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सिंदूर नहीं लगाया तो पत्नी मान ली जाएगी लिव-इन पार्टनर!

    • आईचौक
    • Updated: 18 अप्रिल, 2017 04:13 PM
  • 18 अप्रिल, 2017 04:13 PM
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मैं शादी के बाद सिंदूर और मंगलसूत्र नहीं पहनती थी. इसलिए मेरे पड़ोसियों ने हमें लिव-इन पार्टनर मान लिया. हमें सबूत के रूप में शादी का कार्ड देने के लिए कहा! पढ़िए एक शादीशुदा औरत की आंखों-देखी और उसका संघर्ष...

पता नहीं वो दिन कब आएगा जब लोग लड़कियों को क्या करना चाहिए, कैसे रहना चाहिए, कैसे बोलना और चलना चाहिए की लिस्ट पॉकेट में लेकर चलना बंद करेंगे. अगर लड़की शादीशुदा है तब तो उसपर लड़की होने वाली लिस्ट के साथ शादीशुदा लड़की के दायरे भी बांधे जाते हैं. मुझे आजतक समझ नहीं आया की शादी का सिंदूर, मंगलसूत्र और बिछिया से क्या संबंध है. आखिर क्यों रातों-रात लड़की को अपने माथे पर शादीशुदा होने का लेबल लगाना जरुरी होता है.

सिंदूर ही शादी का श्रृंगार है

मैं उन महिलाओं में से एक हूँ जो अपने माथे पर शादीशुदा का लेबल लगाना जरुरी नहीं समझती और ना ही इसकी जरुरत मुझे कभी महसूस होती है. और सच कहूं तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इससे कभी कोई दिक्कत होगी. मैं मुस्लिम हूं और हमारी संस्कृति में महिलाओं को शादी के बाद, शादीशुदा होने की कोई भी पहचान माथे पर चिपका कर चलने की पाबंदी नहीं होती.

हालांकि मुझे जिस लड़के से प्यार हुआ वो किसी और धर्म का था और उससे शादी करने के बाद मेरे जीवन में नाटकीय बदलाव आया. शादी के बाद मेरे ससुराल वालों को कभी मेरे सिंदूर या मंगलसूत्र ना पहनने से दिक्कत नहीं हुई. लेकिन मेरे पड़ोसियों को मेरे इस तरह से रहने के कारण खाना पचना बंद हो गया था. उन्हें ये बात बर्दाश्त ही नहीं हो रही थी की कोई शादीशुदा औरत, 'लड़की' की तरह रह रही है.

शादी के बाद मैं अपने पति के साथ एक नए अपार्टमेंट में शिफ्ट हो गई. ना तो मैंने, ना मेरे पति ने, पड़ोसियों द्वारा हमारी पीठ के पीछे होने वाली कानाफूसी पर ध्यान दिया. पड़ोसियों को हमारे निजी जीवन के बारे में रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था, लेकिन फिर भी उन्हें अपने पड़ोस में रहने वाले 'अविवाहित' दंपत्ती से दिक्कत थी. मेरे सिंदूर ना लगाने और मंगलसूत्र ना पहनने के कारण उन्होंने ये मान लिया था कि हम...

पता नहीं वो दिन कब आएगा जब लोग लड़कियों को क्या करना चाहिए, कैसे रहना चाहिए, कैसे बोलना और चलना चाहिए की लिस्ट पॉकेट में लेकर चलना बंद करेंगे. अगर लड़की शादीशुदा है तब तो उसपर लड़की होने वाली लिस्ट के साथ शादीशुदा लड़की के दायरे भी बांधे जाते हैं. मुझे आजतक समझ नहीं आया की शादी का सिंदूर, मंगलसूत्र और बिछिया से क्या संबंध है. आखिर क्यों रातों-रात लड़की को अपने माथे पर शादीशुदा होने का लेबल लगाना जरुरी होता है.

सिंदूर ही शादी का श्रृंगार है

मैं उन महिलाओं में से एक हूँ जो अपने माथे पर शादीशुदा का लेबल लगाना जरुरी नहीं समझती और ना ही इसकी जरुरत मुझे कभी महसूस होती है. और सच कहूं तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इससे कभी कोई दिक्कत होगी. मैं मुस्लिम हूं और हमारी संस्कृति में महिलाओं को शादी के बाद, शादीशुदा होने की कोई भी पहचान माथे पर चिपका कर चलने की पाबंदी नहीं होती.

