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अब बताओ बंधू कैसे करोगे 'कार-ओ-बार'...

    • श्रुति दीक्षित
    • Updated: 06 नवम्बर, 2016 04:59 PM
  • 06 नवम्बर, 2016 04:59 PM
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कार-ओ-बार का मतलब कार में बैठकर दारू का मजा लेना. युवा वर्ग में ये बहुत लोकप्रिय है. अक्सर मस्ती में झूमते हुए, लाउड गाने चलाकर हंगामा करते हुए युवक-युवतियां दिल्ली की सड़कों पर दिख जाते हैं. कैसे निपटेगी इससे दिल्ली सरकार?

दिल्ली एक और उसके चर्चे अनेक. अब देखिए ना कहीं प्रदूषण के चर्चे हो रहे हैं, कहीं पॉलिटिकल गलियारे में गर्मागर्मी है तो क्राइम ने भी नाक में दम कर रखा है. इसी बीच दिल्ली केजरीवाल सरकार ने पिछले दिनों एक और घोषणा की थी. बात ये है कि 7 नवंबर से अब "कार-ओ-बार" यानी कार में बैठकर शराब पीने (पब्लिक प्लेस पर) पर और ज्यादा सख्त कानून लागू हो जाएगा.

क्या होता है कार-ओ-बार...

कार-ओ-बार का मतलब कार में बैठकर दारू का मजा लेना. युवा वर्ग में ये बहुत लोकप्रिय है. अक्सर मस्ती में झूमते हुए, लाउड गाने चलाकर हंगामा करते हुए युवक-युवतियां दिल्ली की सड़कों पर दिख जाते हैं.

क्या है नया नियम...

नए नियम के अनुसार 7 नवंबर से कार में पब्लिक प्लेस में बैठकर शराब पीने वालों को 5000 रुपए का जुर्माना और 3 महीने की जेल हो सकती है.

ये भी पढ़ें- क्या होगा अगर हमेशा के लिए डिलीट हो जाए आपका वॉट्सएप अकाउंट?

'कार-ओ-बार' खास तौर पर दिल्ली वालों के पीने का तरीका है. दिल्ली वाले मस्त मौला होते हैं अपनी गाड़ी उठाई दोस्तों के साथ या अकेले निकल लिए मस्ती करने को. स्ट्रीट फुड के साथ हाथ में दारू की बोतल अपनी कार और मौज. यही है दिल्ली वालों का सस्ता, सुंदर और टिकाऊ तरीका. भला खुली हवा में पीने का क्या मजा है ये सरकार को कहां पता? भले ही हवा प्रदूषित हो, लेकिन जनाब बात कुछ होगी ही शायद तभी तो दिल्ली वाले इससे बाज नहीं आते. बार-बार मनाही के बाद भी लोग अपने मन के मालिक बने हुए हैं.

आखिर ऐसी भी क्या जरूरत पड़ गई नियम बनने की?

अब अगर दिल्ली वालों को ये इतना पसंद है तो केजरीवाल सरकार आखिर इसपर रोक क्यों लगा रही है. जवाब हैं आंकड़े. कार में शराब पीने के बाद जो हंगामा किया जाता है उससे आम-जन को काफी...

दिल्ली एक और उसके चर्चे अनेक. अब देखिए ना कहीं प्रदूषण के चर्चे हो रहे हैं, कहीं पॉलिटिकल गलियारे में गर्मागर्मी है तो क्राइम ने भी नाक में दम कर रखा है. इसी बीच दिल्ली केजरीवाल सरकार ने पिछले दिनों एक और घोषणा की थी. बात ये है कि 7 नवंबर से अब "कार-ओ-बार" यानी कार में बैठकर शराब पीने (पब्लिक प्लेस पर) पर और ज्यादा सख्त कानून लागू हो जाएगा.

क्या होता है कार-ओ-बार...

