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होमगार्ड्स जॉब पर खतरे की जड़ यूपी में नहीं, केंद्र में है!

    • बिलाल एम जाफ़री
    • Updated: 16 अक्टूबर, 2019 05:31 PM
  • 16 अक्टूबर, 2019 05:31 PM
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भले ही विपक्ष द्वारा आलोचना झेलने के बाद Home Guards को लेकर यूपी सरकार ने अपना फैसला बदल लिया हो मगर जैसा रवैया रहा है, केंद्र सरकार तक चाह रही है कि इन्हें हटा कर राज्य के बजट में कुछ सुधार कर लिया जाए.

25,000 Home Guard जवानों को नौकरी से निकालने के कारण चर्चा में आई P govt ने बड़ा यूटर्न लिया है. सामने खुद यूपी सरकार में होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान आए हैं. मामले को लेकर विपक्ष यूपी सरकार की आलोचना कर रहा है इसलिए किसी और के मुकाबले खुद होमगार्ड मंत्री ने सफाई देना बेहतर समझा. सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ को संवेदनशील बताते हुए चेतन चौहान ने कहा है कि, किसी भी होमगार्ड को नहीं निकाला जाएगा, सभी अपनी दीपावली अच्छी तरह मनाएं. उन्होंने आश्वासन दिया कि कोई भी होमगार्ड बेरोजगार नहीं होगा. अपने एक बयान में चेतन चौहान ने कहा है कि, 'अभी तक इस बारे में हमें औपचारिक तौर पर कोई लिखित प्रस्ताव या पत्र हमें नहीं मिला है. होमगार्ड का मानदेय बढ़ने की वजह से कुछ बड़ा बजट जरूर गड़बड़ हुआ है, लेकिन इसके लिए किसी होमगार्ड को निकाला नहीं जाएगा.' साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि इस मामले पर विभागीय बैठक में विचार-विमर्श  किया जाएगा. ध्यान रहे कि अभी हाल ही में एडीजी (पुलिस मुख्यालय) बीपी जोगदंड की ओर से आदेश जारी किया था जिसमें 25 हजार होमगार्ड जवानों की ड्यूटी समाप्त करने का निर्णय लिया था.

होम गार्ड्स की नौकरी को लेकर जो फैसला यूपी सरकार ने लिया था उसे विपक्ष की आलोचना के बाद वापस ले लिया गया है

बताया जा रहा है कि होम गार्ड्स के संबंध में यह आदेश प्रयागराज स्थित यूपी पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी किया गया था. आदेश में पुलिस विभाग की अगस्त 2019 में सूबे के चीफ सेक्रेटरी के साथ हुई  बैठक का हवाला दिया गया हैं. बैठक में बजट को आधार बनाकर 25 हज़ार होमगार्ड को ड्यूटी से हटाने की बात कही गई थी.

दो या चार हज़ार नहीं 25000 लोगों की नौकरी पर बात है तो आलोचना का होना स्वाभाविक था. विपक्ष इस मुद्दे को न भुना ले इसलिए तत्काल प्रभाव...

25,000 Home Guard जवानों को नौकरी से निकालने के कारण चर्चा में आई P govt ने बड़ा यूटर्न लिया है. सामने खुद यूपी सरकार में होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान आए हैं. मामले को लेकर विपक्ष यूपी सरकार की आलोचना कर रहा है इसलिए किसी और के मुकाबले खुद होमगार्ड मंत्री ने सफाई देना बेहतर समझा. सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ को संवेदनशील बताते हुए चेतन चौहान ने कहा है कि, किसी भी होमगार्ड को नहीं निकाला जाएगा, सभी अपनी दीपावली अच्छी तरह मनाएं. उन्होंने आश्वासन दिया कि कोई भी होमगार्ड बेरोजगार नहीं होगा. अपने एक बयान में चेतन चौहान ने कहा है कि, 'अभी तक इस बारे में हमें औपचारिक तौर पर कोई लिखित प्रस्ताव या पत्र हमें नहीं मिला है. होमगार्ड का मानदेय बढ़ने की वजह से कुछ बड़ा बजट जरूर गड़बड़ हुआ है, लेकिन इसके लिए किसी होमगार्ड को निकाला नहीं जाएगा.' साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि इस मामले पर विभागीय बैठक में विचार-विमर्श  किया जाएगा. ध्यान रहे कि अभी हाल ही में एडीजी (पुलिस मुख्यालय) बीपी जोगदंड की ओर से आदेश जारी किया था जिसमें 25 हजार होमगार्ड जवानों की ड्यूटी समाप्त करने का निर्णय लिया था.

होम गार्ड्स की नौकरी को लेकर जो फैसला यूपी सरकार ने लिया था उसे विपक्ष की आलोचना के बाद वापस ले लिया गया है

बताया जा रहा है कि होम गार्ड्स के संबंध में यह आदेश प्रयागराज स्थित यूपी पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी किया गया था. आदेश में पुलिस विभाग की अगस्त 2019 में सूबे के चीफ सेक्रेटरी के साथ हुई  बैठक का हवाला दिया गया हैं. बैठक में बजट को आधार बनाकर 25 हज़ार होमगार्ड को ड्यूटी से हटाने की बात कही गई थी.

दो या चार हज़ार नहीं 25000 लोगों की नौकरी पर बात है तो आलोचना का होना स्वाभाविक था. विपक्ष इस मुद्दे को न भुना ले इसलिए तत्काल प्रभाव में एक्शन लेते हुए सरकार ने ये फैसला वापस ले लिया है. चेतन चौहान के अनुसार इस सन्दर्भ में डीजीपी से वार्ता हुई है और सीमित बजट में ड्यूटी देने का सुझाव दिया गया है.

