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सुनो सुनीता! तुम नेता नहीं पुलिस हो, सबको हदें याद दिलाते रहो...

    • अनु रॉय
    • Updated: 13 जुलाई, 2020 05:06 PM
  • 13 जुलाई, 2020 05:06 PM
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गुजरात में एक महिला पुलिस कांस्टेबल सुनीता यादव (Gujarat woman cop Sunita Yadav) को कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते लगे कर्फ्यू (Curfew) में एक मंत्री के बेटे को रोकना महंगा पड़ा है और अब बात उसकी नौकरी पर आ गयी है.

वो गुजरात (Gujarat) के स्वास्थ्य मंत्री (Health Minister) किशोर कानाणी जी का बेटा है, वो तुम्हें सच में 365 दिन के लिए वहीं उसी चौक पर खड़ा रखवा सकता है. वो चाहे तो तुम्हें नौकरी से भी निकलवा सकता है. उसका बाप मंत्री है. तुम क्या हो उसके सामने एक मामूली से कॉन्स्टेबल. तुम्हारी क्या औक़ात है? हो गयी न सस्पेंड. आयी थी क़ानून का पाठ पढ़ाने. उसके बाप ने भी तुम्हीं को बोला न कि वो मेरा बेटा है, वो मेरी गाड़ी चला सकता है. नहीं, क्या ज़रूरत थी तुम्हें अपनी ड्यूटी करने की. तुम उन शरीफ़जादों को घूमने देती, करने देती मस्ती. कर्फ़्यू (Curfew) ही तो है कौन सा आग लगा हुई है. ऊपर से उसके बाप ने भी कहा कि उसका ससुर हॉस्पिटल में अड्मिट है क्योंकि उसको कोरोना हुआ है, तो उसे जाने देना था न. होने देना था इन मनहूसो को भी कोरोना. क्यों तुम्हें क़ानून की पड़ी थी? वो मंत्री का बेटा है उसके लिए कोई रूल नहीं है. वो कोरोना ग्रस्त मरीज़ों से मिल सकता है. कोरोना भी उससे और उसके मंत्री बाप से डरता है, तुम किस खेत की मूली हो?

गुजरात में एक महिला पुलिस कांस्टेबल सुनीता यादव को अपना फर्ज निभाना बहुत महंगा पड़ा है

क्या तुम्हें नहीं पता कि भारत में नेता के सामने भगवान भी सिर झुकाते हैं. नेता के लिए क़ानून-फानुन जैसी कोई चीज़ नहीं होती. ये सारे पाठ तो तुम्हें पुलिस-एकेडमी में पढ़ा दिया गया होगा फिर भुल कैसे हुई?

मैं लिख कर दे रही हूं कोई नेता जी के बेटे का कुछ न बिगाड़ पाएगा मेरी जान. ये हिंदुस्तान है. अब देखना तुम पर ही चार इल्ज़ाम धड़े जाएंगे. तुम्हारे प्रमोशन को रोका जाएगा. क्या पता तुम्हें भ्रष्टाचारी और ऊपर से लड़की हो तो दो-चार लांछन लगा दिया जाएगा. और किसी को तब नहीं पड़ी होगी तुम्हारी. किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ता तुम्हारे...

वो गुजरात (Gujarat) के स्वास्थ्य मंत्री (Health Minister) किशोर कानाणी जी का बेटा है, वो तुम्हें सच में 365 दिन के लिए वहीं उसी चौक पर खड़ा रखवा सकता है. वो चाहे तो तुम्हें नौकरी से भी निकलवा सकता है. उसका बाप मंत्री है. तुम क्या हो उसके सामने एक मामूली से कॉन्स्टेबल. तुम्हारी क्या औक़ात है? हो गयी न सस्पेंड. आयी थी क़ानून का पाठ पढ़ाने. उसके बाप ने भी तुम्हीं को बोला न कि वो मेरा बेटा है, वो मेरी गाड़ी चला सकता है. नहीं, क्या ज़रूरत थी तुम्हें अपनी ड्यूटी करने की. तुम उन शरीफ़जादों को घूमने देती, करने देती मस्ती. कर्फ़्यू (Curfew) ही तो है कौन सा आग लगा हुई है. ऊपर से उसके बाप ने भी कहा कि उसका ससुर हॉस्पिटल में अड्मिट है क्योंकि उसको कोरोना हुआ है, तो उसे जाने देना था न. होने देना था इन मनहूसो को भी कोरोना. क्यों तुम्हें क़ानून की पड़ी थी? वो मंत्री का बेटा है उसके लिए कोई रूल नहीं है. वो कोरोना ग्रस्त मरीज़ों से मिल सकता है. कोरोना भी उससे और उसके मंत्री बाप से डरता है, तुम किस खेत की मूली हो?

गुजरात में एक महिला पुलिस कांस्टेबल सुनीता यादव को अपना फर्ज निभाना बहुत महंगा पड़ा है

क्या तुम्हें नहीं पता कि भारत में नेता के सामने भगवान भी सिर झुकाते हैं. नेता के लिए क़ानून-फानुन जैसी कोई चीज़ नहीं होती. ये सारे पाठ तो तुम्हें पुलिस-एकेडमी में पढ़ा दिया गया होगा फिर भुल कैसे हुई?

मैं लिख कर दे रही हूं कोई नेता जी के बेटे का कुछ न बिगाड़ पाएगा मेरी जान. ये हिंदुस्तान है. अब देखना तुम पर ही चार इल्ज़ाम धड़े जाएंगे. तुम्हारे प्रमोशन को रोका जाएगा. क्या पता तुम्हें भ्रष्टाचारी और ऊपर से लड़की हो तो दो-चार लांछन लगा दिया जाएगा. और किसी को तब नहीं पड़ी होगी तुम्हारी. किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ता तुम्हारे रिजाईन करने से.

वैसे भी सुनिता, यहां ईमानदार लोगों की कद्र नहीं, बेईमान लोग पूजे जाते हैं. ये तुम्हारा दुर्भाग्य नहीं इस देश का दुर्भाग्य है जहां ईमानदारी की सज़ा सस्पेंशन होती है या फिर आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने पर रेसिग्नेशन. ख़ैर, तुम्हें ख़ूब सफलता मिले और इतनी तरक़्क़ी करो कि आसमां पर तुम्हारा नाम हो. ख़ूब मुहब्बत तुम्हारे लिए. तुम्हारे जज़्बे को सलाम.

मंत्री के बेटे और महिला कांस्टेबल के बीच हुई कहानी का पूरा वीडियो: 

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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