेक और दमदार व्यक्तित्व की बदौलत जीती है और इसके बीच में उनका रंग कहीं आड़े नहीं आया. बल्कि वो रंग उनकी खूबसूरती को और निखारता हुआ ही नजर आया. प्रतियोगिता की किसी भी तस्वीर को उठाकर देख लीजिए यकीनन उनका मुस्कुराता चेहरा नई परिभाषा गढ़ता नजर आएगा.

अनुकृति वास

मिस इंडिया का जवाब जिसने बदला नतीजा...

मानुषी छिल्लर का विनिंग आंसर तो सभी को याद होगा, लेकिन अनुकृति ने अपने सवाल के जवाब में कुछ और बेहतर बताया. अनुकृति से सवाल किया गया था कि ,'जिंदगी का सबसे बेहतर टीचर कौन है- सफलता या असफलता?'.

अनुकृति का सीधा सा जवाब था - 'असफलता. ये मेरी असफलता ही है जिसने मुझे यहां तक पहुंचाया. एक गांव की जगह से उठकर मिस इंडिया तक पहुंचा दिया. लोगों के ताने और असफलता ने मुझे वो बनाया जो मैं हूं. मेरी मां के अलावा और कोई मेरे साथ नहीं था, लेकिन ये असफलता ही थी जिसने साथ दिया और मुझे बताया कि मैं और आगे बढ़ सकती हूं'.

यकीनन गांव से लेकर शहर तक किसी भी लड़की के लिए अनुकृति का खुले आम मंच पर अपनी खामियों के बारे में बताना किसी प्रेरणा स्त्रोत से कम नहीं है.

सबसे कमाल की बात है कि इस प्रतियोगिता में हरियाणा की मीनाक्षी चौधरी फर्स्ट रनर अप और आंध्र प्रदेश की श्रेया राव सेकंड रनर अप बनी दोनों लड़कियां भी बहुत गोरी नहीं हैं. यहां आप मुझे रंगभेदी कहें उससे पहले मैं आपको बता दूं कि मैं सांवली या गोरी लड़कियों के विरोध में नहीं हूं मैं खुद उस रंगभेद के विरोध में हूं जो अभी तक चलता रहा है.

मीनाक्षी चौधरी, अनुकृति वास और श्रेया राव

अनुकृति वास उन सभी ब्यूटी क्रीम विज्ञापनों के मुंह पर तमाचे की तरह हैं जो गोरेपन को ही सक्सेस का तरीका मानती हैं. जिन विज्ञापनों में दिखाया जाता है कि एक ब्यूटी क्रीम लगाने से लड़कियां पायलट से लेकर मॉडल तक सब कुछ बन सकती हैं. ये यकीनन उस भ्रम को तोड़ने के लिए काफी है कि अपने रंग को बदलने के बारे में नहीं सिर्फ दुनिया बदलने के बारे में सोचो.

अंग्रेजी में एक पुरानी कहावत है 'Be comfortable in your own skin' यानी जैसे हो वैसे रहो. इस कहावत की बात यहां करना जरूरी है क्योंकि भारत में ब्यूटी स्टैंडर्ड कुछ अलग ही हैं. यहां के ब्यूटी स्टैंडर्ड के मुताबिक आपको अपनी स्किन में कम्फर्टेबल होना ही नहीं चाहिए. ब्यूटी क्रीम्स से लेकर, दाग धब्बे हटाने वाली क्रीम और गुप्तांग को गोरा करने वाली क्रीम भी भारतीय ब्यूटी मार्केट का हिस्सा है. यहां घर, स्कूल, कॉलेज, ऑफिस में उसकी ही पूछ है जो गोरा हो. भारत में सुंदरता और रंग ही सब कुछ है.

ब्यूटी पेजेंट्स जो अभी तक एक तय स्टीरियोटाइप के आधार पर चलते थे वो अब बदल रहे हैं. ये कहा जाए कि वो अब बेहतर हो रहे हैं. इसमें सबसे बड़ा बदलाव गोरेपन को लेकर ही है. पहले जहां यही समझा जाता था कि गोरा है तो बेहतर है लेकिन अब बदलाव धीरे-धीरे सिर चढ़ रहा है. लोपामुद्रा रावत से लेकर अनुकृति वास तक सभी का रंग वैसा नहीं है जैसा सोचा जाता है. इससे यह धारणा भी टूटेगी कि मिस इंडिया ब्यूटी पेजेंट जैसी प्रतियोगिताएं सौंदर्य प्रसाधनों वाले बाजार को ध्‍यान में रख आयोजित की जाती हैं. जहां अकसर उन्‍हीं युवतियों का चुनाव होता है, जो प्‍लास्टिक की गुडि़या की तरह दिखती हों और ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट्स के लिए मॉडलिंग कर सकें.

अनुकृति के अनुसार वो एक ऐसे समाज से आती हैं जहां लड़कियां 6 बजे के बाद बाहर जाएं तो इसे गलत माना जाता है. जहां एक बंधी हुई सी नपी तुली सी जिंदगी होती है लड़कियों की. अगर ऐसा है तो यकीनन अनुकृति ने अपनी दुनिया तो बदल ही दी और कई लड़कियों के लिए ये संदेश भी दिया कि सांवले होने पर सक्सेस न मिले ये जरूरी नहीं है.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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