माना जा रहा है कि यूपी पुलिस अपने सीमित बजट में 17000 होमगार्ड्स को वापस ड्यूटी पर बुला सकती है. जबकि 8000 होमगार्ड्स को मुख्यालय से ड्यूटी मिलेगी. मामले पर सरकार का तर्क है कि 31 मार्च के बाद सभी होमगार्ड को नए मानदेय के साथ ड्यूटी मिलेगी. होमगार्ड मंत्री के अनुसार आने वाले समय में होमगार्ड और पुलिस के बजट में बढ़ोत्तरी की जाएगी.

वहीं जब इस मामले को लेकर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा  के तर्क थोड़े अलग हैं. शर्मा के अनुसार, होमगार्ड विभाग के लिए आवंटित बजट वर्तमान में नहीं बढ़ाया जा सकता है लेकिन भविष्य में इसे बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएंगे.

समस्या, बजट नहीं समस्या खुद सरकारें हैं

जी हां बिलकुल सही सुना आपने. इस पूरे मामले में बजट से बड़ी समस्या खुद इन लोगों के प्रति सरकार का रवैया है जिन्हें वोट बैंक की राजनीति के तहत सरकार ने नियुक्त तो कर लिया मगर अब जब बात इन्हें सुविधा देने की आ रही है तो सरकार इन्हें सिरे से नकार रही है.

कुल कितने होम गार्ड, कब-कब भर्ती हुए

बात उत्तर प्रदेश में होमगार्ड्स के सन्दर्भ में चल रही है तो ये बताना बेहद जरूरी है कि उत्तर प्रदेश में होम गार्ड्स परेशानी का सबब आज से नहीं हैं वर्ष 2007 से पहले उत्तर प्रदेश में 25,800 होमगार्ड्स ड्यूटी कर रहे थे. बाद में जब सूबे में बसपा सरकार आई तो करीब 25 हजार होमगार्डों की ड्यूटी बढ़ाई गई जिसके बाद यह संख्या करीब 51 हजार हो गई. उसके बाद वर्ष 2017 भाजपा सरकार द्वारा 25 हजार जवानों की ड्यूटी बढ़ाने के बाद यह संख्या करीब 76 हजार से अधिक हो गई थी.

होम गार्ड सैलेरी/भुगतान की प्रक्रिया

महंगाई के इस दौर में जब लोगों के लिए नौकरी का मतलब सैलरी हो होम गार्ड्स का भविष्य गर्त के अंधेरों में है. बात अगर इनकी सैलरी की हो तो इन्हें हमारी आपकी तरह महीने की सैलरी नहीं मिलती. इन्हें रोजाना का भत्ता मिलता है तो पहले 500 रुपए था जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ाकर 672 रुपये कर दिया गया. माना जा रहा है कि होम गार्ड्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने ताबूत में आखिरी कील का काम किया. ध्यान रहे कि पुलिस महकमा पहले ही इनसे अपना पिंड छुड़ाने पर आतुर था ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सीधा असर पुलिस विभाग के निर्णय पर देखने को मिला और आज हालात ये हैं कि इनकी नौकरी पर बन आई है.

उपरोक्त पंक्तियों में हमने इनकी सैलरी का जिक्र किया था तो बता दें कि होम गार्ड्स को तनख्वाह ड्यूटी के आधार पर मिलती है यानी अगर किसी होम गार्ड ने महीने में 10 ड्यूटी की होगी तो उसे 10 ड्यूटी के हिसाब से 6720 रुपए मिलेंगे. इसी तरह अगर किसी ने 15 ड्यूटी की होगी तो उसे 10,080 रुपए हासिल होंगे.

राज्य ही नहीं केंद्र सरकार भी इनसे निजत पाना चाहती है

हो सकता है ये बात सुनने में थोड़ी अजीब लगे मगर सच यही है कि सिर्फ उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार का भी मानना है कि अब वो वक़्त आ गया है जब इन्हें घर पोअर बैठा दिया जाए. सवाल होगा कैसे ? तो इसके लिए हम भारत सरकार के गृह मंत्रालाय के Directorate General Fire Services, Civil Defence & Home Guards की वेबसाइट में दी गई जानकारियों का अवलोकन कर सकते हैं जो कई मायनों में चौंकाने वाली हैं. केंद्र सरकार खुद होम गार्ड्स की संख्या और उनके फंड्स में कटौती करने को आतुर है.

केंद्र सरकार भी चाहती है कि होम गार्ड्स की सेवाओं को सीमित कर दिया जाए

होम गार्ड्स के खर्चों को लेकर जो आंकडें दिए गए हैं उन्होंने सारी असलियत खुद बयां कर दी है. यदि आंकड़ों को देखें तो मिलता है कि साल 2013-14 के मुकाबले 2017-18 में होम गार्ड्स के बजट में एक बड़ी कटौती की गई है.

बहरहाल, दिवाली के बाद यूपी के होम गार्ड्स के अच्छे दिन आते हैं या नहीं इसका फैसला वक़्त करेगा. मगर इस फैसले पर बात इसलिए भी होनी चाहिए क्योंकि सरकार का ये फैसला सिर्फ होम गार्ड्स नहीं बल्कि उनके परिवार के भविष्य से भी जुड़ा है.

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इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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