कार-ओ-बार का मतलब कार में बैठकर दारू का मजा लेना. युवा वर्ग में ये बहुत लोकप्रिय है. अक्सर मस्ती में झूमते हुए, लाउड गाने चलाकर हंगामा करते हुए युवक-युवतियां दिल्ली की सड़कों पर दिख जाते हैं.

क्या है नया नियम...

नए नियम के अनुसार 7 नवंबर से कार में पब्लिक प्लेस में बैठकर शराब पीने वालों को 5000 रुपए का जुर्माना और 3 महीने की जेल हो सकती है.

ये भी पढ़ें- क्या होगा अगर हमेशा के लिए डिलीट हो जाए आपका वॉट्सएप अकाउंट?

'कार-ओ-बार' खास तौर पर दिल्ली वालों के पीने का तरीका है. दिल्ली वाले मस्त मौला होते हैं अपनी गाड़ी उठाई दोस्तों के साथ या अकेले निकल लिए मस्ती करने को. स्ट्रीट फुड के साथ हाथ में दारू की बोतल अपनी कार और मौज. यही है दिल्ली वालों का सस्ता, सुंदर और टिकाऊ तरीका. भला खुली हवा में पीने का क्या मजा है ये सरकार को कहां पता? भले ही हवा प्रदूषित हो, लेकिन जनाब बात कुछ होगी ही शायद तभी तो दिल्ली वाले इससे बाज नहीं आते. बार-बार मनाही के बाद भी लोग अपने मन के मालिक बने हुए हैं.

आखिर ऐसी भी क्या जरूरत पड़ गई नियम बनने की?

अब अगर दिल्ली वालों को ये इतना पसंद है तो केजरीवाल सरकार आखिर इसपर रोक क्यों लगा रही है. जवाब हैं आंकड़े. कार में शराब पीने के बाद जो हंगामा किया जाता है उससे आम-जन को काफी परेशानी होती है. नशे की हालत में कई जुर्म भी किए जाते हैं.

अभी जून की ही बात ले लीजिए. 21 साल के एक युवक ने जनकपुरी इलाके में शराब के नशे में तीन लोगों पर गाड़ी चढ़ा दी. इनमें से दो की मौके पर ही मौत हो गई. हाल कुछ यूं था कि नशे में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चलाने वाले इस युवक ने इतनी शराब पी रखी थी कि वो पुलिस के सामने खड़ा भी नहीं हो पा रहा था.

 सांकेतिक फोटो

ऐसा ही एक और किस्सा इस साल की शुरुआत में सामने आया था जिसमें 18 साल के एक युवक ने अपनी गाड़ी से कुचल कर एक 32 साल के मार्केटिंग मैनेजर की जान ले ली थी. युवक 4 दिन पहले ही 18 साल का हुआ था.

सितंबर में 20 साल की दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा की मौत इसलिए हो गई थी क्योंकि जिस उबर कैब में वो बैठी थी उसके ड्राइवर ने शराब के नशे में एक ट्रक से एक्सिडेंट कर लिया और बेचारी युवती को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.

ये भी पढ़ें-प्रदूषण: इन शहरों से सीख ले सकती है दिल्ली

होता है हंगामा...

कितनी ही बार देखा गया है कि लोग कार में शराब पीते हैं घूमते हैं और फिर सड़कों पर हंगामा करते हैं. एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 70% एक्सिडेंट्स की वजह ड्रंक ड्राइवर होते हैं. कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंक ड्राइविंग (CADD) ने ये आंकड़ा 5000 लोगों पर सर्वे के बाद जारी किया है. रिपोर्ट के अनुसार इनमें से सिर्फ 6.94 प्रतिशत पर ही कार्यवाही होती है. इस सर्वे से तो ये भी बात सामने आई है कि दिल्ली वाले करीब 45% लोग महीने में 8000 से 20000 तक शराब पर खर्च कर देते हैं.

ये एक लत की तरह है जिसे काबू में करना जरूरी है, शायद यही वजह है कि केजरीवाल सरकार ने इसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. तरीका तो सही है, लेकिन इसपर कितना अमल होता है ये देखना होगा.

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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