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5 बिंदु, यूपी चुनाव टलने की संभावना कितनी और उसके बाद कैसे हालात होंगे...

    • देवेश त्रिपाठी
    • Updated: 24 दिसम्बर, 2021 09:21 PM
  • 24 दिसम्बर, 2021 09:21 PM
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यूपी विधानसभा चुनाव 2022 से पहले ओमिक्रॉन वेरिएंट के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने चुनाव टालने का अनुरोध किया है. चुनाव आयोग को इस बारे में फैसला लेना है. आइए 5 प्वाइंट्स में जानते हैं कि यूपी चुनाव टलने की कितनी संभावना है?

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिंता जताई है. हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि विधानसभा चुनाव से पहले कोरोना की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर सियासी दलों की चुनावी सभाओं और रैलियों पर रोक लगाई जाए. साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुरोध किया है कि 'प्रधानमंत्री चुनाव टालने (Election Postponement) पर भी विचार करें, क्योंकि जान है तो जहान है.' हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव ने एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि 'संभव हो, तो फरवरी में होने वाले चुनाव को एक-दो माह के लिए टाल दें, क्योंकि जीवन रहेगा तो चुनावी रैलियां, सभाएं आगे भी होती रहेंगी.' मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस पूरे मामले पर कहा है कि अगले हफ्ते उत्तर प्रदेश के दौरे के बाद हालात की समीक्षा की जाएगी. इस स्थिति में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव टलने की संभावना है? आइए 5 प्वाइंट्स में जानते हैं कि इसकी कितनी संभावना है...

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि अगले हफ्ते उत्तर प्रदेश के दौरे के बाद हालात की समीक्षा की जाएगी.

चुनाव आयोग के पास कितने अधिकार हैं

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग अपने हिसाब से हालातों को देखते हुए चुनाव कराने का फैसला ले सकता है. आसान शब्दों में कहा जाए, तो चुनाव आयोग द्वारा चुनावों को टाला और रद्द किया जा सकता है. पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान भी चुनाव आयोग ने कई राज्यों के पंचायत चुनाव और कई विधानसभा और लोकसभा सीटों के उपचुनावों को टाल दिया था.

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में बनी थी ऐसी ही स्थिति

बीते साल मार्च में...

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिंता जताई है. हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि विधानसभा चुनाव से पहले कोरोना की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर सियासी दलों की चुनावी सभाओं और रैलियों पर रोक लगाई जाए. साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुरोध किया है कि 'प्रधानमंत्री चुनाव टालने (Election Postponement) पर भी विचार करें, क्योंकि जान है तो जहान है.' हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव ने एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि 'संभव हो, तो फरवरी में होने वाले चुनाव को एक-दो माह के लिए टाल दें, क्योंकि जीवन रहेगा तो चुनावी रैलियां, सभाएं आगे भी होती रहेंगी.' मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस पूरे मामले पर कहा है कि अगले हफ्ते उत्तर प्रदेश के दौरे के बाद हालात की समीक्षा की जाएगी. इस स्थिति में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव टलने की संभावना है? आइए 5 प्वाइंट्स में जानते हैं कि इसकी कितनी संभावना है...

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि अगले हफ्ते उत्तर प्रदेश के दौरे के बाद हालात की समीक्षा की जाएगी.

चुनाव आयोग के पास कितने अधिकार हैं

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग अपने हिसाब से हालातों को देखते हुए चुनाव कराने का फैसला ले सकता है. आसान शब्दों में कहा जाए, तो चुनाव आयोग द्वारा चुनावों को टाला और रद्द किया जा सकता है. पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान भी चुनाव आयोग ने कई राज्यों के पंचायत चुनाव और कई विधानसभा और लोकसभा सीटों के उपचुनावों को टाल दिया था.

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में बनी थी ऐसी ही स्थिति

बीते साल मार्च में चुनाव आयोग ने कोरोना संकट की वजह से लॉकडाउन के चलते महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार में विधान परिषद और कई राज्यों में राज्यसभा के लिए लंबित चुनावों को टाल दिया था. लेकिन, महाराष्ट्र में पैदा हो सकने वाले 'संवैधानिक संकट' को देखते हुए राज्य में विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव कराया गया था. दरअसल, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के छह महीने भीतर ही विधान मंडल का सदस्य होने की संवैधानिक अनिवार्यता पूरी करनी थी. इस संवैधानिक संकट का हल निकालने के लिए कोरोना महामारी के बीच विधान परिषद के चुनाव कराए गए थे. क्योंकि, इसमें जनता की प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं होती है, तो महाराष्ट्र के राज्यपाल ने चुनाव आयोग से चुनाव कराने का अनुरोध किया था. जिसके बाद महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव कराने का एलान कर दिया गया था.

किस स्थिति में टाले या रद्द हो सकते हैं चुनाव

चुनाव आयोग की ओर से उम्मीदवार की मौत होने, दंगा या प्राकृतिक आपदा आने, पैसों के सहारे मतदान को प्रभावित करने, बूथ कैप्चरिंग होने और चुनाव के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में चुनाव को टाला या रद्द किया जा सकता है.

यूपी चुनाव के टलने की कितनी संभावना है

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आग्रह, कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों और तीसरी लहर के संभावित खतरे के हालातों की समीक्षा करने के लिए ही चुनाव आयोग अगले हफ्ते उत्तर प्रदेश का दौरा करेगा. चुनाव आयोग की टीम इस दौरान सभी संभावित हालातों पर विमर्श करेगी. इस चर्चा में सूबे के सभी राजनीतिक दलों से भी उनके विचार जाने जाएंगे. आसान शब्दों में कहा जाए, तो अगले हफ्ते होने वाले चुनाव आयोग के दौरे के बाद ही यूपी विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर स्थिति पूरी तरह से साफ होगी. क्योंकि, यूपी चुनाव को टालने का फैसला चुनाव आयोग को ही करना है.

चुनाव टला, तो क्या होगा

अगर यूपी विधानसभा चुनाव 2022 को टाला जाता है, तो यहां राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ेगा. राष्ट्रपति शासन कम से कम 6 महीने के लिए लगाया जाता है, तो उत्तर प्रदेश में चुनाव 1 या 2 महीने के लिए नहीं टाले जा सकते हैं. अगर चुनाव टलते हैं, तो 6 महीने बाद सितंबर में चुनाव होंगे.

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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