हालांकि मुझे जिस लड़के से प्यार हुआ वो किसी और धर्म का था और उससे शादी करने के बाद मेरे जीवन में नाटकीय बदलाव आया. शादी के बाद मेरे ससुराल वालों को कभी मेरे सिंदूर या मंगलसूत्र ना पहनने से दिक्कत नहीं हुई. लेकिन मेरे पड़ोसियों को मेरे इस तरह से रहने के कारण खाना पचना बंद हो गया था. उन्हें ये बात बर्दाश्त ही नहीं हो रही थी की कोई शादीशुदा औरत, 'लड़की' की तरह रह रही है.

शादी के बाद मैं अपने पति के साथ एक नए अपार्टमेंट में शिफ्ट हो गई. ना तो मैंने, ना मेरे पति ने, पड़ोसियों द्वारा हमारी पीठ के पीछे होने वाली कानाफूसी पर ध्यान दिया. पड़ोसियों को हमारे निजी जीवन के बारे में रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था, लेकिन फिर भी उन्हें अपने पड़ोस में रहने वाले 'अविवाहित' दंपत्ती से दिक्कत थी. मेरे सिंदूर ना लगाने और मंगलसूत्र ना पहनने के कारण उन्होंने ये मान लिया था कि हम अविवाहित थे. अपने इसी शक और संस्कृति के ठेकदार होने के कारण उन्होंने तुरन्त आरडब्ल्यूए से संपर्क किया. हालांकि जब उन्हें पता चला कि हम शादीशुदा हैं तो उनके आश्चर्य की कोई सीमा नहीं रही.

वे ये समझ ही नहीं पा रहे थे कि कोई शादीशुदा औरत आखिर क्यों 'कुंवारी' दिखने की कोशिश करेगी! और जब उन्हें ये पता चला कि हम दो अलग-अलग धर्मों से हैं तो शायद उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई होगी. हालांकि मुझे लगा था कि हमारे बारे में इतनी जानकारी मिलने के बाद से उनके अंदर की खुजली शांत हो जाएगी, लेकिन हुआ ठीक इसके उल्टा. वो इस बात पर भरोसा ही नहीं कर पा रहे थे कि हम सच में पति-पत्नी हैं!

अपनी इसी खुजली के कारण उन्होंने आगे जो किया उससे हमारे लिए चीजें बदतर हो गईं. एक परिवार मेरे मकान मालिक के पास गया और उसे कहा कि- 'वो हमसे हमारे शादीशुदा होने का सबूत मांगे.' और मकान-मालिक ने हमें बुलाकर हमें सबूत के रूप में हमारी शादी का कार्ड देने के लिए कहा!

क्या आप विश्वास कर सकते हैं इस बात पर? लेकिन हमने इस सच को जिया है!

हालांकि जो कुछ भी हो रहा था उससे मेरे अंदर गुस्सा भर गया था. लेकिन मेरे पास उनके इस वाहियात मांग को पूरा करने के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं था. मुझे इस बात का डर था कि इनकी बात ना मानने के कारण कहीं मुझे और मेरे पति को अपार्टमेंट से बाहर ना निकाल दिया जाए. इस घर को मैंने और मेरे पति ने बड़े प्यार से सजाया था. इसीलिए मैं और मेरे पति अपनी शादी का कार्ड लेकर तुरन्त अपने मकान मालिक के घर पर गए.

हालांकि जो कुछ भी मैंने, सिर्फ सिंदूर और मंगलसूत्र जैसे शादी के लेबल को ना चिपकाने की वजह से झेला, उससे मैं परेशान तो हुई, लेकिन इस घटना ने मुझे और मजबूत किया. मैं अपने पति से प्यार करती हूं और मुझे बिल्कुल नहीं लगता कि दुनिया के सामने मुझे अपने पति के लिए प्यार दिखाने की जरुरत है. सिंदूर और मंगलसूत्र जैसे रिवाजों से तो बिल्कुल भी नहीं.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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